00:00चोल सामराज्य का समुद्री खजाना, तमिलनाडू, दक्षिन भारत, तथा चोल सामराज्य, चोल राजाओं के पास इतना धन था, कि उनके
00:06एक मंदिर, ब्रहदेश्वर मंदिर को बनाने में जितना सोना लगा, वो आज की किसी भी सरकार के बस की बात
00:11नहीं, राजराज चोल
00:12प्रथम ने 110 इसवी में इस मंदिर को बनाया, इसके शिखर पर 80 टन का पत्थर बिना किसी क्रेन के
00:18उपर चड़ाया गया, आकिन चोलों का असली खजाना मंदिरों में नहीं था, वो समुद्र में था, चोल राजाओं ने अपनी
00:24सबसे कीमती संपती, सोना, हीरे, मानिक, सम�
00:29हिंद महासागर की गहराईयों में छुपाई थी, 1289 में जब चोल सामराज्य का अंत हुआ, तो उनके आखिरी राजा ने
00:35वो खजाना समुद्र में डुबो दिया, हमेशा के लिए, तमिलनाडू के तटपर, पामबन द्वीब के पास, और रामिश्वरम के आसपास,
00:43समुद
00:55आज भी पास समुद्र की गहराई में चोल सामराज्य की याद दिला रहा है
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