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अद्भुत अविश्वसनीय अकल्पनीय: जहां हनुमान चालीसा की जगह होती है 'दैत्य वंदना', कारण जान रह जाएंगे हैरान
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00:15नमस्कार मैं हूँ श्वेता सिंग गोस्वामी तुलसीदास की हनुमान चालिसा में एक चौपाई है
00:21भूत पिशाच निकट नहीं आवे महावीर जब नाम सुनावे यानि महावीर यानि हनुमान जी का नाम लेने से भूत पिशाच
00:30आदी दूर रहते हैं
00:31लेकिन भारत में एक ऐसा गाउं है जहां लोगों ने एक दैति को अपना भगवान मान लिया है और हनुमान
00:39जी के नाम से भी उन्हें बैर है
00:41जहां जय बजरंग बली बोलने की सख्त मना ही है जबकि दैति की निरंतर जय जयकार होती है
00:47अद्भूत आस्था की और विश्वस्निय और कल्पनिय मान्यता के दर्शनूं के लिए चलिये हमारे साथ इस गाउं
00:55जहां हर तरफ दैति की महिमा का बखान होता है लेकिन बजरंग बली की जय नहीं बोली जाती
01:14हमारे गाउप परास्त कोई मैस्री का अपत्ती भी नहीं आती है
01:22जैसे हनुमान जी राम भक्त है निस्सिम उस्तरह स्री निंबाज अत्ते महराज राम भक्त है
01:28होजरी व्याक्षा स्कूल में उनका जन्म हुआ
01:42तरफ दैति महाराज ने हनुमान जी को परास्त कर दिया इस गाउ में हनुमान जी का नाम ने रहेगा
01:48है कि गाउ में हनुमान महारोती बवन इस नाम को भूई विक्ती यहाँ पे चलता नहीं है
02:01हम महारोती कार में बेटे सुझा नहीं है
02:06गाउ में आप कहीं भीज़ग है वहां पे ।्धबल मगली मारत कहीं नहीं है
02:13अ गायओ रखेदा हुआ है नाम कि और मकूर्मान जीकले महाराज का कहीं सुझा नहीं तो
02:30छ patent वरेस्फटी जव्क्यान के सब….
02:40मंदिर में आर्थी दैत्य की
02:53घरों पर कृपा दैत्य की
02:57हर शुभ काम से पहले दैत्य की पूजा
03:05हर अनिष्ट से बचने के लिए दैत्य की शरण
03:11पूरा गाव दैत्य की जागीर
03:15हर गाव वासी दैत्य का पुजारी
03:20यहां भगवान के लिए कोई जगह नहीं
03:23क्योंकि दैत्य ही यहां का भगवान है
03:38अद्भूत आस्था की अक्सर ऐसी तस्वीरे मिल जाती हैं जहां
03:41पूजा का विधान और विश्वस्निय और कल्पनिय होता है
03:45जैसे उत्तर प्रिदेश के बिसरक में रावन के प्रती अगाद श्रद्धा
03:50पुडे में प्रेथ बेताल बाबा का मंदिर
03:52जिनके बारे में हम आपको आगे दिखाएंगे
03:54लेकिन अभी हम जिस गाओं की बात कर रहे हैं
03:59यहां की जो मान्यता है
04:00वो केवल इतनी नहीं कि दैत्य को पूजने वालों का गाओं है
04:04बलकि यहां पर हनुमान जी से घंगोर बैर भी है
04:09यह गाओं महराश्र के एहमद नगर से 60 किलोमीटर दूर है
04:18यहां हनुमान जी की पूजा करना मना है
04:22गाओं वले लोग हनुमान जी को मान सनमन देते है
04:27तो ओ गाओं की आई सीरी थे
04:30हनुमान जी से जगाह पर उनको मान दिया जाता है
04:39हनुमान जी का नाम लेना भी मना है
04:42हनुमान जी के नामों वाले व्यक्तिका गाओं में घुसना मना है
04:56यहां कोई हनुमान चालीसा नहीं पड़ता
05:19हनुमान जी के नाम वाली गाड़ी तक नहीं खरीदता
