00:06नमस्कार में हूँ शमस्ताहरखान और आप देख रहे हैं हमारी खास पेशकर सीधे जंतरमंतर से
00:11बच्चे अगर घर के बाहर हो तो घर में माबाप परिशान हो जाते हैं
00:17पर जरा सोची अगर देश का भविश्य सडकों पर उतर आए तो फिर देश को कितना परेशान होना चाहिए
00:24इस वक्त जंतरमंतर हम सब को उसी परेशानी का एहसास करा रहा है
00:30अहसास करा रहा है कि हमारे देश का भविश अपने भविश और उस भविश के सपने को लेगर कितना परेशान
00:38है
00:40कि कहीं उसके भविश का सपना मरना जाए और सबसे खतरनाक होता है सपनों का मर जाना
01:15पुलिस के मार सबसे खतरनाग नहीं होती
01:26गदारी और लालच की मुठी सबसे खतरनाग नहीं होती
01:42बैठे बिठाए पकड़े जाना बुरा तो है
01:51सहमी सी चुपनी जगड़े जाना बुरा तो है
01:59पर ये भी सबसे खतरनाग नहीं होता
02:10सबसे खतरनाग होता है मुर्दा शांती से भर जाना
02:25सबसे खतरनाग होता है हमारे सपनों का मर जाए
02:38दिल्ने का जंतरमंतर यानि वो दहलीज जहां से देश का घुस्सा अपने हुक्मरानों से फर्यात करता है
02:47ये फर्यातें तरवार के किस हिस्से तक पहुँचने में काम्याब होती है
02:52इसी बात से फर्यात के गदर उसकी हैसित का अंदाजा लगाया जाता है
02:59लेकिन इस बार चोट थोड़ी गहरी है
03:02इस बार जंतरमंतर पर गम और घुस्से का आजीब संगम है
03:06किसी को छात्रों और आम लोगों का तेवार देखना हो
03:11तो उसे जंतरमंतर का नसारा ज़रूर करना चाहिए
03:15हर तरफ बस एक ही शोर है
03:18कि शायद शायद इस बार कुछ ऐसा हो जाए
03:22कि फिर किसी बच्चे के सपने को
03:24एक्जाम के नाम पर कोई चुराने की हिम्मत न कर बाए
03:29माबाप और उनके बच्चों के सपनों के हग में
03:32एक ऐसा कानून बन सके
03:34जिसके बाद हर बच्चे का मुस्तखबिल महपूस हाथों में
03:42नाइंसाफी पेमानी और भरस्टा चार का सैकड़ो साल पुराना किस्सा
03:47नई पोशाक पहन कर एक बार फिर हमारे दिलों पर दस्तक दे रहा है
03:54रगों में लहू बनकर उतर चुका इम्तिहान चोरों का कैंसर आखरी ऑपरेशन की मांग कर रहा है
04:01अवाम सियासत के बीज बोकर हकोमत की रोटियां सेखने वाले नेताओं के भविश्च का फैसला करना चाहती है
04:12ये घुस्सा एक मिसाल है कि हजारों छातर जब एक मकसद के लिए एक साथ स्कूल कॉलिज से निकल कर
04:20गांधी के बताय आंदोलन का हिस्सा बन जाते है
04:24तो हिंदुस्तान का हिंदुस्तानियत पर यकी और पढ़ जाता है
04:41महंगाई गरीवी भूक और बेरोजगारी जैसे एहम उत्तोस्त रोजाना और लगातार जूचती
04:49देश की अवाम के सामने भरस्टाचार इस वक्त सबसे बड़ा मुद्दा और सबसे खतरनाफ बीमारी है
04:59अगर इस बीमारी से हम पार पागए तो यकीन माने
05:03सोने की चड़िया वाला वही सुनेरा हिंदुस्तान
05:06एक बार फिर हम सब की नजरों के सामने होगा
05:10पर क्या ऐसा हो पाएगा
05:13क्या आप ऐसा कर पाएंगे
05:15जी हम आप से ही पूछ रहे हैं
05:18क्योंके सिर्फ क्रांती की मशाले जलाकर
05:21नारे लगाकर आमरन अंशन पर बैठकर
05:24ये सरकार को जुगाकर आप छातरों की ये जंग
05:27नहीं जीत सकते
05:29इस जंग को जीतने के लिए खुदा आप का बदलना जरूरी है
05:33तो कि भरस्टा चार और बेमानी का बढ़ावा देने में आप भी कम गुनहकार नहीं
