00:00सवाल ये खड़ा होता है कि कॉंग्रेस की राजनिती अफसरवादी राजनिती है?
00:06क्या झारखंड के इवाउन के लिए कोई महत्व नहीं रखते?
00:21क्या जारकन के इवाउं के वाज उठाएंगे ने उठाएंगे क्या कॉंग्रेस पार्टी के मुह में दहीं जम गया है जब
00:29जारकन के इवाउं की बात आती है जब पंजाब के इवाउं की बात आती है सवाल यह खड़ा होता है
00:35कि अगर राज्यस्तान में जब कॉंग्रेस की स
00:50देश में कॉंग्रेस की सरकार थी, तब भी राहुल गांदी कभी युवाओं के लिए खड़े नहीं हुए, केवल राजनिती करने
00:58के लिए कुछ युवाओं को पकड़ करे उनके कंदे पर कॉंग्रेस बंदूग चलाना चाती है, अपनी राजनितिक रोटिया सेकना चाती
01:05है
01:06सवाल ये खड़ा होता है कि ये सिलेक्टिव राजनिती क्यों, अफसरवादी राजनिती क्यों और जूट की दुकान अब राहुल गांदी
01:15और कॉंग्रेस पार्टी बन चुकी है
01:36पार्लेमेंट का तीसरा हफता चल रहा है, और तीसरे हफते तक इतने दिनों में तीन बार भी राहुल गांदी संसद
01:44में नहीं देखे गए
01:44वो लोगसभा आते ही नहीं, जब इतनी सीरियस डिबेट चल रही थी पेपर लीक मामले पे, एक बहुत शेशक्त कानून
01:55नरेंदर मोदी जी की सरकार लेकर आई, तो बारा घंटे की चर्चा में बारा शब्द भी कॉंग्रेस पार्टी की और
02:02से उस बिल पर नहीं बोले के �
02:04जो देश के इवाओं के लिए था, भविश्य में पेपर लीक ना हो, उसके लिए कठोर सजा बनाने के लिए
02:10था, जिस पार्टी ने साठ साल सत्ता में राज किया हो, उसके पास कोई व्यक्ति बोलने के लिए नहीं था,
02:16जो इस मामले पे गंभीरता से बोल पाए, ये कॉं�
02:21अखलापन देखता है, इनकी नाकारात्मक राजनीती दिखती है, संसत को चलने नहीं देते, मुद्दों पर विचार नहीं होने देते, महत्पुन
02:30बिलों पे चर्चा नहीं करते, केवल वाक आउट करते हैं, वेल पे नारे लगाते हैं, अगर कॉंग्रिस को नारे ही
02:37लगा
02:37आने तो बाहर जाके नारे लगाए, बाकी सांचदों का महत्पुन समय क्यों कहीं पे सूखा है, कहीं पे बाढ़ है,
02:44कहीं पे लोगों की अलगलग चिंता हैं, स्वास्त शिक्षा से लेके अन्य मुद्दों को लोग उठाना चाते हैं, जनता से
02:50जुड़ों गंभीर मुद्
03:06करना चाते, क्या संसद के सदन का उप्योग लोग हित्मे नहीं करना चाते, क्या वो केवल रोज की जो उनको
03:15डिये मिलता है, वो जेब में डालते हैं, लेकिन सदन को नहीं चलने देते, ये विपक्षी दल जितने हैं, इनके
03:21सांचदों के भत्ते भी कटने चाहिए, क्योंक
03:41झाल झाल
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