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बांग्लादेश की मशहूर लेखिका तस्लीमा नसरीन ने 19 साल बाद कोलकाता की जमीन पर कदम रखा है.... साल 1994 में बांग्लादेश छोड़कर कई देशों में शरण लेने वाली तस्लीमा नसरीन पर पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में प्रतिबंध लगा दिया था.... उन्हें पश्चिम बंगाल आने की अनुमति नहीं थी... अब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है और बीजेपी की सरकार ने तसलीमा के बंगाल में वापसी होने स्वागत किया है... इस दौरान बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये देश संविधान से चलता है और हर किसी को बोलने का हक है।

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Transcript
00:01बांगलादेश की मशूर लेखिका तस्लीमा नस्रीन ने 19 साल बाद कोलकाता की जमीन पर कडम रखा है
00:08साल 1994 में बांगलादेश छोड़कर कई देशों में शर्ण लेने वाली तस्लीमा नस्रीन पर पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में
00:18प्रतिबंध लगा दिया था
00:19उन्हें पश्चिम बंगाल आने की अनुमती नहीं थी अब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है और बीजेपी की सरकार ने
00:26तस्लीमा के बंगाल में वापसी होने का स्वागत किया है
00:31इस दौरान बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये देश सम्मिधान से चलता है और हर किसी को बोलने का
00:38हग है पिछली सरकारे राज्य में ताना शही करती थी लेकिन बीजेपी की सरकार में ऐसा नहीं होगा
00:45खलकाता में बहुत लोग आते हैं सारा दुनिया को आते हैं City of Joy ये परंपरा को खंडित किया था
00:51TMC CPM वहां selective लोगों को आने दिया जाता है जो उनके पक्षमी बोलेंगे
00:57आज सरकार बिदला है लोग्तंत्र है और कोई अगर आके कुछ कारकाम करना चाहते बूलाना चाहता है सब्सक्송 करकार के
01:06पास ऑर धोसे अपिल करेगा उन्मुति देगा जो चाहते हैं बूरके उनकी बात सँने उनको पसंद है उसको माने
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01:56ये शहर उनको अपने घर जैसा लगता है।
01:59उन्होंने कहा कि मैंने कभी अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा।
02:03तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने मुझे राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था।
02:08फिर भी मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी कि एक दिन में वापस जरूर लटूँगी।
02:13अब हम आपको बताते हैं कि तस्लीमा नसरीन आखिर कौन है।
02:16तस्लीमा नसरीन बांगलादेश में जन्मी एक प्रसिद्ध लेखिका, कवित्री, स्तंबकार और पूर्व चिकित्सक है।
02:24वो महिलाओं के अधिकार, धर्म निर्पेक्ष्टा, अभिव्यक्ती की स्वतंतरता और धर्मिक कट्तरवाद के खिलाफ अपने बेबाक विचारों के लिए जानी
02:31जाती है।
02:54तसलीमा ने लज्जा, द्विखंडितो, आमार मेये बेला समेत कई मशूर पुस्तकें लिखी हैं।
03:01अब आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि तसलीमा नसरीन को पहले बांगलादेश और फिर बंगाल क्यों छोड़ना पड़ा
03:07था।
03:08तसलीमा ने 1993 में प्रकाशित पन्यास लज्जा में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांगलादेश में हिंदू अल्प संख्यकों पर हुए
03:15अक्तियाचारों का चित्रन किया था।
03:17इस पुस्तक के बाद कटर पंथी संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये, फत्वे जारी हुए और उन्हें जान से
03:24मारने की धंकिया मिली, उन्हें फासी देने की मांग की गई और उनके सिर पर इनाम भी रखा गया।
03:30सुरक्षा कारणों से 1994 में उन्हें बांगलादेश छोड़ना पड़ा और फिर बाद में वो यूरोप समेत कई देशों में रही।
04:00वो लंबे समय तक भारत में अलग-अलग स्थानों पर रही और कोलकाता नहीं लोड़ सकी।
04:06अब लगभग 19 साल बाद फिर से तसलीमा की कोलकाता में वापसी हुई है।
04:12तसलीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता में एक कारेकरम में शामिल होगी।
04:16साल दर साल बीचते गए, सरकारें बदली और फिर भी दर्वाजे बंद ही रहे।
04:21तसलीमा अपने सम्मान में हुए नागरिक स्वागत समारों में कुछ कविताएं भी सुनाएंगी और चर्चा में हिस्सा लेंगी।
04:28तसलीमा नसरीन लंबे समय से दिल्ली में रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं, वहीं उनके कोलकाता में वापसी पर राज्य
04:35की सियासत भी पूरी तरह से दर्मावली थे।
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