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  • 2 days ago
गुरु पूर्णिमा पर पढ़िए ऐसे गुरु की कहानी जो नई पीढ़ी को भारतीय सनातन संस्कृति का पाठ पढ़ा रहा हैं. अंकुर जाकड़ की रिपोर्ट...

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00:21GURURI BHRAMA, GURURI VISHNU, GURURI DEVO MAHESHVARA, GURURI SAKSHAT PARBHRAMA, TASMA SHRI GURUVI NAMAHA
00:28इसकंद पुरान में गुरु की महता धम्मा विश्णु महिश से भी सर्वोच बताई गई है
00:34और आज के दौर के अगर बात करें तो हमाई साथ एक ऐसे ही गुरु मौजूद है
00:39जो आधुनिक दौर में तकनीके सिक्षा के दौर में भी भारतिय सनातन संस्कृती और भारतिय सभ्धेता से जुड़े हुए संस्कारों
00:50की सिक्षा बच्चों को दे रहे हैं
00:52पूरी तरह से निशल्क हमाई साथ मौजूद है पंडित योगेश आचारे जी उनसे बात करते हैं
01:02आज जब शिक्षा पंडिती की बात होती है तो शिक्षा किया टीचर इस तरह से बात की जाती है
01:08लेकिन आज के दोर में भी आप गुरू कुल संचालित कर रहे हैं और आप गुरू कहला रहे हैं
01:14क्या आपका ये शुरुआत रही थी क्या उसका उद्देश्य था गुरू कुल का वो आपसे जनना चाहेंगे
01:20देखिए जीवन में चाहें कितना भी बड़ा गुरू हो उसके पीछे भी कोईना को गुरू होता है
01:24और हमारे शास्त्रों में लिखा गया है कि यातन विश्की वेलडी गुरू अमरत की खान और शीष दिये सत्गुरू मिले
01:31तो भी सस्ता जाना
01:32अगर हमारे शिषो को में होतला सिर को भी काट कर गुरू के चड़नों में अरपित करना पड़े ना तो
01:36शायद वो भी हमारे लिए कम होगा क्योंकि माता पिता गुरू का रिण जीवन के अंदर कभी चुकाया नहीं जा
01:41सकता
01:41तो इसी परंपरा को दोराते हुए मेरे परंपूजने गुरूदेव श्री गयारसिलाल जी वेदाचरे का मन में एक संकल्प था कि
01:49मैं जीवन के अंदर एक गुरू कुल खोलू
01:51और गुरू के जब गोलो गमन के बाद के अंदर मुझे लगा क्योंकि गुरूदेव ने काफी बच्चों को पढ़ाया लेकिन
01:57जो उनका एक सोच थी जो एक उनके मन में था कि छोटे-छोटे बच्चे वहां आने चीए काफी अधिक
02:02संक्या में होने चीए उनकी प्रोपर �
02:03यग्योपई धान करके शिखा बंदन करके वो बालक रहने चीए जो हमारे सनातन की पहचान मने तो मन में इस
02:10द्रडश अंकल को लिए उनके आशिरवास से हमने आगे कदम रखा कदम रख करके और मैंने सरप्रतम अपने घर के
02:16अंदर ही आसपास के ब्रामन बालक है उनको ल
02:32चाहिए तो हमने सर्व समाज के सभी लोगों को इकत्रित करके और इस सनातन की शिक्षा देना प्रारम करा जिसके
02:40अंदर बच्चों को प्रातकाल जल्दी उठने का महत है देखिए वेदों का अध्यन करना एक अलग चीज है लेकिन वेदों
02:46के सासात में पहले व्यक्ति को �
02:47खud को परिश्क्रित करना भी आवशक है जो हमें हर चीज सिखाती है तो हमने उनको बच्चों को बता है
02:52कि जल्दी उठने का महत है तरकाल संधय क्यों करना चीज,
02:59प्रत्वी को प्रणाम करना चाहिए, प्रतकाल उड़ती, कराग्रे वसेती लक्षमी का क्या आर्थ है, किस तरह से तिलक लगाना चाहिए,
03:05सारी चीज़ हम बच्चों को बताते हैं, उसके बाद में जब हमें लगता है कि प्रारंबिक शिक्षा है, तो उसका
03:10एक कैम्प लगत
03:10है हमारा, उसके अंदर हमारे इस वर्ष भी जैसे 600 वर्ष, 600 विद्यारती हैं, हमको लगबग करते हुए, इस कारे