05:41नीट एक्जाम पेपर लीक सिर्फ एक लीकिज नहीं
05:44बेमानी और भरस्टा चार का पूरा एक गटर है
05:58दिली के दिल जंतरमंतर से शुरू हुआ इंकलाब उम्मीद की किरन जगाता है
06:03कि अपने देश को इमानदार और फ्रस्टा चार मुक्त बना कर
06:07हमारे भविश यानि नौजवानों का भविश बहतर बनाने का हमारा सपना अभी मरा नहीं
06:15यह अलग बात है कि हक और इमानदारी की बात करते हुए
06:19हम अपनी जिम्मेदारियों की चर्चा तक करना नहीं जाते।
06:27और दूसरों से इमानदारी से नीत या उस जैसे दूसरे इम्तहान को कराने की उम्मीद रखते हैं
06:35बहुत से लोग ये कह सकते हैं कि जन्तरमंतर पर मौजूद छातर निरंकुश थे
06:41या सियासी लोग उन्हें इस्तेमाल कर रहे थे
06:44ऐसे लोगों को जन्तरमंतर के इस घम और घुसे को करीब से महसूस करना चाहिए
06:51ये भीर किसी वोड बैंक का हिस्सा नहीं बलकि उनकी है
06:55जो पूरे साल की बढ़ाई की महनत और अपने माबाप के सपनों के बार बार तूटने से तंगा चुके हैं
07:03अगर हम तंगा चुके इन हजारों लोगों को किसी एक नाम से पुकारेंगे
07:08तो यकीन वो नाम आंदोलन ही होगा
07:11बाकि सबाजाद हैं अपने अपने हिसाब से इसे कोई और नाम देने के लिए
07:23जन्तर यानि मशीन और मंतर मंतर के मतलब की गिंदी
07:29यानि जन्तर मंतर का मतलब हुआ वक्त और ग्रहों की गिंदी करने वाली मशीन
07:35क्या इत्दफाक है ना क्या जो जंतरमंत धरने परदर्शन और आंदोलन का पहचान बन चुका है
07:42वो गुजरे वक्त में देश की महान वैग्यानिक तरकी का सबूत हुआ करता था
07:48और ये भी क्या इत्फाक है कि 33 साल पहले 1993 में डूसू यानि दिल्ली उनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन में पहली
07:58बार जंतरमंतर पर कोई बड़ा परदर्शन किया था
08:01इसके बाद से जंतरमंतर वो जगा बन गई जो सब को जगा देती है जहां लोक तंतर सक्मुझ जिंदा नजर
08:10आता है
08:11वह इस बार भी हो रहा है इसी जंतरमंतर पर क्यों तो असल में इसकी शुरुवात इसी साल मई में
08:19हुई थी
08:19पूरे साल कड़ी मेहनत और सपनों पर नजरे गड़ाए बाइस लाक बच्चे डॉक्टर बनने के लिए नीट के इमतिहान में
08:28बैठते हैं
08:29उस इमतिहान में जिसे चोरों ने पहले ही चुरा लिया था पेपर लीक हो चुका था एक्जाम कैंसल
08:36अब सुचिए सिर्फ उन बच्चों के बारे में नहीं उनके माबाब के बारे में भी जिरोंने अपने बच्चों को डॉक्टर
08:44बनाने की हस्रत में अपनी सारी पूंजी लगा दी
08:47कुछ की पूंजी गम पड़ी तो बच्चों की खातिर घरबार बेच दिया पर उन्हें मिला क्या धोका
08:55अब अगर एक देश एक इम्तिहान तक को चोरों से न वचा पाए तो भारत का भविश घुसा तो होगा
09:03उदास और मायूस भी बहुत से तो ऐसे बच्चे थे जिनने एक्जाम के बाद लगा कि उनकी मंजिल बस अब
09:10दरवाजे पर खड़ी है
09:11इम्तिहान ही इतना अच्छा गया था लेकिन जब नीट चोरों के चोरी की दास्तान सामने आई तो ऐसे बहुत सारे
09:20बच्चे तूट गए
09:21देश भर में 20 से ज्यादा बच्चों ने अपनी जाम दे दी सोची
09:26सोच कर ही अजीब लगता है जिन्दगी का इम्तिहान तो समझ आता है पर बच्चों का इम्तिहान भी जाम लेता
