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जंतर-मंतर की वो तस्वीरें, जो द‍िल्ली पुल‍िस को रहीं चुभ, देखें वारदात

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00:01नमस्कार मैं हूँ शम्स ताहर खान और आप देख रहे हैं वारदात
00:04जंतर मंतर खामोश हो चुका है धरना प्रदेशन और आंदोलन के बाद छातर और जंजी अपने अपने घरों को लोट
00:13चुके हैं
00:14लेकिन खामोश चंतर मंतर खामोशी से पहले की कुछ तस्वीन है और कई ऐसे सवाल छोड़ गया जुना दिल्ली पुलिस
00:22से देखते बन पा रहा है और नहीं जिनके जवाब देते
00:26छर्रे और पत्थर दिल्ली पुलिस से सवाल पूछ रहे हैं एक सवाल तो सीधे एक एक 47 पूछ रहा है
00:44पानी कब चालू होगा जर्मी लगए तो आपको भी लगता हुआ जाइज जबात है अभी जच पानी पिए पुरा चक्कर
00:52आ रहा है पुरा पसीना पसीना पानी चालू कर वादेते
01:23जानते हैं वाटर कैनल
01:26टियर गैस और लाखी मादने की बात है ये प्रदर्शनकारी क्यों कर रहे थे क्योंकि इन्हें पता था कि यही
01:34वो तीन चीज़ें जो हर धरने प्रदर्शन और आंदोलन के आखर तीन हथियार होते हैं
01:40चाहे वो धरना प्रदर्शन या अंदोलन किसानों का, वकीलों का, छात्रों का, सरकारी करमचारियों का, मजदूर संगठनों का, नेताओं का,
01:50यविपक्षी पार्टियों का
01:52या फिर कई बार तो खुद सरकार का हो, एक तह सीमा से आगे जाने से रोकने के लिए, या
01:58बेकाबू भीड को कंट्रोल करने के लिए, कई बार हिंसक प्रदर्शन कार्यों से निपटने के लिए, अमोमन हमारे देश में
02:06यही तीन तरीके इस्तिमाल किये जाते हैं
02:09यही बात हाल में देश के अलग-अलग हिस्सों में चात्रों और कौकरोद चंतापाटी के आंदोलन से जुड़े, आंदोलन कारियों
02:17को अच्छी तरह मालूँ दूनिया में दो तरह के देश हैं, एक जहां तनाशाही या फिर राजशाही
02:36वहाँ आवाम को अपनी आवाज उठाने की इजासत नहीं होती, सत्ता के खलाब बगावत छोड़िये, मूँ खोलने का अंजाम भी
02:45मौत से लेकर जेल तक दी सजा होती है
02:47लेकिन इस दुनिया में ऐसे देशों की एक बड़ी आबादी है, जो खुशनसीब है कि वहाँ लोक तंत्र है
02:54लोक तंत्र है, इसलिए खुलकर बोलने से लेकर धरना, भिरोत पदर्शन और आंदोलन की भी इजासत है
03:02और उन खुशनसीब देशों में एक देश हमारा भी है
03:07हमें हमारा समविधान और उस समविधान का अंचेद 19 देश के हर नागरिक को अपने विचार रखने और बोलने की
03:16आजादी देता है
03:16और इसी दाहरे में शांतिपुलों ने धरना प्रदर्शन आंदोलन और भाशन भी आते है
03:26लेकिन छात्रों और कौकरोज जन्तापाटी के आंदोलन के बीच से आई
03:31इन तीन तस्वीरों ने पूरे देश में इस वक्त एक पहस छेर दी
03:35खासकर इन में से दो तस्वीर तो ऐसी है जिनके बारे में कोई सोच भी नहीं सकता था
03:41कि किसी धरना प्रदर्शन या अंदोलन के दौरान पुलिस या सुरक्षबर प्रदर्शनकारियों पर इसका भी इस्तिमाल कर सकते हैं
03:50क्योंकि अब तक वो यही जामते थे कि ऐसे मौकों पर पुलिस सिर्फ वाटर कैनल यानि पानी की तेज पहुचारे
