00:06रिष्टों की कोई जाती नहीं होती, प्यारकार कोई मज़भ नहीं होता और तिवारों की खुशियां किसी एक धर्म की मौताज
00:14नहीं होती
00:14रायकुर में इसकी खुबसूरत मसाल पेश कर रहा है एक मुसलिम परिवार जो पिछले 32 सालों से राखियां बनाने और
00:24बेचने का काम कर रहा है
00:26पिता द्वारा बेहत छोटे स्तर से शुरू किया गया यह सफर आज पूरे परिवार की पहचान बन चुका है
00:34घर के तीन बेटे, तीन बहुएं और परिवार के दूसरे सदस्य मिलकर रक्षा बंधन से करी चार महीने पहले से
00:43राखियां बनाना शुरू कर देते हैं
00:46खास बात यह है कि जिस परिवार के हाथ हिंदो बेहनों की कलाई सजाने वाली द्राखियां तयार करते हैं
00:53वही परिवार रक्षा बंधन का तयोहार भी पूरे उत्सा और धूमधाम से बनाते हैं
00:58दानिश आलम और उनका परिवार मानता है कि राखियां सिर्फ भाई बेहन के प्यार का तयोहार नहीं
01:05बलकि भाई चारे और हिंदो मुस्लिम एकता की ऐसी डोल है जो दिलों को जोडने का काम करती है
01:15हम दूसरे मुस्लिम कम्यूनिटी से आते हैं बड़ रक्षा बंधन एक बहुत खुबसुरा तयोहार है
01:21जिसे हर किसी को मनाना चाहिए चाहिए वो हिंदो हो मुस्लिम हो बहुत एक बहुत प्यारा तहवार है भाई बेहनों
01:27के प्रती बहुत प्रेम अभार करता है
01:30और इसलिए मैं चाहता हूँ कि हर भाई बहन और हर कम्मुनिटी में ऐसा प्यार रहना चाहिए भाई बहन के
01:36प्रती
01:36और हम लोग इस तहवार को काफी टैम से मनाते आ रहे हैं और आगे भी मनाते जाएंगे
01:42और रही बात काम की तो हम लोग बचपन से काम करें फादर के टैम से तो इसकी सुरुवात एक
01:47पापा बताते थे मेरे
01:50कि बिटा बहुत छोटे पन से सुरुवात करा हूँ मैं मैं खरीदी करके महले टू महले फेरी करता था मैं
01:58उस टाइम से जरनीश अलू हुआ है और उनको स्कोप दिखा था इस बिजनेस पे और एक बहुत परमपरिक खुबसूरा
02:06तैवार है उसके प्रति उनको बहुत दिलचस्पी थी तो इस सिच्वेशन को लेके ही आगे की जरनीश चली है और
02:13आज तक हम लोग उनके जाने के बा�
02:27सपोर्ट नहीं करता मैं एक मुस्लिम हूँ और उससे पहले मैं इंडियन हूँ जो इस इंडियन तैवार में हर फेस्टिवाल
02:35में मनाता हूँ चाहे वो होली हो चाहे वो दिवाली हो जो सबसे प्यारा खुबसूरा तैवार वो रक्षा बंदन है
02:41उसको मैं बहुत खुबस�
03:02सब्सक्राइब करते हैं और दूसरी कम्यूनिटी के भी आते हैं मेरी बहन लोग भी आते हैं मेरे से रक्षा बंदन
03:11मनाते हैं डिमांड के तरह गिफ्ट भी मांगते हैं बड़ा अच्छा लगता है
03:19जी मेरी दुकान भी है दो दुकान है एक यहां पर यह थोड़े से आगे में है और यह हम
03:24लोग ना होम मेड ही राखी बनाते हैं अग कुछ-कुछ एसेंबल भी करते हैं और कुछ-कुछ रेडिमेड भी
03:31लेके आते हैं लेकिन सेवेंटी परसेंट हम लोग घर में ही बनाते
03:35बूटी की राकी हो गई, पेंडल की राकी हो गई, स्टोन की राकी हो गई, कुंदन जड़ाओ की राकी हो
03:40गई, रुद्राक्ष की राकी हो गई, मोतियों की माला टैप की राकी हो गई, और भी कई सरे पैटन है,
03:46हजारों पैटन हैं जो मैं आपको एक्स्प्रेन नहीं कर पा�
04:11जोलरी पीस में भी रह जाता है। इस इस आप से अपन बेशते हैं।
04:33जब दिलों को जोड़ती है तो मजभब के दिवारें अपने आप छोटी बढ़ जाती है। यह इस परिवार की कहानी
04:40को हिंदो मुस्लिम एक तक एक खूपसुरत और सची मिसाल बनाती है।
05:03पूरी फैमिली को हम लोग सपोर्ट करते हैं।
05:05हमारे हजबेंड साथ ससूर जो आगे बढ़ाएं हैं तो हम उनको सपोर्ट कर रहे हैं और हम यह राखियां खुद
05:11घर पे ही बनाते हैं।
05:12और हमारे पास स्टोन राखी, पैंडल वाली राखी, डोरी, बूटी यह सब हम लोग मिलके सब बनाते हैं।
05:20और राखी का तेवार हमें बहुत ही अच्छा लगते हैं।
05:23हमारे हां सब भाई बहन आते हैं।
05:26जरूरी नहीं है कि हिंदू का तेवार है तो वही मनाएं।
05:29हम सब मिलके मनाते हैं।
05:30और मैं तो चाहूंगी कि जितने भी कास्ट के सब को राखी मनानी चाहिए।
05:34और हमरे हां जितने भी लड़किया आती हैं, बहुत कुछ धी थाई बहूं है।
05:49हम लोग मेरे पती के टाय्म से लुव करे हैं।
05:55थोड़े से में शुरू करे थे, थोड़े पैमाने में शुरू करे, फिर बढ़ते बढ़ते, आज हमारा पूरा परिवार तीनों बेटे,
06:03तीनों बहुए मिलके करती हैं, और हम लोग रक्षा बंदन को इतने अच्छे तरीके से मनाते हैं, मेरे को तो
06:09सबसे ज्यादा पसंद ह
06:10हाई बेहन का प्यार, और बहुत कुछ शेकने को भी मिलता है, तो हम लोग ये रक्षा बंदन बहुत-बहुत
06:18खुशियों से मनाते हैं, राखी बनाना पुरा परिवार किस तरह बनाता है? राखी मिलके एहमदाबास से माल आता है, दिल्ली
06:26से आता है, बंबे से आता है, डो
06:40कम से कम 20 साल हो गए मेरी शादी को, तब से ये काम चल रहा है हमारा, किस तरह
06:45चलते हैं आप ये, और राखी ही क्यों मतलब एक, क्योंकि दूसरे कम्मुनिटीज आते हैं आप तो, राखी खुशियों का
06:55तेभार है, सारे लोग मनाते हैं, हम खुद मनाते हैं, और हमारे इस �
07:00काम था, तो फिर चल रहा है, तो फिर हम भी चलाई ही रहे हैं, तसर है
07:30आप है
08:25झाल झाल
08:32झाल
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