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'धर्म संसद' के मंच पर संतों-विद्वानों ने धार्मिक आस्था, मंदिरों की पारदर्शिता पर रखे विचार, देखें

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00:00स्वामी अभधेशपुरी जी क्योंकि हम सावन के महीने में यहाँ पर मौझूद हैं इसे में महाकाल की दगरी मैं कई
00:07बार आई हूँ
00:08इस बार क्या मेरे लिए महत्व खास होना चाहिए धर्मसंसर तो है ही खास लेकिन क्या इस बार अगर मैं
00:15सावन में दर्शन करूँ या फिर तमाम जो भक्त इन पावन दिनों में दर्शन करते हैं उनके लिए क्या महत्ता
00:22आप समझाएंगे
00:29बोलिये महकाल भगवान की ये बहुत ही प्रशनता की बात है आपने प्रशन किया कि इस बार क्या वशेश महत्तो
00:38है ऐसे तो भगवान महकाल सदाश्व हैं ने मैं कई बार यहां पर आई हूँ
00:45बगवान महकाल का महत्तो अपनी जगे है लेकिन आप इसलिए सवभागयवान हैं चुकि आप इस बार जब आई हैं तो
00:53आप पिछली बार जब उज्जेन को देखी थी उसमें और इस बार के उज्जेन में बहुत बड़ा अंतर आया है
00:58बगवान महकाल तो वही है लेकिन उ
01:13इस गती से इस बार हुआ है, इसे पूर्व कभी नहीं हुआ, तो आप देख रहे होंगे, कि चारो तरफ
01:19जब हम जाते हैं, चारो तरफ रोड ही रोड आपको नजर आ रहे हैं, छिप्रा पर घाट ही घाट नजर
01:25आ रहे हैं, ये सब सिर्फ इसलिए संबब हो पाया, क्योंकि �
01:29भगवान महाकाल का बेटा, भगवान महाकाल की नगरी से, सीएम भगवान महाकाल के पासे बने, तो उन्होंने उज्जन का आमुल
01:37चूल पर वर्तन कर दिया, जब वर्दस्त विकास किया है, विकास की गंगा दिन प्रति दिन बह रही है, साथ
01:43ही भगवान महाकाल का दर्श
02:07तो यह सब देख करके प्रत्यक्सर धालू का मन बहुत ही प्रसंद होता होगा धन्यवार्ट
02:14पंडित शेलेंद र्यास जी पिछले कई वर्षों से आप महाकाल को देखते आ रहे होंगे इसे समझते आ रहे हैं
02:22आस्था तो अपनी जगहा है वो तो अडिग रहती है आस्था की कभी गहराई कोई नाप नहीं सकता है लेकिन
02:29आपने इस प्रांगर को बदलते हुए देखा ह
02:32होगा इसके स्वरूप को बजलते हुए देखा होगा क्या हम उस काल से इस काल अगर पिछले 20-25 वर्षों
02:40की ही बात करें कैसे महाकाल की नगरी बतली
02:42सम गच्छद्वम सम वदद्वम सम वो मनान से जानताम देवा भागम यथा पुर्वे सम जाना नाम उपासते
02:51नेहा जी आप राहे बनाते चले महाकाल मंजिल बनाएगा और शिरागों को मचलने दे आज तक पुरे विश्व में मुस्कुराएगा
03:01तालिया हो जाएक स्वरत पर संब्सेयं धैसल में तालिया वो नहीं बजाते हैं जिनेंदूसरों की बतों का गम होता है
03:09और तालियंग वो बजाते जिनके हाथों में
03:20में गीता रामचरित मानस हनमान चालिसा रखता हूं
03:25महाकाल बाबा का संवान करता हूं
03:28यह हमारे पूरवजों की जागीर है दोस्तों
03:32मैं अपने दिल में दोस्तान रखता हूं
03:35बाभा महाकाल कालों के काल है
03:38बाबा महाकाल की नगरी, क्रश्न सुदामा की मेत्री स्थली, कालिदास की कावी रचना स्थली, छिपरा के जल के तरंगों से
03:48तरंगाईत, गोरवशाली एश्वर्य और वेभाव से मंडित, महाकुम्ब की नगरी, सद्भावना की नगरी, सीहस्त की नगरी, शांती की नगरी
03:58इसने की नगरी प्यार की नगरी आज फली बूत हो रही है
04:02तो बाबा महाकाल की असीम अनुकम पास है
04:06आज श्री बाबा महाकाल के भक्तों का जो एजाफा हुआ है
04:12बाबा महाकाल के दर्शन में जो भक्त गण आ रहे हैं
04:15जितनी सुविधाएं हमारे मद्यपदेश शाषन के शतावधानी यशेश्वी मुख्यमंत्री डक्टर महुंजी द्वारा दी जा रही है वो आने वाले वर्षों
04:25में पहले कभी नहीं दी गई और बाद में भी यह सोभा की उज्जेन को प्राप्त नहीं होगा महिमा मंडित
04:33
04:33कालिदास की गौरव गाथा उज्जेनी महाकाल की अपनी परंपराएं है अपना संसकती है यह बाबा महाकाल की नगरी यह अपार
04:42सनातन संसकती की नगरी है इतिहास की दादी है पुराणों की नानी है परंपराओं की परदादी है महिमा मंडित कालिदास
04:51की गौरव गाथा
04:52का उज्जयनी नियाए मूड़्ती विक्रवा दित्त की किर्थि पता का उज्जयनी सांदीप निशी बुद्धिश आलाका उज्जयनी धवल अधार
05:02अध्याधार्दी छिठप लटट धान्य सुधन्य ऊज्जयनी महाकाल उज्जेन का मन है और
05:09शिपड़ा विश्व का तन है तो बाबा महाकाल के इस नगरी में जो वेभाओ जो आनंद जो मस्ती का सुनामी
05:17लहर हमको भक्तो और शद्धालों की रूप में दिखाई दे रही है वो बाबा की क्रपा है और हमारे यशश्वी
05:24मुख्यमरंती का वीजन है जुनोंने इविकास
05:27के चवं और द्वार खोल दी है पंडित रमंत्र वेदी जी क्योंकि बारा जोतिलिंग और बारा जोतिलिंगों में से महाकाल
05:38का विशेश महत्व कैसे ये बाकी 11 से अलग है कैसे यहां का पूजा का विदी विदान अलग है और
05:46कैसे यहां की भविता बाकी जोतिलिंगों से �
05:49हर हर महादेव बुलिये महाकाल महाराजय की जये जये महाकाल जये महाकाल