09:34है
09:35उसे पहली बात तो यह है कि देखिए जो स्टूडेंट है वो स्टूडेंट का दर्द समझता है मैं भी एक
09:40स्टूडेंट हूँ
09:40मैं एमे कर चुका हूँ अभी कम्प्लीट मैं पी एजडी की तियारी कर रहा हूँ
09:44तो मैं यह कहना चाहूँगा कि आंदोलन जो हो रहा है सबसे पहले तो हमारे 90 से उपर पेपर लीक
09:49हो गए 10 साल में
09:50चोटे बड़े सम्मिला करके पेपर लीक बिलकुल नहीं जो है चाहे यूपी में हो चाहे कहिंदर में हो जिसके कारण
09:57हमारे केवल तथा कतित आंकड़ी में
09:5916 शात्रों ने जान गमाई है
10:01लायने कितने शात्रों ने जान गमाई होगी
10:04हम उनके इंसाफ के लिए
10:06और ताकि आगे ऐसा ना हो सके
10:08हमारे देस में
10:09हमारा देस एक संजीत की से
10:11पेशाए और
10:12मन और चेहन की जिन्दगी बनी रहे हैं
10:52आज आगे जाके सही कर दिया जाएगा उन बच्चों की लाइफ बापिस नहीं आएगी
11:20इतना हो रहा है तो इतना हो रहा है तो इतना हो रहा है तो आपको भी आगे जाकर नीट
11:40का एक्जाम देना पड़ेगा
11:42नीट के उन बच्चों ने युहीं जान नहीं दे दी थी बलकि उसके पीछे भी एक कड़वे सच की दास्तान
11:48थी
11:48हमारा देश दुनिया के गिने चुने उन सबसे बड़े देशों में सहे है जहां सबसे बड़ा स्कूली सिस्टम है
11:56देशपर में मौझूद 14,071,000 स्कूल है जिन में लगभग 24,70,000,000 बच्चे पड़ते हैं
12:06भारत चीन के बाद दूसरा ऐसा देश है जहां सबसे ज़्यादा ग्रेजवेट पैदा होते हैं
12:12हर साल देश के अलग-अलग कॉलेजों से करीब 50,000,000 बच्चे ग्रेजवेट होते हैं
12:18लेकिन जानते हैं, हर साल इन पचास लाग ग्रेडवेट होने वाले बच्चों में से नौकरी कितनों के हिस्से में आती
12:26हैं, सिर्फ 28 लाग, यानि हर साल औस तन 22 लाग बच्चे ग्रेडवेट होने के बावजूर बेरोजगारों की गिंती पढ़ाते
12:35जाते हैं।
12:37अब ऐसी सूरत में अगर पूरे साल की महनत के बाद एक पूरा इम्तिहान ही चोर चुरा ले जाया, तो
12:44उन बच्चों पर क्या बेटती होगी, उनके माबाप का क्या हाल होता होगा।
12:49और यहीं से ये सवाल और गुस्सा दोनों एक साथ आया, कि जिस देश का डंका पूरी दुनिया में बचने
12:56के दावे किये जा रहे हैं, वो देश बच्चों का एक छोटा सा एक्जाम भी चोरों और भरस्राचारियों से नहीं
13:04बचा पाया।
13:06सही बोले तो मेरा अपढ़ाई जस कंप्लीट हो गया, बर आई वांटेट कि मेरा जो फ्यूचर जो मेरा बहन है,
13:11जो मेरा भाई है उनको यह जो एजुगेशन सिस्टेम से चल रहा है अभी जो जो भी यह लोग कर
13:19रहे है, इजुगेशन सिस्टेम जो ठीक नहीं चल रहा है
13:21तो मैं नहीं चाती हूँ कि मेरे भाई जो मेरा बहन आने वाले उनको इस चीस से कोई प्रॉब्लम हो,
13:25इस चीस के वज़े से मैं आज आई हूँ यहाँ पर हम अपने फ्रेंज के साथ स्टेन लेने के लिए
13:29ममा ने बोला कि एजुगेशन बेसिक राइट है और हम कंट्री में यह भी बोलता है कि यूथ ही हमारा
13:36फ्यूचर है तो अगर आप अपने फ्यूचर कोई बेसिक एजुगेशन नहीं दे पा रहे हो, उनको प्रोटेस्ट करना पढ़ रहा
13:41है अपनी बेसिक नीट्स के लिए
14:04मेरा फ्यूचर की एज़ा है और इस दुट्री में तो इनको नहीं आएक हो सकता है कि जो हमारे बच्यान
