00:00फोन की घंटे का इंतिजार करते करते बुड़ी आँखों के सपने हो गए बे नूर दोड़ती दुनिया में वक्त नहीं
00:08किसी के पास आज अपनों से ही हो गए हम कितने दूर
00:13नमसकार में हूँ शमस ताहर खान और आप देख रहे हैं वारतात तीन तीन बेटियों का बाप होने के बावजूद
00:21एक बज़र्ग बाप विद्धा आश्रम में रह रहा था तीनों बेटियां शादी शुदा हैं एक बेटी बैंक में नौकरी करती
00:29है एक बेटी टीचर है वि
00:42क्योंकि उनके पास वक्त था ही नहीं तो विडियो कॉल पर ही अंतिम संसकार की रस्म अदाएगी कर लिए जिसमें
00:50का घाओ हो गया बुढ़ा दर्द की एनके बदलता है
01:15अभी और कितना टाइम लगेगा हमें नहाना भी है चूला भी जलाना है खाना भी खाना है और भी बहुत
01:23सारे जरूरी काम है ये चिता की लकडियां जल्दी क्यों नहीं जल जाती
01:30पापा जल्दी राख क्यों नहीं बन जाते और कितना इंतिजार करो
01:36टाइम नहीं है हमारे पास
01:46जिन्दगी का सबसे बड़ा सच जो सच मुझ सचा है वो मौत
01:55पर मौत से पहले एक जिन्दगी भी होती है
01:58और वो जिन्दगी अपने साथ इतनी भाग दोड लेकर आती है
02:02कि किसी के पास उसी जिन्दगी के लिए वक्त ही नहीं होता
02:11अब जब जिसके पास जिन्दगी के लिए वक्त नहो तो वो भला मुर्दों के लिए अपना वक्त क्यों परबात करें
02:20जस बेटी को कभी उसने बहुत बहला फुसलाकर अपने हाथों से रोटियां खिलाई थी
02:26आज उसी बेटी के पास अपने उसी पापा के लिए शंशान तक आना यागनी देना तो दूर
02:33दूर बैट कर मोबाइल पर विडियो कॉल के जरी चिता की आग को बुझने तक भी देखने का टाइम नहीं
03:06मेरे दिल के किसी कोने में एक मासूम सा बच्चा बड़ों की देख कर दुनिया बड़ा होने से टरता है
03:24आज समझ में नहीं आ रहा कि इस वारदात के शो में आपको यह क्यों दिखा रहा हूं जो काइदे
03:31से कोई वारदात ही नहीं
03:34एक बजर्ग की मौत ही तो हुई है तीन बेटियों का एक बाप ही तो मरा है उसे किसी ने
03:41मारा भी नहीं
03:42बताने वाले बता रहे हैं कि मौत बीमारी से हुई
03:46लेकिन कहने वाले कह रहे हैं कि तीन बेटियों की भरी पूरी दुनिया आसपास होने के बावजूद तनहाई और अकेले
03:55पन इसकी जान ले लिए
03:59किसी थाने में इस बुजर्ग की मौत का कोई मुकदमा दर्च नहीं है
04:03लेकिन फिर भी इस बुजर्ग की मौत हर किसी को जग छोड रही है
04:08जो भी इस तस्वीर को देख रहा है
04:10जो भी इस वीडियो में इस बेटी की बात सुन रहा है
04:13वही हैरत में है
04:16हैरत इस बात पर कि क्या सच मुझ अब हम सब के पास इतना भी टाइम नहीं है
04:22कि हम मरते हुए मरने जा रहे
04:25या मर चुके अपने माबाप को देखना तो छोड़िए
04:28उनके लिए शम्शान या कब्रिस्तान तक नहीं जा सकते
04:32अब माबाप का अंतिम संसकार भी वीडियो कॉंफेंसिंग या वीडियो कॉल पर ही देखना पड़ेगा
04:40छोड़िये भी जिन बच्चों के पास अपने माबाप के अंतिम संसकार में शामिल होने का भी वक्त नहीं
04:47वो चिता ठंडी होने के बाद उसी शम्शान में जाकर अस्थियां चुनने का वक्त कहां से निकाल पाएंगे
