00:02पुतिया तूदवाला
00:32अर्जुन को बताया गया था कि शिवपुर जाने वाली आखरी ट्रेन रात के ग्यारा बज़े आती है
00:38लेकिन अब बारा बजने को आये थे और पटरी पर दूर दूर तक किसी रोशनी का नामों निशान नहीं था
00:44अजीब बात है ग्यारा बज़े की ट्रेन थी और अब बारा बजने को आये हैं तो भी शिवपुर गाउं की
00:51ट्रेन स्टेशन पर पहुँची नहीं
00:53पिता जी और मा स्टेशन पर मेरा इंतिजार कर रहे होंगे फोन भी नहीं लग रहा यहां तो
00:58तबी उसकी नजर सामने स्टेशन मास्टर के केबिन पर पड़ी
01:02ठक हार कर अरजुन प्लाटफॉर्म के कोने में बने उस पुराने केबिन की ओर पढ़ा
01:08जहां दरवाजे के सामने स्टेशन मास्टर अपनी कुरसी पर बैठा हुआ था
01:26बेटा शिवपुर जाने वाली ट्रेन वक्त देखकर नहीं चलती
01:30वो तो रूहों की मर्जी से चलती है
01:36मेरी बात सुनो
01:37तुम अभी इसी वक्त स्टेशन से वापस घर लोट जाओ
01:48क्या बक्वास कर रहे हैं आप
01:50मुझे सही सही बताइए ट्रेन कब आएगी
01:53बस बेटा तुम्हारी शिवपुर की ट्रेन अब आने ही वाली है
01:58बस पटरी पर दिखने की देर है
02:00पर याद रखना
02:01शिवपुर गाओं के स्टेशन पर उतरना तो आसान है
02:05लेकिन वहां से निकलना बहुत मुश्किल
02:08इसी लिए मेरी बात मान लो
02:10तुम अभी यहां से वापिस लौट जाओ
02:13स्टेशन मास्टर की ये डरावनी बाते सुनके
02:16अरजुन डर के मारे पीछे हट जाता है
02:20अचानक उसके पीछे एक इनसान आकर खड़ा हो जाता है
02:23वो पानी की बोतलें बेच रहा था
02:27जिसके चहरे पर अजीब सी खामोशी थी
02:31साहाब पानी की बोतल लेंगे क्या?
02:34एकदम थंडा थंडा बर्फ का पानी है
02:36गला सूखरा होगा तुमारा
02:39सिर्फ बीस रुपे की है
02:41देदू
02:43शिफपुर का रास्ता बहुत लंबा है बेटा
02:45और प्यासा भी
02:48तुमको पानी पी लेना चाहिए
02:49नहीं चाहिए मुझे पानी की बोतल
02:53ये बताओ
02:54ये स्टेशन मास्टर कैसी अजीब बाते कर रहे है
02:57बेटा
02:58यहां जो दिखता है वो होता नहीं
03:01और जो होता है
03:02वो किसी को दिखता नहीं
03:05स्टेशन मास्टर तो बस तुम्हें
03:06चेतावनी दे रहे थे
03:08शिफपुर का वो पुराना स्टेशन
03:10अब वहां मुसाफिर नहीं
03:13सिर्फ यादें उतरती है
03:14अर्जुन को पानी वाले की बातें और भी डरावनी लगी
03:19अचानक दूर अंधेरे से कट कट करती हुई
03:22जोर से ट्रेन की सीटी की आवाज गूंजने लगी
03:26लोहे की पट्रियों में एक अजीब सी थर्थराहट होने लगी
03:30अर्जुन ने राहत की सांस ली
03:32जाओ बेटा, तुम्हारी शिवपुर की ट्रेन आ गई है
03:37तुम्हें तुम्हारी मंजिल बुला रही है
03:40पर ध्यान रहे, सफर के दौरान पीछे मुर कर मत देखना
03:45चाहे कोई भी पुकारे
03:48स्टेशन मास्टर की बात समकर
03:50अर्जुन शिवपुर ट्रेन की ओर बढ़ा
03:52जब अर्जुन ट्रेन के पास पहुँचा
03:54तो उसके मन में अजीब सी घुटन सी हो रही थी
03:59उसका मन कह रहा था कि वहां से भाग जाए
04:02पर माता पिता की चिंता
04:04उसे उस मन्हूस ट्रेन के डिब्बे के अंदर
04:06खीच ले गई
04:08जैसे ही उसने पैर अंदर रखा
04:11ट्रेन बिना किसी जटके के सरकने लगी
04:15अंदर सनाटा इतना गहरा था
04:17कि अर्जुन को अपनी ही धरकने सुनाई दे रही थी
04:21ये क्या?
