00:00सब्द का कभी अंत नहीं हो सकता है और धेर सारी गैलेरियों में मैं तो आश्चरे चकीत हो गया मेरे
00:08देखने के लिए 5 मीट रखे थे मगर पूरा 28 मीट तक मैं देखता रहा और मैं आज इन्होंने इतना
00:17परिश्रम करा है उनको बता कर जाता हूं मैं धाई 3 गंटा निकाल कर
00:21यह पूरे सब्द मुझयम को जरूर देखना चाहूंगा यह मेरी इच्छा है हमारे यहाँ संकुचित्ता का कोई भाव उत्पन हो
00:34ही नहीं सकता क्यूंकि हमारे विचारों की पद्धती में ही संकुचित्ता व्यापत नहीं है हम जब भूमी पुजन करते हैं
00:45सान्त्री मंत्
00:51करते हैं वनस्पति में भी सान्ति की कामना करते हैं यहां तक कि ब्रह्मान्ड में भी सान्ति की कामना करते
00:58हैं संकुचित्ता यह भारतिय संस्कुर्ति का कदापी चिन्ह नहीं बन सकती परन्तु हमारा जो है इसको आगे बढ़ाना उसमें सर्म
01:14नहीं होनी चाहिए
01:16विशाल, विचार, विशाल, रदे की व्याख्या इस तरह से कर दी गई
01:21कि हम दूसरोंक में गवरव लेते हो गए, हमारे को हम भुल गए
01:26मैं मानता हूँ कि ये सब्द मिज्यम हमारी भासाएं, हमारी संस्कूर्थी
01:32उसको चीर काल तक हमारी आने वाली पिडियों को सिक्सित भी करेगा, इससे संस्कूर्थी का परिचय भी करेगा
01:42और उनको जीने का रास्ता भी सिखाएगा, हमने कभी विचारों पर पहरा नहीं लगाया
01:51सूर्थी के साथ समवाद हुआ, दर्सन के साथ सास्त्रार्थ हुआ
01:58और परमपराओं के साथ हमने निरंतर नवाचार को स्विकारा है
02:03और आज जब मैं पुरा मिज्यम देखकर आया हूँ
02:07तब ओमकार से लेकर, सब्द की रचना से लेकर, व्याकरण की रचना से लेकर, सुरूती समृती से लेकर, पांडु लिपयो
02:21और सिला लोख्यों से लेकर, प्रिंटिंग मसीन तक एक पूरा मुजयम सब्द की यातरा को व्रनीत करता है
02:29मेरा संस्क्रूती सच्चीव जी से निवेदन है कि इसको अब आप कॉम्पीटर और AI तक भी पहुचा दिजे जिससे हमारी
02:41भासाये पूर्ण तयास शुक्रूत है
02:44मित्रो बंगाल भारतिय चेतना का समगर भारतिय चेतना का एक वैस्विक प्रकास तंब रहा है
02:54एक लंबा कालखंड आया जब हमारी भारतिय सांस्कूरूतिक चेतना को बंगाल से विमुक करने का प्रयास किया गया
03:04संकुचित वितारदाराएं विदेश की विचारदाराएं इन्होंने बंगाल को अपने देश और दुनिया को योगदान करने की समता को क्षीन कर
03:15दिया
03:17यह बंगाली है जहां महरसी अर्विंद जन में थे जहां विवेकानन्द और रामकृष्ण जन में थे जहां चैतन्य महाप्रभू हुए
03:27थे
03:40यह बंगाली है जो हमेशा देश से पांच दसक आगे रहकर देश का मार्ग दर्शन करता था
03:48मुझे पूरा विश्वास है अब समय आ गया है भारतिय चेतना के यह बहुदिक प्रकास्तम को
03:57फिर से एक बार अपने पूरी सक्ति के साथ पूरे विश्व की चेतना को जगाने का प्रकास्तम फिर से बनाने
04:06का
04:06नरेंदर मोदी जी के नेत्रुत में सुवेंदू बाई के नेत्रुत में यहाँ जो परिवर्तन हुआ है
04:13मुझे पुरा विश्वास है
04:14मैं नो सपता से बंगाल
