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भरतपुर के गोलमोल महादेव मंदिर के इतिहास और धार्मिक मान्यता के बारे में जानिए...श्यामवीर सिंह की रिपोर्ट..

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00:08भरतपुर का एक ऐसा मंदिर जहां सिर जुकाय बिना शेहर का सबसे बड़ा उत्सव शुरू नहीं होता एक ऐसी आस्था
00:16जो पिछले 128 सालों से लगातार चली आ रही है यह भरतपुर का एतिहासिक गोलमोल महादेव का मंदिर जहां 128
00:25साल पुरानी आस्था आज भी पूरी श
00:27श्रद्धा के साथ निभाई जा रही है मानेता है कि जस्वंत प्रदर्शनी एवं राष्ट्रिय पशु मेले की शुरुवात बाबा गोलमोल
00:35के आशिर्वाद से हुई थी यही वजह है कि आज भी मेले का उद्घाटन करने से पहले प्रशासनी क अधिकारी
00:42मेला मजिस्ट्
00:43और पशुपालन विभाग के अधिकारी मंदिर में पूजा अर्चना करते हैं दूर दूर से आने वाले व्यापारी भी अपनी दुकान
00:50सजाने से पहले गोलमोल महादेव के दर्बार में माथा टेक कर व्यापार में बरकत की कामना करते हैं
00:58यह एक बाबा गोलमोल नाम से शंत हुए थे शन्यासी संप्रताय से वो द्नागा थे उन्होंने यह तपष्या करीब स्यासत
01:07काली में तो राजाओं के टाइम में महाराजा जस्वन सिंग यह और उन्होंने महाराज से कही कि आप अंदर किले
01:16में चलो माप पूजा अर्चना
01:18और बजन द्यान करना उन्होंने यह कहा था कि वाई हम दो यहां रहेंगी जंगल में तो यह जिनी जिनावरों
01:25का खत्रा था पर वो उनको नहीं हुआ और राजा से यह कहा था कि राजा जी यहां एक दिन
01:34कंचन बढ़सेगा मीना बजार लगेगा तो यह वावा गोलमोल न
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01:46He has been told that Baba Goulmol was 1898 in the 19th century.
01:56He was the leader of Baba Master Ram.
01:59He was the leader of Baba's mind.
02:02He was the leader of Baba's mind.
02:04He was the leader of Baba's mind.
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02:22जिसकी प्रान प्रतिष्था सन्यासी परंपरा के अनुसार बाबा मस्तराम ने कराई थी।
02:56This is where the market is located, when there is a house in a house, the king has a house
03:05in a house, and the king has a house in a house, and the king has a house in a
03:10house.
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03:37अब जैपूर दिल्ली सहित देश के विभिन्न शहरों और विदेशों में बस चुके हैं इसके बावजूद वे समय समय पर
03:44मंदिर पहुंच कर अभिशेक और पूजा अर्चना करते हैं कुछ परिवार हर साल अपनी पारिवारिक परंपरा के तहत यहां दर्शन
03:51करने आते हैं
03:53भरतपूर से ETV भारत के लिए श्यामविर सिंग की रिपोर्ट
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