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भारत की किस पार्टी ने सबसे ज्यादा बगावत देखा है? देखें कहानी में
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00:27पार्टी के भीतर ही शुरू हो जाता है
00:29जब महत्व का अंशाएं टकराती हैं नेत्व पर सवाल उठ जाते हैं और भरोसे की दीवारे दरखने लगती हैं तब
00:36राजनेतिक दलों के सामने अस्तित्व का संकट खड़ा हो जाता है
00:40कुछ फैसली निताओं को नई उचाईयों तक पहुचा देते हैं तो कुछ राजनेतिक परिद्रिश को बदल देते हैं
00:47आज कहानी दल बदलू राजनेतिकी जिससे सिर्फ पार्टियों का भविश्य नहीं बदला वलकि देश की राजनेतिकी दिशा और दशा दोनों
00:56को प्रभावित किया
01:22मताव एनरजी को कॉंगरेस से अलग होकर त्रणभूल कॉंगरेस बनाते वह देखा
01:26और दूसरी और पीए संगमा और शरत पमार को NCP का गट्विं करते हुए दिखा
01:40हमारा जो भविश्य है राजितिक भविश्य जो है वो कहीं का नहीं गएगा तो उन्होंने अपने अपने रास्ते अपना लिए
01:46ममदब एनरजी का त्रिनूमूल किसे है यह हाईजेक हो चुका है खाली में खाया उसमें छेट किया खाली में खाया
01:53है लोगो उसमें छेट करके चले गए है
02:00आम आदनी पार्टी में उटे सवाल अभी थमे भी नहीं थे कि पश्यमंगार की राजिति में नई हल्चर शुरू हो
02:06गई
02:06त्रिनूमूल कॉंग्रिस बगावत के दावों ने सियासी पारा चड़ा दिया और अब माराश से ऐसी तस्वीरे सामने आ रहे हैं
02:13जिन्होंने उधव थाक्रे के लिए नई चिंता खड़ी कर दी है
02:17सवाल सिर्फ इन पार्टियों का नहीं है सवाल उस राज्यतिक प्रवती का है जो बार-बार भार्टि राजिति का चेहरा
02:24ही बदल देती
02:32प्रिशन टाइगर हो रहा है अपरेशन ऐसा हो रहा है अपके खासदरों को आपने समबलना यह ज़रूरी था वो आप
02:39समबल नहीं पाए उसके बारे में कोई चर्चा नहीं कि यह बेमान है और बेमानी उनके खुन में है ऐसा
02:46आप लगने लगा है
02:48सब को पता है कि औरिजनल टाइगर कौन है अपरेशन टाइगर नहीं है और पिशन गीदड़ है सत्ता की भूक
02:55उसकी एक मर्यादा होती है
03:03कि तुम्हें तकलीफ हो रही थी तो तुमने एलेक्शन के बाद ये तकलीफ क्यों जाहिए कि एलेक्शन को पहले करना
03:10चाहिए था
03:13कि यह पार्टी टूट रही है वो तना तेजी थे तो तो तेना नहीं टूटी थी विचार विमार्स कुछ नहीं
03:20किया लिए इतना कि उसका पावर मस्तिस्ट अंधर चला गया है कि हमको कोई कुछ करने वाला नहीं है जुरी
03:27है
03:30यह तो पूरा बेहिमानी स्विप ममता दी थी या त्रिमोल कंगेस से नहीं है यह पूरा बेहिमानी एक एक भोटर
03:39के साथ भी है
03:43कुछ सालों से मैं यह फील कर रहा था हूं दैट परहाप्स आइम दो राइट मैन बट इन दे रॉंग
03:49पाटी
03:51उबाठा नाम की पार्टी अब धीरे धीरे खत्म हो रही है मैं आम आदमी पार्टी से अपने रास्ते अलग कर