04:54अस्थियां चुन भी लिए तो कौन उन्हें कलश में भर कर हरीदवार छोड़िये आजपास की किसी नदी में प्रवाहित करने
05:03की तकलीफ उठाएगा
05:04सुनिये ना इस बेटी के पास सच मुझ टाइम नहीं है
05:20अभी तक टुकड़ों में मैंने आपको इस बेटी की आवाज सुनाई
05:24दिल के टुकड़े कर देने वाली इस कहानी की
05:27पहले आप बिना टुकड़ों में एक साथ अब पूरी बात चीत सुनिये
05:54अभी तो संस्कार हुआ है
06:02अभी और किसा नहीं की गटुकड़ों पिके थाएंगे और ना आएंगे जुदा जिलाएंगे
06:08अभी तो संस्की एना के इसाथ और ने जैदी
06:14कि जुचफे झाले देटे।
06:29जुचफे लाएंगे जुचफे
06:31कि लाएंगे लाएंगे अप्रेटाटाओ
06:43दिल्ली की लगभग चौकट पर मौजूद ये सोनी पत का एक शम्शान है
06:48और ये है 74 साल के बुजर्ग शिफचरन रामरत्न गुपता
06:54हाला कि 74 के उम्र इतनी ज्यादा बुजर्गियत की भी नहीं होती
06:58लेकिन उलाद चाहे तोम्र से पहले माबाप को बुढ़ा बना सकती है
07:03और अगर वही माबाप को उनके बच्चे अपने घरोंदों से निकाल कर किसी वृद्धा आश्रम में फेंग दे
07:10तो इनसान सिर्फ बुढ़ा नहीं होता मर जाता है यही रामरतन के साथ हुआ
07:17एक दोर था जब रामरतन का हस्ता खेलता परिवार था
07:22मुंबई में शानदार घर और कपड़ों का काम्याब बिसनेस
07:27करोड़ों पती हुआ करते थे रामरतन तीन पेटियां थी
07:31तीनों को मुंबई के अच्छे स्कूलों में पढ़ाया
07:34कॉलिज भेजा तीनों को काम्याब बेटी बनाया
07:37फिर बड़ी धूमधाम से तीनों की शादियां की
07:41तीन में से दो इस वक्त टीचर भी है
07:43तीनों का अपना भरा पूरा परिवार है
07:46परचाना किस्वत ने ऐसा पल्टा खाया
07:49कि राम रतन का कारोबार परबाद हो गया
07:52सब कुछ डूब गया
07:54फिर भी किसी तरह मुम्बे में गुजर बसर चलती रही
07:57लेकिन जिन्दगी जब गर्दिश में आई
08:00तब राम रतन को पहली बार एहसास हुआ
08:03कि दौलत के जाते हैं उनकी अपनी बेटियां भी बदल चुकी
08:06अपनी ही बेटी का घर उन्हें खाने लगा
08:09बाकी की दो बेटियों में से एक
08:12यूपी के आजमकड़ और दूसरी नेपाल में रहती थी
08:16बेटियों की बेरुखी शाहिद राम रतन बरदाश्ट नहीं कर पा है
08:20इसलिए तीन साल पहले अपनी पत्नी को साथ लिए दिल्ली पहुँच गए
08:51दिल्ली में रहने के दौरान ही राम रतन को पहली बार
08:54सोनी पत्न में मौझूद एक व्रिधा अश्रम के बारे में पता चला
08:58दोनों पती पत्नी दिल्ली से सोनी पत्न इसी व्रिधा अश्रम में पहुचे
09:03तीन शहर में तीन बेटिया थी और माबाप अब एक व्रिधा अश्रम को अपना घर बनाने जा रहे थे
09:10विद्धा श्रम में आने के दो साल बाद शायद राम रतन की पत्नी से अपने पती का दुख देखा नहीं
09:18गया
09:18एक साल पहले उनकी मौत हो गए दोहजार पंचिस में
09:24मोबाईल, विडियो कॉल और विडियो कॉंफरेंस से तब भी सब कुछ मौजूद था
09:29तब भी तीनों बेटियों सोनी पत्स सिर्फ हजार पंद्रह सो किलोमीटर की दूरी पर मुंबई आजमकर और काठमांडू में मौजूद
09:38थी
09:38लेकिन पिता से पहले माँ की मौत पर भी तीनों बेटियों के पास इतना भी टाइम नहीं था
09:45कि अपनी माँ को आखरी विदाई देने या अंतिम संसकार के लिए वो सोनी पत्न आपा दी
