00:12ुद्यान अपक्षियों के साथ मीठे पाने के कच्छों का भी प्रमुक संग्रक्षन किल बनता जा रहा है
00:18भरतपूर के विश्प्रसिद घना में पहली बार टर्टल सर्वे शुरू किया गया है
00:23इस सर्वे के जरी कच्छों की प्रजातियों, उनकी संख्या, आवास और संग्रक्षन की चुनोतियों का बिस्त्रत डाटा तयार किया जाएगा
00:33केवलादेव तो अपने बर्ड्स के लिए जना ही जाता है, पर यहाँ टर्टल का भी अच्छा स्पीसिस डैवर्सिटी पाया जाता
00:39है
00:40हमारे प्रिवियस स्टेडिस के अकॉर्डिंग यहाँ साथ टकार के टर्टल स्पीसिस मिले जाते हैं प्रेशवाटर के
01:00पूरे राजस्थान में सिर्फ केवलादेव में ही रेकॉर्डेड है
01:03उद्यान निदेशक चेतन कुमार विवी के अनुसार यहाँ साथ प्रजातियां मौझूद हैं जो राजस्थान के कुल 11 प्रजातियों में से
01:11दो त्यहाई है
01:12खास बात यह है कि ब्राहमी रिवर टेरापिन और पिकॉक सॉफ्ट सेल टर्टल जैसे दो दो लप्रजातियां पूरे राजस्थान में
01:20सिर्फ केवलादेव में ही पाई जाती है
01:22पांच तीमो द्वारा बारा महत्मुन जलाशियों पर हो रहे है इस सर्वे से बेसलाइन डाटा तयार होगा और भविश में
01:29हर साल मौनिटरिंग की जाएगी
01:56कच्छोई बेटलाइन की स्वास्त की महत्मुन संकी तक है
01:59वे जलाशियों को साफ रखते हैं और पारस्थित्कित संतुलन बनाए रखते हैं
02:04या पहल न केवल दुल्ल प्रजादियों की सुरक्षा करेगी बलकि देश के अन्य आदरभूमी शित्रों के लिए भी संगरक्षन का
02:11प्रभावी मौडल साबित हो सकती है
02:13भरतपूर से ETV भारत के लिए श्याम बिर सिंकी रिपोर्ट
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