03:56भीड को तितर बितर करने के लिए आंसु गैस के कोली या फिर आखिर में लाठी चला सकते हैं
04:02लेकिन पुलिस या सुरक्षाबर प्रदर्शनकारियों पर छोटे छोटे छोटे लोहे के चर्रे से भरे पैलिट गन और एके 47 जैसे
04:11घातक हतियार से कोलियां भी चला सकती हैं
04:14ये लोगों ने पहली बार देखा और सुना
04:17पैलिट गन फिर भी इस से पहले पहली बार 2010 में कश्मीर प्रदर्शनकारियों पर इस्तिमाल हो चुका था
04:25लेकिन देश के इतिहास में ये पहला अंदोलन था जिसमें पुलिस ने चात्रों पर एके 47 से गोलियां दागी
04:42सबसे पहले जन तरबंतर पर बीज जुलाई को हुए प्रदर्शनकारियों को देखी
04:49चेहरे से लेकर जिसम के अलग-अलग हिस्सों पर ये जो छोटे-छोटे निशान आप देख रहे हैं
04:55जानते हैं ये निशान किसके हैं
04:57उसी पैलेट गन से निकले चर्रों की छोटे-छोटे लोहे के चर्रों की
05:03यही सारे वो निशान थे जिनने इलाज के दौरान देखने के बाद डॉक्टरों ने पहली बार ये बताया
05:09कि ये पैलेट गन से चली गोलियों के चर्रों के जख्म है
05:13इस तारी के प्रदर्शम ने जो बच्चे घायल हुए थे उने एक नाम 19 साल के साहिल का भी है
05:17और साहिल के शरीर पर जो जखमों के निशान है वो ऐसा दिकर करके लगता है कि पैलेट गन जैसे
05:23किसी बंदू का इस्तमाल कियो तो माम सारे चाहिवे जो है उसकी वज़स उसकी �
06:01जैसे ही पैलेट गन को लेकर अफ़ा उड़ी दिल्ली पुलिस ने पिना सोचे समझे इसे जूटी खबर करार दे दिया
06:08दिल्ली पुलिस ने बाकाइदा अपने ऑफिशिल सोचल मीडिया हैंडल से फैक्ट चेक करने का दावा करते हुए ने सिर्फ इसे
06:16गलत बताया बलकि ये भी दावा कर दिया
06:19कि दिल्ली पुलिस न तो पहले गर लेकर जंतर मंतर गई थी और नहीं उसका कोई इस्तमाल हुआ
06:26पर धरना प्रदर्शन के दोरान अमोमन ऐसे जखम मिलते नहीं है
06:31पर ये किस तरह के जखम थे तो दिल्ली पुलिस के जूट को खुद उसी के एक थाने ने आईना
06:37दिखा दिया
06:37ये पारलेमन्ट स्ट्रीट थाने में दर्ज एक जनरल डायरी है
06:41जनरल डायरी में शिकायत या सूचना लिखी जाती है
06:4422 जुलाई की तोपहर एक बचकर 24 मिनट पर रैपिड एक्शन फोर्स का एक डिप्टी कमांडर सतीश कुमार सांगवान जनरल
06:53डायरी में एक सूचना लिखवाता है
06:55ये सूचना डियूटरी रूम में तब मौजूद सब इंस्पेक्टर ओम परकाश लिखते हैं
07:00साड़े तीन लाइन की पूरी सूचना ये है
07:05तो इस सूचना के मताबिक रैपिड एक्शन फोर्स के डिप्टी कमांडर सतीश कुमार सांगवान की डियूटी
07:1220 जुलाई को जनतर मंतर की जोन वन में थी
07:15उन्हें नौर्थ डिस्ट्रिक के डीसी पी राजा बांठिया के साथ अटैच किया गया था
07:20सीज़पी प्रोटेस्ट में भीर पर काबू के दौरान डीसी पी के ही आदेश पर
07:25उसने नौन ऐलेक्टिकल शिल 55, ऐलेक्टिकल 15, टेरसमो کے ग्रेनाइट, A.R.G, 2B.C तो पीपी इस्तमाल किया
07:34यहाँ पीपी शब्द उसी पैलेट गन के लिए इस्तमाल किया गया है
07:38अब कमाल देखे दिल्ली पुलिस पहले पैलेट गन के इस्तमाल को ही नकार देती है
07:44पिर पैलेट गन के इस्तमाल के पूरे 48 घंटे यानी दो दिन बाद इसी पारलेमन्ट स्ट्रीड ठाने में