06:27पुरे भारत वर्ष में बारा जोतिलिंग का सोयंभू
06:35पुरे लिए की सब्सक्राइब होती में बारा जोतिलिंग यहां बारा जयता है
07:01हुआ यही शिद्ध हुआ था ओम होम जूम स्वाहम ओम भूर्भा स्वाह ओम त्रयंबकम जयाम है सुगंदि बुष्टिवा धरम और
07:10वार कुविवन धरहां मृत्यों रुक्षिये मां बतात ओम स्वाह ओम भूह ओम सहा जूम होम ओम एक बार यह मंत्र
07:20सुनने से हमारे अकाल
07:31जा काल है वह महाकाल है चाहिए वह मेरिका हो लंदर हो मलेशिया हो जग्ये नो भारत हो शैकाशिनम्रелен का
07:41वहाधकव हर जगे है इसलिए भगवान महाकाल का जीकमत्पण
07:45यह दक्षिनुक जोतिलने के सिर्फ 12 में एकी है और विशाल है छोटा ली कि वीशाल है इनके सरगार होते
07:54हैं नित्य-वाचित आप पर सकते हैं
07:56उनसे, हजारों साल हो गए, यहां प्रें भगवान का है,
08:00शंगार होते होते, और भगवान रूप में दर्ष diferença दिये हैं,
08:05यह कालों के काल, और देताओं के देता है,
08:08यहां क्रुष्हुन है मुजय ने आके चिक्षा स्ठरीख करश्ण ही रही है,
08:13राम ने यहां के भगवान की तबस्या की है इसलिए इसको यहां पे भगवान महाकाल की नगरी को देवत्याओ की
08:22नगरी कहा जाता है
08:23क्योंकि यह नगरी चोरा सी महादेव की नगरी है यह नगरी सब्तो सागर की नगरी है
08:29ये नगरी साथ बार स्वर्गों को गई हो साथ बार स्वर्गे से नीचे ही है
08:34इसलिए इसको कोई कुषसरी विशाला, कलक्शंगा ऐसे अनैक नामों से जाना जाता है
08:41अमन्तिका, उज्जेनी और उज्जेन, विक्रमाजिती के जमाने में इसका नाम उज्जेनी था
08:46उसके बेले कृष्णे के जमाने में अलग-अलग नाम से यह जाने जाती है
08:50यहां पे पाउन तीर्त जो है चार धाम और बारा जोतिलिंग
08:56इकाउन पीट सब्तसागर और यहां की महिमा इतनी अखंड है
09:01कि छोरा सी महादे जो हमारी छोरा सी लाग योनिया होती है
09:04उसमें जो स्योरा सी लाग योनियों में जो सबसे महत्पूर्ण योनि है
09:09वो भगवान महाकालेश्वर उनकी क्रमा करते है और उसमें मोक्ष की प्राप्ति करते है
09:14इसलिए यह भगवान महाकालेश्वर भगवान प्राटक काल में जब जागरत करते है
09:21तो भगवान चिता भसमे से लेपन होता है
09:38जो अमंगल कारी चीज़े भगवान शंक्तर करहन करते है
09:41और वो मंगल कारी चीज़े भगवान प्रदान करते है
09:44जिससे जंग का कल्यान होता है
09:45ऐसे हमारे महाकाल को आप सब या आज तक के जो लोग आते है
09:50और आज तक की टीम जो याई है
09:52ये बहुत बड़ा पुंडी का कारी आपने किया है
09:55क्योंकि ये पुंडी का कारी करने से
09:57हजारों लोग इस चीज को देख रहे है
09:59और जो भी महहकाल का नाम सुनता है
10:01उसको पुंडी की प्राप्ति होती है
10:03और विशेश कर सावन का महिना और आपने ऐसे महिने में इस शिप्रा के तड़ पर इस महाकाल की लगरी
10:11में इस अनलक शेत्र में इस महाकाल लोग में आके अलोकित कर दिया है आज तक को बहुत-बहुत बहुत
10:17बहाई भगवान महाकाल का बहुत-बहुत आशिरवाद ये श्क
10:33लोग दर्शन करते हैं और उनका हजारों लोग देश विदस से आके दर्शन करते हैं वो बढ़ती जा रही है
10:40भीडिया इसमें प्रशाचन का बहुत बड़ा योगदार है प्रशाचन के जो आधिकारी लोग है वो बधाई के पात्र है यहां
10:49के मुख्यमंत्री आधर निव प
11:03आधत विभूशित डिग्रिया मिली है आएंगे इस मंच पर आएंगे भग्वार महा का आशी ज का आशी जी यहांपर कई
11:17तरह की आरती होती हैं लेकिन भषमार्ती का विशेश महत्र है लोग यह भी मानता है कि अगर भषमार्ती नहीं
11:23देखते हैं तो दर्शन अधूरे र
11:32महा कालम महा योगिन महा कालम नमोस्तुते
11:36परमपिता परमात्मा जोतिलिंग बाबा महा काल का दरबार
11:40बाराज जोतिलिंग के अंदर सिर्फ एक मात्रे साइस्ताने जापे बगवान ने बस्म दारन करी है
11:47बस्म क्या है बस्म संसार का नासवान होने का बोधक बताती है
11:53कि एक दिन हमें नास होना है
11:55और बाबा की जो बस्म शंती है वो एक पोटली होती है
11:59अखंड गाय के गोबर उबले जो कंडे होते हैं
12:03उसकी बस्म बनती है और वो धई किलो की होती है
12:06अर्थात हमारा जीवन का जब प्रारंब होता है तो यह सा कहा जाता है कि जब पज्चा पेदा होता है
12:13तो वो धाई किलो के लगभक का होता है वो जब उसका जीवन छुड़ता है वो जब हम उसे संसान
12:19में जला देते हैं तो जो राग बनती है वो भी धाई किलो के लगभक की
12:25ही रहती है इस तरह भगवान महाकाल के दरबार में बाबा पर धाई किलो की पोटली से भगवान महाकाल के
12:33जो पांच मंत्र हैं जो पांच तत्व हैं हमारे जीवन के उन तत्वों से सद्ध्योजात अगोर वाम देव तत्पुरूस इसान
12:43तरंबक जो मंत्र है उससे भगवान
12:46को बस्मशानी जाती है भगवान निराकार से साकार होते हैं और पुना निराकार हो जाते हैं लाई और विलाई की
12:55जो प्रक्रिया है वो है बस्मार्थी जो भगवान के हमें जीवन को सिखाती है कि जीवन का प्रारंब है और
