00:19तो देश का बड़ा तबका ही मानता है, तो किसी न किसी को तुम्य का तुम्य का दीदक होती हैं
00:25तो तो तो रही है
00:26बार बार गड़बडियां हो रही है तो उनके साथ के लोगों ने को जुम्मेदारी देने को तयार नहीं है
00:43उन्होंने अपना अमड़नांसं किया भाई हम बैठे हैं नहीं खाएंगे पीएंगे इसी तरह से परिवार में दबाव ढाला जाता है
00:50प्रिवार का कोई भिविविटी नहीं खाता भीता है तो घरके लोग सिंद्न हो जाते हैं के इसके से अध्यले के
00:56लिद कर जाये
00:56डिकत हुझा है उसका मनाते हैं कि नहीं निड़ीव कर खालो, अम तभारे बात ऐसा करेंगे , ऐसा करेंगे, कैसे
01:02भी कर करनेर निकाला
01:03तो यह परिवार में होता है, जब यह भारत देश की परिवार का तब यह सब्सक्राइब चलती थी, आप खन
01:11अभी ना शोड़ते थे, तो आप सरकार आकर कि किसी ना किसी बात हैं से कभी इनको बेश्टे तब उनको
01:17बेश्टे आप सुरू करती थे, आप देखिए, तो आप �
01:46किसी को कोई मतलब ने कह दिया, इनकी जान की रक्षा करना
01:50तुम्हारी दिय्मेदारी है, तो उनको चाहिए था, कि कुई रास्ता निकालके उनकी रख़ा कर देगे, लेकिन उनहोंने क्या रास्ता निकाला
01:58कि की दाक्टरों को, पूलिस्षवालों को गाकर का भेश पे Kirश
02:02है सबेद सबेद कोट पेना दिया और आला कले में टंगवागी और अचानक सबेरे जिस समय सब तो कापिल रहते
02:10हैं तो सबेद सबेद कपड़ों में चुपा करके उनको लठीली में लेते चाले किया जा रहा है कि कोई भी
02:26संकारी है उसके बारे में यह है
02:33लेकिन उसकी गडिमान में कोई वंग नहीं होना चाहिए अब देश जो है उसके ही रास्ते पर जा रहा है
02:43जहां पर तुझा को चंता करने की आवस्यक्ता है कि आगे चल करके क्या होगा ऐसा नहीं होगा यूतर को
02:51लिया की तरह से हमको
02:54अब साशक का बोटो देखते ही साश टांग करना पड़ जाएगा चाहिए हम अंदर से कोई भी भी भाव रहते
03:00हैं तर का ये वाता बरण पैदा किया जा रहा है तो थी प्रवाग्दपुर्ण है
03:16प्रवाग्दपुर्ण प्रवाग्दपुर्ण
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