14:20बच्क्री का है और 2022 की नीट्स ओस पास ने भाव धेजा
14:25कि मतलग सर्भाइब करना लोग के लिए मुश्किल हो जा रहा है कि तुमने पूरी तरह से हत्या कर दी
14:34और तुम हमारी बात सुनना ही नहीं चाहते हो
14:36सौना बंग चुप को जिस तरह से तुम उठाके ले गए हो क्या वह सही तरीका था तो इस बात
14:41का हम अभी तक तो हम यह चाहते थे कि सुने सुने
14:43लेकिन आप हम इस स्थिति में आगे कभी आर पर की स्थिति होनी चाहिए बहुत हुआ अब इसके आगे सही
14:49शक्ति बची नहीं आप कंपेर करते हो खुद को कि हम बांगलादेश से उपपर है हम पाकिसान से उपर है
14:55आप चाहिना से खुद को कंपेर करो ना वह इतना बड�
15:15लेकिन सिस्टम है हम उस सिस्टम में आगे और बढ़ना है जाना है अगर यह सिस्टम अच्छा नहीं होगा तो
15:21हम कैसे फिर आगे जा पाएंगे इस वज़े से हम खुद जगर भान के आ गया है
15:26मेरे पास एक पॉइट एक्छुली मैंने जसे एक निजस पे देखा था एक्छुली कि एक स्टुटन था जिसको दो मिने
15:31चो गया था तो एक्जाम को और नहीं बाइट ने भाइट ने दिया गया है तो यह तो दिखिए कितना
15:36सेमफूल बात है जो बंदा उतने ताइम से व
15:54कर दिया तो रेविलुशन का स्पार्क तो वहीं से आएगा तो सिस्टम से बहुत परिशान हूं और सिर्फ एक सीफा
16:02पे या एक रेजिनेशन से यह चीज नहीं बदलेगी हमें सिस्टम में बहुत बड़े
16:16स्पूर्स में ट्रांस ट्रांस वसिंओ बास फूर्ट हो रहा थां हमारी मारी आख और से समझ नहीं आ रहता है
16:25भाग़े दोड़े क्या करें करके अगर लगो
16:30को हमारे उपर मतलब यहांसे प्लान है ना कि इन्होंने पहले ही तो यह करके रखा था कि पहले हम
16:34इनको यहां तक लेकर आते हैं और फिर उसके बाद हम उन पर यह जान लेवा हमला करेंगे
16:40हम क्यों फेकेंगे पत्थर वो लोग लेकिया थे और उन्होंने फेके और फिर बात में यह बोल जिया कि स्टूडेंट
16:49फेक रहा है वो उनका अल्रेडी प्लान था कि यह सब उनको करना है और यह जो हो रहा है
16:54यह रुक जाए
16:55कि जो प्रशाशन है उसने बिना कुछ कहे लड़कियों पे लाठी चार्ज किया पत्थर बाजी की यहां के लोगों पे
17:03कि यहां पे सारे स्टूडेंट्स हैं जो लोग में सरकार से परेशान लोग हैं तो क्या यह सही है हम
17:08पे लाठी चार्ज करना हम पे पत्थर बाजी करन
17:11जो हमारी प्रशाशन ने किया है जिस तरह से बरवरता के साथ हमारे साथियों को मारा गया हमारी बहनों को
17:17मारा गया वो अशोविनी था और हमने उन्हें जब हमारे साथियों को हमारी बहनों को ये बरवरता थे मान रहे
17:28थे उसको उनको भचाने के लिए हम बैरिकेट के बाहर
17:32थे वहाँ से कूटके उनके पास हम गुलाब का फूल लेके जा रहे थे और उन्होंने हमें फूल के बदले
17:38फूल तो नहीं लिये लेकिन बदले में लठ हमारी
17:43मई में पेपर लीग के बाद बच्चे नारास थे, उदास थे, घुसा थे, छोटे मोटे मंचों से अपनी आवाज उठाने
17:51की कोशिश कर रहे थे
17:52पर तभी एक अजीब बाक्या हुआ, देश की सबसे बड़ी अदालत की सबसे उची कुरसी पर बैठे, भारत के चीज
18:00जस्टिस के मूँ से एक शब्द निकला, कौक रोच
18:04डिल्ली में सुप्रीम कोर्ट से निकले इसे एक शब्द को, अमेरिका के बॉस्टन शहर में एक भारतिये ने, मजाग मजाग
