00:04शादियों की वो मेठी धुन और शहनाई की वो गूंज, क्या आपने हाल फिलाल में सुनी है?
00:19शायद नहीं, क्योंकि अब शादियों का मतलब सिर्फ और सिर्फ डीजे का ये कान फोरू शोर रह गया है
00:31नालंदा के बिहार शरीफ में कभी शादियों की शान कहे जाने वाले पारंपरिक बैंड बाजे आज खुद दम तोड़ रहे
00:39हैं
00:39कल तक जिन कलाकारों के बिना शादियां अधूरी थी, आज वो पेट पालने के लिए मज़दूरी करने को मजबूर है
01:01नवाब बैंड की संचालक गोल्डन कहते हैं कि उनका परिवार तीन पुष्ट से बैंड बाजा का काम करते आ रहे
01:08हैं
01:08दादा के बाद पिता और आज गोल्डन इस परमपरा को निभा रहे हैं
01:12लेकिन इस्थिती पहले जैसी नहीं रही, अब तो काम भी नहीं के बराबर मिलता है
01:19ये बेवासाई का भी बुरा हाल है
01:36ये वो बिहार है जिसने देश को भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्ला खां जैसे शेहनाई वादक दिये
01:43लेकिन आज इसी मिट्टी में डीजे और ट्रॉली के चलते बैंड का कारुभार 75% तक घट चुका है
02:05ये शोर सर्फ रोजगार नहीं छीन रहा बलकि बहरापन और हार्ट टैक जैसे बिमारिया भी बाट रहा है
02:12नालंदा के कलाकारों ने कहा कि वक्त आ गया है कि सरकार और समाज मिलकर इस दम तोड़ती सांस्कृतिक धरुहर
02:20को बचाएं
02:20इचवी भारत के लिए नालंदा से महमूद आलम की रपोर्ट
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