03:17को करते हुए, बारा वर्ष हमारे हो गए हैं, और दिनो दिन उत्रोतर ये व्रधि की ओर चले जा रहा
03:23है, आगे बढ़ता जा रहा है, और सभी लोगों के स
03:37अनातन से रिलेटेड जरूर होना चाहिए, हम यह नहीं कहते हैं कि नहीं, आप जो आधुनिक शिक्षा है, उसको आप
03:45जीवन के अंदर अमल करें, आप उससे कमाएं नहीं, कमाने का सोरत हम इसे हमने नहीं बता थे कि कमाना
03:50आया इसके, इस शिक्षा से आपको कमाई मिलेग
04:12करता है, यह संचालान आसानी से हो गया या कुछ चुनोती अभी सामने आई, अब देखा जाए तो बहुत सारी
04:35चुनोती आई हैं, क्योंकि लोग
04:38क्योंकि सब जगे का नियम है, क्योंकि कोई भी अच्छा कारे होता है, तो इसके अंदर टांग खैसने वाले भी
04:43होते हैं, तो कुछ लोग तो यह एक समझने लगए मुझे कि
04:46जिसे हमारे कई पूजन पार्ट में जो पंडी जी हैं, वो यह सोचते हैं कि हमारे प्रतिदंदी यह तैयार कर
04:52रहे हैं, तो कई बार मुझे कहते थे इस बात को लेकर कि
04:54तो मारे बहुत सारे प्रतिदंदी हो जाएंगे, मैंने कहते हूं कि प्रतिदंदी की चिंता मत करो, और आपको बताना चाहूंगा,
05:00वास्तुक्ता है भी है, क्योंकि आज मैं बच्चों को तैयार कर रहा हूं, तो कही ना कहीं, मुझे अपने कारे
05:05के अंदर जो लाब मिलना
05:18दी, तो हम तो बहुत चोटी चीज़े हैं, बच्चों के अंदर हमें उन वीजो को डालना पड़ेगा, और बच्चों खुद
05:23ही समाज को जोडने का प्रयास करेंगे, तो हम बच्चों को प्रतिवर संकल भी दिलाते हैं, विद्यार्तियों को कि इस
05:29तरह से, कि आप सभी ब�
06:02प्रश्णों के साथ समापन करना चाहेंगे, पहला कि गुरुकुल में पढ़ने वाले चात्रों का क्या भविश्य है, और दूसरा इस
06:09गुरुकुल का क्या भविश्य है, क्या विजन है आपका?
06:12देखे, सबसे पहले तो बच्चों के लिए बताना चाहूँगा, कि उनको बच्चों को भविश्य है, कि आजकल के विध्यारतिय है,
06:19बहुत आउसाद में आ जाते हैं, छोटी-छोटी चीजों को लेकर बहुत आउसाद में आ रहे हैं, सबसे पहले तो
06:36उनको जीवन में सि�
06:38qari di jati hai, Padaya jata hai, Vedo ka Adhiyan kura jata hai, Saaswarir, Rudraashti
06:42hai hai ka part kura jata hai, Baachiyon ko Adhiyan kura jata hai, Durgaash Shabshati
06:46ka part sikhaaya jata hai, Balmiki Sundorakand ka bachyo ko part sikhaaya jata hai,
06:50or bade joh senior bachyo jiasese jiasase hotte jate ho ne Sainita ka Adhiyan kura
06:53jata hai, phir unko har saal, haomare yao pa eek Vedik Sammilaan ho ta, Swedik Sammilaan
06:57ke ndar, har saal bachyo ko pramani joh certificate hai, whoo dee jate hai, joh ki
07:01about it.
07:31तो ये थे गुरु पंडित योगेश पारिक जिनका एक मत है कि हर घर में वेदों का उच्चारण हो, हर
07:41घर में भारतिय सनातन संस्कृती जीवित रहे और इसी उद्दिश्य से ये हर साल सैक्डो छात्रों को शिक्षित कर रहे
07:50हैं, दीक्षा दे रहे हैं और प्रयास से ही है क
07:53आगामी दिनों में चात्र अपने पैरों पे खड़ा हो सके और वेदों के माध्यम से आगे भड़ सके इस प्रयास
08:01में ये जुटे हुए हैं
08:02सेयोगी विजिंद्र के साथ अंकुर जाकर, ETV भारत, जैपुर
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