00:09इस वर्ष भी धर्मनगरी हरीद्वार में कावण मेला स्रधा और भक्ती से सराबूर नजरा रहा है।
00:17बड़ी संख्या में कावणी ये गंगा जल्लेने हरीद्वार पहुच रहे हैं।
00:22कावण यात्रा समय के साथ बदलती रही है।
00:25कभी बांस और लकडी से तयार होने वाली पारंपरी कावण आज स्टील के कलश, आधुनिक डिजाइन और नई तकनीक से
00:34सज़े स्वरूप में नजराती है।
01:04धर्म नगरी हैद्वार में कावण मेला अपनी चरम सीमा पर चलना है।
01:10हाला कि कावण यात्रा का स्वरूप बदला है लेकिन भगवान शिव के प्रती स्रधालों की आस्था और गंगाजल लेकर जलाभिशेक
01:19करने की परंपरा आज भी पहले जैसे ही कायम है।
01:23पहले चलती थी शिंगल बांस में रशी बांध के पला बांग लेते थे उसमें जल ले जाते थे कट्टी मुहां।
01:33अब पर वर्तन हो गया अब गेलने चलने लगी।
01:36अब थोड़ा सजावट भी कर लेते।
01:41अब पहले पर फूल पात लड़ा लेते थे साधा कांवर बनाती है।
01:47हम दिली से आए कि रावग नरस्यां कि इतने किलोमेटर के यहां से 200 किलोमेटर है।
01:54पुराड़े बनाता है उसकी पूजाओगी पहला यहां नाकी वह जल बर्रके फिर द्वार नागने के बाद पूजाओगी इसमें अग्सी लगती
02:08है अच्छी जो यह चीज़ेगो समें अच्छी लगती हैं शलके पक्का हूजाता उसके बाद नहीं निगलता है।
02:14This is 220 km, I'm going to go to Dhilli.
02:17How much is it?
02:20It's just a set.
02:23It's just a set.
02:26It's about 16 liters.
02:30In Kaabar, it's been a lot.
02:33First, we were going to Kaabar.
02:35Then, we were going to Kaabar.
02:39We were going to Kaabar.
02:45We are going to Kaabar.
02:51So, we are going to Kaabar.
03:01We were going to Kaabar.
03:04We were going to Kaabar.
03:04This was much more to Kaabar.
03:05This is a new trend.
03:09This has been a new trend.
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04:38.
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04:42४ूजा करें, उनको मनाएं, उनको रिजाएं, उनको अपना बनाएं, उनके स्टुति करें, शुतांडों का पाठ करें, ऐसा करें भगवान आपके
04:49हो जाएं।
04:50आधुनिक्ता की इस दौर में भी काउड यात्रा का मूल भाव नहीं बदला है।
04:55सर्धालू आज भी हरिद्वार की हर की पैडि और अन्य घाटों से गंगाजल भर कर सैकडों किलोमेटर की यात्रा पैदलताई
05:03करते हैं और अपने-पने शेत्रों के शिवालयों में भगवान शियू का जला भिशे करते हैं।
05:10ुद्देश यही होता है कि हर की पैडी से गंगाजल लिया जाए, गंगाजल को भरने का पात्र चाहे कुछ भी
05:18हो।
05:18हाला कि कावण के सुरूप में चाहे जिस तरह का भी परिवर्तन हुआ हो, लेकिन उदेश से केवल आस्था से
05:25जुड़ा है और आस्था जुड़ी है पवित्र गंगाजल से, जिसे कावण यह भरकर अपने अपने गंतेविय की ओर रवाना हो
05:32रहे हैं।
05:32सचिन कुमार, ETV भारत, हरिद्वार
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