18:12में लबग लिया
18:13और उसी मजाग मजाग में सोशल मीडिया पर अचानाच, कौक रोच जंता पार्टी का जंग हुआ
18:19शुरुवात में सोशल मीडिया पर ये मजाक ही बना हुआ था
18:23इस पर मीम्स बन रहे थे
18:25सब इसे मजाक में ही ले रहे थे
18:27लेकिन असल में चुपचाप खामोशी के साथ
18:30यही कौक रोच नीट के मारे बच्चों का साथी बनता जा रहा था
18:35उदर हुक्मरानों को लगा कि कोई नहीं दोबारा नीट का एक्जाम करा लेंगे
18:40घरस तो बच्चों को है डॉक्टर बनना है तो वो इमतिहान में बैट भी जाएंगे
18:46लंबे चोड़े दावों के बीच पहली बार दुश्मन देशों की सरहतों के अंदर जाने वाले
18:52बायू सेना के जहाजों को डॉक्टरी के सवाल जवाब वाली पर्चियों यानि पेपर एक्जाम सेंटर तक भीटना पड़ा
19:00तब कहीं जाकर बच्चों के इमतिहान पूरे हुए और फिर रिजल्ट भी आ गए
19:05तो सवाल है कि जंतर मंतर पर बच्चों का फिर यह हूं कहां क्यों
19:16आज हम लोग जब आप से नियाय मांगने आये हैं तो आप आसोगेस के गोले क्यों छोड़ रहे हैं
19:21बिल्कुल भी संबेदन सील नहीं है क्या आप की संबेदना कहां गई है जिन से चुनकर आप आते हो उनी
19:28को तुम कुत्तों की तरह भगाते हो तुम्हें शर्माने चाहिए
19:32अब बात उस शिक्षा की मुद्दे से उपर आ गई है कि धर्मेंद्र ब्रदान जी का स्तीफा मांगा जा रहा
19:37था तो अब मैं कहूंगी कि प्रदान मंत्री जी कहा हैं सो रहे हैं वो क्या देश को चला रहे
19:44हैं क्या हैं क्यों उनसे एक स्तीफा नहीं मांगा गया तो यही �
19:54इतने पेपर लिख हुए सभी बच्चे का मेहनत समझे कैसे बच्चे मेहनत करते हैं और दिन दिन भार रात रद
20:00बजाक के एक पेपर निकालने के लिए इतने संघर्ष करने तुछ संघर्ष को समझे धर्मेंद परदान
20:23अब सरकार को ये समझ लेना चाहिए कि उसकी ताना साही नहीं चलेगी इंडिया में डिक्टेटर्सिप नहीं चलेगा
20:33हमारे पेरेंश इतने कैपेबल नहीं है मैं मैं कि ये जो टिउसन का इतना हाइयर पी है वो बार-बार
20:39हम पे दे सकते हैं हम तो कोई सब्या चैयल नहीं है मैं कि सिर्फ हम ही को पढ़ाएंगे और
20:44भी बाई बैन हमारे होते हैं पढ़ने के लिए और मैं एक बार पेपर ली�
21:01कि वो लोगों के लिए मजाक में पेदा हुआ काउकरोच अब जंतर मंतर पर पहट चुका था
21:19मुद्दा और मांग बड़े सीधे साथे थे
21:22पढ़ाई के एक्जाम और तरीके अच्छे
21:25और पढ़ाई की फील के देश के सबसे बड़े उस्ताद
21:28यानि शिक्षा बंत्री
21:30नीट एक्जाम में फेल होने के बाद स्कूल से निकल जाए
21:34यानि अपनी कुर्सी छोड़े
21:36मांग सीधे बच्चों से जुड़ी थी
21:39कौक रोच नया गया
21:41और नई चीज हमेशा अपने साथ नई उमीदे लाती है
21:44लहाजा देखते ही देखते अब सोशल मीडिया के परदे के बाहर
21:49हकीकत की जमीन पर भी बच्चे कौक रोच से जुड़ते चले गए
21:53अब भी सब कुछ शान्त और ठीक ठाक चल रहा था
21:56पिर तभी लटाक के समाच सेवी सोनम वांग चुटे जंतर मंतर में एंट्री होती है
22:02पिर वो अचानक आमरन अन्शन का एलान कर देते हैं
22:06भूख हर्ताल शुरू हो जाती है कई दिन भी जाते हैं पर होता कुछ नहीं
22:11लोग जंतर मंतर पर आते हैं और वीकिंड की छुट्टियां जैसी छुट्टियां मनाकत लोट जाते हैं