05:40एक दैत्य के प्रती इतनी आस्था और हनुमान जी से इतना बैर
05:44आखिर यह कैसी मान्यता है और यह कैसी अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय श्रद्धा है
06:00अद्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय की टीम जब दैत्यनांदुर गाम पहुंची तो वाकई
06:05यहां घरों, दुकानों, गाडियों पर हर जगह निम्बा दैत्य महाराज की कृपा को समर्पित नाम ही हर जगह लिखे हुए
06:15मिले
06:19आखिर क्यों यहां के लोगों ने हनुमान जी से नाता तोड लिया है
06:25आखिर क्यों यहां हनुमान जी के नाम वाली गाडी तक लोग नहीं खरीदते
06:31आखिर कौन है यह निम्बा दैत्य
06:45प्रभू की नाम जब करते थे जब हनुमान जी यहां से जा रहे थे उदर
06:50तो उन्हें ने देखा कि कुछ निम्बाद इतने नाम का राक्षेस यहां पे है
06:55और मेरे राम जी को कुछ ना कुछ उसे गलती हो सकते है, कुछ कर सकता है
06:59इसके बारे में उन्हें ने देखा, तो नीचा आगे, दोनों के बारों में जगडा हो गया
07:06उनका जो तंटा हुआ, जगडा हुआ, उन्होंने प्रभूराम चंद्रजी ने उनको एक आश्रवाद दिया
07:20उनको एक आपवाद ऐसा गाव होता है, कि उनको गाव में हनुमान जी का मंदिर नहीं, नहीं है
07:27उनको ओ जो गाव है, ओ प्रभूराम चंद्रजी ने स्री निम्बा जट्ते महराज को जहागिरी दिया, ओ गाव दान दिया
07:40रामजी खुश हुए और रामजी ने बोला कि आपको ऐसा क्या चाहिए, जट्ते महराज को बोला कि मैं आपको दू
07:46तब ओ बोले कि जैसे आपने कबूल किया है, कि जैसे हनमुझे आपके भक्त है, वैसे मैं हूँ, तो मुझे
07:52आईसा एक स्तान देओ, कि जिसमें सिर्फ मैं ही आपका भक्त दिखू
07:55और उस ताइम पर रामजी ने खुश होकर ये गाओ अपने निम्बा देते हैं, उनको गिब दिया कि आज सिर्फ
08:02तुम्हारे इच रहेगा, तुम्हारे नाम से सब चलेगा इस गाओ में
08:09आज का देत्य नांदूर गाम जिस क्षेत्र में आता है, वो रामायन काल में वर्णित, दंड कारण ये वन का
08:16हिस्सा है, जहां से भगवान राम वनवास के समय गुजरे थे
08:25गाम के लोगों का विश्वास है कि इस गाम की जागीर भगवान राम ने निम्बा दैख्ते से प्रसन्न होकर उसे
08:31सौप दी थी, और तब से ये गाम उसके सनरक्षन में माना जाता है
08:38जो हमारा ग्राम दैवत है, इस गाव के जो लोग है, उनका जो विश्वास है, वो सभी देव के उपर
08:45ही आता है और देव हमारा जो भगवान है, वो हमारा रख्षा करता है
08:50सर्विस होती है कुछ भी होती है मन्नत हमें दैत्ति माराज को मांगते है तो पूरी करते है दैत्ति माराज
08:55और शादी के पहले भी पर नया कुछ भी जाता है ना तो उदर दैत्ति माराज को जाता है दूसरे
09:01गाव में जाता है तो यह हनुमान को चलता है इधर नहीं चलता क�
09:17लड़का है ना जुल वयतला उनकी शादी है तो खुशी का महाओ लेगर हाँ खुशी का महाओ लेगर हाँ गाव
09:30के लोग कोई भी शुभ कार्य करने से पहले किसी और भगवान को नहीं बल्कि सिर्फ निम्बा दैत्य का ही
09:36नाम लेते हैं और उनहीं की आराधना करते हैं
09:42कि याशुभ कारे होता है शादी वगरे तो कारेक्रम में इतर गाव में जैसा लोग पहला ग्राम दैवत का मान
