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दरके पहाड़, सड़कों पर सैलाब... देखें बारिश से हर तरफ तबाही का मंजर
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00:05नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग और आप देख रहे हैं आज तक भारत के कुल भौगोलिक शेत्र का लगभग 12
00:11.5 प्रतिशत इलाका यानि 4 करोड हेक्टेर से अधिक हिस्सा हर साल बाढ की चपेट में आता है
00:19जिसमें उसेतन 1600 लोगों की मौत होती है लेकिन इसमें से भारत के शेहरी इलाकों में हर साल 70 प्रतिशत
00:28से अधिक शेहरों में मौनसून के दौरान बाढ या गंभीर जल भराओ की समस्या आती है
00:33और आज हम इसी शेहरी बाढ यानि अबन फ्लडिंग की बात करेंगे ये कितनी खतरनाक है कितनी तबाही लेकर आती
00:41है इसका कारण क्या है और इससे कैसे निप्टा जा सकता है सिर्फ देश नहीं बलकि दुनिया के कई ताकतवर
00:47देश इस बाढ के आगे बेबस हो जाते हैं
00:51आज हम आपको देश भर के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का हाल भी दिखाएंगे और साथ ही अर्बन फ्लडिंग
00:59के हर पहलू की बात करेंगे
01:10इनसान ने कंक्रीट के शेहर जीत लिये
01:15खुद्रत ने एक पारिश में उनका गुरूर बहा दिया
01:41इमारते आस्मान चू रही है
01:44लेकिन बादलों का इरादा कुछ और है
01:50इनसान नक्षों पर शेहर बसा रहा है
01:54खुद्रत अपने रास्ते खुद चुन रही है
02:00इनसान नदियों को बांध रहा है
02:02लेकिन पानी ने याद दिला दिया कि रास्ता वही तै करता है
02:12तक्नीक बहुत ताखतवर है
02:14लेकिन प्रकृती का वुस्सा एक कठिम परीक्षा है
02:19इनसान विकास की रफ्तार में प्रकृती के नियम भूला
02:23तो खुद्रत उन्हें अपने तरीके से याद दिलाती है
02:31ये इनसान और खुद्रत की लडाई नहीं
02:34बल्कि उस भ्रह्म का टूटना है
02:36कि इनसान खुद्रत से बड़ा है
02:38खुद्रत हर बार जीतने नहीं आती
02:40लेकिन जब वो अपना संतुलन वापस लेने निकलती है
02:43तो सबसे अताफर बर शहर भी उसके सामके बेवस दिखाई देते हैं
02:53इस वक्त मौनसून देश के अलग-अलग हिस्सों में
02:56बाढ़ और बरबादी का डबल अटाक लेकर आया है
02:59पहाड़ी इलाके हो या मैदानी इलाके तबाही का बंजर हर जग्य दिख रहा है
03:04छोटे शहर अगर सैलाब में डूबे हैं तो बड़े शहर भी लगातार बाढ़ के खत्रे में हैं
03:10पूरे देश में बारिश कैसी तबाही लेकर आई है देखिए
03:25मौनसून राहत नहीं बलकि पहाडों पर आफद बन कर परस रहा है
03:30कहीं पहाड दरक रही हैं कहीं सडके तूट रही हैं तो कहीं नदियां खत्रे के निशान के पार बह रही
03:36है
03:38लगतार बारिश ने हिमाचल से लेकर उत्तरा खंड और भारत के पूर्वी हिस्से तक जन जीवन बुरी तरह प्रभावित कर
03:45दिया है
03:46मौसम विभाग में अभी और भारी बारिश की चेताब नीदी है
03:55राद के अंधेरे में पहाड से मौत बन कर उत्तरा पानी
03:59मलबे के सैलाब ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया
04:03गाडिया पत्थरों के नीचे दब गई घरों में कीचड और चटाने घुज गई
04:12ये तस्वीरें जम्मो कश्मीर के डोडा जिले के ठटरी खजबे की हैं
04:17जहां कुछ ही मिंटों की बारिश ने पूरी बस्ती का नक्षा बदल दिया
04:21बादल फटने के बाद लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद ठटरी इलाके में अचानक फ्लैश फ्लड आ गया
04:28पहाडियों से तेज रफ्तार के साथ मलबा, बड़े बड़े पत्थर और चट्टा ने नीचे उतरी
04:34जिसने रास्ते में आने वाली हर चीज़ को अपनी चपेट में ले लिया
