00:00जीले में स्वास्थ प्रवस्था को मजबूत और सुद्रिट बनाने के लिए प्रशाशन की तरफ से योजना बनाने के दाविक किये
00:05जाते हैं
00:06लेकिन उनकी योजना एजादा तर कागजों पर ही रहती है, धरातल पर नाम मात्र ही उतर पाती है
00:11ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि स्रावनी मेला के दौरान पिछले वर्श स्रधालों को तुरंत अस्पताल पहुचाने के लिए
00:1710 बाइक अम्बूलेंस लाए गए थे
00:41बाइक के चक्के जमीन में धस कर मिट्टी फांक रही है, जबकि यदि अस्पताल प्रबंधन और स्वास्त विभाग चाहता तो
00:47इन अम्बूलेंसों को आम दिनों में भी उप्योग किया जा सकता था
00:50जिले में अभी भी कई ऐसे ग्रामिन छेत्र हैं जहां पर बड़े अम्बूलेंस का आगमन मुश्किल होता है
00:56ऐसे में इन अम्बूलेंसों के माध्यम से सुदूर छेत्रों में रहने वाले मरीजों से उनकी मदद की जा सकती थी
01:03जसीडी समुदाइक स्वास्त के अंदर में खड़ाब हो रहे इन बाइक एम्बूलेंस को देखने वाला कोई नहीं है
01:07पर रहे इम्बूलेंस को लेकर जसीडी स्वास्त केंदर के चिकित्सा प्रभारी डॉक्टर विशनात चौदरी से जब बात की गई तो
01:14उन्होंने कहा कि उन्हें इस इम्बूलेंस को उप्योग करने की अनुमती नहीं मिली है
01:18लेकिन सवाल यह उठता है कि जब उनके छेत्र अधिकार में यह एम्बूलेंस परे हुए हैं तो उसकी देखरेग भी
01:23उन्हें ही करने थी
01:24लेकिन कहीं न कहीं इसमें अस्पताल प्रवंधन की लापरवाही जरूर दिख रही है
01:29पूरे मामले पर जब जिले के सिविल सर्जन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि खराब हो रहे हैं
01:34अब देखने वाली बात होगी कि इस तरह के अम्बूलेंस को कब तक दुरूस्त करा जाता है
01:53ताकि आम लोगों को सेवा मिल सके
02:16इसको सरक कभी उप्योग तो क्या जा सकता है इमर्जन से
02:18इसके लिए हम बबर नहीं बूला गया है
02:20स्रावनी मिला के नहीं की बताया हो
02:21अबबूरेंस के स्रू गाई इसके अधा लिया जा सकता था सुदूरो कियांगा
02:33अध्यु ए बाईक के स्पड़ाब कर दो एसके इसकंति अधा इसके कहें बबलेंस
02:51I will see it.
02:53If it is time, then I will be back to it.
03:21नई नई बाइके जो है लाई गई है और यह सभी बाइके नए थे लेकिन देख रेक के अभाव में
03:27अभी या जर जर पढ़े हैं हला कि जब प्रबंधन से बात करने की कोशिस की गई तो उन्होंने कहा
03:33कि स्रावनी मेला के दोरान इसका उपयोग होता है इसलिए स्रावनी मेल
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03:58foreign
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