09:51पर बदनसीब रामरतन की पत्नी खुशनसीब थी क्योंकि कम से कम उनकी चिता को उनके अपने सुहाग ने शमशान जाकर
10:00अगनी तो दी
10:01बेटियों की तरह विडियो कॉल कर अंतिम संसकार की रस्म देखने की रस्मे अदाईगी तो नहीं की
10:10माराश्टर के कपड़ा वापारी सीवचरन अपनी पत्नी के साथ सबसे पहले सोनीपत के इस अपना गराशरम में पहुँचे थे
10:18मत तस्वीरे दिखाओंवा देखिए यह उसकी पत्नी मीना है और यह सीवचरन है यह अपना गराशरम है सोनीपत के सेक्टर
10:26साहत में श्तीत है हमारे साथ जो इसकी संचाला के सारी का काल रहा हमारे साथ ही समय मोझूद है
10:32मैंडम यह शीवचरन जो कपड़ वैपारी थे अपनी पत्नी के साथ कब आपके पास पहुचे थे हमारे पास तो शीवचरन
10:40जी चार मार्च दोजार चोबिस में पहले ही आय थे उसके बाद मैं में उनकी पत्नी हमारे पास आई थी
10:46यह कहा उनोंने क्या बताया आपको कां�
10:51करते हैं कुछ बताया पर जब पहुचे तो यह बताया था कि कपड़े में उनके कोई रिलेटिवस पैले रहते थे
10:57और बंबे में उनका कपड़े का कोई बिजनिस था जिसमें वो काफी लॉस और गया था उनको इस वज़े से
11:03वो यहां पर अपने रिश शितिदार के बास �
11:05कपड़े में उसके बाद बताया कि बच्चे हैं क्या करते हैं उने यह बताया था तीन बेटिया है एक बेटी
11:12उनकी नेपाल में रहती है एक सूरत में रहती है और एक यूप में कहीं रहती है इसके बारे में
11:17उनको जानकारी थी उसके बारे में को जानकारी थी उसके बताय
11:41वो अपस्कार करना है जब उनकी मम्मी यह पर आय ती तब हुआ थी तो जल कि दोप्सकार करना है
12:03जानने की कोशिच की थी क्या हुआ था तब हमें ये पता चला था कि उनके कुछ फैमिली मैटर्स की
12:08वज़े से वो ट्रॉमा में है और जब उनके ममी जादा बेमार हो गए थी तब उनकी बेटियों को इन्फॉम
12:13कर दिया था था अंकल कुद इन्फॉम कर रहे थे उनको बेट
12:33मैं अंकल और मारे स्टाफ ने मिलके जाके हरीदवार करके आए थे उन्होंने इतना ही बताया कि मैं बहुत अच्छा
12:41कपड़ा वैपारी था किसी कारण वर्श मुझे लॉस हो गया था लॉस कारण भी उनकी बेटियों का ही था जो
12:48अब मैं नहीं बता सकती क्योंकि हो सकता ह
12:51वो इन्होंने जब इतने साल किसी को डिस्क्लोज नहीं किया तो हम भी नहीं करना चाहते हैं
12:59तीनों बेटियों की बेरुखी तो रामरतन फिर भी सह गया लेकिन जिन्दगी के सुखदुख में हमेशा साथ देने वाली पत्नी
13:07की मौत में उन्हें तोड़कर रख दिया
13:09जिस वृद्धा आश्रम में वो अपनी पत्नी के साथ रहा करते थे
13:13वहां की हर चीज उन्हें अपनी पत्नी की याद दिला दी
13:17इसलिए डेड़ साल पहले वो वृद्धा आश्रम ही छोड़ दिया
13:21इसके बाद वो सोनी पत्क के ही इस आश्रम में पहुँच गए
13:24पत्नी के जाने के बाद रामरतन की जिन्दगी में अब सिर्फ तीन बेटियां थे
13:30लेकिन शायद तीनों बेटियों की जिन्दगी में रामरतन नहीं थे
13:34हाँ फोन पर कभी कभार बात्चीज जरूर हो जाती
13:38पत्नी के गुजरने के बार द्रामरतन बीमार रहने लगे
13:42करीब 20 दिन पहले भी उनकी तबियत खराब हुई
