00:02आज अगर मैं आपसे पूछूँ कि आपकी कार में जो पेट्रोल डल रहा है क्या वो सच में 100%
00:08पेट्रोल है या नहीं तो सायद आपका जवाब होगा हाँ
00:11लेकिन सचाई ये है कि अब भारत में मिलने वाला ज़ादा तर पेट्रोल पहले जैसा नहीं रहा है उनमें धीरे
00:18धीरे एथनॉल मिलाया जा रहा है
00:19आपने पेट्रोल पंप पर E-20 लिखा जरूर देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका मतलब क्या
00:26है क्या ये सिर्फ एक नया फ्यूल है या भारत की सबसे बड़ी एनरजी पॉलिसी का हिस्सा
00:31सरकार कहती है कि इससे देश के अर्बो डॉलर बचेंगे किसानों की आय बढ़ेगी और पॉल्यूशन कम होगा
00:38लेकिन दूसरी तरफ कई लोग दावा करते हैं कि E-20 आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो
00:43गया है
00:44कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि 1 लीटर एथनॉल बनाने में करीब 3000 लीटर पानी का इस्तेमाल
00:50करना पड़ता है
00:51अगर ऐसा है तो क्या हम सब पेटरोल बचाने के चक्कर में पानी गवा रहे हैं
00:56और सबसे बड़ा सवाल क्या आने वाले समय में भारत की सडकों पर 100% एथनॉल वाली कारें चलती दिखेंगी
01:03या नहीं
01:03तो आईए आज हम इस वीडियो में समझते हैं कि E-20 फ्यूल का पूरा सच क्या है
01:07सरकार के दावो को भी देखेंगे लोगों की राय भी जानेंगे और उन सवालों के जवाब भी खोजेंगे जो सायद
01:13आप सभी के मन में होंगे
01:15सबसे पहले समझते हैं कि आखिर E-thenol क्या है
01:18आसान भासा में कहें तो E-thenol एक तरीके का अलकोहल है लेकिन ये पीने वाला अलकोहल नहीं है
01:23इसका इस्तेमाल इंडस्ट्री और फ्यूल बनाने में किया जाता है
01:26इसे गन्ने, मक्के और कुछ अन्यक्रिसी उत्पादों से तयार किया जाता है
01:31यानि जो फसल पहले सिर्फ चीनी बनाने के काम आती थी
01:35अब वही अपनी कार चलाने के काम भी आ रही है
01:38एथनol बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिल्चस्प है
01:40सबसे पहले गन्ने या मक्के से सुगर निकाली जाती है
01:44फिर उसमें yeast मिला कर fermentation कराया जाता है
01:47जिससे वो alcohol form में बदल जाता है
01:49इसके बाद distillation की प्रक्रिया से उसे सुध किया जाता है
01:53और आखिर में वही एथनol पेट्रूल के साथ मिला कर
01:56E10, E20, E85 या फिर E100 जैसे fuel तयार हो जाते हैं
02:02अब सवाल है कि E20 नाम क्यों पड़ा
02:04तो इसका जवाब बहुत आसान है
02:06E का मतलब है ethanol और 20 का मतलब है कि उस fuel में 20% ethanol और 80%
02:12petrol की मात्रा
02:13इसी तरह E10 में 10%, E85 में 85% और E100 में सिर्फ ethanol होता है
02:20लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि आखिर सरकार ऐसा क्यों कर रही है
02:24तो इसकी सबसे बड़ी वज़ा है भारत का कच्चे तेल पर निर्भर होना
02:28हम सब को पता है कि भारत अपनी जरूरत का लगबग 85% crude oil विदेशों से खरीता है
02:33इसके लिए हर साल भारत में विदेशी मुद्रग खर्च होती है
02:37अगर पेट्रोल में 20% ethanol मिला दिया जाए तो कच्चे तेल की जरूरत कम होगी
02:41यानि आयाद घटेगा, डॉलर की बच्चत होगी और देश की उर्जा सुरक्षा मजबूत रहेगी
