00:00Rohit hathamur, Maha Bhairat ke yudh ke ant ke bad, Shrarap jheel raha,
00:09Eek aamar yodhha gahre buno moe bha teak raha ta.
00:13Bhataktay bha te dronachariya ka vah Duatra ek aise GupING áshiram meja pauncha jahat eata
00:18yug ke mahan rishi upasthit thhe.
00:30ुश्वत्थामा अपने अमर होने के अभिशाप और शरीर पर लगे घावों की असहय पीडा से पूरी तरहे त्रस्थ हो चुका
00:37था
00:37दिशी वालमीकी ने अपनी योग शक्ती से पहचान लिया कि यह वही द्वापर युग का पापी योध्धा है जिसने कुल
00:45का नाश किया था
00:46लेकिन करुना के सागर महर्शी वालमीकी ने उसे कोई दंड देने के बजाए धर्म और शांती का गहरा ज्यान प्रदान
00:55किया
00:55वालमीकी ने समझाया कि अमर्ता कोई वर्दान नहीं बलकि पिछले कर्मों के प्रायश्चित का एक महान अफसर है
01:04उस दुरलब भेंट ने अश्वत्थामा के क्रोधी हृदय को शांत किया और उसे युगों तक भटकने की मानसिक शक्ती दी
01:12और ऐसे ही रोचक महाभारत की कहानिया सुनने के लिए फॉलो जरूर करें और बेल आइकन दबाएं
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