13:03जीवन का अंत है वो है बस्मार्थी बस्मार्थी
13:07हमारे जीवन के संपुर्ण संसकार जो वेक्ति के जो सोला संसकार होते हैं
13:14वो सोला संसकार का प्रति निधित्व करती है वो है बस्मा आरती
13:18क्योंकि भगवान शिव ने यहाँ पर बस्म दारन करकर संपुर्ण समाज को संदेज दिया है
13:24इसलिए यहाँ पर जब बसम शांते हैं तो एक बहुत रोचक समय आता है जब हम महिला को कह देते
13:30हैं कि आप पर्दा करिए
13:32क्योंकि भगवान उस समय निराकार थे साकार रूप के अंदर आते हैं तो महिला सम्मान में भगवान शिव को पर्दा
13:39करती है
13:40और जब बसम अर्तिक समापत हो जाती है तो भगवान का पुना सिंगाल लिकाल लिया जाता है वो जल अरपन
13:46करकर भगवान को पुना निराकार कर दिया जाता है तो यह जो बसम अरति है वो निराकार वो साकार का
13:54सरूप है जै महाकाल
13:58ओम प्रकाश शातुर वेदी जी क्योंकि आप लंबे समय से काल भहरव मंदे से जुड़े हुए हैं क्या मेहत्ता है
14:06इस मंदर की जिन लोगों को अभी तक दर्शन प्राप्त नहीं हुए हैं अगर महाकाल के दर्शन के साथ काल
14:14भहरव के दर्शन ना हो तो क्या जोतेलिंग के
14:17दर्शन अधूरे माने जाते हैं तक महाकालेश्वर भगवान के इस नगरी में महाकालेश्वर जोति लिंग है भगवान शंकर का इस्थान
14:29है उज्जेन में माता की दाहिने हाथ की कोहनी की स्थापना होने से यह शक्ति पीड की सेड़ी
14:38में भी आता है उज्जेन और माता भी यहां सक्टी बीट होता है माता जो है जागरत अवस्था में बिराजमान
14:44रहती है हर समय माता की साधना भी उतनी महत्वपूर्ण है वो भी की जा सकती है उज्जेन में उज्जेन
14:51का यह दूसरा महत्व है भगवान स्रीकर्ष्ण यहां �
14:54पढ़ने आये थे आप देखिए स्रीकर्ष्ण का जन्म हुआ द्वापर के अंत में और स्रीकर्ष्ण जब वहां थे जन्म किसने
15:04दिया पाला किसने और महां मट्की फोड़ा करते थे वो बालक जब उज्जें में पढ़ने के लिए आये तो यहां
15:11से जाने के बाद जो उनको �
15:12डिगरी मिली वो थी रश्णम मने जगत गुरुम और ग्यान और विज्जान उन्होंने यहां से जो प्राप्त किया वो उन्होंने
15:22सर्व प्रसंद प्रगट किया कुरुक्षेतर में और स्रीकर्ष्ण का जब जाने का समय आया तो उन्होंने वहां से ना हस्तिनापूर
15:31में �
15:31ना कुरुक शेदर महरुके, ना मत्राबन्दावन गये, ना उजझेन आए, उन्होंने अपने विग्जान के बल पर जलतत्यों से प्र� si
15:40Lego Såd credentials का अवेरभाव किया अपने विग्जान के बल पर और महाद्वारर का
15:44माई बसाई जिस दिन स्रिकर्ष नया से गए उसी दिन वो द्वार का डूब गए एग्रिमेंट समाथ तो हो चुका
15:50था ये अब ये इन विशेष्टाओं के साथ उज्जेन और महाकालेश्पर जोते लिए कि एक और विशेष्टा है
15:58कि वैष्णों तिर्थ भी है माता का तीरत भी है भखवान शिव का तीरत भी है इसके अलावा चार बूंदे
16:05अमरत की जो गिरी उनमें भी एक उज्जेन है इसी पकाद थोड़ा सा यहां उज्जेन में भेहरो का आपने पूछा
16:13है
16:14मैं आपसे निवदन करना चाहता हूँ मालूम सबको है मैं आपको यह निवदन करना चाहता हूँ कि उज्जेन के मद्ध
16:22में उज्जेन के सेंटर में प्राचीन अवंती नगरी के मद्ध में भेहरो बिराजमान है
16:28महा उज्जेन के दक्षिन दिशा में सब को मालूम है शनीगर निवास करते हैं
16:33और उज्जेन के उत्तर दिशा में सूरी निवास करते हैं
16:36दोनों में पिता-पुत्र का रिष्टा है लेकिन वो वेमनस्षिता का रिष्टा भी एक है उनमें बनती नहीं है
16:42तो वो द्वंंद से गरशित उज्जेन
16:45साधकों को
16:46सेही मार्ख पर लाने के लिए
16:48भहरो जो है
16:50उज्जेन में बिराज माने
16:51उंको क्शेत्रपाल की रूप में पूजा जाता है
16:53कुल देवता की रूप में पूजा जाता है
16:55और जहां बनारस्त जो उनका मूल इस्थान है महा उनको कोतवाल की रूप में रक्षपाल की रूप में पूजा जाता
17:01है
17:02महा हम जब जाते हैं तो भेरव जो उज्जेन आए तो उनका स्वरूप हो गया राजस
17:12और यहां आने के पर वो हो गए चतर भुजम शंक गदाधरा युधम पीतांबरम सांदर पयोदसो बगम
17:20स्रीवत्सलक्षम गलशो भिकोस्तुम यह जो है भेरव का सुरूप हो गया उज्जेन में
17:24तो भेरव उज्जेन में एक अलग रूप में विराजमान है और सारे इमनुरत परिपूर्ण करने वहां पहले उनकी आग्या लेकर
17:34के अंदर जाते हैं
17:35यहां आप आगे पिछे कभी भी आ जाएं जो सारे कोटी तिर्थ है उज्जेन में इन तिर्थों में हम जाते
17:42हैं और नहीं जा पाते हैं
17:44जो हम नहीं जा पाते हैं, वहां का भी भेहरव हमको फल पजान करते हैं, ये मानिता अलंबे समय से
17:52चली आ रही है, ये मानिता है वहां की, अब भेहरव जो है, चुकि तमगुर पजान दे उता हैं, तो
17:58उनको मदीरा का आपने पूछा भी, मदीरा का भी भोग लगता है, जैस
18:18वहिरो को मद्रावान के उसमें हैं, हील्थ परक परगने वाल है।
18:43प्रणाम करता हूं, ये माताब साक्षात लक्ष्मी की समान है.
