00:0020 तारिक, 21 तारिक, आज 22 तारिक
00:05समझने आरा
00:08ये कैसे रुकेगा, ये कौन रुकेगा, इसके लिए क्या किया जाए
00:15क्योंकि इंसानियां तो खत्म हो गई है, इंसानियां तो नहीं है
00:20मत्तब आप सूचिए कितने हिरानी की बात है
00:25कि अभी भी बहुत सारे लोग चुब बैठे हो है, मत्तब आप अपनी जगा बचाने की चक्कर में है
00:34आप ये सोच रहे हैं कि अगर आपने बोला, तो ये सरकार आपके अगेंस्ट हो जाएगी, आपका काम बंद हो
00:40जाएगा
00:41आप कुछ काम नहीं कर पाएंगे, अपना बड़ा नाम नहीं कर पाएंगे, आप उससे डरे बैठे हैं, शर्मानी चाहिए
00:50अरे इनसादियर तो जगा हो, उन बच्चों को देखो, जो बच्चे दूर हैं, जो बच्चे बिलक रहे हैं, जो बच्चे
00:57पिट रहे हैं, जो खून बाहार हैं, जो अपनी लड़ाई लड़ रहे हैं, अगर आज हमारे बच्चे लंडन, अमेरिका और
01:05पता नहीं कहां कहां
01:06पहुंच गए हैं और अपने घर में सुरक्षित हैं तो हमारे इंसानियत मर गई
01:12मत्तब उन बच्चों से आपको कोई हमदर्दी नहीं हो रही है आप अपने घर में बुझेवे हैं यह जो बड़े
01:17बड़े नाम है शर्म मनी चाहिए इंसानियत तो जगाओ
01:23सिर्फ इस वज़े से कि तुम्हें चार काम बन दो जाएंगे तुम्हारे भुछ सारे awards बन दो जाएंगे उस लिहाज
01:31से घर में बैठे वे हो इस वक देश को हर इंसान की जरूद है हर शेत्र से इंसान की
01:38जरूद है किसी भी पेशे से जो भी बड़े लोग है उनके support की जरू
01:47सेवे हैं तकि हमें अपनी अपनी जगा बचानी है हमें अपनी इज्जत बचानी है
01:54और आपको क्या लगता है ये जो आज बच्चे सड़क दो दो आज बच्जे मार खा रहे हैं फून बाहर
02:02कि कि कल आपका साथ देंगे किस के फिरूसे सरकार के फिरूसे बड़े बन良गे अरे ज़से रख हो जायगी जनतफांगी
02:11आपकी अपनी स्रकार क्या कर लहीं है शर्मानेच आई शर्म
02:16मानी चाहिए सबको तीन दिन हो गए इतना हाल खराब हो रहा है जैसे अपने घर का कोई बच्चा मर
02:23रहा है
02:26पता नहीं कौन लोग हो आप कोई अबाज ही नहीं उठा रहा है इतना डरते हो है डर पोग लोग
02:35हो तुम लोग शर्मानी चाहिए घरों से निकलो बोलो बच्चों का सहोग दो
02:44हेड्स ओफ शाबाना आजमी जी मैं फैन होगी उनकी बहुत जब्रदस की इस उमर में उस औरत ने वहां जाटकर
02:51कंदे से कंदा मिलाया है
02:54मैं अगर अपने अपने इस वक्त अपने प्रॉब्लम से जूज नहीं रही होती मैं भाग जाती मैं उन बच्चों के
03:02साथ लाठी खाती
03:07शर्म कर लो बहुत गंदे लोग हो तुम लोग तो यार बहुत ही गंदे हो
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