07:51रैपिड एक्शन फोर्स की तरफ से ये कबूला जाता है
07:54कि दिल्ली पुलिस के डीजूपी के हुक्म पर उसने पैलेट गन का इस्तमाल किया
07:59अब इससे उपर का भी कमाल देखना है तो ये देखे
08:02ये दिल्ली पुलिस के वही नए-बुलिस कमिशनर आनुराख कुमार सहाब है
08:07जिनकी बाकी वजहों के साथ साथ सीजेपी के इस प्रोटेस्ट को बेहतर धंक से हैंडल करने के लिए अचानक दिल्ली
08:14में उतारा गया
08:15पुलिस कमिशनर साहब सीजेपी प्रोटेस्ट के दौरान लगातार इसी पारलेमेंट स्ट्रीट ठाने में मौजूर थे
08:22डीसीपी के दफतर में बैटकर लगातार हालात पर नज़र रखने के लिए और इसी पारलेमेंट स्ट्रीट ठाने में ये जनरल
08:29डायरी लिखी गई
08:30अब सवाल ये है कि क्या पैलेट गन के इस्तमाल को लेकर कमिशनर साहब को कोई जानकारी नहीं थी
08:36और उससे भी बड़ा सावाल ये कि क्या उन्हें पैलेट गन के इस्तमाल को लेकर उनी के थाने में तरच
08:43इस जनरल डायरी के बारे में खुद उनके अफसरों ने उन्हें कोई जानकारी नहीं दी उन्हें अंधेरे में रखा
08:49अब अगर ऐसा ही है तो जब कमिशनर साहब को अपने थाने की ही खबर ठीक से नहो तो फिर
08:56बाकी का क्या कहें
08:59अब आप सोच रहे होंगे कि पैलेट गन ही तो चलाया बंदूक से गोली थोड़ी चलाई
09:04पैलेट गन से कोई मरता भी ने है तो फिर इसे लेकर इतना हंगामा क्यों
09:09तो पहले पैलेट गन के बारे में जान दीचे आम बंदूक से अमूमन एक बार में एक गोली निकलती है
09:16लेकिन पैलेट गन के एक कार्थूस में सैक्नों छोटे छोटे छर्रे होते हैं
09:25ये छोटे छोटे गोल दाने जैसे होते है जब पैलेट गन का ठ्रिगर दपता है तो कार्तूस में मौजूद बारू
09:33इन सैक्रो छोड़ों को एक साथ बाहर फेंगता है
09:36इस तरह बंदूब की नाली से बाहर निकलते हैं ये छर्रे आसपास एक बड़े दायरे में फैल जाते हैं अगर
09:44पैलेट गन का इस्तमार आसमान की तरफ किया जाए तो नुकसान कम है या भीर से खास दूरी बना कर
09:50किया जाए तो भी नुकसान ना के बराबर है लेकिन अगर �
09:54करीब से प्रदशनकारियों पर चलाई जाए तो शरीर के नाजुक्त हिस्सों खासतोर पर आँखों के लिए घातक हो सकता है
10:01क्योंकि ये छोटे छोटे छर्रे होते हैं लेहाजा अगर ये आँखों पर जाकर लगें तो आँखों की रोशनी भी जा
10:08सकती है देश में पैले�
10:23अगन के छर्रों की गिंती जा रही थी कि तभी आचानक बिहार से स्टुडिन प्रोटेस्ट की एक और तस्वीर सामने
10:30आ जाती है अगर सबूत के तौर पर ये विडियो सामने ना आता तो शर्तिया बिहार पुलिस कभी ये मानती
10:37ही नहीं कि उसने चात्र आंदोलन के दौर
10:53चातरों और सीजेपी के पर्दाशन के दोरान एक पुलिस वाले के हाथ में ये A.K.47 दिखाई देता है
10:59ये पुलिस वाला सिर्फ A.K.47 अपने साथ लेकर इस आंदोलन में पहुँचा नहीं था बलक teşekkür विडियो में
11:06साफ दिखाई देता है कि वो इसी A.K.47 से हवा में दो र
11:25दिल्ली पुलिस की तरह बिहार पुलिस और बिहार सरकार ने पहले तो इस खबर को ही गलत करार दे दिया
11:31लेकिन तस्वीर तो तस्वीर है इनसान की तरह जूट नहीं बोलती