18:46ये माताब भगवान मिश्मू के समान है.
18:49मैं आपको भषरो को पतान करता हूं.
18:51तो जब माता अपने हाद से भषरो को पात जाती है,
18:54तो हमारे साथ negative energy भी चली जाती है.
18:57एसा मानेता है कि आधी, व्याधी, कलह और धरित्रता ये मदिरा की रक्षन भी चले जाते हैं
19:03और वादले में भगवान हो को पतान करते हैं आरोग्यायू सिरी संपत्ति वेभव
19:07ये विनिबाई वाली पूजा है, लेंदेन वाली पूजा, जो भी हम सकाम उपासना करते हैं, वो सब लेंदेन वाली पूजा
19:14होती है, रिलेशन्शिप वाली नहीं, उस शक्ति से हमारा रिलेशन करना केसे वो उसकी प्रोसी सह लगे, बाकी सब लेंदेन
19:21वाली हैं, जी, आप
19:28आपने भी एक बात और बताता हूं आपको, जो सब को ग्यात है लेकिन कोई ध्यार नहीं देता उसे, जब
19:34भगवान के दर्शन करने के लिए लंबी लाइन लगी है, और दर्शन करने के लिए मंदिर में मंदिर पहुंचता है,
19:40तो आप देखिएगा 90% लोगों की आखे बंद
19:43हो जाती है, जब भगवान सामने सीरी विग्रह है, यो कोई माया, कोई और है, जो हमसे ऐसा करवाता है,
19:50दूसरी बात, सकाम उपासना में हम ये देते, वो लेते, यो ओम गंगनपते, इनमाहे, कदंताय, विद्भाहे, वक्रतंदाय, धीमाही करके हम
20:00घंस उकाड़ लेते, �
20:01दुर्वादल चड़ाता है, सारे वीग्रवाध है, दूर हो जाते है, हम उसी में से धतूरे का फूल चड़ाते है, शिवजी
20:07परसंन हो जाते है हमारे पस कुछ नहीं साधन, ये इसको बोलते उपाय, और तांतुरी भाशा में बोलते है तंत्र,
20:14और तंत्र के जो विकास है
20:16वो जो विद्या हैं, ये कल्यूग में विशेस लोगों को दी गई है, सत्यूग वालों को नहीं थी, सत्यूग में
20:23लंबे समय तक तपस्या, त्रेता यूग में लंबे समय तक जान, लंबे समय तक अनुष्ठानम यग्यादी, और लापर यूग में
20:31लंबे समय तक जान करना �
20:32परता था कल्यूंग में ही हमारे लिए क्योंकि आपने कल्यूंग की बात छेड़ी है और कल्यूंग में अब मंदिरों से
20:39कई विवाद भी जुड़ रहे हैं तो मैं स्वामी अवधेश्पुरी जी से यही पूछूंगी कि जो हाली में राम मंदिर
20:45चंदा चोरी विवाद हु�
20:59है और इसकी वजह क्या है इसका आपने बहुत बड़ा पृष्ण है और आप सभी को इस सवाल का जवाब
21:09देना है कि करके मैं सभी की रायस पर और बरतमान समय में जितना बड़ा मुद्दा ये बना है मुझे
21:17लगता है कि धर्म को लेकर के और धर्म जगत के बिष्टाचार
21:20को लेकर के इतना बड़ा मुद्दा इससे पहले कभी नहीं बना था तो बहुत ही बड़ा मुद्दा बन गया है
21:26और बड़ा मुद्दा इसलिए बन गया चूकि भगवान राम का जब मंदिर बना तो उससे पहले हम सब जानते हैं
21:33कि हमारा करीब पांच सो वर्ष का संगर्�
21:43तो मार्ट सेख़व पीडियां शमाप्त हो गई उसके बाद हमने बागवान राम मंदर के निर्माड की ये जो सुपन देखा
21:54था वह सुपन साकार हुआ तो सुपन साकार हुआ उसमें बड़ी बात ये हुई कि सरकार अगर चाहती तो स्वैं
22:02हजार दो हजार पांच जार का अ
22:07मंदर का निर्माड हो जाता गवर्मेंट के लिए कोई बड़ी बात नहीं थी प्रदेश सरकार कर देती केंतर सरकार भी
22:13सायोग कर देती मंदर का निर्माड हो जाता लेकिन ऐसा नहीं हुआ मंदर का निर्माड हुआ प्रतेक रामभक्त के प्रतेक
22:21हिंदू के घर घर से जैसी �
22:24जिसकी सरद्धा थी उसके अनुसार उसमें योगदान लिया गया, चंदा लिया गया, सहयोग लिया गया, क्यों लिया गया, क्योंकि प्रतेक
22:32व्यक्ति का प्रेम, प्रतेक व्यक्ति की आस्था, प्रतेक व्यक्ति की निष्ठा और प्रतेक व्यक्ति की सरद्धा भगवान रा
22:40हलाएं कि राम मंदे जब नहीं था तब भी राम के प्रती लोगों के में सरदात हो थी
22:44क्योंकि रामो विग्रहवान धर्मा जब हम धर्म की परिवासा देते हैं
22:48धर्म की डेफिनेशन की जब बात आती है तो संपूर्ण धर्म जिसमें समाहित हो जाए
22:53ऐसा कोई करेक्टर ऐसा कोई चरित्र ऐसा कोई व्यक्तित पूरी धर्ती पर है तो वो भगवान सी राम का व्यक्तित
23:00है भगवान सी राम का चरित्र है
23:02तो ऐसे भगवान स्री राम जो जनजन में व्यापत हैं, सब के हिर्दे में अपना इस्थान रखते हैं, धर्म के
23:08साक्षा तो स्वरूप हैं, सनातन के साक्षा तो स्वरूप हैं, ऐसे भगवान राम से और अधिक लोगों को जोड़ने के
23:15लिए, उनको और नजदी की कानुभ
