00:26।
00:37अगर शरीर को अकेला छोड़ दिया तो माना जाता है कि आत्मा ब्रहमित या आस्थिर हो सकती है
00:43इसलिए परिजन उसके पास रहते हैं मंत्र प्रार्थना या शांत वातावरन बनाए रखते हैं ताकि आत्मा की यात्रा सहज हो
00:51सके
00:51अब समझते हैं इसका व्यवहार एक पक्ष पहला कारण है सम्मान और सुरक्षा मृत शरीर के साथ सम्मान जरक व्यवहार
00:58करना हर संस्कृति में जरूरी माना गया है उसे अकीला ना छोड़ना एक तरह से अंतिन सम्मान देना है दूसरा
01:05कारण परिस्थितियां प्राचीन समय
01:07में जब सुविधाय कम थी शरीर को सुरक्षित रखना जरूरी होता था जानवरों मौसम या आने जोखिमों से इसलिए किसी
01:14का पास रहना आवश्यक था तीसरा कारण मानसिक और भावनात्मन जब कोई अपना चला जाता है तो उसके पास बैठना
01:22उसे छोड़ करना जाना �
01:23ये शोग को व्यक्त करने का एक तरीका है ये एक तरह का क्लोजर देता है एक और गहरी बात
01:28कुछ मानेताओं के अनुसार मृत्यों के बाद का समय बहुत समवेधन शील होता है इस दोरान सकरात्मक वातावरन प्रार्थिना दीपक
01:36मंत्र ये सब मन और मौहल को स्थर रखते
01:39हैं चाहे इसे आध्यात्मिक माने या मनोवैग्यानिक दोनों ही इस तर पर ये प्रक्रिया बेहत महत्मपूर्ण है आज के समय
01:46में भली है अस्पताल मोच्री और आधनिक वविस्था आ गई हो लेकिन परंपरा आज भी यही कहती है जिसने जीवन
01:53भरसात दिया उसे अंतिम
01:54समय में अकेला ना छोड़ो अंतिम बस एक बात ये सिर्फ एक नियम नहीं है ये उस संबंध का सम्मान
01:59है जो जीवन भर बना रहा और शायद इसलिए अंतिम विदाई तक किसी को अकेला नहीं छोड़ा जाता इसी के
02:05साथ इस वीडियो में ता ही अगर आपको एज़ानकारी
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