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हमारे कथित सभ्य संस्कारवान पुरुष बहुत आहत हैं कि ये Gen Z ख़ासतौर से लड़कियां कौन सी भाषा बोल रही हैं। कौन सी गालियां दे रही हैं। समझिए इसके क्या मायने हैं.
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00:00दोस्तों हमारे कथित, सभ्भे, संसकारवां, समाज के ठेकेदार पुरुष बहुत आहत हैं कि ये जैंजी, खास्तोर से लड़कियां कौन सी
00:09भाषा बोल रही हैं, कौन सी गालियां दे रही हैं।
00:12जबकि ये माहनुवाओ खुद एक वाक के एक लाइन बिना गाली दिये, मावेहन की गाली दिये बिना बोल नहीं सकते।
00:42नहीं आपके पाखाने में एजाब डाल दिया और आपका सारा किया धरा भक भकाकर उपर आगया।
00:50अब आपके बात्रूम में गंदे की बह रही हैं और आपके पैर सन रहे हैं और पूरा घर बदभु मार
00:59रहा है। तो आप हाय हाय कर रहे हैं।
01:02ऐसे ही लोगों के लिए कभी पत्रकार शुर्ति कुश्वाह ने व्यंकी भाशा में लिखा है कि जैंजी की तमाम गालियों
01:08की कड़ी निंदा खरती हूं
01:09मैं हमारे देश की महान गाली परंपरा यथा मा बहन डेश डेश के सम्मान को ठेश पहुचाने के लिए इस
01:19नई जैनरेशन को बिल्कुल शमा नहीं करूंगी
01:22हम अपने गौरव शाली, स्वैदेशी, सांस्कृतिक गाली धरोहर के साथ ये दुरवयवार किसी सूरत में स्विकार नहीं कर सकते
01:31जैंजी हाए हाए
01:33तो प्रिय धीर, गंभीर, सभय, संसकारिद, हिपोक्रेट माननी ये पुरशोज अर अपनी भाषा पर गौर किजिए और फिर जैंजी लड़कियों
01:42को भाषा की तमीज सिखाईए
01:45ये वही गालिया हैं जो आपने आपके पित्र सत्तात्मा ब्रह्मनवादी समाज ने इजाद की हैं
01:51अब ये नई पीड़ी, ये लड़कियां इसे आपको ही लोटा रही हैं
01:55कहा जाताने हैं बच्चे हुए के आवाज होते हैं
01:59अब एक गुजारिश जैंजी खासतोर से लड़कियों से भ्यांग से सुनिएगा
02:04मैं जानता हूँ कि ये समाज आपकी गालियों से नहीं आपके बोलने से भी डरता है
02:08आपका हस्वेभ्यंग, हसी मजाग, इसकी समुझ से पाहर है
02:13लेकिन जैसे आपने अपने संघर्ष में नित नए आयाम गड़े
02:16नए नए क्रेटिविटी दिखाई, नए नए नारे गड़े, नए नए गीत रचे
02:21उसी तरह अब वक्त है नए गालियों को गड़ने का
02:25क्योंकि ये गालियां इस पुरिष समाजने, पित्र सतात्मक समाजने
02:28आपकी अस्मिता पर हमला करने के लिए ही बनाई थी
02:32इसलिए इस ओर भी ध्यान दो, खुब हसी मजा करो, गुस्सा करो, संघर्ष करो, आंदोलन करो, लड़ाई लड़ो
02:38लेकिन अब वक्त है नई नारों के साथ कुछ नई गालियां भी गड़ने का
02:43भाशा के कुछ ऐसे तीर जो ऐसे दुष्टों की नाभी में सिधे जाकर लगी
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