00:01बांगलादेश की मशूर लेखिका तस्लीमा नस्रीन ने 19 साल बाद कोलकाता की जमीन पर कडम रखा है
00:08साल 1994 में बांगलादेश छोड़कर कई देशों में शर्ण लेने वाली तस्लीमा नस्रीन पर पश्चिम बंगाल सरकार ने 2003 में
00:18प्रतिबंध लगा दिया था
00:19उन्हें पश्चिम बंगाल आने की अनुमती नहीं थी अब राज्य में सत्ता परिवर्तन हुआ है और बीजेपी की सरकार ने
00:26तस्लीमा के बंगाल में वापसी होने का स्वागत किया है
00:31इस दौरान बीजेपी नेताओं का कहना है कि ये देश सम्मिधान से चलता है और हर किसी को बोलने का
00:38हग है पिछली सरकारे राज्य में ताना शही करती थी लेकिन बीजेपी की सरकार में ऐसा नहीं होगा
00:45खलकाता में बहुत लोग आते हैं सारा दुनिया को आते हैं City of Joy ये परंपरा को खंडित किया था
00:51TMC CPM वहां selective लोगों को आने दिया जाता है जो उनके पक्षमी बोलेंगे
00:57आज सरकार बिदला है लोग्तंत्र है और कोई अगर आके कुछ कारकाम करना चाहते बूलाना चाहता है सब्सक्송 करकार के
01:06पास ऑर धोसे अपिल करेगा उन्मुति देगा जो चाहते हैं बूरके उनकी बात सँने उनको पसंद है उसको माने
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01:56ये शहर उनको अपने घर जैसा लगता है।
01:59उन्होंने कहा कि मैंने कभी अपनी मर्जी से कोलकाता नहीं छोड़ा।
02:03तत्कालीन पश्चिम बंगाल सरकार ने मुझे राज्य छोड़ने पर मजबूर किया था।
02:08फिर भी मैंने कभी उम्मीद नहीं छोड़ी कि एक दिन में वापस जरूर लटूँगी।
02:13अब हम आपको बताते हैं कि तस्लीमा नसरीन आखिर कौन है।
02:16तस्लीमा नसरीन बांगलादेश में जन्मी एक प्रसिद्ध लेखिका, कवित्री, स्तंबकार और पूर्व चिकित्सक है।
02:24वो महिलाओं के अधिकार, धर्म निर्पेक्ष्टा, अभिव्यक्ती की स्वतंतरता और धर्मिक कट्तरवाद के खिलाफ अपने बेबाक विचारों के लिए जानी
02:31जाती है।
02:54तसलीमा ने लज्जा, द्विखंडितो, आमार मेये बेला समेत कई मशूर पुस्तकें लिखी हैं।
03:01अब आपके लिए ये जानना भी जरूरी है कि तसलीमा नसरीन को पहले बांगलादेश और फिर बंगाल क्यों छोड़ना पड़ा
03:07था।
03:08तसलीमा ने 1993 में प्रकाशित पन्यास लज्जा में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद बांगलादेश में हिंदू अल्प संख्यकों पर हुए
03:15अक्तियाचारों का चित्रन किया था।
03:17इस पुस्तक के बाद कटर पंथी संगठनों ने उनके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किये, फत्वे जारी हुए और उन्हें जान से
03:24मारने की धंकिया मिली, उन्हें फासी देने की मांग की गई और उनके सिर पर इनाम भी रखा गया।
03:30सुरक्षा कारणों से 1994 में उन्हें बांगलादेश छोड़ना पड़ा और फिर बाद में वो यूरोप समेत कई देशों में रही।
04:00वो लंबे समय तक भारत में अलग-अलग स्थानों पर रही और कोलकाता नहीं लोड़ सकी।
04:06अब लगभग 19 साल बाद फिर से तसलीमा की कोलकाता में वापसी हुई है।
04:12तसलीमा नसरीन 19 साल बाद कोलकाता में एक कारेकरम में शामिल होगी।
04:16साल दर साल बीचते गए, सरकारें बदली और फिर भी दर्वाजे बंद ही रहे।
04:21तसलीमा अपने सम्मान में हुए नागरिक स्वागत समारों में कुछ कविताएं भी सुनाएंगी और चर्चा में हिस्सा लेंगी।
04:28तसलीमा नसरीन लंबे समय से दिल्ली में रेजिडेंस परमिट पर रह रही हैं, वहीं उनके कोलकाता में वापसी पर राज्य
04:35की सियासत भी पूरी तरह से दर्मावली थे।
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