00:00अभी शहरों के लिए सबसे बड़ी समश्या माने जाने वाला कच्रा अब कमाय और संक्साधन का जरिया बन रहा है।
00:06राचिन अगरनेगं भी इसी सोच के साथ ठोस कच्रा प्रबंधन के दिसा में MRF यानी Material Recovery Facility Center को
00:13विक्सित कर रहा है।
00:14इन केंद्रों में कच्रे को बेगानिक तरीके से अलग-अलग सेणियों में बाट कर रिसाइक्लिंग के जिलिए तयार किया जाता
00:20है।
00:21उद्देश्य है कि डंपिंग ग्राउंड तक जाने वाले कच्रे की मात्रा कम हो और कच्रे से आर्थिक लाब भी हासिल
00:27किया जा सके।
01:07राची सहर से प्रतिदीन लगभग 600 से 600 तन कच्रा निकलता है।
01:12इसमें करीब 300 तन सुखा कच्रा होता है जिसे MRF सेंटरों में भेज कर प्लास्टीक, कागज, धातु, कांच और अन्य
01:19उप्योगी सामगरी अलग की जाती है।
01:21नगन डिगम की योजनास शहर में कुल 12 MRF सेंटर स्थापित करने की है।
01:26इनमें हर्मू, मधुकम, कर्बला चौक और वेज़िटेबल मार्केट, जेल रोड के पास समेत कई केंदर स्चाहर में संचाली थैं।
01:33इनमें सबसे पहले घरों और बाजारों से आए सुखे कच्ड़े के छटाए की जाती है।
01:37मसीनों और कर्मचारियों के मदद से प्लास्टिक, कागज, गत्ता, लोहा, एल्मूनियम और काच को अलग किया जाता है।
01:43इसके बाद रिसाइकलिंग योग्य सामगरी को उद्योगों तक भेजा जाता है।
02:18इस बाद रिसाइकलिंग प्लास्टिक हो गया, यह जतना भी रिसाइकलिंग और फिर छटा जाता है।
02:41वो तो प्रोसेस जीरी का प्रोसेस जाता है।
02:44यहां तो जिसे गाड़ी गीरा वो प्रोसेस स्टाट होता है।
02:47अब देख पार हैं कि पुछे ट्रैक्कर वजन लगरा हो रहा है, वो क्या प्रोसेस है।
02:51I have to collect a weight that I would not want to get rid of it.
02:58This is a one that I can collect?
02:59Per day is 50 tons of segregation capacity.
03:04Per day is a one that can be a one that can be used in the MTS.
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03:48ETV Bharat, Rachi
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