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Vande Mataram 1937 Resolution Explainer: राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम्' को लेकर संसद और राजनीति में छिड़ा घमासान फिर से तेज हो गया है Hindustan Times। क्या 1937 में कोलकाता में हुई कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) की बैठक में इस गीत के केवल शुरुआती दो छंद गाने का फैसला मुस्लिम लीग के दबाव में लिया गया था या इसके पीछे रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह थी The Hindu?

बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा 1875 में रचे गए और उपन्यास आनंदमठ में शामिल 'वंदे मातरम्' के शुरुआती दो छंदों में भारत भूमि की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन है, जिन्हें 1937 में राष्ट्रीय सम्मेलनों के लिए अपनाया गया Wikipedia। जबकि बाद के छंदों में धार्मिक प्रतीकों (दुर्गा पूजा व मूर्तिपूजा) के संदर्भ होने के कारण उस दौर के कई नेताओं और समुदायों ने आपत्तियां उठाई थीं Wikipedia। पंडित जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस और मौलाना आजाद की समिति ने गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर के सुझाव पर सर्वसम्मति से शुरुआती दो छंदों को स्वीकार किया था The Wire।

24 जनवरी 1950 को संविधान सभा में डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने 'जन गण मन' के साथ 'वंदे मातरम्' को राष्ट्रीय गीत (National Song) का दर्जा दिया The Hindu। हाल में संसद द्वारा राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम में संशोधन और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा गृह मंत्री अमित शाह के बयानों के बाद इस पर राजनीतिक सियासत चरम पर है Rediff, The Hindu। जानिए 150 सालों के इस पूरे इतिहास और विवाद की असल कहानी।

An in-depth explainer tracking the historical roots and political debates surrounding India's national song "Vande Mataram." Exploring Bankim Chandra Chattopadhyay's composition, the 1937 Congress resolution guided by Rabindranath Tagore and Jawaharlal Nehru, the 1950 Constituent Assembly settlement, and the ongoing political clash in Parliament.