04:47यह तस्वीरे हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की है, जहां एक बार फिर भूस खलन ने लोगों की नीद उड़ा
04:54दी है
05:09चारों तरफ पानी ही पानी, नदी उफान पर और बीच में फ़से सैकड़ों लोग
05:16जान जोखिम में डाल कर पुलिस और राहा दल लोगों तक पहुँचे और उन्हें सुरक्षित जगों पर ले कर गए
05:26ये तस्वीरें जम्मो कश्मीर के पुँच जिले के मेंधर की हैं जहां लगतार बारिश ने बार जैसे हालात पैदा कर
05:33दिये हैं
05:40भारी बारिश के बाद मेंधर, हड़ी खजबे और सगलैंड इलाके से गुजरने वाली नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया
05:49देखते ही देखते, नदी नाले उफान पर आ गए और पानी निचले इलाकों में बने घरों और खेतों तक पहुँच
05:56गया
05:58उत्तर अखन में भी बारिश लगतार मुश्किलें बढ़ा रही है
06:01पीरी गड़वाल में तीस्वे दिन भी बारिश का सिलसिला जारी है
06:05लगतार हो रही बारिश की वज़े से पीरी जील का जलस्तर बहता जा रहा है
06:10जील और नदी किनारे रहने वाले लोगों में दर का महौल है
06:22उधर बदरी नाद धाम में भी लगतार तीसरे दिन बारिश जारी है
06:26बारिश का असर अब अलक नंदा नदी पर साब दिखाई दे रहा है
06:32नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है और तेज बहाव लोगों की चिंता बढ़ा रहा है
06:44रुद्र प्रयाग में बारिश ने चार धाम यात्र के रफ्तार पर भी ब्रेक लगा दिया
06:51रिशिकेश बद्रिनाथ राश्ट्री राजमार्क पर खांकरा के पास पहाड का बड़ा हिस्सा दरक गया
06:57भारी बोल्डर सड़क पर गिरने से हाईवे बंद हो गया
07:01दोनों तरफ वहनों की लंबी कतार लग गई और यात्रियों को घंटों इंतिजार करना पड़ा
07:11बारिश के मौसम में पहाडों की यात्रा एक बार फिर चुनौती बन गई है
07:20तबाही की ये तस्वीरे नैशनल हाईवे 10 की है
07:24ये वही हाईवे है जो सिक्किन की लाइफ लाइफ लाइन है
07:26बंगाल के सिली गुडी से शुरू होकर गंग टोक तक जाता है
07:30लेकिन मौनसून की बारिश के चलते हुए भूस खलन से हाईवे प्रभावित है
07:38पहाडों पर बारिश अभी थमी नहीं है
07:40नदिया अब भी उपान पढ़े और पहाडों पर मौनसून राहत नहीं आफ़द बन कर बरस रहा है
07:51वही हालत मैदानी इलाफों की भी है
07:54ये सड़क नहीं सेलाब है चारों तरफ सिर्फ पानी
07:58घरों की पहली मन्जिल तक बार और छटों बालकनियों पर खड़े लोग जिन्हें इंदिजार है कि कब पानी कम हो
08:04तो घर से बाहर निकले
08:12ये तस्वीरें गुजरात के सूरत की हैं जहां तापती नदी के किनारे बसा आथनिक शहर कुछ घंटों में पानी में
08:19तैरता नजर आया
08:22कई अलाफों में हालात इतने खराब हो गए कि सड़कों पर गारियों की जगे एंडियारेफ की नावें उतर गे
08:27राहत बचाब दल ने नावों के जरीए घरों में फसे लोगों तक पहुँचकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुचाया
08:38अब टूट गया है पानी का इतना भावता न रोड भी नहीं रहा
08:56जहां नाव नहीं पहुँच सकी वहाँ जेसी भी राहत का सबसे बड़ा सहारा बनी
09:01रस्यों के सहारे बालकनी तक राहत सामगरी पहुचाई गए
09:08उधर सुरत का एक बड़ा शॉपिंग कॉंपलेक्स भी बाल के पानी में डूप गया
09:37यह जर्फ लैंड स्लाइड नहीं बलकि कुछी सेकंड में आई तबाही है
09:45पहाड से मिट्टी, पत्थर और मलबे का सैलाव नीचे उतरता है और रास्ते में जो भी आता है उसे अपने
09:51साथ बहा ले जाता है
09:55सबक पर खड़ा भारी भरकम टैंकर भी इस मलबे के सामने खिलोना बन जाता है
10:02ये खौफनाक सीसी टीवी तस्वीरे केरल के वाइनाड की एक निर्माणा धीन साइट पर भारी बारिश के बाद अचानक लैंड