11:36लियादा जब तस्वीरें आई ना बनकर बिहार पुलिस के सामने खड़ी हो गए तो पुलिस को भी मानना पड़ा
11:42फिर बिहार पुलिस की तरफ से कहा गया कि जिस पुलिस वाले के हाथों में ये AK-47 है और
11:48जिसने गोलियां चलाए
11:49वो सीवान के S.P. का सुरक्षागाट था उसके ड्यूटी आंदोलन की जगा पर थी ही ने वो तो कहीं
11:55और जा रहा था भीर में फस गया और फिर भीर से निकलने के लिए गोली चला था
12:01मतलब कॉमेडी की भी हद होगी है ऐसे सीरियस मेटर में भी बिहार पुलिस मजाग करने से बाज नहीं आ
12:07रहे है
12:08सर जिस सिपाही का वीडियो वाइरल हो रहा है गोली चलाते वक्त उसके उस पर करवाई हुई है सर
12:21उस सिपाही को तथकाल परवास से लिलमित कर दिया क्या है वह उसके विरूट विवागी कारवाही प्रारण की जई है
12:32वो फंस गये थे जैसे पुर्व में एस्पी सामने बताया कहीं और जा रहे थे और इस कमोशन में फंस
12:37गये थे
12:38फिर हुआ यूँ कि सारी गाज एक अकेले उसी पुलिस वाले पर गिरा दी गए और सस्पेंड कर दिया गे
12:44यानि बाकी बड़े पुलिस अफसर जिम्मेदारी के इस जंजाल से बच गये
12:49अब पैलेट गन की तरह यहां भी सवाल है कि एके 47 का क्यों इतना भौकाल है
12:55अब तोमल क्लाशन कोव राइफल यानि एके 47 बनाने वाले का नाम है मिखाईल क्लाशन कोव
13:021947 में जब उन्होंने एके 47 बनाया तो देखते ही देखते
13:07दुनिया भर में सुरक्षा बनो, सेना, पुलिस और फिर अपराजियों का भी यह सबसे पसंदीदा हत्यार बन गया
13:14एके 47 के पॉपुलर होने की सबसे बड़ी वज़ा यह थी
13:18की लंबी दूरी से भी जान लेवा है, ज्यादतर बाकी हत्यार की रेंज जहां 30 से 50 मीटर तक होती
13:25है
13:25वहीं एके 47, 200 से 300 मीटर की दूरी पर भी गोली मार कर किसी की जान ले सकती है
13:37एके 47 गोली चलाने के दो विकल्प देता है, S और R
13:42अगर राइफल को S यानि सिंगल मोड पर रखा जाए, तो ये कंट्रोल फायर करता है
13:47यानि इससे एक फायर में एक ही गोली निकलती है
13:50जबकि अगर इससे आर यानि रिपीट मोड पर चलाया जाए, तो एक ही फायर में इसकी पूरी मैगजीन खाली हो
13:57जाना है
13:57एक ही फायर में एक ही फायर में एक साथ तीस कोलिया निकलती है
14:04हाला कि अब दो मैगजीन वाली एक ही फायर में एक ही फायर में दोनों मैगजीन खाली, एक साथ एक
14:13फायर में साथ कोलिया
14:15भारत में एक ही सैथालीस का इस्टमाल सबसे पहले सेना ने किया
14:19इसके बाद अर्थिस्थानिक बलो, बॉर्डर से लगे राज्जे और नौर्थीस्ट के उगरवात प्रभावित इलागों में पहली बार पुलिस्ट को दी
14:27एके सहतालीस को इस्तेमाल करने की इजाज़त दीगे
14:32मनेशा जा, सुपरतीम बैनर जी, अन्शुल सिंग और हिमान्शु मिश्रा के साथ अर्विंदोचा तिल्ली आज तक
14:42आखिरे स्ट्रक की असलियत क्या थी? संसद का मौनसून सत्र शुरू होने वाला था
14:47संसद मार्च का एलान हो चुका था, छात्र धरने पर बैठे थे
15:00तो फिर सवाल ये है, कि ऐसी सूरत में आखिर इतना भारी भरकम ट्रक जिन में पत्थर थे, वो जंतर
15:08मंतर तक पहुँचा कैसे?