#VandeMataram #IndianHistory #Nehru #RabindranathTagore

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00:00वन्दे मातरम
00:01ये सिर्फ दो शब्द नहीं है
00:03बलकि भारत के स्वतंदरता आंदोलन की सबसे टाकतवर आवाजों में से एक है
00:08यही वो गीत था जिसे अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ आंदोलन में नारे की तरह इस्तमाल किया गया
00:13और जिसने हजारों सोतंदरता सेनानियों में दिशभक्ती का जजबा जगाया
00:19लेकिन आज करीब डेड़ सदी बार यही गीत एक बार फिर राजनुतिक बहस के किंदर में है
00:24सवाल है क्या कॉंग्रिस ने 1937 में वन्दे मातरम को तोड़ दिया था
00:30क्या यह फैसला मुस्लिम लीग के दबाब में लिया गया था
00:32या फिर उस समय के नेताओं ने राश्ट्रिय एकता और सभी समुदायों की स्विकार्यता को ज्यान में रखते हुए
00:38एक वेभारिक फैसला लिया था
00:41तो चलिए आज के इस स्पेशल रिपोर्ट में हम जानेंगे कि वन्दे मातरम की शुरुआत कहां से हुई
00:46विवाद शुरू कैसे हुआ
00:481937 में कॉंग्रस ने क्या किया था
00:50पिर 1950 में क्या बवाल हुआ था
00:53और अब 2026 में ये विवाद क्यों लोटा है
01:06तो इस पूरी कहाने को समझने के लिए हमें बापस 19 सदी में जाना होगा
01:11सबसे पहले ये जानना होगा कि वन्दे मातरम की शुरुआत कहां से
01:15वन्दे मातरम की रचईता थे बंगाल के महान सहित्यकार बंकिम चंद्र चटुपाध्यार
01:20कुपलब एतिहासिक सोर्स के अनुसार इसकी रचना 1870 के दर्शक में हुई थी
01:25और इसे 7 निवेंबर 1875 को सहित्यक पत्र का बग दर्शन में प्रकाशित किया गया
01:31बाद में बंकिम चंद्र ने इसे अपने प्रसिद उपन्यास आनंद मठ में शामिल किया
01:36लेकिन उस समय ये सर्फ एक सहित्यक रचना थी
01:39इसका राजनितिक जीवन में बाद में ये इसकी शुरुआत हुई
01:441896 में कलकत्ता में हुए कॉंगर्स अधिवेशन में रविंदरनाथ टैगोर ने वंदे मातरम गाया
01:49इसके बाद ये गीत राश्ट्री आंदोलन में तेजी से लोगप्रया होने लगा
01:531905 में जब अंगरेजों ने बंगाल का विभाजन किया
01:58तब वंदे मातरम आंदोलन का एक महत्वपुर्ण और प्रमुख प्रतीक बन गया
02:03बिटिश शाष्टन के खलाफ प्रद्वशन करने वाले लोग इसे गाते और इसके नारी लगाते थे
02:09यानि वंदे मातरम का राजनितिक महत्वप सिर्फ बाद के वर्शों में नहीं
02:26और दुर्गा, लक्ष्मी और सरस्वती जैसे धार्मिक संदर्भों लाए गए लाते हैं
02:30यही से समझतिया शुरू हुई
02:321930 के दशक में मुस्लिम लीग और कुछ मुस्लिम नेताओं ने आपत्ती जताई कि
02:38ऐसे धार्मिक संदर्भों वाला गीत सभी भारतियों के लिए राष्ट्य गीत के रूप में स्विकार करना कठिन हो सकता है
02:45यहां एक बात समझना जरूरी है
02:47वंदे मातरम की आलोचना सिर्फ गीत के पहले दो अंतरों को लेकर नहीं थी
02:52विवाद मुखे रूप से बाद के अंतरों और उनके धार्मिक संदर्भों से जुड़ा था
02:57और 1937 आते आते यह सवाल कॉंग्रेस के सामने भी गंबीर्दा से खड़ा हो गया
03:03तो 1937 में कॉंग्रेस ने क्या किया
03:05अक्चुबर 1937 में कॉंग्रेस वरकिंग कमिटी की बैठक कलकता में
03:10इस दौर में महात्मा गांधी, जवाहर लाल लहरू, सरदार पटेल, सुभाष चंद्र बोस, मौलाना, अबूल, कलाग, आजाद और दूसरे बड़े
03:18निता कॉंग्रेस के शिर्ष नित्रतों में थे
03:35इस सवाल पर रविंद्रनाथ टैगोर की राय व्यद महत्मूर बनी, टैगोर खुद 1996 के कॉंग्रेस अधिवेशन में वंदे मात्रम गाच
03:43चुके थे, 1937 में उन्होंने इस विवाद पर अपनी राय देते हुए कहा, कि मूल कविता के संदर्मों को देखते
03:49हुए, पूरी �
04:02टैगोर का तर्था, पहले दो अंतरों को राश्ट्रिय गीत के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, जिबकि बाकी रचना
04:10अपने साहितिक संदर्म में बनी रह सकती है, फिर आता है 28 अक्टूबर 1937 का पैसला, जो है इसके बात
04:1728 अक्टूबर 1937 को कॉंग्रेस वर्किंग
04:20कमेटी ने वंदे मातरम को लेकर एक महत्वपुन बयान जारी किया, इसमें कहा गया कि राश्ट्रिया सभाव में वंदे मातरम
04:26गाते समय किवल पहले दो अंतरे गाये जाएं, साथी आयो जकों को किसी अन्य ऐसी गीत को गाने की सुतंतरता
04:33भी दी गई, जिस पर किसी को धा