09:52हनुमान जी को देता है पैसा ओ गाव की आईसी रित है कि ओ गाव का जो मान सनुमान है
10:01ग्राम दैवत का ओ स्री निम्बा दैत्य को मिलता है ग्राम लोग देते है
10:19जितनी अद्भुत है दैत्य में आस्था, उतनी हिया विश्वस्निय है एक दैत्य महाराज की पूजा का विधान भी
10:50पूरण पूरी का हर घर का हर रोज उनको भोग लगता है
10:59ली माद्यत महाराज की यात्र रही
11:12चली, मान लिए, कि आस्था तो किसी की भी
11:15किसी में भी हो सकती है लेकिन गाउं में हनुमान जी पूरी तरीके से क्यूं वर्जित है उनका नाम लेने
11:22या स्मरण करने से क्या हो जाता है
11:24उनके नाम की इस गाउं में सख्त मना ही क्यूं है
11:34रामायन काल से गाउं की प्रथा निम्बा तैत्य को पूजने की रही
11:38लेकिन हनुमान जी का नाम न लेने की जो कहानिया लोगों ने सुनाई
11:41वो वाकई अध्भुत अविश्वस्निय अकल्पनिय है
11:50मैंने संकल्प लेकर मारूती की गाड़ी लेकिन कभी उसका नाम नहीं लेता था
11:57यही कहता था कार लाओ, कार की चाबी लाओ
12:00एक बर मैं कार लेकर शहर से आ रहा था, सड़क खाली थी
12:03पता नहीं चला क्या हुआ, गाड़ी राइट साइड में खेतों में चली गई
12:06मैं काफी अच्छा ड्राइवर था, ऐसे कैसे हुआ समझ में नहीं आया
12:10मेरे दवा खाने में जहां कभी मरीजों की लाइन लगती थी, अचानक वहां पर मरीज कम हो गए
12:14सौ से दो तीन पर आ गए, मुझे समझ में नहीं आया, आखिर ऐसा क्यूं हो रहा है
12:18तब मुझे एक राच सपना आया, जिसमें एक ब्रहमर ने कहा कि जब मारूती की गाड़ी यहां चलती नहीं, तो
12:23क्यूं खरी थी
12:24मैंने फॉरन कार अपने दोस के नाम ट्रांसफर करती, उसके बाद मेरे दवा खाने पर फिर मरीजों की भीड लगने
12:29लगी
12:29आज तक फिर किसी ने मारूती की गाड़ी वहां नहीं खरी थी
12:35गाम के लोगों का मानना है कि हनुमान जी से निम्बा दैत्य का जगड़ा हुआ था
12:39इसलिए उन लोगों ने खुद अनुभव किया है कि अगर कोई चीज हनुमान जी से जुड़ती है तो मुश्किल आती
12:46ही है
12:46बोराने जमाने का टेक्टर है वह बहुत बड़ी ब्रेंट उस टाइम का सबसे स्ट्रॉंगेस टेक्टर था उस कमपनी का
12:53और आइसे बोलते है कि वह टेक्टर के फसा उसकी पावर जो इंजिन थी ट्रिपल इंजिन थी जो बोलते है
12:58उस टाइप की तो वह चोटा सा खड़ा था उसमें फस गया था
13:03सारे लोग उसको चार पाच बैल गड़ी लेकर आये थे उस टाइम पर खीच रहे थे फिर भी वह निकलने
13:09रहा था लोग बोले आइसा क्यों रहा है कि वह पता नहीं था
13:12सिंपल सी जब लोगों ने हमारे निमबा देटेजी महाराज उसका नाम लिया और फिर वो ढखका देके वो ट्रैक्टर आगे
13:19गया पर बात में एक लोगों को दिखा कि उसके पीछे नाम महारुती क्या था तब लोगों ने माना कि
13:25ये हमारे देटे महाराज ने हमें सक्षत
13:28करकिया है कि आप लोग हैसन है कि कोई गलती से हुआ तो उस ने पर आप डाइरेक्ली चैलेंज लेके
13:36इधर आए तो सबसे मांगा पड़ सकता है
13:40सबसे हैरान करने वाला दावा तो ये है कि इस गांव से जुड़े एक व्यक्ति ने गांव से बाहर हनुमान
13:46जी के नाम वाली कार खरीदी तो वो भी मुश्किल में पड़ गया