02:47सरकार का दूसरा सबसे बड़ा तर्क किसानों से जिवड़ा हुआ है
02:50जून 2026 तक सरकार के अनुसार गन्ना और मक्का किसानों को एथेनोल सप्लाई चेन के जरिये करीब
02:56एक दसमलो 58 लाग करोड रुपे की आये मिल चुकी है
02:59पहले अतरिक्त गन्ना सिर्फ चीनी मिलो के लिए समस्या बन जाता था
03:03लेकिन अब उन्ही गन्ने का एथेनोल बन रहा है
03:06इससे सुगर मिलो को भी नया बाजार मिला है
03:09और किसानों को भुकतान की संभावनाय भी और बहतर होती देख रही है
03:13सरकार ने तीसरी वज़ा बताई है पर्यावरन को
03:16यानि सरकार का कहना है कि पेटरोल की तुलना में एथेनोल मिस्रिती इधन से
03:20ग्रीन हाउस गैसों कोट सर्जन में कमी लाई जा सकती है
03:23यानि अगर सही तरीके से उसका इस्तेमाल हो
03:26तो ये पारामपरिक पेट्रोल की तुल्ला में आप एक्षा क्रिच साफ इधन साबित हो सकता है
03:31अब अगर सब कुछ इतना अच्छा लग रहा है
03:33देश का फायदा है, किसानों का फायदा है, प्रदूसर भी कम है
03:37और तेल का आयाग भी कम हो रहा है
03:39लेकिन अगर कहानी इतनी ही आसान होती
03:42तो E20 को लेके इतना विवाद आखिर क्यों हो रहा होता
03:45अब सवाल यहीं से सुरू होता है
03:48कि अगर एथनॉल इतना ही अच्छा है
03:50तो हजारों लोग माइलेज कम होने की सिकायद क्यों कर रहे हैं
03:53आखिर लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि पहले जो गाड़ी 20 किलो मिटर चलती थी
03:57अब उसकी माइलेज में भारी कमी देखने को मिल रही है
03:59और क्या सचमुच एक लीटर एथनॉल बनाने में करीब
04:03तीन हजार लीटर पानी की जरूत पढ़ती है या नहीं
04:06तो यहीं से कहानी का दूसरा और सबसे important हिस्सा सुरू होता है
04:10क्योंकि अब हम बात करेंगे उन सवालों की जिन पर आज पूरे देश में चर्चा सबसे ज़ादा हो रही है
04:16कि अगर E20 फ्यूल इतना फाइदे मंद है तो फिर लोगों की सिकायते इतनी ज़ादा क्यों आ रही है
04:21तो सबसे पहले बात करते हैं माइलेज की
04:23तो पेटरोल की तुल्ला में एथलॉन की जो उर्जा है यानि की एनरजी कॉंटेंट वो थोड़ा कम होता है
04:29इसका सीधा मतलब है कि समान मात्रा में E20 फ्यूल सुध पेटरोल की तुल्ला में थोड़ा कम दूरी तै कर
04:35सकता है
04:36सरकार का दावा है कि ये कमी करीब 2-6% के बीच हो सकती है
04:41लेकिन उपियोग करताओं का नुभो इससे अलग है
04:44कुछ लोगों का कहना है कि उनकी गाड़ियों की माइलेज में उन्हें ज़्यादा गिरावट महसूस हो रही है
04:48हाला कि यहां एक बात समझना बेहत जरूरी है कि माइलेज सिर्फ फ्यूल पे डिपेंड नहीं करता है
04:53गाड़ी की कंडिशन, ड्राइबिंग स्टाइल, ट्राफिक और मेंटेनेंस भी इसमें सामिल होता है
04:59हाल ही में भारत में फ्लेक्स फ्यूल वीकल का काम सुरू हुआ है
05:03जैसे कुछ दोपहिया और कार मॉडल जो अलग-अलग एथनॉल पॉसंट पे चल सकते हैं
05:08लेकिन समस्या यह है कि भारत में भी जादा तर गाड़िया E20 के हिसाब से पूरी तरीके से डिजाइन नहीं
05:14हुई है
05:15ऐसे में E85 या E100 फ्यूल का इस्तेमाल फिलाल सीमित है
05:19अब बात करें E100 यानि की 100% एथनॉल की तो यह फ्यूचर की दिसा जरूर है
05:24लेकिन इसके लिए पूरी गाड़ियों, इंजन टेकनोलोजी, फ्यूल इंफ्रस्टेक्चर को बदलना पड़ेगा
