00:00देशबर के चात्र पिछले कुछ महीनों से चीफ चस्टिस अफ इंडिया सूरेकांट से नाराज हैं। एक तरफ देश के चीफ
00:06चस्टिस सूरेकांट हैं, दूसरी तरफ कारून के चात्र और बीच में आ गया है BCI। सवाल इतना बढ़ा कि सुप्रिम
00:14कोर्ट में CGI को कहना प�
00:29और कौन है BCI के चेर्मेन मनन मिश्रा चिन के फैसले पर सुप्रिम कोर्ट ने ही सवाल उठा दी है।
00:36पूरा बामला समझते हैं। नमस्कार मैं हूँ पूजा मेरुत्रा और आप देख रहे हैं आज तक डिजिटल। हैटरबाद की नालसार
00:44यूनिवर्सिटी ओफ लौ दे�
00:46की परतिस्टत लोस अंस्थानों में गिनी जाती है। यहीं से 2026 बैच के ग्रेजुट्स ने दिक्षान समारों में CGI सुर्यकांत
00:53को इनवाइट के जाने को लेकर अपनी असहमती जाहिर की थी। दरसल 20 जुलाई को जंतलमंतर पर हुए चात्र परदर्शन
01:01और उस दौरान ह�
01:06प्रिम कोट में सुनवाई फी थी। सुनवाई के दौरान CGI की कुछ मोखिक टिपनियों से नालसार के छात्र का सहमत
01:13थे। इसके बाद छात्रों ने युनिवर्सिटी परशाशन को पत्र लिखा और मांग की कि CGI सुर्यकांत को उनके दिक्षान सवारों
01:21में मुक्यतिती के त
01:35नालसार दो हजार चब्विस के तिसी भी छात्र का अधिवक्ता के तौर पर एन्रोल्मेंट ना किया जाए। सोचिए, तानून की
01:45पढ़ाई पूरी करने के बाद जिन छात्रों का अगला कदम वकालत में प्रवेश करना था, उनके करियर पर ही रोक
01:50लगने का हत्रा पैदा
02:04लेकिन कहानी यहीं खब नहीं हुई, मामला पहुच गया सुप्रेम कोट और यहां सीजी आई सूरेकांग ने बीसी आई के
02:11रुक पर कड़ा एतराज जताया, फटकार लगाई, सुप्रेम कोट ने बीसी आई को नोटिस जारी किया और छात्रों के खिलाफ
02:19किसी भी तरहें क
02:20दंडात्मक कारवाई न करने का निर्देश दिया, सीजी आई ने साफ कहा कि छात्रों को शांतेपुन तरीके से अपनी बात
02:29रखने और विरोध करने का अधिकार है, और सबसे अहमार, सीजी आई ने ये भी कहा कि छात्रों ने उन्हें
02:36पत्र लिखा था, ये उनके और छात
02:49गतिविदियों और आंदोलों में सक्रिये रहे हैं
02:52संदेश साफ है
02:54असाहमती का मतलब अनुशासन हींता नहीं है
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