03:59रहा हूं आपको गाली इसलिए दी जा रही है क्योंकि आपने अपनी पार्टी के साथ जिसने आपको सब कुछ दिया
04:06आज आपकी शादी भी अगर हो पाईए �
04:08इसलिए उपाई क्योंकि आप इस पार्टी के द्वारा राज्यसभा के अंदर मेंबर बनाए गए आप एक राज्यसभा मेंबर थी अन्ना
04:16कोई नहीं पूछता आपको
04:22बस यू समझ लीजिए कि भारतिय राजनीती में तूफान आया है तूफान और वो भी बिना लहर के और इस
04:29तूफान में नेता सियासत के सूखे हुए पत्ते की तरह उड़ रहे हैं
04:33कौन कब किस पेड से तूट कर किस शाक पर जाकर फिट हो जाएगा विधाता भी नहीं जानते
04:39पहले आम आदमी पार्टी में तूफ फिर तुर्मूल कॉंग्रिस में बगावत और अब उद्धव ढाकरे की शिक्सेना पर संकट के
04:45बादर
04:50संडे को सब लोग एक साथ थे कुछ भर्चुली आये थे आज ला पता है अब ला पता कहा है
05:00रिज़ए उनको पता है दो दो बार तिन तिन बार इंजी बने हमारे पार्टी से तो हम क्या उनको अगणाई
05:06हैं लेकिन इस बार उनको नहंगा पड़े चाहें कुछ दूए
05:11हाँ we want to see इंद्रा गांधी के अटाइन से जोटी बोसु तक ममता भेंजी तक जो आवाज उठाया था
05:20दिल्ली नहीं देता है, सेंटरल नहीं देता है, गोरिब को कुछ पैसा नहीं मिलता है, पचास साल ही करके निकाल
05:26दिया
05:30भारतिय राजनीती में पर फिर दलों के भीतर उठी पगावतें स्तुर्खियों में, पंगाल में ममता भेंजी की पार्टी के सांसदों
05:37और विधायकों के अलग रास्ता पकड़ने के दावों के बीज, महराष्ट में भी सियासी हलचल तेज हो गई है
05:46कि देर राज से ही आपरेशन टाइगर इन लोगों ने सुरू कर दिया ताकत का इसा इस्तेमाल करना दुर्पयोग करना
05:53इन्होंने ऐसा समाज में एक माहौल कर दिया है कि अब कोई विपक्ष यहां पर जिन्दा रह नहीं सकता
05:59विपकर साफ ने एक जिवेदन दे दिया है और कहा है कि जो पुछ हंसुन रहे है अब तो कानुन
06:04मत पोई सामने आकर तो नहीं कह रहा तो उसके प्रावदाल अगर स्वविदानी में हमने आपकी देखा क्या बारी वह
06:10भी एक सुपरिव पोर्ट पर के जा रही है तो विश
06:29हर चीज फिर से घुमा देती है तो आज आपका वक्त है कल हमारा भी वक्त हो सकता है
06:40लेकिन क्या ये पहली बार हो रहा है बिल्कुल ने भारती राजनितिक का इत्यास बताता है कि जब भी किसी
06:46पार्टी के भीतर नेत्रित्व, महत्वा कांख्षा और सत्ता को लेकर संघर्ष बढ़ा है तब तब बड़ी राजनितिक पार्टियां तूटती रहे
06:58सबसे ज्यादा तूट का इत्यास कांख्ष के नाम दर्जे है
07:011969 में इंद्रिया गांधी और संघठन के नेताओं के बीच संघर्ष ने कांख्ष को दो हिस्सों में बाट दिया
07:071977 में इमर्जेंसी के बाद फिर पार्टी में बगावत हुई
07:11आगे चलकर कॉंग्रेस थे प्रिणमूल कॉंग्रेस, राष्टवादी कॉंग्रेस पार्टी यानी NCP, YSR कॉंग्रेस और कई शेत्रिय दल निकले जिन्होंने अपने
07:20अपने राज्यों में बड़ी राजनीतिक ताकत हासिल की