10:13स्लाइड हो
10:14देखते ही देखते मिट्टी और मलबे का तेज बहाव सड़क तक पहुँच गया
10:21वहां मौजूद लोगों को समखने का मौका भी नहीं मिला
10:23कई लोग जान बचाने के लिए इधर उधर भागे लेकिन मलबे की रफ्तार इतनी तेज थी कि वो उन्हें अपनी
10:30चपेट में लेता चला गया
10:31सीसी टीवी में दिख रहा है कि भारी टैंक कर कई सौ मीटर तक पहुआ
10:40जहां तक नजर जाएगी वहां सिर्फ मगरमच ही मगरमच दिखाई देंगे
10:44एक दो नहीं दस नहीं बलकि दरजनों मगरमच एक साथ नदी किनारे नजर आ रहे है
10:51ऐसा नजारा कम ही देखने को मिलता है ये तस्वीरें गुजरात के वडोदरा की है जिसने हर किसी को हैरान
10:57कर दिया
11:00वडोदरा के पादरा तालुका के कोट वाड़ा गाउं के पास बहने वाली विश्वा मित्री नदी में मगरमचों का बड़ा जुन
11:07दिखाई दिया है
11:09मौनसून के दौरान नदी का जलस्तर बढ़ने के साथ बड़ी संख्या में मगरमच किनारे आ गए हैं
11:14अधिकारियों का कहना है कि बारिश के मौसम में मगरमचों की गतिविधिया बाढ़ जाती है इसलिए जरा सी लापरवाही भी
11:21भारी पड़ सकती है
11:28गुरुग्राम मुंबई सूरत बैंगलूरू जैसे बड़े शहरों में हर मौनसून के दौरान जल भराव अब आम तस्वीर बन चुकी है
11:36लेकिन इस जल भराव की जम्मेदार पूरी तरह से बारिश है ये कहना गलत है
11:42दरसल शहरी बार को प्राकृतिक नहीं बलकि इनसानी गलतियों से पैदा हुई एक आपदा माना जा सकता है
11:50और बहुत हद तक इस समस्या की जड में शहरों की प्लानिंग भी छिपी गी
12:01दुनिया के बड़े से बड़े शहर क्यूं बारिश के आगे छोटे साबित हो रहें
12:12परफेक्ट प्लानिंग के लिए मशूर देशों की प्लानिंग फेल क्यूं हो रही
12:22चीन में तबाही की भयानक तस्वीरें क्या बता रही
12:33अनियोजित प्लानिंग का नतीजा या पुद्रत का क्रोथ
12:43भारत के मेट्रोपॉलिटन शहर बार के आगे बेबस क्यूं हो रहें
12:53तिल्ली, मुंबई, कुरुगराम, सूरज जैसे बड़े नाम सेलाब के आगे मजबूर क्यों है
13:05क्या सिर्फ भारी बारिश ही शहरी बार की वज़े हैं?
13:17शहरों में बहती बार को केवल बे लगाम शहरी करण या सिर्फ पुद्रत का पहर कहकर समझा नहीं जा सकता
13:23सच ये है कि आज की आर्बन फ्लडिंग इन दोनों का मिला जुला नतीजा है
13:28भारत में अनियोजित निर्मान, नालों पर अतिक्रमान, कॉंक्रीट कवाहता जंगल और कमजोर ड्रेनेज वेवस्था बारिश के पानी को निकलने नहीं
13:37देते
13:37इसलिए थोड़ी देर की तेज बारिश भी शहरों को डुबो देती है
13:42लेकिन दूसरी ओर चीन जैसे अपेक शक्रित बहितर नियोजित देश के शहर भी हाल के वर्षों में बार बार जल
13:49मगन हुए है
13:50दुनिया के सबसे आधुरिक इंफ्रस्ट्रक्चर वाले कई चीनी शहर भी बार बार जल मगन क्यूं हो जाते हैं
13:57दरसल जब बारिश की तीवरता किसी भी शहर के डिजाइन मानकों और ड्रेनिच शम्ता से अधिक हो जाती है तो
14:04आधुरिक बुन्यादी धाचा भी जवाब दे देता है
14:06यानि आज की अर्बन फ्लडिंग केवल विकास की अव्यवस्था की कहानी नहीं बलकि बदलती जलवायू और पुराने शहरी धाचे के
14:15बीच बढ़ते असंतुलन की भी कहानी है
14:17चलिए थोड़ा विस्तार से समझते हैं दरसल बार तीन तरीके की होती है
14:22पहली फ्लू वियल जब भारी बारिश या बर्फ पिघलने से नदिया जीले या नाले अपने किनारों से बाहर बहने लगते
14:30हैं और आसपास के इलागों में पानी भर चाता है
14:34प्लूवियल जब बहुत कम समय में तेज बारिश होती है और पानी निकलने की व्यवस्थाद जवाब दे देती है इसके
14:41दो रूप
