00:04राजस्थान का भरतपुर्जिला जो कभी अपनी फसल विविदता और लहलहाते चने के खेतों के लिए जाना जाता था आज वहां
00:12से चने का नामों निशान मिटता जा रहा है
00:15चार दशक पहले जिस मिट्टी में रिकॉर्ड चने की पैदावार होती थी आज वो खेत चने को तरस रहे हैं
00:23आज यह रकबा सिमटकर महस चार से पांच हजार हेट्टेर में रह गया है
00:27डीग, कुमेर, नगर और कामा जैसे इलाके जो कभी चने के गढ़ थे वहां अब चने की जगह पीली सरसों
00:35का राज है
00:37जिले में जिसमें डीग भी जो सामिल था और करीब आपके उननीस सो असी पिच्चाशी के असपास चना का रखवा
00:50करीब असी से पिच्चाशी जारेक्टेर हुआ करता था
00:54और पूरे जिले में असंचित चनिक वबाई की जाती थी
01:00दे देरे किसानों ने जिए आप जानते हैं कि बड़की जिले में
01:04जानते हैं चने की फसल एक दलानी फसल है
01:16ऎक पानी में उसमें जो लावकारी जीवानु रुते हैं
01:20हम च्चाश का बार अदुगा है
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01:43is
01:49the
01:50bacteria
01:53bacteria ko nisht kar diya hai jis te chanay ki paida war lagataar ghti chali gai
01:59khaas karke siya 23-24% teak protein pae jati hai jamein ke liye bau laag kari hai
02:06unki jadeo mein ghaanthi hooti hai ghaanthi hooti hai ghaanthi hooti hai ghaanthi hooti
02:11jis ko raijium jiwaanthi kaiti hai toh chanaki kheti karne se haamari jamein hai
02:32qeeti padlii toh bharatpur ka poora audiyogik dhhaanca hi padal gaya
02:36chanay ki kami ki sab se badai maat, isthaniya dal udiyogab par pari hai
02:40करीब 15 साल पहले तक भरतपुर में 30 दाल मिलें चलती थी
02:45जिन में से आज सिर्फ 2 या 3 मिलें ही किसी तरह सांसे ले पा रही है
02:51अब मिल मालिकों को मध्यप्रदेश और कोटा से महंगा कच्चा माल मंगाना पड़ता है
02:57विजले में और डीग झिले में खास करके जैसे डीग की बात करें तो वहां जो ही सरुवब भाज चित्र
03:07में जो पहाड़ी से वहां जो है
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03:39चिसाइब बात के कुछ च्छेते हैं, वहाँ है कुछ थोड़ा सा यह वैर का च्छेते हैं।
03:44आज मंडीयों में चने के भाव जहां 5500-5000 रुपए प्रती क्विंटल हैं, वहीं सरसों के भाव किसानों को 75
03:52-500 रुपए प्रती क्विंटल से भी ज्यादा मिल जाते हैं।
03:55कम महनत कम पानी और बंपर मुनाफे के चलते किसानों ने चने से पूरी तरह मुह मोड लिया है यही
04:03वज़ा है कि आज भरतपुर में दाल मिलें तो बंद हो गई लेकिन सरसों तेल मिलों की संख्या बढ़कर 125
04:09के पार पहुँच गई है
04:13अब करीब 10 से 20 परसेंट की कमी आई है अपने पूरे इंडिया में और जसमें कि चच्चा माल भी
04:20नहीं मिल पार रहा है
04:21मिल चलाने में भी दिक्कत हो रही है बरतपर में तो चच्चा माल होता ही नहीं है ना के वरावर
04:26होता है यो कि किसान करता ही नहीं है
04:336,5-6,5-6,5-6,5-6,5-6,5.
04:42This means that the pork is not getting a lot to the ground.
04:46The pork is a lot to the ground,
04:48and that pork is not getting the pork.
04:51It is because of the pork is not getting the pork.
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05:13मिल चलाणे में जटों मिल वहांने में दिक्कत नहीं होती कHI K molto
05:19हालंकि चने का गायभ होना मिट्टी की चेहत के-लिए अच्छे संगेत नहीं है
05:23चने की कमी से जमीन की प्राकृतिक उड़गरता कम हो रही है और आसाइनिक कादों
05:29पर निर्भरता बढ़ रही है रहात की बात ये है कि केंदर सरकार ने अब 5 साल के लिए दलहन
05:35आत्म निर्भरता मिशन शुरू किया है ताकि किसानों को उन्नत बीज और ट्रेनिंग दे कर दोबारा दलहन की तरफ मोड़ा
05:42जा सके भरतपूर से ETV भारत के लिए श्यामविर सि
05:46कि रिपोर्ट