13:46वरदा अश्रम के संचालक ने उनकी एक बेटी को फोन किया
13:50बेटी ने कहा आते हैं पर कभी आई नहीं
13:55इसकी तबियत करीब 20-25 दिन पहले एक बार खराब हुई थी तो मैं फिर इसको होस्पिटल में लेके गया
14:00उसी टेम में ने दोनों बीटियों को फॉन किया पर इनकी तबी तोड़ी डिली हो रही है आप मिर राचा
14:05हो तो आ सकते हो उन्हें ने का तो ठीक हम आते हैं आते हैं �
14:38इसे हफते राम रतन की तबियत खराब हुई
14:41पेट में तेज दर्द था फिर बेटियों को खबर की गई
14:45लेकिन हमेशा की तरह तीनों बेटियों के पास टाइम ही नहीं था
14:49इधर मंगलवार को रामरतन के जिन्दगी का आखरी टाइम भी खत्म हो गया
14:55तीनों बेटियों के रहते हुए एक विरधा अश्रम में उन्होंने आखरी सांस ली
15:00विरधा अश्रम के संचालकों को लगा अब तो बेटियां अपने मुर्दा बाप के लिए कुछ टाइम तो निकाल लेगी
15:07यही सोचकर रामरतन की बेटी को फोन किया पिता के मरने की खबर दे पर इस बार भी विरधा अश्रम
15:15के संचालक खलब निकले
15:16क्योंकि बाप की मौत की खबर सुनने के बाद भी बेटियां टाइम निकालने को तयार नहीं थे
15:24आने को तर जादा जादा चोवी सगंटे में महाराष्टर तक इतना टेम लगा गा कम से कम आले चोवी सगंटे
15:31माजया आजया आदमी लेकिन उन्हों आने की इचान निकी तो ते रात को शवा तीन साड़ी तीन गजे करीब डैत
15:37वहींगी उसी टेम में ने दोनों बेटियो
15:41तो उन्होंने फिर भी ये का कि दूर इतनी है कि हम तुआ ने पाएंगे आप इनका अंतिम संस्कार करा
15:48दो मैंने का बेटा इन उन्होंने शरीड़ डान के बारे में बोले आप भी शरीड़ डान करा जाए तो उन्होंने
15:54का कि शरीड़ डान तो ना करना आप इसकी खाली आ
16:10कि पूरे अंगदान की बजाए सिर्फ आँखें दान कर देना
16:14और वही हुआ रामरतन की मौत के बाद अम उनकी आँखें किसी और की आँखों की रोशनी बन चुकी
16:21बहुत मुम्किन है कि रामरतन ने खास तोर पर अपनी आँखें इसलिए भी दान की
16:26ताकि वो फिर कभी उस दुनिया को देखना ही नहीं चाहते थे
16:31जिन में उनकी वो बेटियां भी हैं जिनके पास अपने बज़र्ग बाप के लिए टाइम ही नहीं
16:37हाँ बेटियों ने बेटी होने का कुछ फर्स तो निभाया
16:41कहा मेरे पिता का अंतिम संसकार लावारिस की तरह नहीं होना चाहिए
16:46लकडियां घी बाकी सारी चीज़ें वैसी ही होनी चाहिए
16:51पैसे की फिक्र मत करना टाइम नहीं है तो क्या पैसे तो है
16:5551 सो रुपे भेज रही हो अंतिम संसकार के लिए काफी होगा
17:00फिर थोड़ा और दिल पसी जा
17:02तो बेटियों ने कहा टाइम नहीं है
17:05शमशान नहीं जा सकते
17:06तो क्या हो
17:07वीडियो कॉल पर सब कुछ लाइफ देख लोगी
17:10वीडियो कॉल पर ही शोग भी बना लोगी
17:13फिर बेटी ने एक खास हिदायत भी दी
17:15कि सब कुछ शमशान में रिकॉर्ड करना
17:18वीडियो भेजना
17:19कम से कम बाकियों को तो दिखा सके
17:45पर मुल्टे करके हमने उसका
17:47हमतिम संस्कार कर दिया
17:49वो बेटिया ही थी
17:50जिनके कहने पर रामरतन की अर्थी
17:53जब शमशान पहुंची
17:54तभी से मोबाइल आन हो गया
17:56सब कुछ रिकॉर्ड हो रहा था