13:51मेरे भाई नाशिक में उस तरह धी करे उनका नाम श्रिपा दई पड़े तो उनके बारे में वे घटना हुई
13:56थी उन्होंने सर्विस को लगने के बाद मारोती एट हंड़ेड एक गाड़ी नहीं खरीदी थी लेकिन गाड़ी खरीदने के बाद
14:03साथ-ाठ दिन में ही उनका �
14:05उस गाड़ी में एक्सेंड हुआ था तो हमारे जो पुरानी आंकल है या दादाज है उन्होंने सब को ध्यान में
14:11आया कि यह क्यों हुआ तो गाव सब एजुकेट है गाव में 90% सब लोग एजुकेट है हम आजकल
14:19बोलते ही कि सब दुनिया में साइंस चल रहा है लेकिन सा�
14:31आंकल ने बोला कि पहले आपने को गाड़ी बदल ने बढ़ेंगी जब बाद में जो मारती गाड़ी हमने बेज दी
14:37और मारती छोड़के जो दुसरे कमपनी है टाटा हो या हुंडा हो गाड़ी लेने के बाद हमें वह इसी कुई
14:42दिक्कत ने आई
14:45इस गाव में बाहर से आने वाले व्यक्ति का नाम भी अगर हनुमान जी के नामों से जुड़ा है तो
14:51उसका प्रवेश तभी गाव में संभव है जब उसका नाम बदल दिया जाए
14:56उस पे जो मजदूर थे एक मजदूर का नाम हनुमान था लेकिन वो काम करते समय जब देखा गया तो
15:04आचानक उसके मन में कुछ बात हो गई उनके शरीर में बदलाव हो गए और वो गलत-गलत कुछ बाते
15:11करता था
15:12जब गाव के 10-12 लोग वहाँ पे गए और उनसे वो नाम लेके बोल रहे थे हनुमान तुम शांत
15:18रह जाओ और इस गाव का तो इतियास आपको मालूम है पता है कि इस गाव में हनुमान मारोती पवन
15:25इस नाम का कोई विक्ती यहाँ पे चालता नहीं है क्योंकि प्रभू र
15:52अगर कोई गाव का व्यक्ती बाहर किसी नौकरी में जाता है तो निम्बादैत्य को किसी न किसी रूप में अपने
16:00साथ लेकर ही जाता है वाकई अद्भुत है यह विश्वास
16:06जब वो अपने डिउटी पे जाता है अपने साथ निम्बादैत्य जी महाराज की छोटी मूर्ती हो या फोटो हो वो
16:13लेके जाता है और सुभ सवेरे वो उसका दर्शन लेता है उसका नाम लेता है और आपना काम शुरू कर
16:20देता है
16:38निम्बा दैत्य के प्रती ऐसी आस्था और लोगों के लिए लोग कथा की तरह हो सकती है
16:43लेकिन इस गाम के लोगों के लिए ये विरासत है
16:46एक ऐसी विरासत जो युगों से चली आ रही है और इसे कोई बदलना नहीं चाहता
16:52लोग खुश है कि उनके रक्षक भगवान नहीं एक दैत्य है
17:03जिस पर विश्वास होता है उसी में आस्था हो जाती है फिर भगवान हो या शैतान देवता हो या दैत्य
17:09है
17:09लेकिन इसके साथ ही हम आपको अब आस्था के एक ऐसे अध्भुत रूप को दिखाने जा रहे हैं जिसे देखने
17:17के लिए मैं पहुंची पुणे
17:18उसमें प्रेतों क्या राजा वेताल लोगों की अटूट श्रद्धा का ईश्वर है वेताल का शादिक अर्थ होता है ऐसी अत्रिप्त
17:26आत्मा जो शम्शान में मुर्दा शरीर पर बैठी होती है जिसे प्रेत योनी का सबसे शक्तिशाली पिशाच माना जाता है
17:33लेकिन उस �
17:34वेताल कभी मंदिर हमें मिला और हजारों भक्त भी जो रोज उनकी पूजा सदियों से करते चले आ रहे हैं
18:13महाराष्ट्र का शहर पूणे आधुनिक चकाचौंद से भरा हुआ लेकिन जहां से इस शहर की सीमाएं शुरू होकर जहां खत्म
18:20होती हैं वहां तक शहर से सटी हुई एक उची पहाड़ी है