23:18अब कराने के लिए सब लोगों का उसमें सहयोग लिया गया तो लोगों के अंदर
23:21मैं समझताओं की इतिहास में भगवान राम का जब पहला दर्शन लोगों ने किया
23:26हम चुकि उस तिनुः मौजूद थे तो हमारी सब के आँखों में आशू थे
23:30लोग रो रहे थे, क्यों रो रहे थे
23:33इसलिए रो रहे थे
23:35क्योंकि यह एतिहास एक शन
23:36हमने साइध धर्म जगत के पहली बार देखे थे
23:39जो कि हमें कहीं कहीं
23:40गर्व का एहसास करा रहे थे
23:42विजय का एहसास करा रहे थे
23:43परमात्मा राम के सामीप्य का एहसास करा रहे थे
23:46तो खुसी के आशू दिन निकल रहे थे
23:48इसके बाद अगर लोगों को
23:50हमने दुखी होते हुए देखा
23:52तो जब देखा को उसी राम मंदर में
23:54जब चोरी हुई
23:55तो चोरी राम मंदर में हुई
23:57इसलिए यह मुद्दा बना
23:58दूसरे सामान्य मंदर में चोरी होती तो यह मुद्दा नहीं बनता
24:01आपने कहा कि जोत्रलिंग इससे अचूते हैं क्या
24:04तो मैं तो यह कहूँगा कि जोत्रलिंगों को
24:06नहीं सभी मंदरों को चोरी से
24:21किम प्रमाणम कहा जाता है, बरतमान समय में पहले जो राम मंदर में दर्शन करने जाते थे, पांच दिन के
24:27अंदर वहाँ संक्षा 80% कम हो गई थी, क्यों भई, खाली पड़ा था, क्यों, भगवान तो वही हैं, क्या
24:34लोग नहीं जानते कि वही राम जी हैं ये, लेकिन फिर �
24:37लोगों ने जाना बंद किया, क्यों किया, क्यों कि लोगों का विश्वास, वहां की विवस्था से उठा, इस प्रकार का
24:42प्रकण जब सामने आया, तो लोगों के अंदर कहीं न कहीं असरद्धा पैदा हुई, किसके प्रती, माना कि वो जो
24:49गल्ती थी, वो कुछ लोगों की
24:58तो मैं तो कहूँगा कि लोगों को मंदर जाना चाहिए बगवान के प्रती जो सरद्धा पहले थी वही आज भी
25:05रहनी चाहिए और भविश्य में भी रहनी चाहिए और जिस प्रकार राम मंदर में ये दुरभा के पूर्ण गटना जो
25:12हुई है ये गटना किसी भी देश के प�
25:20वह इतनी निश्पक्षता के साथ, इतनी आदर्श व्यस्ता के साथ, मंदरों का संचालान करें, कि कम से कम सर्दालों की
25:28जो सर्दा है, निश्टा है, वह मंदरों के प्रती बनी रहे, और धर्म के प्रती बनी रहे, सायद तभी सनातन
25:34का उध्धार हो सकता है, तभी सनातन का कह
25:37दर्म का उत्दार हो सकता है रक्षा हो सकते खिलाफ कारभाई होनी चाहिए वो ट्रेस के लोग क्यों ना
25:44कोई भी हो कोई भी हो कोई भी हो एनी परसंट कोई भी विखती
25:55मेरा सवाल दरसल राममंद्र से
25:57जुड़ा इसले हुआ था क्योंकि हाल-फिलाल
25:59काफी चर्चा में रहा और सभी यह जानना
26:01चाते हैं धर्म गुरुऊं से और स्वामि aur
26:03से कि वो क्या रायर रखते हैं
26:05अगर कैसा कभी
26:07वो जिस मंद्र से जुड़े हो
26:09उसके साथ हो तो फिर किस तरह से कारवाई होनी जाए पंडित शेलेंद्र जी आपकी क्या राय है जो मैंने
26:17स्वामी जी से प्रशन पुशा वही प्रशन आपके लिए भी है
26:21मंदिरों को अब कभीलों में मद बाटिये
26:24मंदिरों को अब कभीलों में मद बाटिये
26:27यह सफर चंद मीलों में मद बाटिये
26:29सनातन सहस्कति और मंदिर
26:32हमारी जागीर है मित्रो
26:34इसे तालो और जहिलों में मद बाटिये
26:38पान सो वर्ष की कानूनी लड़ाई के बाद
26:43राम मंदिर हमारा विभव है, हमारी आस्था है, हमारी मर्यादा है
26:48भगवान राम के प्रती हमारा समर्पन है
26:52उनके करमों के प्रती हम सदेव नमन है
26:57रामचरित मानस में तुलसिदार जी ने राम की महिमा को जन जागरण के लिए गाया है
27:03और रामचरित मानस ने राम की भक्ती को बताया है
27:06कहा जाता है कि क्रश्ण का प्यारा है तो मथुरा की गली बन और राम का प्यारा है तो बजरंग
27:13बली बन
27:13जिन्होंने राम मंदिर में चोरी किया ये जो क्रत्य किया है इसकी सजा कानूनी रूप से भी मिलेगी और परमपिता
27:24परमेश्वर भी उनको सजा देगा जो परदे के पीछे हैं वो भी सामने आएंगे जो परदे के आगे हैं वो
27:31सामने आ चुके हैं
27:32इसलिए हमारी आस्थाओं तो कि कर्म हमारा कर्म हमारे जो कर्म हैं उसकी आस्था को कोई डिगा नहीं सकता राम
27:42मंदिर अयोद्या में जो सद्धालू है भक्तगण है आज भी उनका उफान वे सई है जैसा पेले था तो इसकी
27:51जो क्रत्य है ये बहुत गंगोर है और इसकी सज
