00:03बिग बॉस ओडिटी फेम अदनान शेक एक बार फिर सोशल मीडिया पर ट्रोल हो रहे हैं वज़ा है उनका जशने
00:08ईद मिलाद नवी का मनाना
00:09अदनान ने इस मौके पर एक धूमधाम वाली वीडियो शेयर की लेकिन वीडियो आते ही लोगों ने उने बुरा भला
00:15कहना शुरू कर दिया लोग उनसे पूछ रहे हैं कि भाई इस सब में नमास कहा है
00:20सोशल मिडियो पर लोग दो बड़े सवाल उठा रहे हैं
00:22पहले सवाल लोगों का कहना है कि सिर्फ दिखावा करने से कुछ नहीं होता
00:26असली चीज नमाज और अबादत है जो वीडियो में गायब दिखी
00:28दूसरे सवाल कुछ लोगों ने कॉमेंट किया कि इसलाम में इस तरह से एद मिलाद النबी मनाने का कोई जिकर
00:33नहीं है
00:34इसलिए ये तरीका गलत है
00:35अप्रोड़ाई से असान शब्दों में समझते हैं
00:38इसलाम में इस बात को लेकर दो तरह की सोच है
00:40एक पक्ष का मानना है कि नबी के पैदा होने की खुशी में जशन मनाना, रोशनी करना और दरूद पढ़ना,
00:46नबी से महबच जताने का सही तरीका है
00:48दूसरे पक्ष का मानना है कि नबी और उनके साथियों ने कभी इस तरह जशन नहीं मनाया
00:52इसलिए सिर्फ साथगी से इबादत और दूआ करना चाहिए
00:55लेकिन सबसे बड़ी बात जो लोग बोल रहे हैं
00:58वो ये है कि आज कल के सेलिवरिटीज हरते ओहार को सिर्फ सोशल मेडिया, व्यूज और लाइक्स पाने का जरिया
01:04बना देते हैं
01:06अदनान शेक की इस वीडियो पर एक यूजर ने लिखा भाई, इसलाम में सिर्फ दो एद ही हैं
01:10वो है एद उल अधा और इद फित्र, इसके लावा कोई एद नहीं
01:14इसलाम में ये कौन सी एद है अदनान शेक, अदनान शेक भाई, ये क्या है, ये इसलाम है
01:20हमारे प्यारे नभी ने तो दो एदों के बारे में बताया था, ये थर्ड एद कहां से निकल आई
01:26अगर जोन लेका, कुरान और हदीस में ही कहीं जलूस की बता देना
01:30मुझे अगर हो तो नभी के सहाबाओं ने निकाला था, किसी ने जुरूस एक कभी बता दो मुझे
01:35मान जाओंगा भाईयों मत करो, ये बिद्दत माफी नहीं है, समल जाओ, अभी वक्त है
01:41चली अब बात करते हैं सबसे जरूरी सवाल की, क्या वाकर इसलाम में एद मिलाद नभी मनाने का जिक्रे नहीं
01:46है
01:46दोस्तों, पेगंबर मुझे जनम दिन को मनाने को लेकर, मुस्लिम स्कॉलर्स और आम जननता के भी सदियों से दो अलग
01:53-अलग थौट्स रहे हैं
01:54पहला पक्ष यानि देवबंदी, अहले हदीस और सलफी, विचारधारा क्या मनती हैं
01:59इस सोच के लोगों का मानना है कि पेगंबर मुझे उनके करीबियों ने कभी भी अपना जनम दिन इस तरह
02:06तेवहार की तरह नहीं मनाया
02:07इसलाम में किसी भी नए धार्मिक प्रता को शुरू करने को बिदध कहा जाता है
02:11इसलिए ये पक्ष सड़कों पर जलूस निकालने, लाइट लगाने ये लाउड स्पिकर बजाने को सही नहीं मानता है
02:16इनका कहना है कि पेगंबर से मुझे जताने का सबसे सही तरीका
02:19उनकी दी हुई सीख पर चलना, कुरान को समझना और नमास कायम करना है
02:22दूसरा पक्ष यानि बरेली और सूफी विचारधारा
02:25इस सोच के लोगों का कहना है कि पेगंबर मुझे का दुनिया में आना पूरी काइनात के लिए सबसे बड़ी
02:31रहमत है
02:31इसलिए हम इस दिन खुशी मनाएंगे, पेगंबर की शान में नात और दरूद पढ़ेंगे और गरीबों को खाना खिलाएंगे
02:38इनका मानना है कि ये कोई दिखावा नहीं बलकि पेगंबर से अपनी सची महबत और अकीदत जाहिर करने का एक
02:44जरिया है
02:44खुल मिलाकर देखें तो दोनों पक्षों की अपनी दलीले हैं लेकिन एक बात जिस पर पूरा मुस्लिम समाज सहमत है
02:50वो ये है कि दिखावा और दीन की बुनियादी बातों को भूल कर जाना किसी भी हाल में सही नहीं
03:14है
03:18झाल