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  • 2 days ago
कुमाऊं की लोक संस्कृति और कलावा का अनोखा संगम बनीं ऐपण की राखियां, कनाडा-अमेरिका-ऑस्ट्रेलिया तक पहुंची रामनगर की राखी, कैलाश सुयाल की रिपोर्ट

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Transcript
00:12RAKSHYA BANDHAN
00:30This few people come from the place, but these mortgages are a small way from the land-sdale to the
00:34land these days.
00:34This is from the people of Raja Intune, Haji Pratt & Haji Pratt & Haji Pratt & Haji Pratt &
00:41Haji Pratt & Haji Pratt.
00:42It's a small little bit of the owner of Raja's house.
00:46They here, in the area, his typically Beelty.
00:48But there are also a lot of people who are black people who are black people
00:52who are black people who have black people involved in these days.
00:55Even in order to be black people from the land-duty?
01:04In where they are, when the order comes from Satsang with the
01:10Dada, Bula, Bhai, Jaysay Pahari Shabd, Bhai, Behen and Pariwar
01:14Kierishnaki Bhaavnathma Keharai Ko Bayaan Karate Hai.
01:19Kuch Pahari Symbols
01:20हैं,
01:21जैसे,
01:21हम ममी को ईजा कहते हैं,
01:23भाई को बुला,
01:24बड़े भीया को दाजू कहते हैं,
01:26तो इस टाइब के वर्ड उसमें लिखे हुए हैं,
01:28तो लोगों को काफी पसंद आ रहे हैं,
01:30हमारी कुमाओ की संक्रिटियू से साथ जूरी हुई है,
01:42उनकी कुछ भावात्मक चीजें उनसे जुड़ी हुई हैं,
01:48राखियों में एपन कला,
01:50M.D.F. बेस, मोतियों और कलावे का इस्तमाल किया गया है,
01:54खासकर कलावा इन राखियों के धार्मिक और पारंपरिक महत्व को और बढ़ा रहा है।
02:10सबसे ज़्यादा मुझे इसमें यह पसंद आई है,
02:15मुझे राखियां बहुत पसंद आई है और मैं देखती भी हों की राखियां इनकी बाहर तक जा रही है।
02:19रंजना की राखियां खरीदने पहुँचे समाज सेवी नरेंद्र शर्मा ने रंजना की इस पहल को लोक संस्कृती को जीवित रखने
02:27की दिशा में एहम कदम बताया।
02:51राखियों में इतनी संदर संदर आकरतियां बनाई हैं कि हमने भी राखियां खरीदी है।
03:08रामनगर की रंजना के हाथों से तैयार की जा रही एपन राखियां वोकल फॉर लोकल की मिसाल भी बनी है।
03:14जब किसी भाई की कलाई पर भुला या दाजियू या ददा लिखी राकी बंधती हैं तो वो सिर्फ एक सजावटी
03:22वस्तु नहीं रह जाती बलकि उसके साथ परिवार और पहाड की यादें भी जुड़ जाती हैं।
03:27इन राखियों में सिर्फ रंग, धागे और डिजाइन नहीं हैं बलकि इन में कुमाओं की बोली, रिष्टों की मिठास, लोककला
03:35और धार्मिक परंपराओं का संगम देखने को मिलता है।
03:40रामनगर से कैलाश सुयाल की रिपोर्ट
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