00:00प्यारी चिडिया, तुम इस सांप की तरफ इशारा क्यूं कर रही हो?
00:03सांप को सारी उमर शेहत चटाएं, तू भी वो जहर थूकना नहीं छोडता।
00:08इससे इनसान को क्या सबक मिलता है?
00:11कुछ लोगों पर चाहे कितना ही खुलूस लुटाएं, वो डिसने से बाज नहीं आते, क्यूंके फित्रत नहीं बदलती।
00:19हमें क्या करना चाहिए?
00:21हमें सबर करना चाहिए, और हमेशा अच्छा सोचना चाहिए।
00:27अल्लह ताला फर्माता है,
00:32इसलिए ऐसे लोगों से होश्यार रहें, मगर अपना अखलाक, सबर और अल्लह पर भरोसा कभी न चोड़ें।
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