00:07आज तक मैं हूँ आपके साथ मांच दिख्षित और आज हम बात कर रहे हैं इरान की इरान के पूरू
00:14सुप्रीम लीडर आयतुल्या लिखाम नहीं के अंतिम संसकार की
00:17तेहरां के ग्रेंट मौसला परिसर में अंतिम शद्धांजली की तैयारिया पूरी कर लिगए हैं और इसी परिसर में देश विदेश
00:25से आने वाले लोगों और प्रतिनिति मंडलों की मौझूदगी में
00:30खामनई को अंतिम शद्धांजली दी जाएगी वहीं सुरक्षा कारणों के चलते आयतुल्या की बेटे मौस्तवा खामनई के शामिलना होने की
00:38खबर है
00:38सुरक्षा एजेंसियों को हमले का डर है और इसलिए उन्होंने मौस्तवा को अंतिम संसकार समारों से दूर रहने की सला
00:45दी है
00:46वहीं अंतिम शद्धांजली में देश विदेश के कई लोगों को न्योता भी बेजा गया है
00:50भारत की तरफ से विदेश राज्यमंत्री पवित्र मार्क डिरिटा और बिहार की राज्यपाल सेद अता हस्नैन और सल्बान खुर्षिद अंतिम
00:59संसकार में शामिल होंगे
01:07इंडियन डेलिगेशन भी शामिल होगा सुरक्षा कारूनों की वज़ा से मौस्तबा खाम नहीं वहां शामिल नहीं होंगे
01:15लेकिन सारजनिक शोक इस वक्त मनाया जा रहा है तहरान की सड़कों पर
01:18यह तस्वीर जो आप पहली देख रहे हैं उससे देख के अंदाजा लगाया जा सकता है
01:26सुप्रीम लीडर आयतल्ला अली खामरी के अंतिम संसकार में कॉंग्रिस की तरफ से
01:30पूर विदेश मंत्री और कॉंग्रिस के वरिशनिता सलमान खुर्षिट शामिल होने जा रहे हैं
01:34उनसे बात की हमारे सही होगी सुमित चौधरी ने
01:38करीबन चार महीने के बाद ही जो सुप्रीम लीडर थे उनकी जो फ्यूनल सेर्मेनी है वो आखिरकार इरान में होने
01:44जा रहे है
01:45इसको लेकर भारत अपने तरफ से प्रतिनिदी मंडल भेज रहा उसके अलावा कॉंग्रेस की तरफ से भी सलमान खुर्षिट साब
01:51वहां पर जा रहे हैं जो चेर परसन भी है उनकी जो फॉरन डिपार्टमेंट है उसका और इसके लावा वो
01:56विदेश मंत्राले में या वि�
02:11बचाता है कि जाना यह विजिट कितनी इंपोर्टन्ट है भारत के लिए विए है इसलिए है कि जो
02:21तो हालात हुए जंग के दोड़ान, उसमें बहुत सारे सवाल उठे के कौन किसके साथ है और कितना साथ ख़ड़ा
02:32है, बुरे वक्त में अपने दोस्त का साथ देना एक फर्ज है इसान का, किसी भी मुल्क का एक फर्ज
02:39है, जब हमारे इतने गहरे और पुराने रिष्टे हैं,
02:42और इरान ने हर मौके पर हमारा साथ दिया है और हमारे साथ ख़ड़ा रहा है, जब हमारा पाइप्टिस्दान से
02:49मसला हुआ, मैं अकिल ब्यारी बाच पैसाब के साथ जनीवा गया था, तो उस वक्त इरान ने बड़ चल कर
02:57और बड़े खुल कर हमारा साथ दिया था, और इ
03:12रिष्टे बिगड़ गए थे, अमरीका के साथ थे, हमारे रिष्टे इसराइल के साथ हैं, जिनके साथ उनका जाहर है, उनका
03:18कोई रिष्टा नहीं है, और अब तो उन पर जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो
03:23जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो जो
03:41हमने वो बात कही क्या हमने वो ख़दम उठाए चो उस वक्त एरान के लिए बहुत बहुत मौदू होते और
03:49बहुत जरूरी होते
03:50लेकिन इसकी शिकायत एरान में नहीं की मुझे यह एसास इस बात का है कि एरान में बड़ी फिराग गली
03:58से हंदोस्तान का साथ निभाया है
04:00और जब हमारी कष्टिया और मुझ से निकलने वाली थी निकल रही थी उस वक्त एरान में हमारा साथ दिया
04:07यकीनन एक बहुत बड़ी और बहुत फिराग दिली की बात है
04:11और जो भी हुआ जिस दबाव में उस वक्त फाला जो भी बने आज उनकी हमदर्वी में और उनके खंकर
04:20जाकर हम उनका घंव वटा सकें
04:23इसके लिए जो भी पहल की है, हम उसका तावून करते हैं
04:31और जो हमारा अपना फर्ज बनता था, उस फर्ज को अदा करने के लिए