15:10तो पैलेट गन और एके 47 की तस्वीर और कहानी तो आपने सुन लिए और अब उस तीसरी तस्वीर की
15:17कहानी
15:17इस तस्वीर में न कोई पैलेट गन है, न एके 47, बलकि इसमें एक ट्रक है, और ट्रक में दुनिया
15:25का सबसे पुराना हथियार पत्थर
15:27ये ट्रक और पत्थर दोनों इस वक्त दिल्ली पुलिस को उतनी ही चोट पहुँचा रहा है, जितनी पैलेट गन के
15:34छर्रों ने पहुँचाई है
15:35बीज जुलाई को ये ट्रक जंतर मंतर पर ठीक उस जगह से कुछ दूरी पर खड़ा दिखाई दिया, जहां चात्रों
15:42और सीजेपी के अप्रदर्शन चल रहा था
15:44इस ट्रक पर पर पत्थरों के इलावा कंस्ट्रक्शन के बाकी सामान भी लदे हुए थे
15:49एक तो चात्रों का प्रदर्शन उपर से 20 जुलाई को संसद मार्च, ठीक ऐसे वक्त, जंतर मंतर पर पत्थरों से
15:57भरे इस ट्रक पर जब प्रदर्शनकारी चात्रों की नजर पड़ी तो वो भी हैरान थे
16:01पर तब तक मीडिया के एक हिस्से ने ट्रक और पत्थर दोनों को दिखाते हुए इसे कुछ और ही रंग
16:07देने की कोशिश शुरू कर दे
16:10ऐसा मैसेज दिया जाने लगा कि परदर्शनकारी खुद पत्थनों से भरा ये ट्रक लेकर आए लेकिन जब ट्रक की असलियत
16:16सामने आए तो दिल्ली पुलिस को जवाब देते नहीं बना
16:21दरसल इस ट्रक के नंबर से पता चला कि 16 जुलाई को इस ट्रक ने फिरोष शहरोड कस्तूरवा मार गार्दी
16:27क्रॉसिंग पर एक ओमनी कार को टक कर मारी थी
16:30कार में बैठे साथ लोग जखमी हो गया बाद में पुलिस इस ट्रक को जब्द कर इसे पारलेमेंट स्टीर थाने
16:37लिया यानि 20 मार्च के छात्रों के संसद मार्च से चार दिन पहले ही ये ट्रक दिल्ली पुलिस के अपने
16:44थाने में खड़ा था उसकी कस्रडी अब सवाल य
17:00जंता पार्टी के फाउंडर अभिजीत दिपके ने 20 जुलाई को दो वीडियो पोस्ट कर प्रोटेस्ट की जगह पर पार किस
17:06ट्रक को दिखाया इसके बाद होता यह है कि अजानक ये ट्रक जंतरमंतर से गायब हो जाता है पुलिस वाले
17:13इसे हटा देते हैं
17:33पर जंतरमंतर से गायब ये ट्रक अब अचानक मुश्किल से वहाँ से एच से डेर किलो मिटर की दूरी पर
17:39मौझूद इंडियन यूथ कॉंगरेस के आफिस के बाहर ख़ड़ा मिलता है
17:43हाला कि ये पूरा इलाका वो इलाका है जहाँ ट्रकों की एंट्री है ही नहीं यानि इस इलाके में कोई
17:49ट्रक आही नहीं सकता है
17:50लेकिन दिल्ली पुलिस की एक केस प्रोपटी जंतरमंतर से यूथ कॉंग्रेस के दफतर तक यूही लावारिस घूमती और खड़ी नज़राती
17:59है
17:59ट्रक अगले तीन दिनों तक यूथ कॉंग्रेस के बाहरी पार्क तीन दिन बार जब यहां से भी इस ट्रक का
18:05एक वीडियो सोशल मीडिया पर डाला जाता है तो इसके एक घंटे बाद यह ट्रक वहां से भी गायब हो
18:12जाता है
18:29अब इसके अमने देश की पार्लिमेंट है यह ट्रक यहां पर इस ट्रक इसके अंदर है और यह ट्रक कियो
18:39कहई लाब किसी के पात नहीं पोरेंगे
18:54में पूरे नई दिल्ली डिस्टिक के अंदर और इस ट्रक को नहीं हर जwaag जारा है
18:59हम जैसे ही अंदर कूदे हैं देखने के लिए कि स्ट्रक में क्या पड़ा हुआ है तभी सारा दिल्ली पुलिस
19:05का स्टाफ आ गया
19:07इसमें कोई शक नहीं कि दिल्ली पुलिस के अलग-अलग थानों के मालखानों में जगे की कमी
19:12एकसिडेंटल या बाकी केस से जुड़ी गारियां भी बड़ी तादाद में थानों में पड़ी रहती है