27:56हमारे योगी बाबा वहाँ पर जरूर देंगे और दिलवाएंगे तो मैं चाहूंगा एक बार पूरा सदन बर्यादा पुर्षोतन भगवान श्री
28:04राम की
28:08ओम प्रकाश जी आप क्या राय रखते हैं और इस तरीके से मंदिरों में चोरी होना जो आस्था का गड़
28:16है उसमें लोगों की श्रद्धा कम होना ये दरसल एक अच्छा संदेश नहीं है किसी भी मंदिर के लिए
28:24इस समन में मैं इतना निवेदन जरूर खरूँ आप से कि जो इसके जवाबदार है जो आरोपी है वो अलग
28:34है और मंदिर का पुजारी से कोई लेने देना नहीं है उसमें पुजारी शामिल नहीं है जो शामिल है वो
28:42ट्रस्टी लोग हैं इसके अलावा पुजारी केवल मात
28:48पूजा करता है अंडर कस्टडी गोवर्मेंट है सारे मंदीर वहां गर्ब घर तक में पेटियां लगी हुई है और वो
28:55अपने विधान से अपने पूजा कराता है और ऐसी चोरियों के ये आम तोर पे जो चर्चाएं चल पड़ी है
29:00कि चंदा चोर चाहे चरौतरी चोर ये इस
29:24पूजारी हूँ कोई आया मुझसे पूछा किसी ने के पंडी जी अभिशेक करना है मैं अपना बताता हूं कर देंगे
29:36बराबर कर देंगे पंडी जी क्या लगे सामाने तोर में लोग पूछते हैं कि क्या लगेगा तो मैं उससे कभी
29:42बोलता नहीं दो रूपे का सिक्का है �
29:45वो दो करोड के बराबर है इसके अलावा अगर किसी ने बोल दिया के दो हजार लगें के पांच हजार
29:50लगें किसी ने बोल दिया तो कंडिशन दूसरी बंजाची उसको ज्यात नहीं रहती लोगों को कि ये ब्रह्म विद्या है
29:58गुरू के दोरा ज्यात हुई है फर्मात्म
30:14सिंदु पात्रे सुर्थर्वर्शाखा लेखने इपत्र मूर्वी लिखतियती ग्रहित्वाम सारदाम सर्वकालम ततुभी तकुनानाम इसपारब
30:22शारदा मया उसका मुल्य नहीं लिख पाएगी वो भगवान के उस नाम का अभिशेग के चाहे वो यह अभिशेग हो
30:29चाहे महीम नहीं नहीं नहीं राम मंदीर में चोरी
30:45का जो विशय है यह जिसे ही ओपन हुआ उससे थोड़ी आस्ताय तो हिली है आम जन्ता में लेकिन हमारा
30:59सनात्र धर्म इतना मजबूत है
31:01कि इतना मजबूत है कि इन छोटी मोटी चीजों से कोई अंतर नहीं पड़ता है
31:09जो कावड यात्रा के नाम पर इन दिनों डीजे बचते हैं और इतनी इनकी आलोचना होती है
31:15क्योंकि यहां उजेन में तो उससरा का महौल है लेकिन अगर आप अर्बन शेहरों में जाएंगे
31:20दिल्ली NCR की मैं खुद बात कर लेती हूँ वहां पर ट्राफिक की समस्या म्यूजिक साउंड की समस्या और जो
31:27कावड यात्रा के नाम पर हुरदंग होता है
31:30वह समस्या और फिर जब उसकी शिकायत की जाती है तो यह कहा जाता है कि इसे धर्म से जोड़
31:36दिया जा रहा है इसे विसी कावड यात्रा से दिक्कत है आपको किसी मौर्रम के जलूस से दिक्कत नहीं होती
31:43है
31:44अब क्या क्या कहेंगे आप भगवान महाकाल के जर्वार है तो कावडियों का एक दल है यह डीजे और इतने
31:52तेज आवास की क्या जरूरत है नहीं वह वाद आपकी सही है लेकि यह सब आस्ताओं का एक चिंड नहीं
32:00हो गया है थोड़ा सा पहले तो नहीं होता था ऐसा मु�
32:13हर चीज में दिखावा ज्यादा हो गया और हर चीज में को आस्ता हर चीज में दरसल मनुरंजन खोजने लगे
32:21हैं यह आस्ता का विशह है मनुरंजन का विशह नहीं है कि आप 15 दिन मनुरंजन करेंगे सडक पर जहां
32:29पर ट्राफिक प्रभावित हो रहा है अब आज के जबा
32:43यह हम भी इसका वह मतलब स्रयोग नहीं करते हैं ना सपोर्ट करते हैं लेकि यह होना नी चीह इसमें
32:51अपनी लगता है इन सब पर बैंड लगना चाहिए क्या किया जाये इसमें अब आज की आस्ताय जैसे चोरी हो
32:57गई है मंदिरों में चोरी हो गई तो वह एक विशाए उससे
33:01भी क्या है कि आम जंता की तो कोई भावना को ठेश तो लगी है लेकि इससे आस्ताय कम नी
33:07हुई है यह सत्य है भगवान के दरवार में क्योंकि मैं भी राम का पुजारी हूं और राम का भक्त
33:15हूं लेकिन उससे थोड़ा सा दिल जरूर दिखा है क्योंकि यह विश्ताओं क
33:20एक चक्कर है इसमें जो प्रबंदक है इन लोगों का है वो विवस्ता रहती है अब देश्पुरी जी से इस
33:26पर मैं राय लोंगी क्योंकि अब देश्पुरी जी हमने कभी ये स्वरूप नहीं देखा था कावड यातरा का मुझे याद
33:34है गंगा जल लेकर कंधे पर जो काव�
33:47देश दिये जाते इन सब व्यवस्ताओं की जरुवत क्यों है और क्या है क्योंकि ऐसा ना हो ला कि लोग