04:16सरकार की एक एक गति विद्य को
04:19देख रहा हूँ
04:19बंगाल देखते देखते
04:23भारतियच्चितना का
04:24प्रकास महे प्रकास तंब
04:27बन जाएगा इसका मुझे
04:28पूरा विश्वास है
04:30ये बंगाल ने
04:32इस्वर चंद्र विध्यासागर, स्वामी विवेकानन, बंकिम चंद्र चटोपाद्याई जी, रविंद्र नाथ ठाकूर, कई सारे ऐसे महापूरुष्टिये जिन्नोंने भारतिय चेतना को
04:48आगे बढ़ाया।
04:49और भारत को समझना है, तो महरसी अर्विंद को पड़े बगर आप भारत को समझ ही नहीं सकते हैं।
05:19और पूरे विश्व को अपना सबसे अच्छा देने का प्रयास करेगी।
05:25मित्रो, यहाँ पर जब मैं आया हूँ तब युवापिडी को खास कहना चाहता हूँ कि
05:37सब्द को समझे, भासा को समझे, उच्चारणों को सुद्ध कर दीजिये, और व्याकरण को आत्मसाथ करकर आपकी अभिव्यक्ति को प्रभावसाली
05:49बनाईए, वो समाज में आपकी स्विक्रूती को अनेक गुना बढ़ा देगी, यह मेरा अनुभव है।
05:56मित्रो, आज हर्स का विशय ये भी है कि जब पुरा देश वंदे मात्रम का देड़ सोवा वर्स मना रहा
06:09है, तब इस सब्द संग्रालय का उद्गाटन हो रहा है।
06:13यहां मंच पर खड़े रहकर वंदे मात्रम का पूरा गान हम सुनते हैं, तब हमें मालूम पड़ता है कि भारत
06:23माता के प्रती मेरा भाव क्या होना चाहिए।
06:26और यह इतने बड़े बोध से आजादी के 76-77 साल तक देश अंजान रह गया।
06:36आज हर स्कूल में वंदे मात्रम पूरा गाया जाता है, इस से बड़ा वर्स कोई होई नहीं सकता और उसी
06:46वर्स में सब्द संग्रालय की स्थापना हुई है।
06:50मोदी जी ने 2024 में बांगला को सास्त्रिय भासा का दर्जा दिया, इस भासा का सास्त्रिय भासा का दर्जा बांगला
06:59को मिलना एक कब से डू था, उसको भी मोदी जी ने समाप्त करा और स्यामा प्रसाद मुकर जी का
07:08भी 125 साल समाप्त हुआ है।
07:11और सामाप्रसाद मुकर जी ही थे जिन्होंने कलकत्याई विश्वी डाले में जब वो युवा कुलपती बने तब कवी गुरु टागोर
07:21से दिक्सान्त संबोधन कराया था और पूरी भारत की इन्युवर्सिटियों में अंग्रेजे कोई कालखन में पहला बांगला बासा में
07:31दिक्सान्त प्रवचन सामाप्रसाद मुकर जी ने कवी वर टैगोर से कराया था और मित्रो आज बंगल फिर से सोनार बांगला
07:43बनने की दिशा में आगे बढ़ा है मैंने सुभेंदू जी को बहुत भाव के साथ एक पत्र लिखा है जो
07:50मेरे मन के भाव थे वो एक पत्र में
07:53लिखे हैं मैं मुझे आसा है कि सुभेंदू जी जरूर ये बात को पूरी भी करेंगे और गुरू और टागोर
08:01का ये जो स्वपन है उसको भी पूरा करूंगे मित्रो हमने कई सारे हमारे महर्शियों ने सब्द के लिए बहुत
08:12कुछ कहा है मगर मैं कहना नहीं चाहता बड�
08:21मैं जरूर कुछ कहना चाहता हूं मनुष्य समत्ता है कि भासा को हमने बनाया है मेरी बात ध्यान से सुनना
08:29मनुष्य समत्ता है कि भासा को हमने बनाया है मैं मानता हूं कि भासा ने मनुष्य को बनाया है मनुष्य
