00:08ओद्धर प्रदेश की मिर्दापूर की सडकों पर जब खजारो श्रदालू पानी की बॉचारों के बीच जूमते हुए हिंडो लामा के
00:15साथ चलते हैं
00:16तो ये नजारा किसी रहस से कम नहीं लगता
00:19लेकिन आखर ये हिंडो लामाता होती क्या है
00:21क्या ये कोई अलग देवी है और हर साल इतनी भवे जहा की आखर क्यों रिकाली जाती है आईए जानते
00:28हैं इस अनोही परंपरा की पूरी कहाने
00:31सबसे पहली जानना जरूरी है कि हिंडोला माता कोई अलग देवी नहीं है बिर्जापर और विंधाचल शेत्र में माता शीतला
00:38की विशेश शोभा यात्र को हिंडोला कहा जाता है इस यात्र में मां शीतला की परतिमा या स्वरूब को एक
00:44सुन्दर सजे हुए पालने या वि�
01:00प्रुवग जूले पर विराजमान कर नगर भ्रमण कराते हैं। ये श्रद्धा, सेवा और भक्ति का प्रतिक है। इस परंपरा के
01:07पीछे कई धार्मिक मानता हैं। माशीतला को रोगों और महमारी से रक्षा करने वाली देवी मानते हैं। नगर के सुख
01:14समरदी और लोगों क
01:15की अच्छे स्वास की कामना से हर साल उनकी शोभायात्रा भी निकाली जाती है। श्रद्धालू मानते हैं कि माता पूरे
01:22नगर का भ्रमण कर अपने भक्तों को आशरवात देती हैं और संकटों से रक्षा करती है। माता शीतला का संबंद,
01:29शीतलता यानी ठंडक से होता है�
01:31स्वागत में पाने की फुहारे छोड़ी जाती हैं
01:34जिसे वातावरन शीतल रहे
01:35और माता की प्रती सम्मान भी प्रकट हो सके
01:38वहीं शोभायात्रा के पीछे का उद्देश केवल एक ही है
01:42कि मा अपनी शीतलता बदलते मौसम के साथ
01:46लोगों को प्रदान करें
01:47ताकि वो स्वस्त रहे और किसी भी तरह के बदलते हुए मौसम की वज़े से
01:52रोग आदी की चपेट में ना आए
01:55फिलहाल अस वीडियो में इतना ही वीडियो को लाइक और शेयर करें
01:59साथी चैनल को सब्सक्राइब करना ना भूले
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