33:53सोचने लगे सावन आ गया हो अरे बापरे फिर से वही डर्ने लगते हैं लोग वास्तविकता यह दो शब्द हैं
34:01एक है दर्शन और दूसरा है प्रदर्शन तो जो �
34:06होता है वो शास्तर के अधार पर होता है संविधान के अधार पर होता है और आधर्शों के अधार पर
34:13होता है अधर्शन मतलो दर्शन अब आधर्शन जो है वो तो कहीं पीछे रहे गए दर्शन तो पीछे रहे गया
34:20प्रदर्शन बढ़ गया और प्रदर्शन इतना बढ़
34:36गया किसके कारण बोले डीजे के कारण उनात रहे थे बले वो साधीम बज रहा है कि कावड यात्रा में
34:42बज रहा है कि किसी जुलूफ में पर हां जितने निकले हैं ना कि किसी के पास काम धाम नहीं
34:50है अभी कई हद तक सत्य भी है हो सकता है अपन उसको फिर भी अपन नेगे�
35:05के भगत ही, वो जैसे भी हैं, और भोले के भगत तो ऐसे ही होते ही हैं, उनके लिए ज़्यादा
35:10नेगिटिव तो नहीं बोल सकते हैं, क्योंकि तो भोले के भगत हैं, वहां तो सब नंगे पुंगे भी होते हैं,
35:16किसी के सिर हैं, किसी के सिर ही नहीं है, किसी के आते ही नहीं है
35:19बोले की बरात थी, तो एह होती तो बोले की बरात है, उस में में चाय जैसे हो सकते हैं,
35:24अभी हम कल किसी मुल्ले का बियान सुन रहे थे, वो ऑन बता ओ, मैं इन सब को आतंक बादी
35:28तो आतंक बादी आँस तक देखे नहीं, यह बोले के बगद बिचार इस तक देखे यह बह�
35:49सरकार को लिखा भी था फिर दोबारा भी दो-तिन दिन पहले में कोई ऐसी ख़वर पढ़ रहा था आप
35:53लो कोई बड़ा इस पर अभ्यान क्यों नहीं चलाता है अभ्यान भी चला जा सकता है बास समझने की है
35:57गौर्मेंट ने निया इस पर बैन भी लगा बैन मतलब इसका जो
36:15प्रतेक ब्टी इसके खिलाफ होना भी चाहिए क्कि हमारे ब्चों को पढ़ने में समस्याती है बुजुरग बैचारे जो बीमार हे
36:21हाट के सेंट है कितने सारे वह नाजते हुए तो इसकी जो कान पोड़ू जो वाज है ये बिलकुल बंद
36:31होनी चाहिए मतलब कम होनी चाहि
36:44परमात्मा के प्रति लगाओ
36:45अब व्यक्ति एकांत में बैठ करके ध्यान नहीं कर सकता
36:48योग नहीं कर सकता
36:50सैयम भी नहीं कर सकता
36:51लेकिन कहीं कहीं से वो अपने आपको भक्त भी कहलाना चाहता है
36:55तो वो फिर इस प्रकार का आस्रे लेता है
36:57कहने का मतलव
36:58इंग्लिस का एकुटेसन है, something is better than nothing
37:00इसका अर्थ होता है, कि जब आप बहुत कुछ नहीं कर पा रहे हैं
37:03तो थोड़ा ही भला, तो ये भक्तक, हलाएंगे भगवारी के नाम पर करते हैं
37:07इसलिए एक शम्म हैं, लेकिन मैं एक बात जरूर कहूँगा
37:09कि अगर कोई फूरता की जाती है, भक्ती के नाम पर, कोई बहुत बड़ा
37:13इस प्रकार का अडंबर प्रदर्शिन किया जाता है, वो उचित नहीं है
37:16वोलिवड के गाने बचते हैं, हाँ बो बिल्कुल गलत है, बिल्कुल गलत है
37:20मैं देख रहा हूँ, कई लोग सुन्दर कांड के पाठ करते हैं, सुन्दर कांड का पाठ तो करेंगे
37:26लेकिन सुन्दर कांड में बीच बीच में फिल्मी गाने बजाने लगेंगे
37:30ये गलत है ये बिल्कुल गलत है जहां आपको फिल्मी गाने बजाने हुआँ जाओ कौनों को रहा है आपको थिंट्र
37:35में जाओ सुनो कितनी सुनने लेकिन जबब को इस फिल्मी गाने नहीं बजने
37:54पर होनी चाहिए हेलिकॉप्टर से उसकी भी काफी आलोचना होती है आप तो सुना हो जो होती पार पूसब वर्सा
37:59के आलोचना नहीं होनी चाहिए बहुत अब किसी सामप्रदायक दरिश्टी
38:23हेलिकॉप्टर है तो हम उसे फुस परसाएं इसमें मेरी नजरम कुछ गलत नहीं है यह तो अच्छी बात है अच्छी
38:29बात है परसंद आता है उसकी कारेक्रिम की एक भव्यता है वो और जिनके उपर फुस परसाए जाते हैं वो
38:34भी परसंद होते हैं जो बरसाते हैं वो भी प
38:53तो यहां की जोर्म्पळाद के दरवार के अंदर जो भक्त लोग आते हैं जो दान पीटी के अंदर दान देते
39:05हैं, वो अ Moment के निर्माण के लिए लगता है,
39:08तो मंदिर की जब मंदिर का सरकारी करण हो था,
39:1178 में उसके बाद महाकाले इस्वन मंदिर में जो दो पुजारी परिवार संप्रदाई हैं
39:17जनवी पाती और खुट पाती परिवार है
39:19महापर जो बाबा के सामने की जो पेटी लगी रेती है
39:23उसका 35% पुजारी परिवार को मिलता है
39:26यह प्रिववस्ता 78 से चली आ रही है
39:32जो अभी हमने खबरों में देखा उसमें सारी धानली काउंटिंग के समय पर हुई थी
