00:03धनबाद के बिलगडिया पुनरवास टाउंशिप की ये कहानी है आग और भूधहसान की चपेट से निकल कर आत्म निर्भरता की
00:12नई मिसाल बनने की जहां कभी विस्थापन असरक्षा और बेरोजगारी की छाया थी वही आज 40-50 महिलाएं अपने हातों
00:22से ना सर्फ परिवा
00:23चला रही हैं बलकि पूरे इलाके के लिए उम्मीद की की रण भी बन गई हैं यह महिलाएं स्वैम सहायता
00:30समुहों से जुड़कर मश्रूम की खेती कर रही हैं मौसम के हिसाब से ओवेस्टर मिल्की और पहरे बटन मश्रूम उगा
00:39रही हैं देवघर से आने वाले विशशक
00:41इन्हें बैग्यानिक तरीके से ट्रेनिंग देते हैं निकलता है मश्रूम तो चार किलो पांच किलो अभी मौसम थोड़ा सा गर्मी
00:48था थोड़ा कम हो रहा था उत्पाद हैं अब पहले थोड़ा सा मौसम ठंडा में अच्छा मतब 15-25 किलो
00:54तक हम सा तोड़ लेते हैं एक द
01:11संसाधन बहतर थे तो उत्पादन 15-20 किलो प्रति दिन तक पहुँच जाता था लेकिन जगह की कमी और बहतर
01:19सुविधाओं की अभाव में उत्पादन अभी सीमित है
01:40सब से खास बात इन महिलाओं को मश्रूम बेचने बाजार जाने की जरुवत नहीं
01:46आसपास के लोग खुद उत्पादन केंडर पहुचकर ताजा मश्रूम खरीद ले जाते हैं
01:51गुणवत्ता और ताजगी के कारण मांग लगातार बढ़ रही है
02:07महिलाओं का कहना है कि ये सिर्फ रोजगार नहीं उनका आत्म विश्वास है
02:12वे कहती है कि पहले परिवार चलाने में मुश्किल होती थी
02:15आज बच्चों की पढ़ाई घर का खर्चा और जरुवते खुद पूरी कर रही है
02:21अब इलाके की और महिलाएं भी इस काम से जड़ने के लिए आगे आ रही है
03:02बिलगडिया पुनरवास कॉलनी को लेकर पहले लोगों के मन में आशंकाएं थी
03:07लेकिन आज यहां बहतर आवास, सुविधाएं और रोजगार के साथ जीवन पहले से कहीं ज्यादा सुवक्षित और सम्मान जनक हो
03:15गया है
03:24यह महिलाएं साबित कर रही है कि सही अवसर, प्रस्रिक्षन और होसले के साथ किसी भी मुश्किल को सफलता में
03:32बदला जा सकता है
03:33अभी इन्हें एसी उक्त बड़ा शेड और बहतर संसाधन मिल जाए
03:37तो बिलगडिया का मश्रूम सिर्फ धनबाद नहीं, पूरे छारखन की पहचान बन सकता है
03:44ETV भारत के लिए धनबाद से नरेंदर निशाद की रिपोर्ट