05:30और ये एक काफी लंबी प्रक्रिया मानी जा रही है
05:33अब आते हैं सबसे बिवादित मुद्दे पे यानि की पानी
05:36एक रिपोर्ट के अनुसार एक लीटर एथनॉल बनाने में लगभग
05:39तीन हजार लीटर पानी लग सकता है
05:42खास कर जब या गणने से तयार किया जा रहा हो
05:44वहीं मक्के से बनने वाले एथनॉल में पानी की खपत थोड़ी कम होती है
05:49लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि
05:51यहां पानी सीधे एथनॉल में नहीं जाता है
05:54बलकि पूरी क्रिसी और प्रोसेसिंग सिस्टम में इस्तेमाल होता है
05:57भारत जैसे देश में जहां पहले से ही कई राज्यों में
06:01ग्राउंड वाटर लेबल गिर रहा है
06:19बलेंडिंग देश की क्रूड आयल पर निर्भर तक कम करेगा
06:21जिससे हर साल अर्बो डॉलर की बचत हो सकती है
06:24इसके अलावा किसानों को भी उनकी फसल का बहतर दाम मिल रहा है
06:28सुगर मिल्स के लिएक नया रेवेन्यू मॉडल बन चुका है
06:31कुछ बड़ी कमपनिया जैसे की बलराम चीनी, त्रिवेनी इंजिनिरिंग, डालमिया भारत सुगर और अन्य कमपनिया भी इस सेक्टर में तेजी
06:39से विस्तार कर रही है
06:40लेकिन अभी भी सवाल वही है
06:42आखिर फाइदा किसका है, किसान का, या फिर उन कमपनियस का, या फिर सरकार का
06:47क्योंकि ये चीजे सुनने में भले ही नॉर्मल लग रही हो, पर ऐसा है बिल्कुल भी नहीं
06:51लेकिन हर बदलाओ के साथ चुनोतिया भी आती है
06:54सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मौझूदा गाडिया इस बदलाओ के लिए पूरी तरीके से तयार है या
06:59नहीं
06:59क्योंकि अभी देश में लाखो पुरानी गाडिया चल रही है
07:03जो ना तो पूरी तरीके से E20 के लिए डिजाइन की गई है
07:06और ना ही E85 या फिर E100 फ्यूल के लिए
07:09इसके अलावा इंजन के कुछ पार्ट्स जैसे की रबर सील, फ्यूल लाइन और मेटल कंपोनेंट्स पर एथेनॉल का असर लंबे
07:16समय में देखा जा सकता है
07:18क्योंकि एथेनॉल नमी को आकरसित करता है
07:20अगर पूरे सिस्टम को एक नजर से देखें तो तस्वीर काफी दिल्चस बनती है
07:25एक तरफ देश की उर्जा सुरक्षा, किसानों की आये और इंपोर्ट बिल की बचत
07:29तो दूसरी तरफ हैं माइलेज की चिंता, इंजन की कमपैटिबिलिटी और पानी जैसे संसाधनों पर दवाओ
07:35यानि या सिर्फ एक फ्यूल का बदलाव नहीं है
07:37या भारत की पूरी एनरजी स्टेटेजी का ट्रांजिशन है
07:41और हर ट्रांजिशन की तरह इसमें भी फायदे और सवाल दोनों है
07:45अब सबसे बड़ा सवाल आप से है
07:47क्या E20 फ्यूल भारत के लिए जरूरी कदम है या नहीं
07:50जो हमें ओयल इंपोर्ट से आजादी दिला सकता है
07:53या फिर वा एक ऐसा प्रियोग है
07:55जो आने वाले समय में पानी और इंजन की टेक्नोलोजी जैसी नई चुनोतियां खड़ी कर सकता है
08:00जवाब अभी पूरी तरीके से तैं नहीं हुआ है
08:02लेकिन इतना जरूरत है कि भारत अब पुराने पेटरोल यूग से धीरे धीरे एक नए फ्यूल यूग में कदम रख
08:09चुका है
08:09और आने वाले समय में हमें और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं
08:14ऐसी और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें
08:16गुड रिटर्स डिजिटल
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