17:58उन बेटियों के लिए
18:00जो सरफ हजार से पंदरह सो किलोमीटर की दूरी पर थी
18:03ट्रेन प्लेन छोड़ी
18:05सणक से भी आती
18:07तो चौबीस घंटे से कम वक्त महीं पहुंच जाती
18:10पर टाइम नहीं था ना
18:12एक्क्यावन सो रुपे के बदले
18:14पेटियों ने जो गुजारिश की थी
18:16उसे वृद्धा आश्रम के संचालक
18:18में इस तरह पूरा किया
18:19मॉबाइल पर विडियो कॉल किया
18:22और बाप के चिदा की
18:24लाइफ कॉमेंटरी
19:00मॉबाप बच्चे के दिये इतनी कुर्बानिया देता हर पालता पोस्ता है
19:04और जबांत समय मों दुनिया चोड़का जाता है उसके लिए टेमनी
19:07हंतिम संचार हुआ वीडियो कॉल पे आपने बेटिशे बात की थी
19:11क्या उन्होंने कहा था आपको वीडियो कॉल पे क्या क्या बाते हुई देखिए वीडियो कॉल पर बात करवाए गई थी
19:18हालाकि सामाजी संस्ताव का दाइत्तों बनता है वही उनको बताने तक है कि आप अपने पिता को जो अन्तेस्टी किरिया
19:25में सामिल हो
19:26परन्तु मेरे लिए यह पहला ही मामला था कि हमें किसी के परिवार्जन की अंतेस्टी किरिया में सामिल होना है
19:34और उसके परिवार को खासकर बेटियों को वीडियो को पर बात करवानी है मेरे लिए एक तो बतलब
19:41सरदांजली का मानता हूं मैं वही आँखों मैसू थे पर गुस्वा भी था उन बेटियों के नाम का जिनोंने अपने
19:48माबाप के साथ रह करके अपना जीवन जो है बड़ा किया पूरी अपने लाइफ जी रे थे और अंत समय
19:54में पता उने के बाद भी बताने के बाद भी व
20:10वो अस्थियां विसरजित करने के लिए इतना वक्त कहां से लाएगी हालांकि वृद्धा अश्रम के संचालकों ने ये तक का
20:18कि अगर उने आने में कुछ वक्त लगे तो कुछ दिनों के लिए वो उनके पिता की लाश सुरक्षित अस्पताल
20:25में फ्रिजर में रखवा सकते
20:31प्रिज में रखवा सकते हैं तो पहले तो उन्हें कहा कि इसकी जो अस्थिया हैं उठागे रखदेना हम ले जाएंगे
20:49फिर में ने गाविट अठी गए इसकी परस्कों अस्थिया उठेगी और रखदेंगे उनको हम 15-20 दिन से ज्यादा ने
20:55रख सकते हैं
20:57तो बोले कि अंकल यह पूंप भी नहीं रहे तो अस्थियों को आप भी शिर्जित कर देना
21:11कि आपको जो है जो अस्थिया हैं विसरजन करवाने के लिए आना पड़ेगा तो उन्हें बोला कब
21:16तक हमने बोला कभी 20 तारीक तक आजे क्योंकि हमारे यहां पर प्राय किसा तर्वी या तेर्वी से पहले ही
21:22जो है अस्थी विसरजन हो
21:24करने चीए जिनका परिवार है तो हमने उनको 20 तारीकाल टीमेटम या टाइमस दिया तो उन्हें बोला ठीक है देखते
21:30हैं यह सुनकर के मेरे को मानवता को सरमसार करने वारी जो बात है अंदर से फिलिंग आई और ऐसी
21:36फिलिंग आई कि मन कचोच उचता है
21:42हमारा देश युवाओं का देश कहलाता है इस वक्त पूरी दुनिया में सबसे ज्यादा युवा हमारे ही देश में हैं
21:50लेकिन इन युवाओं के भी चिसी देश में 13 करोड के करीब बुजर्ग भी रहते हैं और इनी 13 करोड
21:57बुजर्गों में से एक लाक से ज्यादा ऐसे �
22:01जो विरिधा अश्रम में रह रहे हैं
22:03इन में से भी एक बड़ी तादाद उन बुजर्ग माबाप की है
22:07जिने उनके अपने ही बच्चों ने घर से निगाल दिया