39:38मंदिर की जो पेटिया लगी होई होती है जब पेटिया खुलती है
39:43तो उस समय मंदिर समीति के सदस्रेते हैं जो बेंक वाले वो रहते हैं
39:47मंदिर के पुजारी परिवार से एक वेक्तिमा पर मुझूद होता है
39:50बाकाइदा पूरी पार दस्रेता साथ में बहुत बड़ी सी जगा है
39:54जहां केमरे लगा रखे हैं पूरे के जो भी अंदर जाता है
39:57वो कोई भी सामान लेकर उसको अंदर अलाओड नहीं होता किसी प्रकार से
40:01वो विदिवत तरीके से उसकी पूरी गिंती की जाती है
40:04वो गिंती करने के बाद में जो हमारी मंदिर समीति के मात्यम से जो बेंक होते हैं
40:08वो बेंक तक ले जाने की विवस्ता हैं होती है पूरे पैसे को और पूरी पार दस्तिता के साथ में
40:14बाबा माकाल के दरबार के अंदर जो दान आता है
40:17उसका संग्रह किया जाता है और उसको विवस्तित तरीके से मंदिर के निर्मार कारे के अंदर लगाए जाता है
40:23मंदिर की बहुत सारे प्रकल पर चल रहा है जिसके अंदर ये मंदिर का दान लगता है
40:28मंदिर में जो दान दाता है वो जो दान देते हैं वो बाकाइदा डारेक्ट बेंक में भी जमा कर सकते
40:33हैं
40:33मंदिर काकॉंड में भी जमा कर सकते हैं और पुरा रोज देली का आडिक महा काले सवर मंदिर के अंतर
40:38किया जाता है ठीक पंडित रमन जी यह मैं आपसे इसलिए प्रशन कर रही हूं क्योंकि हमेशा से मेरे बन
40:46में जिग्यासा थी मैंने स्वेम बारा जोतिलिंगों के दर्श
41:02प्रेसा है अनकर कि चास्त्त्र क्या कि Amazon जो प्राषिन जत्र लिंग है जहां आप पहुंकि आई महारास्त में वह
41:11बारा जतिंगों में आता है ओप ये जो स्थाफित हुआ है कई लोग इसको मानते हैं लेकि जो और बहूब
41:21सम्मिलित
41:22जोतिलिंग कहकर कई लोग के दोनों कर लो देख हो जाता है ऐसा नहीं है जो ओरीजिनल जिसको कहते हैं
41:31हम शाष्वत वो यह 12 जोतिलिंग महाराष्ट वाला जोतिलिंग है
41:37शास्त्रों में महाकाल का किस तरीके से वर्णन है और इसकी स्थापना कब और कैसे हुई थी क्या कहानी है
41:48जोतिर लिंग का कही स्थापित नहीं हुआ है वो स्वयम्भु है
41:53स्वयम्भु है लेकिन उसके पीछे हाँ जोतिर लिंग के पीछे कथा है जब भी प्रत्थिव का निर्मान हुआ होगा हजारों
41:59साल पहले जब स्वयम्भु जोतिर लिंग आये हैं उनका कोई कहीं से किसी स्थापित किसी संकराचारी द्वारा नहीं हुआ है
42:08संकराचारी द्�
42:21गट होता है और महाकाल इश्वर भगवान जो वेद पुराणों में इसका वरडन है वो भगवान महाकाल का काल करना
42:31से वेदों का जो काल करना से इसका प्रादरुबा हुआ है काल काल जब से समय शुरू हुआ है तब
42:39से महाकाल है या महाकाल जब से जब से समय शुरू हुआ ह
42:43झौनों एक दूसरे के पूरख हैं और भगवान महाकल के दर्वार में जो कालकी ख़गड़ना हुई है वह आप ये
42:50मज्ज़बदेश्टinter अब दो व्रड़ है और यहां इसे उमद्धी रखा गई है
42:55यहां से करकर एखा गई है और यहां महाकाल इश्वर से काल की गड़ना का प्राधूर बाह हुआ है इसलिए
43:03इसको महाकाल कहा जाता है और इसका चार वेद अठारा पुराणों में और वंती का खंड में इसका विश्टत वर्णन
43:11आता है और बेगदूत में कालिदास ने बह�
43:19भगवान महाकाल का इसलिए यह हजारों साल से जीवी थे यहां कोई आज तक हमला दी हुआ किसी का ओ
43:27यह गुफा में विराजमान है महाकाल इश्वर भगवान गुफा में विराजमान होने से यहां
43:34पूरी ताक्ते अंदर नहीं पहुच पाई है वो शीवलिंग महीं विराजमान है जिसकी हमारे पूर्वज जो है वो इनको भस्मार्थी
43:43करके इसको एक बड़ा सा पत्थर होता था वो खिसका के वो इसको बंद कर देते थे भस्मार्थी की बार
43:50ओ जो रद्द कालेश्वर ह
43:53जिसको जूरा महाकाल का जाता है वहां आम लोग जाते थे और दर्शिन करते थे इसलिए सुरक्षित जोतिर लिंग है
43:59भवार महाकाल एश्वर का और ओरीजने जोतिर लिंग है इसी का वर्णन 14-18 पुराणों में आया हुआ है
44:06आप सभी का बहुत बहुत शुक्रिया हमाई साथ इस मंच पर आने के लिए तो एक बार जोड़ा तालिया हो
44:11जाए हमारे इन सभी विशिष्ट अतित्यों की जो धर्म संसर्थ में हमाई साथ सम्मिलित हुए और तमाम विश्यों पर उन्होंने
44:20अपनी राय रखी और खास औ
44:34बहुत बहुत शुक्रिया आप सभी का भी
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