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03:46ुप्रवार को जब मामले की सुनवाई दोबारा हुई
03:49तो पूरा घटना क्रम बेहद महतपूर कानूनी बिंदू पर आकर अटक गया
03:54आपको बता दे कि सुप्रिम कोट में नियामूर्थी दिपांकर गत्ता की पीठ यहाँ पर सुनवाई कर रही थी
03:59सुनवाई के दौरान अदालत ने जो उत्रप्रदेश सरकार की ओर सित पेस अतरिक्त सॉलिसीटर जनरल के नतराजन से एक सीधा
04:07सवाल पूछा
04:08क्या पूछा सवाल आपको बता दो कि सवाल ये था कि क्या इस मामले में राहुल गांदी के खिलाब अब
04:13योजन चलाने के लिए उत्तरप्रदेश सरकार से जरूरी मंजूरी ली गई थी
04:17और यहां से आपको बता दे कि जो मामला पलटा उसके बात जो है कॉंग्रेस में खुशी की लहचा गई
04:24इस सवाल ने पूरा मामला पलट दिया उत्तरप्रदेश सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि ऐसी कोई मंजूरी
04:31नहीं दी गई थी
04:32अब सवाल उठा कि अगर मंजूरी नहीं दी थी तो फिर धारा 153 एक के तहत राहुल गानी के खलाफ
04:38आप राधिक संग्यान कैसे लिया गया भला
04:40अब देखें सुप्रिम कोट ने इसी सवाल पर पूरा मामला खत्म कर दिया
04:43अदालत ने इस पुष्ट किया कि भारती दंड सहियता की धारा 153 एस संबंदित अपरात का संग्यान लेने से पहले
04:49दंड प्रक्रिया सहियता की धारा 156 के तहत राजसरकार की पूर्व मंजूरी जरूरी होती है
04:55यानि कानून में एक विसेस प्रक्रिया तै की गई है और इस प्रक्रिया के मताबिक पहले जरूरी सरकारी मंजूरी होनी
05:02चाहिए
05:02उसके बाद ही अदालत इस तरह के अपरात का संग्यान ले सकती है
05:06सुनवाई के दोराज शिकायत करता की ओर से पेश वकील ने कहा की अगर मंजूरी जरूरी है और अभी उपलब्ध
05:12नहीं है
05:12तो समन आदेस रद्द करके मामले को नए सिरे से बिचार के लिए मजिश्ट्रेट के पास भेजा जा सकता है
05:18उनकी तरफ से ये भी कहा गया कि अगर कानून के मुताबिक मंजूरी लेना जरूरी है तो उसके लिए आगे
05:23आवश्यक्त कदम उठाये जा सकते हैं
05:25सुप्रिम कोट ने इस दलील को स्विकान नहीं किया कि पहले संग्यान लिया जाए फिर बाद में मंजूरी हासित कर
05:30ली जाए
05:31न्यायमूर्ती दिपंकरद्टा ने साफ शब्दों में कहा कि अगर अपराद का संग्यान लेने से पहले मंजूरी होना निवारे है
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