04:36जब उनकी दावत नामा आया था, तो हमारी पार्टे ने फॉरण ये कहा
04:41कि हम यकीनल किशे को भेजेंगे और मुझे मदूख किया कि आप जाईए और ये हमारा पेर्गाम पहुचा के आईए,
04:47तो खारगे साब ने एक खत लिखा है, उस खत को में लिजाकर आपने जो नहां पर हम लोगों को
04:55होस्ट हो लिए उनके को बहुत है, एक और इंपॉर्टन
05:09को अउसले पर शिकायत हैं। मेरो को वालेट करने की लगातार वैलेशन है कि इसरैल से बात हो नहीं रही
05:17है, बात क्वालेका से पर नहीं भी है, लड़ाई
05:21अमरीका ने मौल ले ली जबकि ये लड़ाई इसरेल ड़रना चाहता
05:32तो बात तो अमरीका और इरान की बीच में हो रही है और हमें खुशी इस बात यहां तक पहुंची
05:38है बात के साथ दिन में उमीद यह है और यह तवक्व है जो कर रहे हैं कि इसका एक
05:45पूरा हल निकल पाएगा हल तो भी पूरा नहीं निकला है लेकिन बहुत हद तक मामले आ�
05:56चल रही थी उसपर तमा दूका मि अब इसको एक परम नंग निजाम बनाएया जा सके जिसमें आगे कभी इस्किसीं
06:10मंफिम इसकी घ्म और उसमे curved हमारा क्या वत हो सकता है हमारा क्या ऐ suction हो सकता है इसको
06:18सब्सक्राइब हर इसको अभी तक बाजिए नहीं किया हमारी हुक्य ह
06:24इसे बात को बादे नहीं किया, कि जहां एक तरफ एरान अभी भी हमसे अच्छे तालुकात बनाए हुए और जाय
06:33है, इस मौके पर उन्होंने दावत नामद दिया है, हमारी हुकूमत के लोगों को दावत नामद दिया है, तो अब
06:39हम उसके रिस्पॉंस में हम क्या कर सकते हैं
06:44और हम उनकी कैसी मदद कर सकते हैं, जो हालात हैं उनने, ये बड़ा सवाल है, इस पर कुछ जवाब
06:50मिले तो फिर आगे इस पर बुश्तरी रह सकते हैं।
07:14आपनई के जनाजे कारिकरम पर एक डीटेल रिपोर्ट।
07:44और वहा के मेज़भी लीडरों ने इसे सिर्फ एक अंतिम संसकार नहीं, बलकि तारीक का सबसे बड़ा और अनुखा योजन
07:52बनाने के लिए कमर कसली है।
08:23देश के कई बड़े शहरों में निकाला जाएगा जुलूस।
08:24भाषा में कहें तो ये कोई मामूली जनाजा नहीं है, बलकि एक ऐसा मजहभी, सियासी और डिप्लोमाटिक शक्सी प्रदर्शन है,
08:31जो आने वाले वक्त में मिडलीस्ट की पूरी सियासत का रुख बदलने वाला है।
08:36इसलामी तोर तरीकों में आम तोर पर तदफीन यानी शव को डफना के काम जल्द से जल्द करने का दस्तूर
08:43है, लेकिन जंग के हालात, सुरक्षा वजहों और खास रंडनीतियों के चलते इसमें देरी हुई।
08:48अब इरान ने जो रूप से यार किया है वो बेहत खास है। ये सफर सिर्फ इरान तक सीमित नहीं
08:54है, बलकि ये शिया इसलाम के सबसे मुकदस मुकामों को आपस में जोडता है।
09:18पौम से लाया जाएगा। आठ जुलाई को सरहत पार कर इराक के नजफ में शिया समुदाय के सबसे पाक मुकाम
09:26के दरगा में ले जाया जाएगा।
09:27नौजुलाई को इराक से लोटने के बाद हामिने के जन्सल वाले शहर मशाद में शव को सुपुर्दे खाक किया जाएगा।
09:36शिया समुदाय में गम, मातम और शहादत का मुकाम बेहद नाजुक और गहरा है।
09:41कर्बला का वाक्या और एमाम हुसैन की शहादत इस समुदाय के अकीदे और तहजीब की बुनियाद है।
09:48जब इरान की लीडर्शिप ने इस जनाजे को मुहर्रम के पाक महिने के दौरान करने का फैसला किया, तो इसके
09:56पीछे बहुत सोची समझी मजहभी भावनाय थी।
09:59आमतोर पर मातम को सिर्फ दुख जाहिर करने का जरीया माना जाता है, लेकिन शिया संस्कृती में ये नाइंसाफी के
10:05खिलाफ खड़े होने, प्रतिरोध करने और हक के लिए जान कुर्बान करने का संकल्ब भी है।
10:11इरान की लीडर्शिप दुख की इस घड़ी को एक प्रेड़नादाई मौके की तरह इस्तमाल करना चाहती है।
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