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क्या E20 Fuel सच में भारत के लिए फायदेमंद है या फिर इससे आपकी गाड़ी का माइलेज कम हो रहा है? इस वीडियो में हम Ethanol Blended Petrol (E20) का पूरा सच आसान भाषा में समझाते हैं।

सरकार का दावा है कि E20 Fuel से कच्चे तेल का आयात कम होगा, किसानों की आय बढ़ेगी और प्रदूषण घटेगा। लेकिन दूसरी तरफ लोगों का कहना है कि इससे माइलेज में गिरावट आ रही है और पानी की खपत को लेकर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।

इस वीडियो में आप जानेंगे:

E20 Fuel क्या है और कैसे बनता है
Petrol में Ethanol मिलाने का पूरा प्रोसेस
सरकार के फायदे और आर्थिक तर्क
माइलेज पर असली असर कितना पड़ता है
क्या सच में 3000 लीटर पानी लगते हैं?
भारत का Energy Future क्या होगा
यह सिर्फ एक फ्यूल नहीं, बल्कि भारत की Energy Policy का बड़ा बदलाव है।

वीडियो को अंत तक देखें और खुद तय करें कि E20 Fuel आपके लिए फायदेमंद है या नुकसानदायक।


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Transcript
00:02आज अगर मैं आपसे पूछूँ कि आपकी कार में जो पेट्रोल डल रहा है क्या वो सच में 100%
00:08पेट्रोल है या नहीं तो सायद आपका जवाब होगा हाँ
00:11लेकिन सचाई ये है कि अब भारत में मिलने वाला ज़ादा तर पेट्रोल पहले जैसा नहीं रहा है उनमें धीरे
00:18धीरे एथनॉल मिलाया जा रहा है
00:19आपने पेट्रोल पंप पर E-20 लिखा जरूर देखा होगा लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि इसका मतलब क्या
00:26है क्या ये सिर्फ एक नया फ्यूल है या भारत की सबसे बड़ी एनरजी पॉलिसी का हिस्सा
00:31सरकार कहती है कि इससे देश के अर्बो डॉलर बचेंगे किसानों की आय बढ़ेगी और पॉल्यूशन कम होगा
00:38लेकिन दूसरी तरफ कई लोग दावा करते हैं कि E-20 आने के बाद उनकी गाड़ी का माइलेज कम हो
00:43गया है
00:44कुछ लोग तो यहां तक कह रहे हैं कि 1 लीटर एथनॉल बनाने में करीब 3000 लीटर पानी का इस्तेमाल
00:50करना पड़ता है
00:51अगर ऐसा है तो क्या हम सब पेटरोल बचाने के चक्कर में पानी गवा रहे हैं
00:56और सबसे बड़ा सवाल क्या आने वाले समय में भारत की सडकों पर 100% एथनॉल वाली कारें चलती दिखेंगी
01:03या नहीं
01:03तो आईए आज हम इस वीडियो में समझते हैं कि E-20 फ्यूल का पूरा सच क्या है
01:07सरकार के दावो को भी देखेंगे लोगों की राय भी जानेंगे और उन सवालों के जवाब भी खोजेंगे जो सायद
01:13आप सभी के मन में होंगे
01:15सबसे पहले समझते हैं कि आखिर E-thenol क्या है
01:18आसान भासा में कहें तो E-thenol एक तरीके का अलकोहल है लेकिन ये पीने वाला अलकोहल नहीं है
01:23इसका इस्तेमाल इंडस्ट्री और फ्यूल बनाने में किया जाता है
01:26इसे गन्ने, मक्के और कुछ अन्यक्रिसी उत्पादों से तयार किया जाता है
01:31यानि जो फसल पहले सिर्फ चीनी बनाने के काम आती थी
01:35अब वही अपनी कार चलाने के काम भी आ रही है
01:38एथनol बनाने की प्रक्रिया भी काफी दिल्चस्प है
01:40सबसे पहले गन्ने या मक्के से सुगर निकाली जाती है
01:44फिर उसमें yeast मिला कर fermentation कराया जाता है
01:47जिससे वो alcohol form में बदल जाता है
01:49इसके बाद distillation की प्रक्रिया से उसे सुध किया जाता है
01:53और आखिर में वही एथनol पेट्रूल के साथ मिला कर
01:56E10, E20, E85 या फिर E100 जैसे fuel तयार हो जाते हैं
02:02अब सवाल है कि E20 नाम क्यों पड़ा
02:04तो इसका जवाब बहुत आसान है
