00:00ओ, ओ, ओ, ओ, ओ, इश्क का रंग ऐसा चड़ा, सब कुछ फीका पड़ गया
00:36नाम तेरा जब लिया, दिल ही काबा बन गया
00:45ना मैं काफिर, ना मैं मौमिन, ना दुनिया की कोई रस्म, तेरे दर का मैं हूँ सवाली, तु ही मेरा
00:54घर्म कर्म
00:56तु ही मालिक, तु ही हाकिम, तु ही रहबर, तु ही हम दम तेरे इश्क में मित गय हम, बाकी
01:05हर पहचान कम
01:07इश्क का रंग ऐसा चड़ा, सब कुछ फीका पड़ गया
01:22कभी सूफी बोले अली अली कभी गाये कोई राम, जिसने इश्क को समझ लिया, उसका एक ही ना
01:33ना सोचा ना समझा, बस दिल ने तुझे चुना, जो तेरा हुआ मौला, वो ही असली फकीड बना
01:43जखम भी तू, मरहम भी तू, दर्द की लग्जत भी तू, प्यास लगी जब रूह को, उस प्यास की राहत
01:53भी तू
01:54इश्क का रंग ऐसा चड़ा, सब कुछ फीका पड़ गया
01:59इश्क का रंग ऐसा चड़ा, सब कुछ फीका पड़ गया
02:05नाम तेरा जब लिया, दिल ही का बाँ बन गया
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