22:12अगर ये ना होते ये अनसान भी पुस्मों की तरी है
22:15जैसे लिए गाएं तुपपादों पा गोमती है और ये नफ तभी नहीं आऴ अघ
22:24तो मेरे अभरे उपर अठा दिये दो बार एक बार्त पहले करा था तो मैं आपकर दिया
22:42फिर उनुन ना दो बारा अप्नी बिर्वाणियों के साथ मिलके ऐटा ता अथ उटा दिया तो मेरे से भरदास नी
22:48व Missouri को सारे सिंबद आज दी तो
22:52मेरे से दो भूव नहीं से मलें थी
22:55तो फिर भी उनों नहीं गलत काम किया
22:57तो मैं वहां से निकल ली माँ चार दिन बैठी रही फिर भी बूखी ती साई
23:00कभी बच्चे नहीं आते आपके पास
23:03मताजी क्या नाम है आपका
23:04माइनेमे जनीलम
23:06माइनेमे जनीलम
23:07कहा कि रहने वाली हुआ हूँ
23:08मैं जब मुक्शमीर की हूँ
23:10यहां कैसे पहुचे सोनी पर
23:11जहां पे नरेला में आया है हम
23:14नरेला बहुते जगड़ा हो गया थोड़ा
23:17जहीं मेरे पती हैं
23:18जहीं बीमार हैं
23:19जहीं लिए लिए आठ नु साल होगी
23:35जब गाता हैं
23:36जाते नहीं आप?
23:37जाएंगे कल
23:38जाओं जाओंगे
23:39हम बुभू से मिए जगड़ा जी हो
23:41किते ने दिन्से यहार रह रहे होगी
23:42एक साल, बू मीन्ने होगी
23:43नहीं बीच में कभी भच्चे नहीं आई
23:45मिलने लिह पूलाने
23:47बोलेड का अथ आया कभी कभी।
23:48बेटे दोर जाएंगी।
23:50जिसके अजगडा कुछ था।
23:51बाइगी।
23:52जी दना उमर आउड़ जी पांसगार दी थे मेरे पिछा एंगा
24:20असल में जिन्दगी की रफ्तार इतनी तेज हो गई है
24:23और तरक्की की भूक इतनी स्यादा कि लोगों के पास अपने माबाप के लिए ताइम ही नहीं है
24:30इस जिन्दगी की आपा धापी में वो इतने दूर निकल चुके हैं
24:34कि घर में तनहा बुजर्ग माबाप का सूना पन उन्हें नजर ही नहीं आता
24:39कोठियों तक में रहने वाले ऐसे बुजर्ग माबाप को घर की खाली दरो दिवा हर रोज खोकली करती जा रही
24:48है
24:50शाम धलते ही सिहर जाता है ये बुढ़ा पतन कोई साया भी यहाँ पास नहीं आता है
24:59देखे हमने सेक्टर हमें को ठी पन से अजार अजार को ठी में बुढ़ा बुढ़ी एक लिए माई उस बैठे
25:05रहे हैं
25:05और वो पूरे संपन है ये नहीं कि भी चलो मुझबूरी के लिए हमने हो जिब जी उनके लिए पैसा
25:11जरूरी है ये नहीं कहते है पैसा ने कमाओ लेकिन आखर में जुरूत कितनी इक है इंसान की
25:16वैसे चलते चलते ना सिर्फ राम रतन की बेटियों बलकि उन तमाम बेटे बेटियों से कहना चाहूँगा
25:23कभी टाइम मिले तो अपने माबाप के चेहरों की तरफ देख लेना तब आपको पता चलेगा कि आपका भविश्य बनाते
25:32बनाते वो खुद कितना टूट जाते हैं
25:35एक माबाप अपने कई बच्चों को एक साथ पाल लेते हैं
25:39लेकिन कई बच्चे मिलकर भी एक माबाप को नहीं बाल पाती है
25:45वाकर कितना मुश्किल है माबाप होना
25:49पवन राठी सोनी पत्र आज तक
25:55बुढ़ापा उन पे भी आखिर कभी तो आएगा
25:59जवान होती हुई पीड़ियां ये क्या चाने तो इसके साथ ही आज की वारदात के खास पेशकर्श में इतना ही
26:07देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तर
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