02:06E का मतलब है ethanol और 20 का मतलब है कि उस fuel में 20% ethanol और 80%
02:12petrol की मात्रा
02:13इसी तरह E10 में 10%, E85 में 85% और E100 में सिर्फ ethanol होता है
02:20लेकिन सबसे बड़ा सवाल कि आखिर सरकार ऐसा क्यों कर रही है
02:24तो इसकी सबसे बड़ी वज़ा है भारत का कच्चे तेल पर निर्भर होना
02:28हम सब को पता है कि भारत अपनी जरूरत का लगबग 85% crude oil विदेशों से खरीता है
02:33इसके लिए हर साल भारत में विदेशी मुद्रग खर्च होती है
02:37अगर पेट्रोल में 20% ethanol मिला दिया जाए तो कच्चे तेल की जरूरत कम होगी
02:41यानि आयाद घटेगा, डॉलर की बच्चत होगी और देश की उर्जा सुरक्षा मजबूत रहेगी
02:47सरकार का दूसरा सबसे बड़ा तर्क किसानों से जिवड़ा हुआ है
02:50जून 2026 तक सरकार के अनुसार गन्ना और मक्का किसानों को एथेनोल सप्लाई चेन के जरिये करीब
02:56एक दसमलो 58 लाग करोड रुपे की आये मिल चुकी है
02:59पहले अतरिक्त गन्ना सिर्फ चीनी मिलो के लिए समस्या बन जाता था
03:03लेकिन अब उन्ही गन्ने का एथेनोल बन रहा है
03:06इससे सुगर मिलो को भी नया बाजार मिला है
03:09और किसानों को भुकतान की संभावनाय भी और बहतर होती देख रही है
03:13सरकार ने तीसरी वज़ा बताई है पर्यावरन को
03:16यानि सरकार का कहना है कि पेटरोल की तुलना में एथेनोल मिस्रिती इधन से
03:20ग्रीन हाउस गैसों कोट सर्जन में कमी लाई जा सकती है
03:23यानि अगर सही तरीके से उसका इस्तेमाल हो
03:26तो ये पारामपरिक पेट्रोल की तुल्ला में आप एक्षा क्रिच साफ इधन साबित हो सकता है
03:31अब अगर सब कुछ इतना अच्छा लग रहा है
03:33देश का फायदा है, किसानों का फायदा है, प्रदूसर भी कम है
03:37और तेल का आयाग भी कम हो रहा है
03:39लेकिन अगर कहानी इतनी ही आसान होती
03:42तो E20 को लेके इतना विवाद आखिर क्यों हो रहा होता
03:45अब सवाल यहीं से सुरू होता है
03:48कि अगर एथनॉल इतना ही अच्छा है
03:50तो हजारों लोग माइलेज कम होने की सिकायद क्यों कर रहे हैं
03:53आखिर लोग ऐसा क्यों कह रहे हैं कि पहले जो गाड़ी 20 किलो मिटर चलती थी
03:57अब उसकी माइलेज में भारी कमी देखने को मिल रही है
03:59और क्या सचमुच एक लीटर एथनॉल बनाने में करीब
04:03तीन हजार लीटर पानी की जरूत पढ़ती है या नहीं
04:06तो यहीं से कहानी का दूसरा और सबसे important हिस्सा सुरू होता है
04:10क्योंकि अब हम बात करेंगे उन सवालों की जिन पर आज पूरे देश में चर्चा सबसे ज़ादा हो रही है
04:16कि अगर E20 फ्यूल इतना फाइदे मंद है तो फिर लोगों की सिकायते इतनी ज़ादा क्यों आ रही है
04:21तो सबसे पहले बात करते हैं माइलेज की
04:23तो पेटरोल की तुल्ला में एथलॉन की जो उर्जा है यानि की एनरजी कॉंटेंट वो थोड़ा कम होता है
04:29इसका सीधा मतलब है कि समान मात्रा में E20 फ्यूल सुध पेटरोल की तुल्ला में थोड़ा कम दूरी तै कर
04:35सकता है
04:36सरकार का दावा है कि ये कमी करीब 2-6% के बीच हो सकती है
04:41लेकिन उपियोग करताओं का नुभो इससे अलग है
04:44कुछ लोगों का कहना है कि उनकी गाड़ियों की माइलेज में उन्हें ज़्यादा गिरावट महसूस हो रही है
04:48हाला कि यहां एक बात समझना बेहत जरूरी है कि माइलेज सिर्फ फ्यूल पे डिपेंड नहीं करता है
04:53गाड़ी की कंडिशन, ड्राइबिंग स्टाइल, ट्राफिक और मेंटेनेंस भी इसमें सामिल होता है
04:59हाल ही में भारत में फ्लेक्स फ्यूल वीकल का काम सुरू हुआ है
05:03जैसे कुछ दोपहिया और कार मॉडल जो अलग-अलग एथनॉल पॉसंट पे चल सकते हैं
