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यूट्यूब पर पूरे वीडियो का शीर्षक:
मूर्तियों और मिथकों को मानें कि नहीं? || आचार्य प्रशांत, वेदांत महोत्सव ऋषिकेश में (2022)
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Transcript
00:00क्या विदान्त मूर्ति पुजा के विरोधी हैं?
00:03मूर्ति बहुधा उपयोगी होती है
00:06तो मूर्ति विर्थ नहीं होती
00:09हाँ कुछ लोग ऐसे हो सकते हैं
00:11जो मूर्ति का सहारा लिये बिना भी आगे बढ़ जाएं
00:14उठीक है कोई आपत्ति नहीं उनसे
00:17लेकिन अधिकांश लोगों को मूर्ति की सहता चाहिए
00:20मूर्ति माने कुछ भी ऐसा जो साकार है
00:22आवश्यक नहीं कि वो पत्थर की अलोहे की हो
00:25काल्पनिक भी हो सकती है
00:27जो कुछ भी साकार है आपके मन में जिसकी छवियंकित हो रही है
00:31उसे हम कहते हैं मूर्त
00:34तो मूर्त का सहारा तो लेना ही पड़ता है
00:36निर्गुड तक पहुँचने के लिए भी सबुड का सहारा तो लेना ही पड़ता है
00:40तो इसमें कोई डरने की बात नहीं है
00:42वेदान्त तुमसे नहीं कह रहा
00:44कि तुम्हारी मूर्तियां जूठी है या हमारे मंदिर व्यरत है बिल्कुल भी नहीं
00:49हाँ वेदान्त इतना जरूर कह रहा है कि मंदिरों को पुनुरुद्धार चाहिए
00:54कि मंदिर सिर्फ गाजे बाजे ढोल तमाशे की केंदर नहीं होने चाहिए
01:01मंदिरों में आध्यात्मिक शिक्षा होनी चाहिए सब मंदिर सुन्दर हैं सब मूर्तियां अर्थ पूर्ण हैं बशर्ते आपको वो अर्थ पढ़ने
01:12आते हूं
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