18:25इस पहाड़ी को कहा जाता है बेताल पहाड़ी
18:30क्योंकि मान्यता ये है कि 2600 फीट उची इसी पहाड़ी पर विराजे है
18:35आठ करोड भूतों के समराज बेताल
18:41वही बेताल जो महाराजा विक्रमादित्य की कहानियों में भी नज़र आते थे
18:48बेताल हमारे लिए कहानियों का एक पात्र था
18:50जिसे 2500 साल पहले महाकवी सोम्देव भट ने बेताल पचीसी में गढ़ा था
18:59कहानिया कहती है कि बेताल एक प्रेत था
19:02जो पेड़ पर उल्टा लटका रहता था
19:04और महाराजा विक्रमादित्य के कंधों पर सवार होकर कहानी सुनाया करता था
19:11लिकिन क्या वाकई बेताल बेताल महाराज हो सकते हैं या वाकई सैक्डों साल पुराना बेताल मंदिर भी हो सकता है
19:25और क्या सच में उनकी पूजा भगवान की तरह की जा सकती है
19:33इन सवालों के साथ हम निकल पड़ें पूणे की उस पहाडी की ओर जिसकी चोटी पर बेताल महाराज के मंदिर
19:41का दावा किया जाता है
19:44पहाडी पर पैदल ही चड़ा जाता है लिहाजा हमने गाड़ी नीचे छोड़ी और चड़ाई चड़नी शुरू करने
19:52एक तो खड़ी चड़ाई और दूसरे मन में ये भाव कि हम बेताल यानि भूतों के राजा के मंदिर में
19:59जा रहे हैं
20:01तीसरे चारों तरफ घंगोर जंगल ये रास्ता किसी के लिए भी आसान नहीं रहता होगा
20:08जब हम चड़ाई चड़ रहे थे तो हमें कुछ ऐसे लोग मिले जो मंदिर से बेताल के दर्शन करके लोट
20:14रहे थे
20:14हमने उनसे बात की ताकि ये समझ सकें कि भूतों के राजा बेताल के दर्शन का उनके लिए आखिर महत्व
20:21है क्या
20:26रॉब गजाब है करें ही लुँ है रहे एक है इस ने तो उसमें gonad की ये जो पोति पढिन
20:42हैो तो श्रावानमास में मौते
20:44का जिकर है तो दर्शन के लिए है बहुत सोब्स होकून
20:56मन में उत्सुकता और बढ़ी।
21:18पिशाच राज महाबूत बेताल महाराज।
21:25पूजापाट तो हो रही थी, लेकिन चारों तरफ एक रहस्यमाई खामोशी थी।
21:31मुख्य प्रतिमा के आसपास कई छोटी छोटी पत्थर नुमा मूर्तियां थी।
21:36जो गेरू से रंगी हुई थी।
21:38हमारे मन में उस आस्था का पूरा सम्मान करते हुए कई सवाल भी थे।
21:42क्या ये वही बेताल हैं, जिने हमने कहानियों में पढ़ा और टीवी सीरियल्स में देखा था।
21:48और क्यों इन्हें भूतों का महाराजा माना जाता हैं, जब आप मंदिर की देखरेख करने वाले एक बुजुर्ग से मिला।
21:56यहां की दर्शन को बहुत ही पावन माना जाता है।
22:00लोग बार-बार यहां दर्शन करने आते हैं, उनकी मनो कामनाएं पूरी होती हैं, यहां वो तरह-तरह की मिठाईयां
22:07चड़ाते हैं।
22:09बातों-बातों में हमें पता चला कि आम तौर पर पहाड़ी वाले इस मंदिर में कम ही लोग आ पाते
22:15हैं, जिसकी वजह से सन्नाटा सा रहता है।
22:19लेकिन अमावस्या या पूर्णिमा की रात को अकसर यहां तंत्र सिद्धियों को पाने के लिए विशेश पूजा की जाती है।
22:25उस वक्त यह खामोश पहाड़ी मंत्रो चार से गूंजने लगती है।
22:42लोगों का मानना है कि बेताल बाबा की पूजा करने से भूतों से जुड़ी कोई बाधा उन्हें नहीं घेरती।
22:47उल्टे बेताल बाबा उनकी रक्षा करते हैं, लिहाजा सदियों से इस पहाडी पर आकर बेताल बाबा की पुजा करने का