05:08लेकिन समस्या यह है कि भारत में भी जादा तर गाड़िया E20 के हिसाब से पूरी तरीके से डिजाइन नहीं
05:14हुई है
05:15ऐसे में E85 या E100 फ्यूल का इस्तेमाल फिलाल सीमित है
05:19अब बात करें E100 यानि की 100% एथनॉल की तो यह फ्यूचर की दिसा जरूर है
05:24लेकिन इसके लिए पूरी गाड़ियों, इंजन टेकनोलोजी, फ्यूल इंफ्रस्टेक्चर को बदलना पड़ेगा
05:30और ये एक काफी लंबी प्रक्रिया मानी जा रही है
05:33अब आते हैं सबसे बिवादित मुद्दे पे यानि की पानी
05:36एक रिपोर्ट के अनुसार एक लीटर एथनॉल बनाने में लगभग
05:39तीन हजार लीटर पानी लग सकता है
05:42खास कर जब या गणने से तयार किया जा रहा हो
05:44वहीं मक्के से बनने वाले एथनॉल में पानी की खपत थोड़ी कम होती है
05:49लेकिन यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि
05:51यहां पानी सीधे एथनॉल में नहीं जाता है
05:54बलकि पूरी क्रिसी और प्रोसेसिंग सिस्टम में इस्तेमाल होता है
05:57भारत जैसे देश में जहां पहले से ही कई राज्यों में
06:01ग्राउंड वाटर लेबल गिर रहा है
06:19बलेंडिंग देश की क्रूड आयल पर निर्भर तक कम करेगा
06:21जिससे हर साल अर्बो डॉलर की बचत हो सकती है
06:24इसके अलावा किसानों को भी उनकी फसल का बहतर दाम मिल रहा है
06:28सुगर मिल्स के लिएक नया रेवेन्यू मॉडल बन चुका है
06:31कुछ बड़ी कमपनिया जैसे की बलराम चीनी, त्रिवेनी इंजिनिरिंग, डालमिया भारत सुगर और अन्य कमपनिया भी इस सेक्टर में तेजी
06:39से विस्तार कर रही है
06:40लेकिन अभी भी सवाल वही है
06:42आखिर फाइदा किसका है, किसान का, या फिर उन कमपनियस का, या फिर सरकार का
06:47क्योंकि ये चीजे सुनने में भले ही नॉर्मल लग रही हो, पर ऐसा है बिल्कुल भी नहीं
06:51लेकिन हर बदलाओ के साथ चुनोतिया भी आती है
06:54सबसे बड़ा सवाल ये है कि भारत की मौझूदा गाडिया इस बदलाओ के लिए पूरी तरीके से तयार है या
06:59नहीं
06:59क्योंकि अभी देश में लाखो पुरानी गाडिया चल रही है
07:03जो ना तो पूरी तरीके से E20 के लिए डिजाइन की गई है
07:06और ना ही E85 या फिर E100 फ्यूल के लिए
07:09इसके अलावा इंजन के कुछ पार्ट्स जैसे की रबर सील, फ्यूल लाइन और मेटल कंपोनेंट्स पर एथेनॉल का असर लंबे
07:16समय में देखा जा सकता है
07:18क्योंकि एथेनॉल नमी को आकरसित करता है
07:20अगर पूरे सिस्टम को एक नजर से देखें तो तस्वीर काफी दिल्चस बनती है
07:25एक तरफ देश की उर्जा सुरक्षा, किसानों की आये और इंपोर्ट बिल की बचत
07:29तो दूसरी तरफ हैं माइलेज की चिंता, इंजन की कमपैटिबिलिटी और पानी जैसे संसाधनों पर दवाओ
07:35यानि या सिर्फ एक फ्यूल का बदलाव नहीं है
07:37या भारत की पूरी एनरजी स्टेटेजी का ट्रांजिशन है
07:41और हर ट्रांजिशन की तरह इसमें भी फायदे और सवाल दोनों है
07:45अब सबसे बड़ा सवाल आप से है
07:47क्या E20 फ्यूल भारत के लिए जरूरी कदम है या नहीं
07:50जो हमें ओयल इंपोर्ट से आजादी दिला सकता है
07:53या फिर वा एक ऐसा प्रियोग है
07:55जो आने वाले समय में पानी और इंजन की टेक्नोलोजी जैसी नई चुनोतियां खड़ी कर सकता है
08:00जवाब अभी पूरी तरीके से तैं नहीं हुआ है
08:02लेकिन इतना जरूरत है कि भारत अब पुराने पेटरोल यूग से धीरे धीरे एक नए फ्यूल यूग में कदम रख
08:09चुका है
08:09और आने वाले समय में हमें और भी बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं
08:14ऐसी और खबरों और अपडेट्स को जानने के लिए देखते रहें
08:16गुड रिटर्स डिजिटल
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