08:38बनाया है हर एक में जीव होता है मगर वो मनुष्य तब होत
08:46होता है और भासा ही भाव को जागरूत करती है ये भासा का जो मूल है वो सब्द है और
08:54अपनी भासा के सब्द है ये दोनों को ए इस ब्द मुजयं आगे बढाएगा � strictly
09:01में आज यहां आया हूँ, तब एक बात भी कहना चाहता हूँ, पांच सुत्र भासा के लिए मैं हमेशा से
09:11इसका आगरही रहा हूँ, आज बताना चाहता हूँ, परिवार की भासा ही पहली पाट साला बढनी चाहिए, मा की भासा
09:21में ही बच्चे ने पढ़ना चाहिए,
09:24विद्यालेव और विश्व विद्यालेव कौपी करने से और अनुवाद करने से आगे निकल कर मौलिक चिंतन करने का कैंडर बने,
09:33तो ही हम सुरुजन में अपना योगदान दे सकते हैं, किसी ने लिखा है उसको पढ़ने में कोई आपत्ती नहीं
09:40है, मगर इसको ज़स्का तस
09:42मत स्विकार कर लिए, चिंतन की कोई सिमा नहीं होती है, उसके अनुभाव, अपनी बासा और अपनी बुद्धी के प्रकास
09:50में इस पर विचार करी है, और मौलिक चिंतन की सुरुवात विश्व विद्यालेवने करनी चाहिए, हर भारतिय बासा को डिजिटल
09:59और AI सक्सम बन
10:01कर इसको एक हजार साल की और आईश्य देने के लिए सभी ने प्रयास करना चाहिए, मुस्तकाले और संग्रहाले सिर्व
10:12भवन में सिमित नहो, इसके अंदर जो भावनाय कूट कूट कर पड़ी है, वो युवाव तक पहुँचे, किसोरों तक पहुँचे,
10:21इसके लिए अभ
10:29आईश्य शिखे, तो हम ना सिर्फ अपनी मात्रू भासा को, भारत की सभी भासाओं को एक लंबा आईश्य देने में
10:37हम आगे बढ़ सकते हैं, ये पांचों बात, अगर आज सरकारें, सिक्सावेवस्ता और विशेश कर देश की जनता सिखाती है
10:50और अपनी अग्डी पिड
10:52भासाओं की सेवा में बहुत बड़ा काम कर पाएंगे, हम दर्ती बंगाल की है, भारती संस्कूरती का इसको प्रकास सब
11:04लोग मानते हैं, यहीं से आज संकल्ब करें कि सब्द से संस्कूरती को हम ताकत देंगे, संस्कूरती से हमारा आत्मविश्वास
11:15जगाएंगे और आत
11:20भारत हम दो हजार सेहतालिस में बनाकर हमारा स्वपन पूरा करेंगे भारत माता को विश्वगुरु के स्थान पर रखने का,
11:29और मैं मानता हूं इसकी नेव, इस सब्द संग्राले बनेगा, इसका एक बहुत बड़ा उपकरन इस सब्द संग्राले बनेगा, रदय
11:38से यह द
11:49मोदी जी ने देश के सामने, देश की सरकार के संग्राले के सामने एक उत्तुंग कल्पना रखी कि सब्दों का
11:58एक मिज्यम बने और इसकी अभीव्यक्ति ऐसी हो, जो सब्द का परिचाय सहाजीक्ता से हर व्यक्ति को करा सके, हर
12:06नागरिक को करा सके, उसको आप दोनों ने म
12:09किलकर चरीरत चरीदार्द किया है मेरी अनेक अनेक सुपकामना है वन्दे मात्रम
12:16अमादेर वीडियो भालो लग लें लाइक एबंग शेर कुरून
12:19कामेंट सेक्षेन एक एज जानान अपना देर मोता मोत
12:22आड़ो वीडियो पे ते आमादेर चैनेल सब्सक्राइब कुरून
12:24एबंग प्रोती मुँँ ते खबरेर अपडेट पे ते प्रेस कुरून बेल आइकोन
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