22:54रिवाज इस क्षेत्र में हैं
23:05इस मंदिर में आने को बोगुले तो पापा यह सब आते रहते
23:11दरसल अगर हम पुराणों की बात करें तो वेताल बाबा या वेताल महराज, वेताल देवता किसी नाम से कोई जिक्र
23:17नहीं मिलता है
23:18लेकिन पुणे में इतिहास दर्ज है
23:19यहां 100 साल पुरानी पांडूलिपियां है
23:22जहां पर विदिवत बताया गया है
23:23कि वेताल महराज की पूजा कैसे करनी है
23:28बेताल को पहले
23:29सिर्फ लोग देवता माना जाता था
23:32लेकिन पुणे के मशहूर
23:33शोध करता डॉक्टर डीवी मुंजाल
23:36ने बाकाइदा बेताल के एतिहास
23:38पर रिसर्च की तो पता चला
23:39कि पुराणों में तो बेताल नाम के
23:41किसी देवता का कोई जिक्र नहीं मिलता
23:44लेकिन पुणे के
23:45100 साल पुराने मराठी साहित्य में
23:48बाकाइदा बेताल महाराज का जिक्र है
23:51जिसमें उन्हें आठ करोण भूतों का
23:53राजा बताया गया है
23:55ये दुरलब पांडुलिपी
23:57आज भी पुणे के भंडार कर
23:59ओरियंटल रिसर्च इंस्टिट्यूट में
24:01बेताल स्रोत के नाम से रखी हुई है
24:04जानकारों का कहना है
24:05कि इस पांडुलिपी में
24:06बेताल की पूजा विधी से लेकर
24:09बेताल को खुश करने के लिए
24:11विशेश क्रियाओं का भी विधिवत वर्णन किया गया है
24:14जिनका उपियोग
24:15विशेश सिद्ध की कामना लेकर
24:17आने वाले श्रधालू करते है
24:39पहाडी पर बने वेताल मंदिर में
24:41हमें एक और हैरान करने वाली बात पता चली
24:44कि इस मंदिर में कम चहल पहल इस कारण है
24:47क्योंकि अब वो यहां से जा चुके है
24:49और शहर के बीचों बीच एक मंदिर में उनका वास है
24:53इसके पीछे की कहानी बहुत ही दिल्चस्प है
24:59आठ करोड भूत प्रेतों के महराज जो हैं वेताल महराज
25:03यहां पर आप इस परिसर में देखिएगा
25:05आपको बजरंग बली का मंदिर पूर्ण रूप में नजर आ जाएगा
25:09आपको शिव जी का मंदिर पूर्ण रूप में नजर आ जाएगा
25:11लेकिन अगर आप देखेंगे कि यहां के जो मुख्य आराध्य है
25:14यानि कि वेताल बाबा उनके सर पर कोई छट नहीं है
25:18कोई मंदिर का निर्माण नहीं है
25:19यह है क्यूं यह जाननी की भी हमने कोशिश की
25:23और जो वज़े सामने आई बहुत दिलजस्प
25:27बेताल पहाडी के नीचे बसे पुणे शहर में ये है
25:30बेताल महाराज का एक और मंदिर
25:33जहां स्थापित प्रतिमाएं वैसी ही थी
25:35जैसी पहाडी के उपर वाले मंदिर में थी
25:37लेकिन सवाल ये था कि जब पहाडी पर मंदिर पहले से मौजूद था
25:42तो पहाडी के नीचे एक और मंदिर कहां से आया और क्यूं स्थापित किया गया
26:33यानि कहानी वाले बेताल की ही तरह अगर शर्त नहीं मानी तो वो बात नहीं मानते
26:38बातों बातों में हमारे सामने ये रहस्योत घाटन भी हुआ कि बेताल महाराज के मंदिर पर छट क्यूं नहीं डाली
26:46गई
27:32एक रात में चट पूरी बन नहीं सकती और अधूरे निर्मान की वजह से
27:37भूतों के राजा की नाराजगी कोई जहलना नहीं चाहता इसलिए आज तक बेताल बाबा की मूर्तियों पर छट नहीं डाली
27:44जा सकी
