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  • 47 minutes ago

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00:03The
00:04The
00:04The
00:05The
00:08foreign
00:14foreign
00:15foreign
00:16foreign
00:30it is 14 years ago, I'm not going to eat the chicken
00:37with my hands. I'm going to eat the chicken
00:39and eat the chicken.
01:14Oh
01:15foreign
01:23foreign
01:24foreign
01:53We will meet them.
01:55Raja का कोई सदा संबनी नहीं होता
01:58कल सारा दिन नगर में
02:00चारों और नगरवासी
02:02अपने नए Raja का गुंगान करते रहे
02:05उनके विचार में
02:06ऐसा आदर्श राजा आज तक
02:09आयोध्या को नहीं मिला
02:11कल
02:13कल ऐसी बाते करने का कारण क्या था?
02:15कल
02:17महादेव वैश्य की पुत्री का विवा था
02:22बारात मधुरा नगरी के एक बड़े व्यापारी
02:26भामंडल वैश्य के यहां से इधर आई थी
02:29आप जानते हैं कि मधुरा के राजा मधु का विवा
02:33महाराज रावन के कुल में हुआ है
02:37उसका पुत्र लवरा सुरही आज कल राज करता है
02:42ऐसा लगता है कि इस बारात में उसके कुछ गुप्तचर भी आये थी
02:49तुमने ऐसा कैसे समझा कि वो गुप्तचर हैं?
02:53सारी बारात में केवल ये चार-पांच ही बाराती हैं
02:57जो कल दिन भर सारी आयोध्या में घुमते रहे
03:03वो नगर में जगा जगा दुकानों पर कुछ वस्तुएं खरीदने के बहाने जा रहे थे
03:10और नागरिकों से आपके बारे में कई प्रश्न कर रहे थे
03:15कि आयोध्या का राजा कैसा है?
03:21आपके आज्या हो तो उन्हें पकड़ कर कुछ पूछ पूछताच की जाए?
03:26केबल उन पर द्रश्टी रखो
03:28जो आज्या है?
03:30आरे सुमागद
03:32महाराज
03:33कल नगर सभा की ओर से एक बैठक हुई
03:37जिसमें इस बात पर विचार किया गया
03:40कि गंगा में पानी
03:42अकस्माद बढ़ जाने से
03:44जिन गाओं को शती हुई है
03:47वहां की परजा की सहायता के लिए
03:49आयोध्या के नागरिक क्या कर सकते हैं?
03:52राज्या की ओर से कुछ नहीं किया गया?
03:55राज्या की ओर से बहुत कुछ किया गया है
03:57परंतु अयोध्या के नागरिक साहेता करना अपना कर्तब्रे समझते हैं
04:03यह तो बहुत अच्छी बात है और?
04:07और कल रात
04:10कल रात क्या हुआ?
04:12कल रात एक स्त्री राजमहल के दौर पर जोर जोर से चिल्ला कर कह रही थी
04:19कि मुझे इसी समय महाराज राम से मिलना है
04:22मुझे नयाय चाहिए
04:24फिर?
04:25प्रहरी ने दौर नहीं खोला
04:27उसने कहा
04:28प्राता राज्य सभा में जाओ
04:31फिर?
04:32वो रोती रही
04:34प्रहरी ने दौर नहीं खोला
04:36और वो उसी आवेश में चली गई
04:40कौन थी वो?
04:41मैंने ये जानने के लिए
04:43उसका पीछा करने की कोशिश की
04:47परन्तु वो
04:48अपने आवेश में
04:50इतनी तेजी से भागती हुई
04:52सर्यू के किनारे
04:54अंधकार में खो गई
05:06और क्या समचा रहे?
05:07बाकी सबोर से गुशल मंगल
05:12कुछ नागरिकों कुछ शंका है
05:14कि राज्य की ओर से उन पर कर बढ़ा जाएगा
05:18परन्तु उनकी ये शंका निर्मूल है
05:21हम सर्व साधारन प्रजा से
05:24अंदादुन्द कर लेने से
05:25कभी सहमत नहीं हो सकते
05:30महाराज
05:30हम सर्व साधारन की ओर से
05:32आपका धन्यवाद करते हैं
05:40आरे सुमंत
05:42कल रात्री में
05:43राजमहल के द्वार पर
05:46एकिस्त्री न्याय मांगने के लिए आई थी
05:49परन्तु से ये कहकर भेज दिया गया
05:51कि कल सबेर आना
05:53क्यों?
05:54प्रहरी का कहना है
05:56कि महाराज उस समय महारानी के साथ
05:58अपने विश्राम ग्रह में पधार चुके थे
06:01महाराज और महारानी के विश्राम में बादा ना हो
06:04इसलिए उसे
06:05आज पराता बुलाया है
06:08आरे सुमंत
06:10यदि न्याय में देरी की जाए
06:12तो वो न्याय नहीं
06:14अन्याय हो जाता है
06:16और कभी कभी उसका परिणाम
06:19बहुत भयानक होता है
06:23हमारे विचार में
06:25यदि प्रजा का कोई भी व्यक्ति बे आराम जाकता हो
06:29तो राजा को आराम से सोने का कोई अधिकार नहीं है
06:31He says,
07:30
07:31Take a look at each other in the village and take a look at each other and take a look
07:37at each other and take a look at each other.
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