14:41तटिये बार, चक्रवात, तूफान या सुनामी के दौरान समुद्र का पानी तटिये इलाखों में घुच जाता है
14:49शहरी बार, प्लूवियल फ्लडिंग की श्रणी में आती है इसके भी दो हिस्से होते हैं
14:54सर्प्रेस वाटर फ्लड जिसमें नालियां और ड्रेनिट सिस्टम पानी निकाल नहीं पाते जिससे सडकों और इमारतों में जल भराव हो
15:01जाता है
15:01दूसरा फ्लैश फ्लड जब बादल फटने या बांध तूटने जैसी घटनाओं से अचानक तेज रफ्तार में आने वाली बाल सबसे
15:09जादा जान लिवा होती
15:13सबसे पहले इन आकों पर ध्यान दीजिये कि कैसे शेहरी निर्मान बढ़ने से प्राकृतिक इलाके खतम होते जा रहे हैं
15:20बैंगलूरू में 1973 से 2010 के बीच पक्ये निर्मान वालक शेत्र 632 फीसदी बढ़ा जब कि वहां के पुद्रती जलाशय
15:2989 फीसदी घट गए
15:31चिन्नई में पनली कर्णई दलदल 2011 तक अपने मूलक शेत्र के सिर्फ 12 प्रतिशत तक सिम अठके आ
15:38मुंबई में मैंग्रोब और तटी वेटलैंड खत्म होने से समुद्र में पानी की निकासी शमता घट दे
15:44हैदराबाद में जीलों और प्राकृतिक नालों पर अतिक्रमण से हर साल जल भराव होने लगा
15:50कोलकाता में वेटलैंड और एतिहासिक नहरों पर रियल स्टेट का दबाव बढ़ने लगा
15:55हर केस में एक बात कॉमन है वो पानी जिसे पहले मिट्टी सोख लिया करती थी वो अब पक्के निर्मान
16:02में तेजी से बह जाता है
16:04जो ड्रेनेच सिस्टम के बस की भी बाहर की बात हो जाती है
16:09दरसल भारत के अधिकान शहर प्लूवियल फ्लडिंग से प्रभावित होते हैं
16:13जानि इतनी तेज बारिश होती है कि सडकें और ड्रेनेच सिस्टम पानी निकाल ही नहीं पाते
16:17पहले शहरों में तालाब, जीले, दलदलिक शेत्र और बार के मैदान एक प्राकृतिक स्पंज की तरह काम करते थे
16:25ये बारिश के पानी को धीरे-धीरे जमीन में पहुंचाते थे
16:28लेकिन तेज शहरी करण और विकास ने इन प्राकृतिक पानी के निकायों को खतम कर दिया
16:37आज के डेट में क्लाइमेट चेंज जो हो रहा है उसके उसके उसे यह नहीं पता लगता है कब कितनी
16:41बारिश आ जाएगी
16:41क्योंकि जिस बारिश के लिए आप आज की डेट में डिजाइन करो कि कल बारिश का पता नहीं की उतनी
16:46आएगी और से ज्यादा आएगी
16:47जब एकदम से बारिश आती है तो सारका सारा पानी भार रोड के उपर आ जाता है और डिस्पोज भी
16:52नहीं होता है
16:53तो सबसे पहले तो आपको प्लांड ग्रोथ करने पड़ेगी शीटिज की और आपका ड्रेनेज सिस्टम को अच्छी तरह से डिजाइन
17:01करना पड़ेगा और उसको मेंटिनेंस भी करना पड़ेगा
17:04तो जब तक मिंटेन नहीं करेंगे तो उसका फायदा नहीं होगा
17:09शेहरों में बार कितनी गंभीर होगी ये इस बात पर निर्भर करता है
17:13कि शेहर की योजना कैसे बनाई गई है
17:15अनियोजित विकास ने जमीन की पानी सोकने की ख्रमता खतम करती
17:19ड्रेनिज सिस्टम फेल हो जाते हैं
17:21इसका भी एक बड़ा कारण है
17:22अधिकान शेहरों का ड्रेनिज सिस्टम अंग्रेजों के समय का बना हुआ है
17:26इसे आज की आबादी और कॉंक्रीट वाले शेहरों के हिसाब से कभी अग्रेड ही नहीं किया गया
17:31गाद, कूड़ा और मलबा नालों को जाम कर देता है
17:34उपर से कम समय में ज्यादा बारिश होने से समस्य और बढ़ गई है
17:38शेहरी बाड का कारण सरकारी व्यवस्थाएं भी हैं
17:41अलग-अलग डिपार्टमेंट्स में सामंजिस्स की कमी है
17:43सडकें पहले बन जाती हैं, सीवर लाइने बाद में बिच्चती हैं
17:47यारी बनी बनाई सडक को तोड़ दिया जाता है
17:49जल निकासी, नगर निगम, विकास प्राधिकरण, जल बोर्ड, आप्दा प्रबंधन जैसे कई एजेंसियां अलग-अलग काम करती हैं