04:22प्रेन के अंदर तो कोई भी इंसान नहीं है, सब इतना धुंदला क्यों लग रहा है मुझे?
04:27और ये कैसी गंध है इस ट्रेन के टिब्बे में, जैसे बरसों से बंद किसी पुरानी हवेली की हो?
04:34खिरकी के बाहर पेड पौधे नहीं, बलकि सफेद धुंद तेजी से पीछे छूट रही थी.
04:41तबी अरजुन को महसूस हुआ कि उसके सामने वाली खाली सीट पर कोई बैठा है.
04:47धुंद साफ हुई, तो उसने देखा, वहाँ वही पानी वाला बैठा था.
04:52लेकिन अब उसका चेहरा पहले से भी ज्यादा सफेद और डरावना था.
04:57बोला था ना बेटा, पानी की बोतल ले लो, शिवपुर पहुँचने से पहले ही हलक सूख जाएगा.
05:03अब हम उस सीमा में हैं, जहाँ से जिन्दा इनसान कम ही वापस लोटते हैं.
05:09कौन हो तुम? तुम, तुम तो स्टेशन पर थे, तो तुम इस ट्रेन में कैसे आए? ये ट्रेन कहा जा
05:15रही है? क्या ये ट्रेन शिवपुर नहीं जा रही?
05:18अचानक पानी बेचने वाला हवा में गायब हो जाता है. तभी ट्रेन ने एक जोर का हौन बजाया और बाहर
05:25एक बोर्ड नजर आया, जिस पर लिखा था शिवपुर. ट्रेन शिवपुर स्टेशन पर रुख जाती है. जब अर्जुन ट्रेन से
05:34नीचे उत्रा, तो अर्ज�
06:02अर्जुन अपने माता पिता के साथ पैदल ही गाउं की पकडंडी से होते हुए अपने पुराने इंग घर पहुंचा.
06:09घर पहुंचते ही उसे एक अजीब सी ठंडक और सीलन की महकाई, जैसे घर महीनों से बंद हो. अभी वो
06:19बैठा ही था कि दर्वाजे के बाहर जोरों की आवाज सुनाई दी.
06:23अबे ओ राम प्रसाइद के बच्चे, घर में तेरा बेटा आगया तो क्या तु अपना काम भूल जाएगा? हराम की
06:30रोटी तोड़ना बंद कर और घर के बाहर निकल, वरना घर के अंदर घुस कर घसीट के बाहर निकालूंगा.
06:35तू बाहर आता है या मैं अंदर आओं? अर्जु ने देखा कि दर्वाजे के बाहर सावकार मनी राम खरा था.
06:43उसके पीछे उसका वफादार कुत्ता मुन्शी और चापलूस तोताराम थे. मुन्शी के हाथ में एक फटा हुआ बही खाता था
06:53और तोताराम के चेहरे पर व
07:05तर्मी है. क्या आप अपनी तमीज भूल चुके हैं? मेरे पिताजी अब बूड़े हो चुके हैं. रात के इस वक्त
07:12वो तहीं नहीं जाएंगे.
07:13अरे ओ शेहर के लड़के, अब तु मुझे तमीज सिखाएगा क्या? इस शिवपुर गाउं में कानून सावकार का चलता है.
07:21ना की तेरे बाप का. समझ गया? तेरे बाप ने मुझसे जो करजा लिया है उसका ब्याज चुकाने के लिए
07:28इसे आज काम करना ही पड़ेगा.
07:30मालिक, मेरा बेटा बहुत सालों बाद इस गाउं में आया है. आज तु मुझे काम से चुट्टी दो, कल मैं
07:36सभी आलू की बूरियों को स्टेशन पर पहुँचा दूँगा.
07:39क्या कल? अरे राम प्रसाद कल किसने देखा? नई, तुम्हें अभी इसी वक्त वो आलू की पचास बोरियां जो गोदाम
07:47में पड़ी हैं, उन्हें अभी के अभी बैल गाड़ी पर लादना होगा और रेलवे स्टेशन के उस पुराने प्लैटफॉर्म पर
07:54छोड़ कर आना ह
07:55कल सुभा की माल गाड़ी उन्हें ले जाएगी
08:24पर पहुचा देता हूँ, पिता जी आप घर पर आराम कीजिए, मैं ले कर जाता हूँ वो आलू की बोरियां,
08:30मुझे स्टेशन का रास्ता पता है
08:33नहीं अर्जुन बेटा, तु अकेले मज जा, उस स्टेशन का रास्ता रात को ठीक नहीं है
08:39लेकिन अर्जुन नहीं माना
08:41और उसने बैल गाड़ी तयार की, आलो की भारी बोरियां ला दिंग और अंधेरी रात में अकेले ही उस पुराने
08:48रेलबे स्टेशन की ओर चल पला
08:51रास्ते में उसे गाउं का इंसान रामदयाल मिला, जो गाउं का सीधा साधा इंसान था
08:57बेटा अर्जुन, तुम इतनी रात को बैल गाड़ी लेकर कहा जा रहे हो? और इस बैल गाड़ी पर क्या है?
