00:00आइंस्टीन ने कहा था कि अगर सूरुग्रेहन पे प्रकाश पलट जाता है तो मेरी थियोरी गलत हो जाएगी
00:06विच इस दी थियोरी और फॉलसिफाइबिलिटी
00:08तो कॉलेज में बात करती हूँ तो वो कहते है कि अगर वेदान्त को अचूक माना जाए
00:13तो क्या ये अथोरिटी नहीं हो गए और इसमें फॉलसिफाइबिलिटी और साइन्टिफिक टेम्परिमेंट का क्या
00:22तो कजब बात हो गई है आपका नाम क्या था है
00:26Samyya
00:27Samyya, मैं आपकी एक तस्वीर पनाओं ठीक है
00:31और फिर आपको दिखाऊं कि ये ये तस्वीर है
00:34तो आप उसमें खोट निकाल सकते हो
00:36और उसको फॉलसिफाई कर सकते हो
00:38कर सकते हो ननकासी प्रमान ये और हमना common
00:42एपके have not
00:43तो कोई when series
00:44दिवाइस लीजिए यह समया के जीवित चेहरे पर ना पा गया और फिर यही जो अनुपात है हमने जाकर उस
00:50पोट्रेट में ना पा तो कितना आया
00:540.30 और फिर यही चीज मैंने जाकर के कहा ना पी तस्वीर में और वहां ना पी तो निकला
00:590.4 लो हो गया फॉल्सिफिकेशन हो गया ना बधाई हो आप आई टी दिल्ली से हैं आपका साइंटिफिक टेंपरामेंट
01:06है बधाई हो पर अगर मैं आकर आपको आईना दिखा दू �
01:10तो क्या उसमें कोई मेरा दावा नहीं थे? Is it a theory? Am I making a claim? क्या मैं कुछ
01:17भी बोल रहा हूं? मैं कुछ बोली नहीं रहा हूं? यह वेदानत है वहां कोई थियोरी नहीं है, वहां कोई
01:24टीचिंग नहीं है वहां सत्य के बारे में कोई दावा नहीं है, वहां बस सवाल है वहां
01:32कुछ है जो प्रतिबिंबित हो रहा है
01:35वहाँ खुद से ही पूछा जा रहा है
01:37मैं कौन हूँ
01:38और कोई नहीं है आप से बाहर जो जवाब देगा
01:41कोई नहीं है जो आपको बाहर एक पोर्ट्रेट बना कर देगा
01:43तो कैसे फॉलसिफाई कर दोगे
01:44How will you falsify what the mirror shows back to you
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