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  • 4 months ago
भारतीय मूल के नासा अंतरिक्ष यात्री डॉ. अनिल मेनन अपने पहले अंतरिक्ष मिशन पर सोयुज़ MS-29 के जरिए इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन (ISS) के लिए रवाना हो गए हैं. कजाकिस्तान के बैकोनूर कॉस्मोड्रोम से लॉन्च हुए इस मिशन में उनके साथ दो रूसी कॉस्मोनॉट भी शामिल हैं. अनिल मेनन करीब आठ महीने ISS पर रहकर माइक्रोग्रैविटी में मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव, अंतरिक्ष में इंट्रावीनस फ्लुइड तैयार करने की तकनीक, सेमीकंडक्टर क्रिस्टल निर्माण और AI आधारित मेडिकल तकनीकों पर महत्वपूर्ण शोध करेंगे. केरल मूल के अनिल मेनन पहले नासा फ्लाइट सर्जन और स्पेसएक्स के मेडिकल प्रोग्राम से जुड़े रहे हैं. यह मिशन भविष्य के डीप-स्पेस अभियानों और अंतरिक्ष चिकित्सा के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.

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00:05बार्दिय यूक्रेनी मूल के नासा एस्ट्रोनॉट डॉक्टर अनल मेनन सोयूज MS-29 अपने दो रूसी क्रूमेट्स के साथ इंटरनाशल स्पेस
00:14स्टेशन के लिए सफलता पूर्वक रवाना हो गये।
00:17इसी मिशन का लॉंच मंगलवार को कजाकिस्तान के बैको नूर कोस्मो ड्रोम से हुआ।
00:47जबकि उनके साथ ही रूसी कॉस्मो नौट प्योत्र दुब्रोव और अन्ना कीकीना का ये दूसरा मिशन है।
00:54अनल ने 2014 में नासा फ्लाइट सर्जन के तौर पर अपना करियर शुरू किया था और सोयूज मिशनों के लिए
01:01ड्यूटी क्रू सर्जन रह चुके हैं।
01:042018 में वो स्पेस एक्स से जुड़े थे जहां उन्होंने कमपनी का मेडिकल प्रोग्राम शुरू किया और पाँच लौंच के
01:12लिए लीड फ्लाइट सर्जन के तौर पर काम किया।
01:15उसके बाद जन्वरी 2022 में उन्होंने नासा एस्ट्रोनॉट कैंडिडेट के तौर पर दो साल की ट्रेनिंग शुरू की थी। अब
01:23आखिरकार उनका पहला स्पेस फ्लाइट मिशन शुरू हुआ है।
01:27इंटरनाशल स्पेस स्टेशन पर आठ महीने रहते हुए अनिल मिनन लंबे समय के माइक्रो ग्राविटी वातवरण में मानव शरीर पर
01:36पढ़ने वाले प्रभावों का अध्यान करेंगे।
01:38साथ ही ISS पानी से इंट्राववीनस फ्ल्यूड बनाने की टेकनोलिजी की स्टडी करेंगे।
01:44ये डीप स्पेस मिशनों में बहुत महत्वपून साबित होगा।
01:48सेमी कंड़क्टर क्रिस्टल इंड स्पेस प्रोडक्शन का अध्यान करेंगे।
01:52जिससे हाइप पर्फॉर्मेंस कंप्यूटर, आर्टिफीशल इंटेलिजन्स चिप और मेडिकल डिवाइसिस के लिए बहतर कंपोनेंट बनाने में मदद मिलेगी।
02:01और एयाई बेस्ट अल्ट्रा साउंड टेकनोलिजी की स्टडी करेंगे।
02:06इससे स्पेस मिशन में प्रिथवी से रियल टाइम मेडिकल सपोर्ट की जरूरत कम हो जाएगी।

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