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  • 2 days ago
अलवर की नेहा सचेती ने घर से ही ज्वेलरी बिजनेस से अपनी अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. पढ़िए पीयूष पाठक की रिपोर्ट.

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00:10दिन में परिवार के जिम्मेदारियां सम्हालना और रात के सन्नाटे में अपने स्थपनों को नए रंग देना
00:17ये कहानी है अलवर की नेहा सचेती की
00:22साल 2009 में शादी के बाद गुरुग्राम से अलवर आई नेहा ने कई सालों तक टैक्स कंसल्टेंसी में हाथ बटाया
00:30लेकिन उनके दिल में फैशन और जूलरी डिजाइनिंग का एक सपना हमेशा जिन्दा था
00:38आज के डिट में मैं सारे ओनूमेंट बनाती हूँ रिंग्स, एर रिंग्स, नेकलेज, टो रिंग्स, एंकलेट, हटफूल, मंग्टी का एवरिधिंग
00:49आज के डिट में बनाती हूँ अफगानी, साउथ हिंडियन, टेंपल जोलरी, कोलापूरी जोलरी इस तरहां का मैंने �
00:57फेशिन डिजाइनिंग बेग्राउंड से थी, मिला डिजाइनिंग और क्रेटिव फीज से मैं शुरू सही थी और मुझे शुरू से ही
01:02इंट्रस्ट था, जोलरी का हो गगया, उसी भी चीज में मुझे शुरू सही हो था, कि मैं अपने अलवर से
01:08स्टार्ट कर सकती हूँ, �
01:10अलवर में इस तरह कि जोलरी कोई लाइक करेगा, नहीं करेगा, थोड़ा सा हाइंड, अगर आप मेटल यूस करो तो
01:16थोड़ा रेंज हाई हो जाता है, तो घर से ही स्टार्ट किया था, पर एक एग्जिविशन अलवर में जब मिला
01:21मुझे उपरचुनिट एग्जिविशन
01:37खुद की पहचान बनाने की जिद के साथ नेहा ने साल 2017 में घर से ही जूलरी डिजाइन करने की
01:45शुरुआत की, उनका मकसद पैसा कमाना नहीं था, बलकि हुनर को हर घर तक पहुचाना था, जल्द ही उनकी बनाई
01:54ट्राइबल, अफगानी, साउथ इंडियन और सिल्वर ज�
02:29लोगों की पहली पसंद बन गई
02:31अफ्तार रोकी, तब नेहा ने हार मानने की बचाए पती के सुझाफ पर सोशल मीडिया का सहारा लिया, डिजिटल ताकत
02:40के दम पर उनका ये छोटा सा काम आज एक इंटरनाशल ब्रैंड बन चुका है, अलवर की गलियों से शुरू
02:47हुआ, उनका ये सफर आज साथ समंदर �
02:50पार विदेशों तक धूम मचा रहा है, राजिस्थान के अलवर से पियूश पाठक की रिपोर्ट
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