17:57द्रेनेज सुधार, भूमी का इस्तेमाल और पर्यावरण संडक्षन को साथ जोड़कर योजना नहीं बनाई जाती है
18:06अर्बन फ्लेडिंग के कारण क्या क्या हो सते हैं, ये तो आज की डेट में होट सारी कारण है
18:11लेकिन मेजर जो कारण है उसमें सबसे पहला कारण तो है अन्प्लांट ग्रोथ अफ दा सिटीज क्योंकि आज की डेट
18:16में इंडिया में जितने भी सिटीज हो रहे हैं, उनकी प्रोपरली कोई प्लानी नहीं होती है, एक्स्टनल डेलप्मेंट नहीं होता
18:21है, ड्रेनेज सि
18:40अलग अलग है, शहर प्लाई ओवर, एक्स्ट्रेस वे और मेट्रो जैसी दिखने वाली परियोजनाओं पर ज्यादा खर्च करते हैं, जबकि
18:48नालों की सफाई और ड्रेनेज सुधार जैसे जरूरी लेकिन कम दिखाई देने वाले कामों पर कम ध्यान दिया जाता है,
18:55कई ज
19:09समस्या से निजात मिल सके, दरसल इलाज कामियाब तभी होता है, जब मर्ज का सही कारण पता लगे, लेकिन जब
19:16तयारियों में ही कमी हो, तो फिर इलाज कैसे हो, कई बातें ऐसी भी सामने आती हैं, कि अक्सर कई
19:22शेहरों के पास महल्ला स्थर के फ्लड माप नहीं होते, स्�
19:39इस रफतार से भारत में विकास के लिए निर्मान कारे हो रहे हैं, उससे ये तो तय है, कि आने
19:44वाले वर्षों में करोणों लोग शेहरों में बसेंगे, यानि जीलें, दल-दल और फ्लड प्लेंस कंक्रीट में बदलते रहेंगे, ऐसे
19:54में शेहरी बाल का खत्रा लगातार �
19:56बना रहेगा, भारत के शेहरों का भविश्च इस बात पर निर्भर करेगा कि वो प्रकृति के साथ विकास करते हैं
20:02या उसके खिलाब, तो सबसे बड़ा सवाल ये है कि अर्बन फ्लडिंग से शेहरों को कैसे बचाया जा सकता है,
20:09सबसे पहले तो प्राकृतिक जल स्रोतों
20:12को बचाना होगा, तलाब, जील, वेट लैंड्स और शेहरी जंगलों को बचाना होगा, ताकि बारिश का पानी जमीन में समाए
20:20ना कि पक्य निर्माल से बह जाए, लोगों को रेन वाटर हार्वेस्टिंग को लेकर जागरूप करना होगा, घरों और इमारतों
20:28की छटों पर
20:28रेन वाटर हार्वेस्टिंग टैंक लगाए जाए, ऐसा होने से सडकों पर जमा होने वाला पानी काफी कम हो सकता है,
20:36नालों की शमता बढ़ानी होगी, उनकी नियमित सफाई करनी होगी और उनको चौड़ा करना होगा, ताकि वो ज्यादा पानी तेजी
20:43से निकाल सके
21:03क्योंकि आज की टीट में क्या हो रहा है कि बरशात आने से बाद में देखने की फ्लेडिंग हो गया
21:07उसकी पहले उसको मेंटेनी नहीं किया जाता है, किसी भी सिस्टम को, ना ही उसका कोई डिस्पोजिल किया जाता है
21:14कॉलोनियों और पार्कों में छोटे-छोटे जल रोकने वाले वाटर शिड भी एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं
21:21ये बारिश का पानी रोकेंगे, भू जल बढ़ाएंगे और बार का खत्रा भी कम करेंगे
21:25और सबसे बड़ी बात कि बारिश के पानी का उप्योग किया जाए
21:29जमा किया गया पानी पीने योग्य बनाने के बाद दूसरे जरूरी कामों में प्रयोग में लाया जाए
21:39दुनिया के कई शहरों ने साबित किया है कि सही प्लानिंग, आधूनिक ड्रेनिज सिस्टम और प्राकृतिक जलाशेयों को बचा कर
21:49अर्बन फ्लडिंग पर काफी हद तक काभू पाया जा सकता है
21:53भारत में भी कुछ शहरों ने ऐसे प्रयोग शुरू किया है, जिनके नतीजे उम्मीद जकाते हैं
22:01और सवाल यही है कि क्या बाकी शहर इन सफल मॉडल्स से सबक लेंगे यहार मौनसून में डूबने की नई
22:09कहानी लिखते रहेंगे
22:21अब सवाल यह है कि क्या हमारे सामने देश में ऐसे कोई उदाहरन है जहां शहरी बार से बचात किया
22:28गया है
22:28तो इसका जवाब है हाँ
22:30देश में स्पंज सिटी का सबसे अच्छा उदाहरन है कोलकाता
