00:04उत्रप्रदेश के कानपोर और लखनाउ जैसे बड़े शहरों के बीच बसा है उन्नाव।
00:10इस जिले की पहचान अक्सर उद्योग सियासत और स्वतंतरता संग्राम से जोड़ कर देखी जाती है।
00:17लेकिन उन्नाव की एक दुनिया ऐसी भी है जो मंदिरों, तालाबों और पीड़ी दर पीड़ी सुनाई जाती लोग कथाओं में
00:26बस्ती है।
00:27इस कहानी में पहले हम बात करते हैं कुशहरी माता मंदिर की।
00:47उन मानिताओं को लेकर आज हम आये हैं यहाँ पर कुशहरी देवी मंदिर।
01:17पानी लेने वहाँ पहुचे हैं उनको नीचे से एक आवाज आई कि पहले मुझे बाहर निकालो उसके बाद जलिया।
01:26उन्होंने वही किया मूर्टी को बाहर निकाला जलिया और माता सीता को।
01:33इसके बाद माता सीता ने महर्शी वालमीकी के आश्रम में आश्रे लिया जहां उन्होंने लवकुश को जन्म दिया।
01:42कहा जाता है कि माता सीता ने अपने पुत्र कुश से यहां मूर्टी स्थापित करने को कहा था।
01:48यह माता कौुश की कुश द्वारा थापित माता कौुश की है।
01:57कौुश की को जब सीता जी बालमीक आश्रम परियर में रह रही थी।
02:03उस समय जो है कुश ने इनको पहले देखा और पूजा की इसलिए इनका नाम कुश हेरी।
02:19मंदर की कहानी सिर्फ गर्भ ग्रेह तक सीमित नहीं है।
02:24बाहर निकलते ही आस्था एक छोटी सी अर्थ विवस्था में बदलती दिखाई देती है।
02:30माता का श्रिंगार से जुड़ा सामान बेचने वाले सुशील बताते हैं कि उनका परिवार पीडियों से यहां दुकान चला रहा
02:38है।
02:59सुशील के मताबक मंदिर से जुड़े कारोबार से करीब 20 परिवारों को प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रोजगार मिलता है।
03:07अब कुशहरी से चलते हैं उन्नाव शहर के कल्याणी माता मंदिर।
03:12यहां की कहानी में न लफकुष है और ना ही कुए से निकलती मूर्ती।
03:17यहां की लोक मानेता के केंद्र में है एक गाए।
03:21मंदिर के पुजारी आचारे महेंद्र कृष्ण के मुताबिक स्थानिय मानेता है कि वर्षों पहले एक चरवाहे ने महसूस किया कि
03:31उसकी गाए घर लोटने के बाद दूध नहीं देती।
03:35तो एक दिन उसने क्या है गाय का पीछा किया कि मेरा दूध कौन धूता है।
03:40तो फिर जब यह यहां आये यहां नेम का ब्रच्छ था तो उसकी नीचे माती तो बस दूध वह निकल
03:46जाता था।
03:47तो जब उन्होंने यह देखा तो वहां पर उसका वहां की साब सफाई करवाया तो उन्होंने तब पता चला कि
03:55यहां यह माता जी है।
03:57So whoever we have, we will be able to get from those who are the ones who have been able
04:05to get to the temple.
04:06But in the middle of the temple, under the temple, a question about the temple,
04:14the temple, the temple and the temple to the temple,
04:18the temple, the temple and the temple of the temple.
04:21But today the temple has changed the temple.
04:26It is a problem that it has become difficult for us.
04:34It is a problem with respect to our values.
04:39It is a problem with respect to our values.
04:51It is a problem with respect to our values.
05:20ुश्राणित इतिहास
05:23उन्नाओ से ETV भारत के लिए पंकच कुमार की रिपोर्ट