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  • 7 minutes ago
लगभग 50 साल बाद अब देश के स्कूली बच्चे भी 1975 की इमरजेंसी के बारे में पढ़ेंगे. एनसीईआरटी ने पहली बार कक्षा 9 की सोशल साइंस की किताब में 'आपातकाल' पर एक अलग चैप्टर शामिल किया है.एनसीईआरटी की नई सोशल साइंस की किताब 'Understanding Society: India and Beyond' में 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल को भारतीय लोकतंत्र की सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बताया गया है.वीओ-किताब में लिखा गया है कि आपातकाल के दौरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिए गए...प्रेस पर सेंसरशिप लगाई गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया.इस अध्याय में लोकनायक जयप्रकाश नारायण के नेतृत्व में चले आंदोलन का भी उल्लेख किया गया है...साथ ही ये बताया गया है कि 1977 के चुनाव में जनता ने मतदान के जरिए अपना फैसला सुनाया और लोकतंत्र की मजबूती का परिचय दिया.

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00:03लगभग 50 साल बाद अब देश के स्कूली बच्चे भी 1975 की इमेजेंसी के बारे में पढ़ेंगे
00:09NCEART ने पहली बार कक्षा 9 की सोशल साइंस के किताब में आपातकाल पर एक अलग चेप्टर शामिल किया है
00:16NCEART की नई सोशल साइंस की किताब Understanding Society India and Beyond में 1975 से 1977 के बीच लगे आपातकाल
00:25को भारती लोकतंत की सबसे बड़ी चुनोतियों में से एक बताया गया है
00:28किताब में लिखा गया है कि आपातकाल के दोरान कई मौलिक अधिकार निलंबित कर दिये गए
00:33प्रेस पर censorship लगा दी गई और कई राजनेतिक नेताओं और कारेकरताओं को गरफतार किया गया
00:39इस अध्याए में लोकनायक जबरकाश नारेन के नेतवत में चले आंदुलन का भी उल्लिक किया गया है
00:44साथ ही ये भी बताया गया है कि 1977 के चुनाओं में जन्ता ने मतदान के जरी अपना फैसला सुनाया
00:51और लोकतंत्र की मजबूती का परिछे दिया
00:53नई किताब में फेक न्यूज, गलत जानकारी, गरीबी, शेत्रवाद, लेंगिक एसमानता और लोकतंत्र में मीडिया की भूमिका जैसे विशो को
01:02भी विस्तार से शामिल किया गया है
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