27:45ये सब जानते हैं कि बेताल महाराज भूतों के राजा हैं लेकिन अध्भूत है ये बार कि बच्चा हो या
27:53बूढ़ा डर किसी को नहीं लगता। उल्टे उनका श्रधा भाव और अधिक बढ़ जाता है।
28:15विताल महाराज को शिवजी का रूप माना गया है और ये है विताल महाराज की सेना यानी प्रतिकात्मक तोर पर
28:22हम कहें तो ये छोटे-छोटे भूत हैं जो उनकी सेना में शामिल हैं तो लोग यहाँ पर पूजते हैं
28:27उन्हें कि उन्हें सनरक्षन प्राप्त हो सके।
28:45शंकर का वतार है। यह उनका शेहनिक है। भूद के सेनिक है, बूत भूद है।
29:18वैसे पुराणों में किसी बेताल महाराज या बेताल भगवान का उलेख तो नहीं मिलता लेकिन शिव पुराण में जहां शिव
29:26पार्वती विवाह का अध्याय आता है
29:28वहां भगवान शिव की बारात में कई प्रमुक गणों के शामिल होने का जिक्र मिलता है जिन में भूत पिशाज
29:34प्रेत और बेताल को प्रमुक गण माना गया है इस लिहाज ये माना जा सकता है कि शिव जी के
29:39गणों में शामिल होने की वजह से आज भी बेताल को भगवान ज
29:55यह आस्था ही है जो प्रेतों के राजा बेताल को भगवान मान लेती है निम्बादेत्य को हनुमान जी से बड़ा
30:02रामभक्त घोशित करती है ऐसी ही अध्भुत कहानी है अधर्म एहंकार और अनीती का पर्याय माने जाने वाले रावन की
30:10पूरे संसार में रावन को बुराई
30:23का पुतला जलाया जाता है नहीं राम लीला होती श्री राम के हाथों रावन का संहार असत्य पर सक्य और
30:32गुराई पर अच्छाई की विजय के तौर पर देखा गया यूग बीते लोग आज भी रावन का पुतला जला कर
30:39बुराई के अंध का संकल्प लेते हैं
30:44लेकिन जब पूरे देश और दुनिया के तमाम हिस्सों में रावण के अंत की खुशियां मनाई जा रही होती है
30:50उस समय एक गाव ऐसा भी है जहां न राम की लीला का बखान होता है न कोई उत्सब
31:01दिल्ली से सटा गाव विसरक जिसे स्थानिय लोग आश विश्रवा की तपो भूमी और रावण का जन्मस्थान मानते हैं
31:09यह वो गाव है जहां रावण खलनायक नहीं बलकि कुल पुरुष माना जाता है
31:15यहीं है वो मंदिर जहां लखेश रावण की पूजा भूमी इस मंदिर के इतिहास का महत्तव क्या है
31:24यह मंदिर जो है ना ब्रह्माजी अकपुलस्त्रुनी रावण के दादा और बाबा उनके द्वारा जो है यह सिविलिंग जो है
31:33स्वाइम फिर्गट करी है
31:35उस साइड में गोरी संकार है और यह साइड में सिविलिंग है जो स्वहम पिरिवट करी जब यह यहां कोई
31:40स्रष्टी नहीं की जब का है
31:41ऐसा है कि जो है रावड की इसलिए पूजा करें थी सम्हेख
31:56इस मंदिर का
32:18तो यहां पर रावड ने अपना बच्पन में पूजा करी और उनका यहां पर वच्पन भी था अपने पिताजी के
32:23पास अगुरकुल जा उनका था बाद में फिर रावड का जो लंका हमारी सब जगे
32:37इनकी फेमस है लंका में बाद में जाकर उन्होंने अपने यहां पर रावड की मूर्ती भी थापित है आगे वहाँपर
32:47और बड़ा प्राचीन मंदिर है
32:51देश भर में दशहरे पर रावड के पुतले जलते हैं लेकिन विसरक्त में ऐसा करना वरजित माना जाता है
32:58यहां रामलीला का मंचन भी नहीं होता। स्थानिय लोगों का विश्वास है कि रावण का अपमान गाम के लिए अशुब
