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  • 2 days ago
कोसी की बाढ़ को फणीश्वर नाथ रेणु ने आपदा नहीं, बल्कि बिहार के लोकजीवन-जिजीविषा और संघर्ष-संस्कृति का जीवंत दस्तावेज में बदल दिया. रिपोर्ट- बृजम पांडेय

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00:30जैसे जैसे कोसी गाउं की चौकट की ओर चड़ती जाती है
00:34फणिश्वर नात रेणू की लिखी गई रचनाए फिर जीवन थो उड़ती है
00:38क्योंकि उन्होंने वही लिखा जो अपनी सम्विदन शील नजरों से देखा
00:42उनका प्रपोर हर्थेत में जहां ढ़ी है
00:49लोग संपल नहीं हुए हैं उससे ग्रसित में हैं रवे हैं उनका कस्ट धिले हैं
01:02ये सब है और इस इजी अलेक कस्टों से लिखने हुए जबाल ला जलने पर लोगー को अलेक कस्टों से
01:11मुखाती होना परता था तो लोग उन्हे डाहिल भी कहती हुए
01:18रिणू ने कोसी को सिर्फ नदी नहीं माना, कभी उसे मैया कहा तो कभी डायन।
01:23ये विरोधा भास नहीं, बलकि समाज की पीड़ा है जो हर साल बाड से उजड़ता है और फिर उसी मिट्टी
01:30पर नई जिंदगी बसाता है।
01:32उनकी प्रसिद्ध रिपोर्टाज कोसी, पुरानी कहानी नया पाठ, रिणजल धंजल के साथ उपन्यास परती परिकथा और मैला आचल आज भी
01:42बाड की सबसे सजीव तस्वीर पेश करती है।
02:25इस पर उन्हों ने रिंजल धंजल यह तो सब को मालूम है।
02:34तो उससे में वह पटने में थे, उससे में कौफी हाउस बंद हो गया था, कौफी हाउस नहीं जाते थे,
02:43घर पर थे।
02:44और कौन-कौन उनसे मिलने आता था, अलोक धनवा उनसे मिलने आता था, बहुत सारी कहानियां आप लोग दिंजल धंजल
02:51पढ़ेंगे तो पता चले।
02:52इतफाक से मैं उस बीच में उनके हाँ गया था, इस बाढ़ के समाप्ती के समय, और उसके साथ मैं
02:58जो बात कर रहा था, तो मुझे लगा कि वो जो मुझे से जितनी बातें हुए, वही उन्होंनों लिखा, ये
03:05बहुत बड़ी मेरे लिए है।
03:081975 की अतिहासिक पटना बाढ़ के दौरान रेणू खुद जल प्रले के बीच फसे थे, उसी अनुभों ने उनकी चर्चित
03:16कृती रिनजल धनजल को जन्म दिया, अपनी रिपोर्टाज शैली में उन्होंने सरकारी आंकड़े नहीं, बलकि बाढ़ से जूजते इंसानों का
03:24
03:24दर्द, संविदन शीलता और उस समय के साक्षात अनुभवों को शब्दों में पिरोया है।
03:55अन्हों के तो ने लिए लेकिन अनकी रचनाओं को पढ़ने के बाद बाढ़ के पड़ती जो उनकी बेचएनियी है, जो
04:00आम जन्म के जीवन को जिस तरह से बार तहस नहस कर देती है, एक तरह से उन्हें पनर जीवन
04:07की परिकलपना करनी पढ़ती हैं, जो बाढ़ ग्रसित �
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