22:18पर जैसे जैसे भूख हर्ताल के दिन बढ़ते गए
22:21अचानक लोगों को 15 साल उनाना चंतर मंतर यादा ने लगा
22:26लगा 2011 का अन्ना हजारे का अंदोलग
22:31वो अंदोलग जिसमें पहली बार नई नसल में अन्ना हजारे में गांधी को देखना शुरू कर दिया था
22:37बीदते दिनों के साथ सोनम वांग्चुक की तवियत भी बिगंडे लगे थी
22:42वजन तेजी से बिर रहा था
22:44ऐसे में कोई दिल्ली हाई कोट पहुँच गया
22:46इस वर्यात के साथ कि सोनम वांग्चुक की चान बचाई जाए
22:50यानि उनका आम रनंशन खत्म करवाया जाए
22:53दिल्ली हाई कोट में तुरंट एक फैसला सुनाया
22:56कहा सोनम वांग्चुक की जिन्दगी प्रिंती है
22:59उनकी सेहत का खया लखा जाए
23:01बस हाई कोट का इतना भर कहना है
23:04दिल्ली पुलिस को एक हथियार दे गया
23:06बीस जुलाई से संसत का वांसूम सत्र शुरू होने वाला था
23:11सोनम वांग्चुक ने पहले ही एलान कर रखा था
23:14कि उस दिन सभी जाथ संसत भवन तक मार्च करें
23:18लेकिन उससे पहले आचानक दिल्ली में हर्चल तेस हो जाती है
23:22सत्रा जुलाई की सुबा अचानक दिल्ली के पुलिस कमिशनर को पतल दिया जाता है
23:26नए कमिशनर की पहली मीटिंग जंतर मंतर को लेकर होती है
23:31पूरी शाम और रात तयारी होती है
23:33और फिर अठारा जुलाई की सुबा सुबा
23:36सोनम वांग्चुक के आमरन अंशन के ठीक पीसवे दिन डॉक्टरों का भेज बना कर दिल्ली पुलिस उन्हें जपरन मंच से
23:44उठाकर सब्दर्जन अस्पतार ले जाती है
23:47लगा अब 20 जुलाई का संसद मार्च मुम्किन नहीं
23:50क्योंकि दिल्ली पुलिस ने सोनम वांग्चुक के हटाने के साथ साथ जन्तर मंच को भी खाली करने का फर्माद चारी
23:57कर दिया था
23:59लेकिन शायद दिल्ली पुलिस उस जन्तर मंच का मतलब भूल बैठी थी
24:04जिसका जन्मी समय और ग्रहों की गिंती करने के लिए हुआ था
24:0820 मार्च को हजारों बच्चे अपने समय और ग्रहों को बेतर बनाने
24:13एक बार फिर उसी चंतर मंतर पर बहुत चुगे थे
24:17उदर पुलिस भी तयार थी बच्चों को रोकने के लिए
24:20और इधर बच्चे भी तैयार अपनी आवास हुकमरानों के कानों तक पहुँँचाने के लिए
24:26लाठियां चले रोते हुए बच्चों के आशु zooming को आशु गैस की गोले से और ज्यादा भिगोया गया
24:33कुछ को गिराया गया, कुछ को उठाया गया
24:36कुछ थाने पहुँचे, कुछ हस्पतार
24:38और कुछ जो वापस घर लोटे
24:41तो ये सोच कर लोटे
24:43कि अपने सपनों में रंग भरने के लिए
24:45वो वापस फिर लोटेंगे
24:47इसी जंतरमन तक तर
24:49क्यों भी ये कैसा अंदोलन है
24:51जिसके आवास को नजर अंदास
24:53नहीं किया जा सकते
24:59सबसे खतरनाक होता है
25:01मुर्दा शान्ती से भर जारा
25:10तड़पका नहों
25:12सब कुछ सहिन कर जारा
25:27घर से निकलना काम तर
25:29और काम से लोटके खरारा
25:36सबसे खतरनाक होता है
25:38मुर्दा शान्ती से भर जारा
25:44सबसे खतरनाक होता है
25:46हमारे सब लोगा पर जारा
26:03जंदर मंदर से हमारी इस खास पेशकर्ष में फिलाल इतना है
26:07देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए
26:09आप देखते रही आज़ता
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