00:00पंदरा अगस निस सो सेटालिस को जब भारत आजाद हुआ उस समय भारत के अखवारों ने आजादी की ख़बरों को
00:06किस प्रकार से चापा ये आम जन और नई पीड़ी जान सके इसके लिए जश्टिस अनिल वर्माजी ने एक प्रदरसनी
00:15लगाई है इस प्रदरसनी को लगा
00:17आने का क्या उद्देश है मैं असल मैं इथियास से सम्मधित वस्तूओं का संग्लाद करता रहा हूं और मेरे पास
00:23आनेक विश्यों पर अकबार हैं और मेरा ये मानना है कि इथियास के सबसे बड़े संभाग होते हैं अकबार हमारे
00:30और 15 अगस 1947 को जब देश आजाद हु�
00:47और ना जाने कितने परिवार हो जड़ गए हाला कि देश का बटवारा हुगा बटवारे में रख रंजित प्रांती हुई
00:57उसका भी खाम्याजा भुगतना पड़ा एक खुशी और गम दोनों का मिश्रित दौर था हूँ 15 अगस 1947 उस खबर
01:05को देश की आजादी की उस खब
01:13पाथा मेरे मन में यह धारणा थी कि नई पीड़ी को इस्यास के उस चूते विशह से आउकत कराए जाए
01:27और इथियास को सही तरीके समझने का मौका मिले इसी भावना के साथ मैंने यह एक्जिबिशन आईजित की है और
01:37इसको तयार करने मुझे करीब छे वर्षों का वर्�
01:42पुराने अकबार को जुटाने कोशिश की कई आर्काइब्स थे कई लोगों के इंडिविजल कलेक्शन में थे कुछ सोचल मीडिया पर
01:50मिले कुछ विदेशी अकबार वहां के आख बारों की साइट से भी मिले तो बड़ा गहन शोत का काने था
02:00कितने अवारों की याट जो �
02:09अर्दू, मलेयालम, माराथी, अने छेतरी भाषा हैं और विदेशों में भी जो फ्रांसीसी है, भासा में भी हैं, आस्ट्रियर के
02:20अकबार हैं, इंग्लेंड के अकबार हैं, अर्एक भाषाओं में हैं इसमें अकबार हैं.
02:34मैं आज 80 साल पीशे जाकर किसी भी एथियास को खोजने की कोशिश करना, कठन काम है.
02:40अधर परिवार और दोस्तों का कैसा सहयोग रहता हैं?
02:42मैरी पतनी का बड़ा सहोग रहता है, क्योंकि मैं जो अपने इन सब कामों के लिए जो समय लगाता था,
02:47अपने नयाइक सेवा के अलावा, तो वो उनका व्यक्ति का समय होता था, परिवार का बड़ा महत्पूर योगदान है.
02:54यह 17 अगस तक चलेगी.
03:23जो सुतंतरता दिवस के आउसर पर आजादी के पहले दिन का ख़वार निकला था, वो कैसा था?
03:28कैमरामेन फैजान के साथ, बिस्वाश चतरुवेदी, ETV भारत, बोपाल.
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