33:06होता।
33:12यह एक पुरानी खांदानी ऐसी परंपरा चली आ रही है जिससे हैं रामलीला का कोई मंचन नहीं होता है।
33:19अगर कोई रामलीला का मंचन भी करता है तो बहुत बुरही हो जाता है। बहुत गलत होता है।
33:26नटकी कला नहीं होती है। रामलीला का मंचन नहीं होता है। और रावण का कोई कुछला नहीं होता है।
33:46पूरी दुनिया में भले रावन को बुराई के प्रतीक के रूप में देखा जाता हूँ, लेकिन बिसरक गाव में रावन
33:53की विधिवत पूजा किसी देवता की तरह होती है।
34:16सटे बिसरक में सदियों से यही परंपरा निभाई जा रही है। यहां रावन को सिर्फ लंका का राजा नहीं बलकि
34:23गाव का पुत्र माना जाता है। इसलिए न यहां रावन का पुत्ला जलता है नहीं राम लीला हुदी।
34:47इसलिए है। ठीक है। और यहां पर दसेरा मारा नहीं मना जाता है। उसके रीजन थे किसी एक बार राम
34:53लीला हो रही थी तो यहां पर डैथ हो गई थी।
34:54तो उस दिन से रावन की कुछ ऐसा लगाता है लोगों लगा कि नाराज हो गई है। तो उस दिन
34:59से रावन की पूजा करते हैं।
35:03और राम लीला नहीं मनाते हैं हापे।
35:06बिसरक का ये मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि भारतिय परंपराओं के उस अनोखे पक्ष की मिसाल है जहां
35:14इतिहास, लोकमान्यता और आस्था एक दूसरे से जुड़ जाते हैं।
35:20ये रावन का जो जनमिस्तान है, बिसरक जो है रावन की जनमिस्तली है।
35:25इसलिए यहां पर रावन की मूर्ति स्थापित की हुई है, उनको पूजते हैं लोग।
35:30और आपने शिव मौापुराण में और रावन सहीता जो है, उसमें सारा इस चीज का वर्णन दिया हुआ है।
35:37यह प्राचीन जो शिव मंदिर हैं अस्ट भुजी शिवलिंग है, जो पूरे भारतवर्ष में एक ही है, जो यहां पर
35:42इस्थापित है, जिसकी पूजा करते थे और जहां पर रावन ने अपना जितनी भी सिद्धिया थी, जो शिव की पूजा
35:50करके जो भी प्राप्त किया �
35:54रामायन में रावन अधर्म का चेहरा है, इसमें कोई विवाद नहीं, लेकिन क्या उसकी पूरी कहानी सिर्फ इतनी ही है,
36:02क्या वज़े है कि बुराई का सबसे बड़ा प्रतीक माने जाने वाले रावन को आज भी कुछ लोग अपना आराध्य
36:09मानते हैं
36:28कहते हैं कि किसी इनसान में लाख गुण हो, लेकिन उसका एक अब गुण, उसके सारे गुणों पर पर परदा
36:34डाल देता है
36:35रावन भी ऐसा ही था, भगवान शिव जिसकी तपस्या से प्रसन्न हुए, ब्रह्मा जी ने जिसको वरदान दिया
36:43और श्री राम जिन्होंने रावन के अंतिम क्षणों में भी उसके ज्यान का सम्मान किया, लेकिन यही रावन अपने अहंकार
36:50के कारण असूर माना गया
36:51यही विरोधा भास, रावन को इतिहास का सबसे अध्भुत, अविश्वस्निय, अकल्पनिय पात्र बनाता है
37:01सनातन धर्म में कणकण में इश्वर का वास माना गया है, यही कारण है कि लोक मान्यताओं और स्थानिय विश्वास
37:08के आधार पर आस्था के रूप भी बदलते हैं
37:11आज के लिए अध्भुत, अविश्वस्निय, अकल्पनिय में इतना ही देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए आप देखते रहिए
37:19आज तक
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