00:00प्रणाम अचारे जी, मैं एक पीडाटीशियन हूँ, हमारी पोस्टिंग दूर दराज के इलाकों में पेरिफेरीज में लगी थी, जैसे कई
00:07बार मैं OPD में बाठी रहती थी, तो वो मुझसे ही आके पूछते थे कि डॉक्टर साहब कहा है, डॉक्टर
00:14साहब से उनका मतलब हो
00:27होगे, मेल बनातोगे न, हाँ अंतर इसमें हो सकता है कि इंजिनियर बोलूं तो कोई दिखा दे कि वो बिल्डिंग
00:33बना रहा है, कोई दिखा दे कम्प्यूटर बना रहा है, पर बनाओगे किसी पूरुष कोई, हमारी संस्कृती हैसी जिसमें डॉक्टर
00:39है ही पुलिंग, �
00:41यहां तक ख कि भाषा में, डॉक्टर नी, अगर महिला बन भी गई तो डॉक्टर नहीं बन सकती, वो डॉक्टर
00:52नी ही बनेगी, जैसे कि कहा जा रहा हो कि इसकी अपनी कोई हैसियत नहीं,
00:58किसी की बीवी वगेरा होगी तो अगर हमारी संस्कृत में ये बात सुईकार होती कि महिला भी तो डॉक्टर, फाइटर,
01:08ब्रिगेडियर, इंजिनियर कुछ भी हो सकती है
01:11हमारी भाषा भी लिंग भेद रखती है और ये बात सिर्फ पुरुशों ने नहीं महिलाओं ने भी आत्मसाथ कर रखी
01:19है
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