00:04तरोट बाहितने नाएट पीजित बेरी लिजे आजए से अखेशन से अखेशन से आखेशना दूए
00:19एक वोल फोलाइब घ्राइब एक मैं देदू के उकर प्रेंद भी एक श्रीपी जाइब रहाँ जाए जाजा एक उपकोड़ी चलीवीड
00:33जाए लगा हूँ
00:36क्वाओ लाख कॉड़ी ते रहाँ बुड़ी ग्रहाँ जा मुझाल ऑच्वाराँ
00:46कि कुछ किती हैं यंद
00:55कि शयर जएग को
00:57कि म소� demographicण styles
00:58कि को समय इपाई
00:58इच आ गब कि शयर जा है
01:10अभल कोुछ
01:16कि अज़े हम लोग कसी मोबाल आ रहा है कि अज़े हमारे बीच नहीं रहे कैसे आख करना चाहेंगे
01:27मेरे स्कूल के साथ ही थे मुझसे दो साथ सीनियर थे सेंट्री दाथ हाई स्कूल बांदरा में
01:36तो स्कूल में हम लोग साथ थे और आर के में वो एसिस्टेंट डिरेक्टर थे राज साथ के
01:46फिर राहूल रवेल के एसोसियेट रहे तो राज साथ के साथ भी हमने काम किया राहूल रवेल के साथ भी
01:54काम किया फिल्म गुनागार में
01:56और उसके बाद इनकी जो पहली फिल्म थी फुल और कांटे उसमें मेरा बहुत ही इंपॉर्टेंट रोल था
02:07तो इनका जो स्कुल में नाम था वो अवतार को ली था अवतार को ली
02:12हम इसी नाम से उने जानते थे और बहुत बड़ी हीट हुई वो पिच्चर
02:20उसके बाद काफी फिल्में इन्होंने बनाई लो प्रोफाइल बन्दा था मीडिया सेवी नहीं था कम बात करता था
02:29और अपने काम से काम रखता था बस अफसोस अरूना जी का है ये जो अमर होती है एडवांस एज
02:39होती है इसमें कमपेनियनशिप की बहुत दरूरत होती है
02:43तो वो कमपेनियनशिप इस उमर में अगर छिंज आए तो अकिला पन बहुत ही ज़्यादा सकलीवते होता है इस हेज
02:54में
02:55कमपेनियनशिप ये रह जाती है एक दूसरे के साथ हम रहते हो और ये अरूना जी के डिये भी मुझे
03:02बहुत अफसोस हो रहा है और ये उमर भी नहीं थी जाने की
03:07अच्छे खासे सेल्मन थे अभी किसी शोक सभा में अरूना जी के साथ आये थे अरूना जी भी विचारी काफी
03:14कमजोर लग रही थी ये बिल्कु ठीम ठाक लग रहे थे लेकिन बात दोई है कि कब किसका स्टेशन आ
03:22जाता है पता नहीं हम सब ट्रेन में बैठे हैं ट्रेन �
03:27जो है दिन्दगी है कब किसे कहां उतरना पड़े कोई कह नहीं सकते हैं ये तो सब उपर वाले के
03:34हाथ में वही वेच्टा है वही बुला लेता है पर उसकी आत्मा की शांती के लिए दौ़ा कर सकते हैं
03:41और खरूना जी के लिए भी हम दौ़ा कर सकते हैं कि उस बगवान को �
03:46उन्हें सबर दे किस सबने को सेने की दाबत दे