22:34इस्ट कोलकाता वेट लैंड्स प्राकरतिक रूप से शहर के सीवेज का बड़ा हिस्सा साफ करती है
22:41यही पानी मचली पालन और सबजी की खेती में भी उपियोग होता है
22:45यानि एक ही व्यवस्था बाण नियंतरन, पर्यावरन संरक्षन और आजी विका तीनों का समधान देती है
22:52महराश के नाग दरवाली की सफलता भी छोटी नहीं है
22:56यह छोटा सा गाउं रेन वाटर हार्वेस्टिंग से जल विहीन से जल संपन बन गया है
23:01बैंगलूरू में वाटर टेबल के स्तर को बढ़ाने के लिए 150 जीलों के जीलनो धार का एक बड़ा प्रोजेक्ट चलाया
23:08जा रहा है
23:08बैंगलूरू विकास प्राधिकरण ने जून 2020 में बेलंदूर और वर्थुर जीलों में गाद निकानने का काम शुरू किया था
23:17बैंगलूर जल उपचार और सीवरिज बोर्ड 26 नए सीवरिज ट्रीट्मेंट प्लांट की ख्रमता बढ़ाने पर काम कर रहा है
23:24इसके अलावा विदेशों में भी कई प्रयोग हुए हैं जो अपने आप में एक मिसाल है
23:28होंग कॉंग ने मौझूदा नालियों को अपग्रेड किया है
23:31एक लाख क्यूबिक मीटर की एक शमता वाले भूमिगत टैंक्स बनाए हैं जो बारिश के पानी को स्टोर करते हैं
23:38चीन स्पंज सिटी कारिकरम लागू करने वाला है
23:40सिंगपोर में बाल की निगरानी के लिए सेंसर का उपियो किया जा रहा है
23:44दरसल अर्बन फ्लडिंग कोई प्राकृतिक आपदा नहीं बल्कि गलत शेहरी प्लानिक का नतीचा है
23:50अगर शेहरों को सिर्फ कॉंक्रीट का जंगल बनाने के बजाए
23:53पानी के प्राकृतिक रास्तों के साथ विक्सित किया जाए
23:56तो हर मौनसून में डूपते शेहरों की तस्वीर बदली जा सकती है
24:00सवाल यह नहीं कि बारिश कितनी होगी
24:02बलकि यह है कि शेहर उस बारिश के लिए कितने तयार है
24:06क्योंकि आने वाले समय में सबसे स्मार्ट शेहर वही होगा
24:09जो पानी को निकालने का नहीं पानी के साथ जीने की कलासी प्रेगा
24:18मौंबई में इस मौनसून सिर्फ बारिश नहीं बलकि खत्रा बरस रहा
24:22मौंबई में आंधी तूफान में गिरते पेड़ लोगों की जान ले रहे है
24:27सवाल सुथ मौसम का नहीं सिस्टम का भी है
24:30क्या हाद से तेज हवाओं की वज़े से हो रहे है
24:33या फिर लापरवाही की जड़े ज्यादा गहरी है
24:36मौंबई में रोजाना पेड़ गिर रहे है
24:39और अब तक कई लोगों की मौत तक हुच भी
25:05मौंबई सपनों का शहर
25:06लेकिन इस वक्त इस शहर में सबसे बड़ा दर पानी नहीं पेड़ दिया
25:18जी हाँ जो पेड़ जिंदगी देते हैं वही अब जान ले रहे है
25:22बारिश शुरू होई नहीं कि मौंबई में पेड़ गिरने का सिलसिला भी शुरू हो गया
25:27हालात ऐसे हैं कि लोग जल भराव से नहीं गिरते पेड़ों से ड़र रहे है
25:33कि अमरा मेरेंजर ने आठ दिन पहले कंप्रेंट किया था ब्याम से ओल आया ओपना इसका और आम का पेड़
25:42का ओ लिखे लिखे गया उसके बात में वो लोग कुछ आया नहीं अभी चार गारी को लुक्सान हो गया
25:48है
25:50मैं दस गारी को पहले निकल चुका था त्यूंकि मैं इदर ही खड़ा था फिर मैं खाना खाने गया फिर
25:55दो गारी लग गया है फिर हो गया उनलों का का ओफिस जा रहे थे जस्ट रिसेंटली आये अंदरी स्टेशन
26:00जाने के लिए जस्त अभी तुरन जाड़ गिरा हुआ
26:47और किस के ऊपर गर जाएगा
26:49इसलिए भी बड़ा है क्योंकि मुंबई में पेड़ों की देख फाल की जिम्मेदारी भी उसी BMC के पास है जो
26:55देश की सबसे अमीर नगर निगम कहलाती है।
27:46अगर बारिश से पहले कमजोर पिर्णारी बड़ा है।
27:50अगर समय पर छटाई हो जाती तो खत्रे वाले पेड़ों को सुरक्षित किया जा सकता था।
27:59माटूंगा हो अंधेरी हो कुरला हो या गोरे गाओं हर इलाके में पेड़ गिर रहे हैं।
