00:00एक मेने का प्रारंब से कह रहे हैं कि किसी प्रकार की कोई डेडलाइन मत रखिये और जो हमारे मुंबई
00:15में या MMR रिजन में जो गैर मराथी भासी जो आटो चालक या टैक्सी चालक हैं उनको निश्ची तोर पर
00:24मराथी आने चाहिए मराथी सीखने के लिए जो अलगलग कें
00:28रहे हैं वो अनवरत जारी रखिये मुझे बड़ी खुशी होती है कि पिछले तीन साड़े तीन महीने में लगबग 85
00:36% ऐसे आटो ड्राइबर टैक्सी ड्राइवर्स ने मराथी काम चलाओ मराथी भासा का ग्यान अरजित कर लिया उनके पास प्रमाणा
00:43पंतर भी मिल गया अ
00:46उनके उपर जो एक डेडलाइन और उनके खिलाब जो एक्शन लिया जा रहा है उनके खिलाब जो दंडात्मक कारवाई की
00:52जा रही है वो गलत है और इसी भी सह पर कल मैं मंत्री जी से भी मिला और मुझे
00:56बड़ी खुशी हो रही है कि साम होते होते माननी है मुख मंत्री ने
01:16इन परिश्टितियों को देखते हुए किसी प्रकार की कोई डेडलाइन रखी जाए और जादा से जादा केंदर बढ़ाये जाए
01:24राहूल गांदी जी को इतना तकलीप उठाने की जरूरत नहीं है इसलिए कि हमारे यहाँ जो सरकार है
01:41महरास्ट के हर वर्ग के जो लोग हैं जो चाहे नौजवान हों या महिलाएं हो या बुजर्ग हों या किसान
01:49हो या मजदूर हों
01:50उन सब के दुख दर्द उन सब की जो पीड़ा है उसकी चिंता करने के लिए परियाप है और वो
01:55सक्षम है
01:56तो अगर हमारे आदिवासी समाज के आदिवासी बच्चों के होस्टल में किसी परकार की कोई कमी है तकलीफ है तो
02:03निश्ची तो पर सरकार उस पर एक्षन देगी और आदिवासी बच्चों को सारे सुविदाएं उपलब्त करा के देगी
02:17सबी धर्मिया मजहब की अपनी परंपराएं होती है और उनके अपने कुछ नॉम्स होते हैं और उसका पालन करने के
02:27लिए वो बहुत जिद्ध करते हैं बहुत आगरह करते हैं
02:30लेकिन जो धर्मिक परंपराएं होती हैं वो अपने मंदीर में अपने घर में पालन किया जाना चाहिए सारवजनिक स्थलोपे नहीं
02:40स्कूल में कॉलेज में या फिर पब्लिक प्लेसेस पे कोई धर्म विशेस के लोग बोलेंगे कि हमको ये खास तरह
02:48की परंपरा का पालन करना है
02:49वो कहीं ने कहीं जो एक सारवजनिक बिवस्था होती है जिसको हम पब्लिक और बोलते हैं उसके खिलाब जाता है
02:56तो इलाबाद हाई कोट का ये फैसला स्वागत योग्य है और मुझे लगता है मुस्लिम समाज के लोगों को इस
03:03फैसले का मर्म समझना चाहिए और देश के मुक्यधारा में आना चाहिए
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