04:35किया अन्याधार पर आपती ना हो, अब इन पहले दो अंतरों की खासियत समझे, इन में भारत की प्रकृती और
04:42मातरी भूमी का वर्णन है, सुजलाम, सुफलाम, मलययज़, शितलाम, यानि कि ऐसी धरती जो जल से भरपूर है, फल पूल
04:50से समर्द है, और जिसकी हवाओं मे
04:52शीतलता है, इन दो अंतरों के बाद के हिस्सों की तरहे देवी देवताओं के सुपष्ट धार में के संदर नहीं
04:58आते, इसलिए कॉंगरिस के उस समय के तर्ग के मुताबिक यही हिस्सा राष्ट्रिय मंच के लिए अधिक व्यापक रूप से
05:04स्विकारत था, क्या ये फैसल
05:18में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने पर चर्चा में प्रधान मंत्री ने 1937 के फैसले पुले कर आरूप
05:24लगाया कि कॉंगरिस ने मुस्लिम लीग के दबाब में गीत के साथ समझोता किया और बाद में यही सोच देश
05:30के विभाजन तक पहुंची, लेकिन कॉंगरिस और
06:02उसके नेताओं की वियाख्या अलग है।
06:03बड़ा सवाल साब में था, क्या ऐसा गी चुना जाए जो एतिहासिक रूप से शक्तिशाली हो लेकिन जिसके कुछ हिस
06:10समुदाय को धार्वी कुरूप से असहेच करते हैं।
06:131937 का फैसला इसी समस्या का राजुनतिक समधान था।
06:17तो फिर 1950 में क्या हुआ?
06:19अब आज बहुत से लोग एक सवाल पूछते हैं, अगर वंदे मातरम को लेकर इतना विवाद था, तो सुतंत्र भारत
06:25ने इसे क्या दरजा दिया?
06:2724 जन्वरी 1950 को सम्मिधान सभा के अध्यक्ष डॉक्टर राजीत्र प्रसाद ने गोशना की कि जन गणमन को राष्टियगान और
06:37वंदे मातरम को राष्टियगीत के रूप में सम्मान दिया जाएगा और दोनों को समान सम्मान का दर्जा प्राप्त होगा।
06:44इस तरह स्वतंत्र भारत ने दोनों को अलग-अलग लेकिन महत्वपुण सम्मेधानिक राष्टियग परंपरा में स्थान दिया।
06:51एक तरफ जन गणमन नैशनल अंथम। दूसरी तरफ वंदे मातरम नैशनल सौंग।
06:58और यही सिती आज भी है। पर 2026 में ये विवाद क्यों लोटा।
07:03वंदे मातरम के देर सोवर्ष पूरे होने पर 2026 में देश भर में उशेश कारेक्रम लिया।
07:09संसद में भी इस पर व्यापक चर्चा हुई।
07:12धानमंत्री मोदी ने इसे सोतंतरता अंदोलन की प्रेणा और राष्ट्रिय एकता के प्रतीक की रूप में प्रस्तूत किया।
07:17लेकिन अगस्ट 2016 में विवाद ने नयराजने तिक मोड लिया।
07:21कॉंग्रेस वरकिंग कमेटी ने 19 अगस्ट को फैसला किया कि पार्टी के कारेक्रमों में बंदे मातरम के पहले दो अंतरे
07:28ही गाने की परबपरा जारी रहेगी।
07:30इसके बाद बीजेपी ने 22 अगस्ट को प्रस्ताव पारिद कर कॉंग्रेस के इस रुख की आलोच ना की और कहा
07:35कि राष्ट्य गीत के सम्मान और उसकी पूरी एतिहासिक विरास्त से समझोता नहीं किया जा सकता।
07:41यानि 1937 का फैसला जो उस समय राष्ट्य आंदोलन की एक राजुनितिक और सामाजिक समस्या का समधान था, आज फिर
07:48कॉंग्रेस बनाम वीजेपी की वेचारिक बहस का हिस्सा बन गया है।
07:52तो आकिर 1937 की कहानी हमें क्या वदाती है। बंदे मातरम का इतिहास सर्फ एक गीत का इतिहास नहीं है।
07:59ये उस दौर की कहानी है जब भारत अंग्रेजों के खिलाफ लड़ रहा था।
08:02और साथ ही ये तैय करने की कोशिश भी कर रहा था कि आजाद भारत की राष्ट्य पहचान क्या सी
08:08होगी। एक तरफ बंदे मातरम की एतिहासिक भूमिका थी। इसने स्वतंतरता आंदोलन में लोगों को जोड़ा और बिटिस शासन के
08:16खिलाफ प्रतिरोध की आवाज बना�
08:21प्रति थी।
08:22उन्स सेटिस में कॉंग्रस ने पहले दो अंतरों को राष्ट्य सभाव के लिए चुनकर एक ऐसा रास्ता अपनाया जुसे उसके
08:28समर्थक समावेशी समझ होता केते। विरूधी से तुष्ट्रिकरन और एतिहासिक समझ होता केते हैं।
08:46और शायद सबसे एहन बात ये है कि किसी राष्ट्य प्रतिक का इतिहास समझने के लिए सिर्फ आज की राष्ट्य
08:52को नहीं बलकि उस समय की परस्तितियों को, नेताओं की बहसों को और उनके लिए गए फैसलों को उसके पूरे
08:58संदर्व को देखना जरूरी है।
09:17लेकिन उससे जुड़ी बहस आज भी भारत की राजनीती इतिहास और राष्ट्य पहचान के सबसे सम्मेदमशील सवालों को सामने ला
09:25रही है।
09:46ये राष्ट्य गौरव इतिहास को सभी जान पाए। और दिखते रहे हैं वन इंडिया है।
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