28:05अंधेरी सब्वे में पेड़ का बड़ा हिस्सा एक शक्स पर गिर गया और वो अस्पताल पहुँच गया।
28:11मुंबई में एक जुलाई से अब 1696 पेड़ गिर चुके हैं।
28:16जानी हर दिन औसतन 212 पेड़। सिर्फ एक हफ़ते में तीन लोगों की मौत।
28:22अब सवाल है आखिर बारिश के मौसम में पेड़ इतने क्यों गिर रहे हैं।
28:26क्या सिर्फ बारिश इसकी वज़े हैं आखिर जिम्मेदार कौन है।
28:46मौंबई में 2023 में 687 पेड़ गिरे, 2024 में 653, 2025 में 855 लेकिन इस बार सिर्फ जुलाई के पहले
28:568 दिनों में 1696 पेड़ गिर चुके हैं।
29:00यही हाल दिल्ली कभी है।
29:03थोड़ी सी आंधी और बारिश में दिल्ली में भी पेड़ों के गिरने का सिलसिला शुरू हो जाता है।
29:09दरसल सिर्फ मौंबई दिल्ली ही नहीं, पहाडी राज्यों में भी लगतार पेड़ गिरने की घटनाएं सामने आती हैं।
29:15लेकिन उत्तरा खंड की राजधानी देहरादून में पेड़ों को सुरक्षित रखने के लिए एक अलग तरीका अपनाया गया है।
29:21वहाँ विशेशक्यों की सलाह पर पेड़ों की जड़ों को मजबूत बनाने और उन्हें प्राकृतिक रूप से फैलने पर जोर दिया
29:28जा रहा है।
29:29एक्सपर्ट का कहना है कि पेड़ों की जड़े चारों तरफ से कंक्रीट में कैद हैं।
29:35बारिश का पानी जड़ों तक पहुचता नहीं, जड़े कमजोर हो जाती हैं।
29:38सलक की तरफ से ज़्यादा शाखाएं काट दी जाती हैं और पेड़ असंतुलित हो जाते हैं।
29:43सलक खोदी जाती है तो जड़े भी काट दी जाती हैं।
30:15पेड़ कमजोर हो जाते हैं।
30:33तेज बारिश या तेज हवा के आने पर ऐसे पेड़ आसानी से गिर जाते हैं।
30:46बार बारिश की चपेट में आते हैं।
30:48सबसे ज्यादा नुकसान बादल फटने की घटनाओं से होता है।
30:51हम आपको बताते हैं कि ये बादल कैसे फटते हैं और कितनी तबाही लाते हैं।
31:22पादल फटने की ये तस्वीरें जम्मू कश्मीर से लेकर अरुनाचल प्रदेश तक की हैं।
31:27कहीं पहाड तूटे, कहीं नदियाओ फान पर आ गई और कहीं कुछ इमिंटों में पूरी बस्ती की तस्वीर बदल गए।
31:40आसमान से बर्शी आफट ने ऐसी तबाही मचाई कि लोग समहल नहीं पाए।
31:44जिन रास्तों पर कुछ देर पहले आवाजाही हो रही थी, वहां सिर्फ मलबा और तेज बहता पानी दिखाई दे रहा
31:50था।
31:59पानी अपने साथ जो भी रास्ते में मिला उसे बहा कर ले गया।
32:32जम्मु कश्मीर के डोड़ा की ये तस्वीरें देखी, दो दिन पहले यहां बादल फटने के बाद अचानक नदी का जलस्तर
32:38कई गुना बढ़ गया।
32:40पानी इतनी तेजी से आया कि लोगों को समहलने या सुरक्षित जगे पहुँचने का मौकर नहीं मिला।
32:45देखते ही देखते, पूरा इलाखा बाड़ और मल्बे की चपेट में आते है।
32:50रात को कोई बारा एक बज़े के दरम्यान आया उपर से फलड़ और हम उठे जब ज़्यादा बारिश आई तो
32:56हम उठे तो हमारा हमसाई उस तरब उधर से उतरे हैं रोड में और पूरी रात हमें रोड में काटी
33:02है।
33:03ये पीले खाली मेरा नहीं चीती बस्ती में नक्सफान हुआ है इनकी बर्पाई होने चाहिए है।
33:24पूरी डैमेज हुई है इनको कोई ठीक नहीं कर रहा है जहां से पानी चलना है।
33:28अपर रीचेज में आई मूस्पर ज़्यादी के हैंए है जगों।
33:46लेकिन आखिर बादल फटने की घटना होती क्या है
33:49और जब बादल फटता है तो कुछ ही मिंटों में इतनी बड़ी तबाही कैसे आ जाती है
33:57जब किसी छोटे से इलागे में बहुत कम समय के भीतर बेहत तेज बारिश होती है
34:02तो उसे क्लाउड बर्स्ट यानि बादल फटना कहा जाता है
34:05मौसम व्यग्यानिकों के मताबिक कुछ ही मिंटों में इतनी ज्यादा बारिश हो जाती है
34:10कि जमीन उस पानी को सोख नहीं पाती
