00:00नमस्ते आचार्या जी, मेरा ये कोशन है कि एक अफेक्शन डिपेंडेंसी में कब बदा जालता है, ये कैसे रेकनाईस करेंगे?
00:07डिपेंडेंस भी अपने आप में अधूरा शब्द है, सवाल ये भी है कि डिपेंडेंस किस किसम किये?
00:14इमोशनल स्टेबिलिटी
00:16इमोशनल स्टेबिलिटी माने क्या?
00:18हमारा जो इमोशनल रहेगा वो उनके उपर डिपेंडेंडेंट रहेगा कि अगर वो हमें
00:22मतलब सीधे सीधे, जमीन की बात करके बोलें तो क्या?
00:25कोई है जो दिख जाता है तो मन खुश हो जाता है, ये बोल रहे हो ना?
00:28वैसे नहीं मतलब अच्छा जिससे कुछ नहीं मिलना अगर वो अच्छे से बुरे से बात करे तो बहुत फर्क पड़ता
00:35है?
00:35नहीं ठीक है तो यानि फर्क उसी के अच्छे से बोलने से पड़ता है जिससे कुछ मिल रहा है वो
00:42कुछ क्या है?
00:45पर जिन्दगी में एक दो इंसान आप खड़े कर लेते हो कि अगर वो मुझसे ठीक से बात नहीं कर
00:49रहा तो मेरा इमोशन डाउन हो गया
00:50तो यह तो बताओ उससे मिल क्या रहा है और उस सवाल पर हम कभी जाते नहीं
00:56वोट इस दा इग्जाक्ट ट्रांजाक्शन इन डरिलेशन्शिप क्योंकि उसके रूठने से आशे बस इतना ही होता है कि अभी रूठ
01:05गया है तो वो जो माल इससे मिलने वाला था अब वो मिलेगा नहीं
01:08पता तो करो कि जो तुम्हारे इमोशन्स का तुम्हारी भावनाओं का समराट बनकर बैठ गया है उस समराट के पास
01:16तुम्हें देने के लिए सच मुछ है क्या
01:19पुट यो फिंगर ओन दे रियल डील देखो पर जब ऐसा बोलता हूं तो बुरा लगता है कहते हैं इस
01:28आदमी की नजर में तो सब कुछ बस मिटीरियल ही है इसको प्यार का कुछ पता नहीं है प्यार तो
01:34एक उची भावना होती है
01:38मुझे प्यार हो एक तो पता नहीं पर हाँ प्यार के नाम पर व्यापार हो रहा हो तो पकड़ लेता
01:42हूं
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