19:17लेकिन जब खुद दिल्ली पुलिस को मालूम है कि 20 मार्च को छात्रों का संसत मार्च है
19:23भीड बेकाबू हो सकती है फिर भी ऐसी सूरत में अपनी ही थाने से ट्रक को बाहर निकाल कर पत्थर
19:30समेथ उसी जंतरमंतर पर क्यों खड़ा कर दिया
19:33जहां सबसे ज़्यादा प्रदशनकारी मौदूग थे जाहिरे इसके पीछे कुछ तो सोच रही होगी
19:39और ये भी तह है कि फैसला पार्लेमेंट स्ट्रीट थाने के इसे चोके एक अकेले अपने बूते की बात नहीं
19:46आलाफसरों को भी पक्का इसकी जानकारी होगी
19:49पर क्या पत्थरों से भरे स्ट्रक की ठाने से जंतर मंतर तक पहुचने का सच कभी सामने आपाएगा शर्तिया नहीं
19:57पर इसके बावजूद इसी दिल्ली पुलिस को ये याद दिलाना जरूरी है कि इसी दिल्ली में 2020 में जो दंगा
20:04हुआ था
20:05उसकी शुरवार ऐसे ही पत्थरों और पत्थर बाजी से हुई थी
20:12धर्ना प्रदर्शन, आंदोलन, परेड, मार्च, रैली, पेशक नाम अलग-अलग हो सकते हैं
20:18लेकिन ये सभी लोकतंत्र का ही एक हत्यार है
20:20लोगों को चब लगता है कि उनकी बात हुत्मरानों के कानों तक नहीं पहुँच रहे हैं
20:26तब वो इसका इस्तमाल करते हैं
20:28जाहिर ये देश गांधी का है
20:30और गांधी नहीं अहिंसा और आंदोलन का पहली बार रास्ता दिखाया था
20:34पर ये भी एक सच है कि कई बार ऐसे विरोथ परदर्शन ये आंदोलन में
20:39शांती बिगारने के मकसद से शांती के कुछ दुश्मन भीड में शामिर हो जाते हैं
20:45जो एक शांती पूर्ण परदर्शन के माहौल को बिगार देते हैं
20:49और फिर उसका खाम्याजा बाकी परदर्शनकारियों को भुगतना होता है
21:19तो इस तरफ से काफी चोट लगी है
21:22और तो सब का अभी इलाज चल रहा है
21:37पर जिस तरह हिंसक प्रदर्शनकारियों को सबख सिखाना जरूरी है
21:41ठीक वैसे ही ये भी जरूरी है
21:44कि पुलिस वाले अपनी ताकत का गलत इस्तेमाल न करें
21:47ऐसे आंदोलन ये वरोत प्रजशन के दोरां भीड को काबू करने के जो खास तरीके हैं
21:54और खास कर जो प्रजशन कारियों के भी खासे पॉपलर हैं
21:58उन्ही का इस्तेमाल काईदे से किया जाना चाहे
22:00वो भी जरूरत पढ़ने पर और जरूरत के हिसाब से
22:04तभी तो लोग खुद से पूछेंगे कि टियर गैस, पानी की बोचार और लाठी की व्यवस्ता है की नहीं
22:11इस व्यवस्ता में कहीं न कहीं एक आर्जू, एक डिमांड और एक अपना पंसा है
22:17कोई चाहे या ना चाहे, लेकिन बरसों से हमारे देश, आंदोलन और विरोध परदर्शन की यही पहचान बन चुकी है
22:25सर गर्मी लग रहा सर, पानी चालू कर दिये सर
22:35पानी कब चालू होगा, गर्मी तो आपको भी लगता होगा, जाहीर सा बात है
22:42अबी जश पानी पिये, पुरा चक्कर आ रहा है, पुरा पसीना पसीना
22:47था पानी चाली तरवा देता है
22:50बाए सार, टीयर गैस के ववास्ता नहीं है, उच्छो ववास्ता आप लोग नहीं कर गर दो
22:59सर, लाठी चाल्ज कब होगा, लाठी चाल्ज
23:03एक दो मार देते, एक दो मार देते 20 तारिक को आया नितम है, घर पे बैटके फोम हो रहा
23:09दो मुझे
23:11मनेशा जा, सुप्रतीम बैनर जी, अन्शुल सिंग और हिमान्शु मिश्रा के साथ, अर्विंदो चा, तिल्ली आज तक
23:20तो वारदात में फ्लाल इतना ही, मगर देश और दुनिया के बाकी खबरों के लिए आप देखते रही आज तक

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