34:12नतीजा ये होता है कि पानी तेज रफ्तार से नीचे क्योर बहता है
34:16और अपने साथ मिट्टी, पत्थर, पेड़ और मलबा भी ले आता है
34:21यही वज़े है कि अचानक बार और भारी तबाही देखने को मिलती है
34:28अचानक को टार्मिनोलिजी है जो कि यूस होती है
34:34और मीटरोलजिकल टार्मिनोलिजी में बात करें इसको हम लोग बोले है
34:38हाई इंटेस्टी रिफॉर्ट याट मिल्स की एक घंटे में कितनी बारिश हुई है
34:44उसके लिए जो है पानक जो तै किया गया है वो है
34:59जानकारों का मानना है कि पहले बादल फटने की घंटनाएं ज्यादा तर ऊचे पहाड़ी इलावों तक सीमित रहती थी
35:05लेकिन पिछले कुछ सालों में संध्या बढ़ी है
35:07अब ऐसे इलावे भी इसकी चपेट में आने लगे हैं जहां आबादी ज्यादा है और निर्मान भी बड़े पैमाने पर
35:13हुआ है
35:14यही गारण है कि अब जान माल पनुकसान पहले की तुल्ना में कहीं ज्यादा हो रहा है
35:24जब जमीन या बादलों के नीचे की गर्म और नम हवा तेजी से उपर उठती है तो वो गिरती हुई
35:30बारिश की मूंदों को भी अपने साथ उपर ले जाती है
35:32इससे बारिश लगतार नीचे नहीं गिरपाती और बादलों के भीतर नई बूंदे बनती रहती है जबकि पुरानी बूंदे भी उपर
35:40की ओर धके लिजाती है
35:41नतीजतन बादलों में पानी की मातरा लगतार बाहती जाती है
35:45एक समय बाद बहुत कम समय में अत्यतिक बारिश हो जाती है
35:49जिसे क्लाउड बर्स्ट कहा जाता है
35:52क्लाउड बर्स्ट के परिणाम खतरनात होते हैं
35:55जी अपने साथ फ्लैश फ्लड, भूस खलन, तेज बहने वाला मलबा और जमीन धसने की घटना इलाते है
36:01सवाल ये भी उठते हैं कि क्या क्लाउड बर्स्ट की भविश्रिवानी की जा सकती है
36:05पहले से पता लगाय जा सके तो नुकसान से बचा जा सकता है
36:09लेकिन क्या ये मुम्किन है?
36:11विशेशग्यों का मानना है कि क्लाउड बर्स्ट बहुत कम समय में विट्सित होने वाली स्थानी घटना है
36:16इसलिए इसकी सटीक भविश्रिवानी करना अभी बिहत कठिक है
36:20इसके लिए बहुत हाई रिजल्यूशन डॉपलर रेडार नेटवर्क की अवशक्ता होती है
36:25जिसे स्थापित करना महगा है
36:26मौसम व्यज्यानिक केवल कुछ समय पहले ही उन ख्षेत्रों की पहचान कर सकते हैं
36:31जहां अत्यधिक वर्षा की आशंका बन भी हो
36:36सवाल ये भी है कि आखर ऐसी खटनाएं बढ़ क्यों रही है
36:38व्यज्यानिकों का कहना है कि इसके पीछे कई वज़े हैं
36:42लेकिन कुछ कारण सबसे ज़्यादा एहम माने जाते है
36:45चलवायू परिवर्तन जिससे मौसम का पैटर्न तेजी से बदल रहा है
36:49बड़े पैमाने पर पेड़ों की कटाई जिससे प्राकृतिक संतुलन बिगल रहा है
36:54तेजी से बहता शेहरी करण और कंक्रीट का फैलाव जिससे स्थानी तापमान बढ़ रहा है
36:59जंगलों पर पहता दबाब, खेती और निर्माल के लिए लगाताद हो रहा अतिक्रमा
37:07इदी आपके पास अच्छे रडार है जो उस एरिया में उस एरिया को कबर कर सकते हैं
37:16सेटलाइट पिक्चर सेटलाइट पिक्चर आपको जो है उपर से बताएगे कि कहां बने काला घना बादल बना हुँ है बादल
37:22बने वो बता दे इंडिकेशन करते ही और इस डारेक्शन में उसकी हाइट कितनी है वो सब पता चलता है
37:31हमें रडार से यह सब करने के लिए आ�
37:46आपके पस बातर रह जाएंगी दस यह पंदरा मिना पंदरा मिना जानकार मानते हैं कि प्राकरितिक आप दाओं को पूरी
37:54तरह रोकना संभब नहीं है लेकिन उनके असर को जरूर कम किया जा सकता है अगर भविश्र में ऐसी तबाही
38:00से बचना है तो विकास और पर्यावरल
38:02की बीच संतुलत बनाना ही सबसे बड़ी जरूरत है
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