09:03इस वक्त उस मनहू स्टेशन की तरफ मच्चा, वहाँ कोई माल गाड़ी नहीं आती
09:09रामदयल काका, ये आलू की बोरिया है, सावकार ने मुझे ये आलू की बोरिया स्टेशन पर लेकर जाने को कहा
09:16है
09:17सावकार ने काम दिया है, करना तो पड़ेगा ही
09:21अर्जन बेटा, तुम क्या पागण हो गयो?
09:24साफकार मनीराम तो 10 साल पहले मर चुका है
09:26और तेरा बाप और मा भी 10 साल पहले मर चुके हैं
09:30अर्जन ने उसकी बात अंसुनी कर दी
09:32और बैल गाड़ी आगे बढ़ा दी
09:36जैसे ही वो स्टेशन के पास पहुँचा
09:38हवा बरफीली हो गई
09:40स्टेशन की लाइटें अपने आप जलने बुझने लगी
09:44ये बोरिया यहां उतार देता हूँ
09:46पर यहां तो कोई कुली भी नहीं है
09:49तभी अर्जन ने देखा कि जो आलू की बोरियां वो लाया था
09:52उनमें से सडी हुई बदबू आ रही थी
09:55उसने डरते डरते एक बोरि खोली
09:58तो उसकी अंदर आलू नहीं
10:01बलकि इनसानी खोपडियां बरी हुई थी
10:03शाबाश अर्जन तुने मेरा काम आसान कर दिया
10:07इन खोपडियों को पहुचाने के लिए
10:09मुझे एक जिन्दा इनसान की ही जरूरत थी
10:12अब तू भी जबूरी का हिस्सा बनेगा अर्जन
10:16हमेशा के लिए
10:17अर्जन पीछे मुरा तो देखा कि
10:19उसकी बैल गाड़ी गायब थी
10:21और स्टेशन की पट्रियों पर
10:23वही पुरानी ट्रेन खड़ी थी
10:25जिसके पास से उसके माता पिता
10:27उसे हाथ हिला कर अपने पास
10:29बुला रहे थे
10:31अर्जन की चीख उसके गले में ही
10:33दब गई
10:35ये सब फरेब है
10:36मा, पिता जी, आप लोग
10:39इनके साथ क्यों है, मुझे यहां से
10:41निकालिये
10:43बेटा, हम खुद इस सावकार के कर्स के जाल में फसे है
10:46हम दोनों को इसी सावकार ने कुछ सालों पहले मार दिया
10:49तब से हम दोनों की आत्मा इसी गाउं में भटक रही है
10:53बेटा, तु जल्दी यहां से अपनी जान बचा कर भाग जा
10:56नहीं तो यह सावकार और इसका मुझे तुझे जिन्दा नहीं छोड़ेगा
11:00चलो मुझे उठाव इसे
11:02इसकी रूप को बोरियों में बंद करो
11:04इसे भी उसी नरक में भेजेंगे जहां हम सालों से सड़ रहे है
11:08सावकार, तु ने हमें धोके से कुछ सालों पहले मार दिया
11:12लेकिन आज हम हमारे बेटे को तेरे कहर से बचाएंगे
11:17आज हम तेरा ये जुल्म हमेशा के लिए खत्म कर देंगे
11:21अर्जुन, भाग बेटा इस मन्हू स्टेशन से
11:23जैसे ही ट्रेन की सीटी बजेगी, तु स्टेशन की दहलीस पार कर जाना
11:27हमेंने अपने साथ ले जा रहे हैं
11:29ताकि ये फिर कभी किसी को नुकसान ना पहुचा सके
11:33उसके बाद अर्जुन वापस उसी ट्रेन में बैठ कर शेहर वापस लोटा
11:39अर्जुन ने महसूस किया कि उसके माता-पिता अब वाकई आजाद हो चुके हैं
11:44शिवपुर के उस मन्हूस स्टेशन को पीछे छोड़कर अर्जुन ट्रेन से शेहर की ओर चल पड़ा
11:50शिवपुर का वो डर अब हमेशा के लिए खत्म हो चुका था
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