07:25जब कॉंग्रेस की टू-टूई और इंद्रा गांधी जी ने अलग से बना ली पार्टी तो उस समय तो वो
07:31खुदी सत्ता का केंद्र थी और उनके समय जो सिंडिकेर थी वो बड़े दिगज नेता थी सेंटर लिडर्शिप की
07:37उनके खिलाफ उन्होंने बगावत की लड़ाई लड़ी और कॉंग्रेस को तब भी पता था कि गांधी परिवार ही द्रूगत आ
07:44रहा है इस पार्टी का तो इंद्रा गांधी के साथ जुड़ गए
07:50जनता दल का हाल भी कुछ ऐसा ही रहा एक समय केंद्र की सत्ता पर काविज जनता दल कुछ सालों
07:55में कई हिस्सों में बढ़ गया
07:57इसी बिख्राव से समाजवादी पार्टी, राष्टिय जनता दल, जनता दल युनाइटेड और जनता दल सेकुलर जैसी पार्टियों का जन्म हुआ
08:07आज कहानी में जानेंगे कि आखिर भारत की कौन सी पार्टी ने सबसे ज्यादा तूट फूर देखी है
08:13कॉंग्रेस से लेकर शिवसेना, एंसीपी और अब टीमसी तक अखिर पार्टियों के विखरने की सबसे बड़ी वज़ा क्या रही है
08:21क्या भारती राजनीती में अब बगावते अपवाद नहीं बलकि नया राजनीति कल्चर बनती जा रही है
08:41भारती राजनीती में कई बार विपक्ट से ज्यादा चुनाती अपने ही घर से आई
08:46और जब बगावत पार्टी के भीतर से उठती है तो उसका असर सिर्फ नेताओं तक सिमित नहीं रहता
08:52बलकि सरकारें गिरती हैं चुनाव चिन्न बदलते हैं और पूरी की पूरी राजनीतिक तस्वीर बदल जाती है
09:04शिर्सेना एक ऐसी पार्टी जिसकी पहचान बाला साहर ठाकरे और ठाकरे परिवार से जुड़ी रही
09:10लेकिन विडमना ये है कि इस पार्टी को सबसे बड़े जटके उसके विरोधियों नहीं बलकि उसके अपने नेताओं ने दिये
09:18सवाल उठता है कि ऐसा क्यों हुआ चगन बुझबल से लेकर नरायन राने राश ठाकरे से लेकर एकनाश शिंदे तक
09:25क्यों पार्टी छोड़कर और तोड़कर चले गए
09:27हर बगावत ने शिर्सेना का चेहरा बदला और माहराश की राज़िती को नई दिशा दी
09:33आज जब उधर ठाकरे की शिर्सेना यूबी टी में फिर नाराज़गी और तूट की तस्वीरे सामने आ रही है
09:39तो सवाल उठा है कि क्या एतिहास खुद को दोरा रहा है
10:03मुअ मुणr यWeड्यर शिर्सेना टाराज जाघ।
10:14कि दिश्वास दिश्वाप परिऋ ś Wave Scholars
10:35जिस पार्टी की पहचान बाला साहब ठाकरे था, जिस पार्टी का चेहरा ठाकरे परिवार था
10:51जिस पार्टी में कभी बाला साहब का एक इशारा ही, अन्ती मादेश मान जाता था
11:03उसी शिवसेना का इतिहास बगावतों, विद्रोहों और तूर की कहानियों से भरा पड़ा है
11:14आज उद्धर ठाकरे की शिवसेना UBT एक पर फिर संकट में दिखाई दे रही है
11:19कुछ सांसत बैठक से गायव है, कुछ नेताओं की शिंदे खेमे से नस्दीकियों की चर्चा है
11:24और सवाल उठ रहा है क्या शिवसेना में एक और बगावत होने वाली है
11:31संडे को सब लोग एक साथ थे, कोई भर्चोरी आये थे, आज लापता है
11:38अब लापता कहां है, क्या है, उनको पता है
11:44हमको उनको धुनने वे आप कोई दिल्चस्पी नहीं है
11:47हाँ, मैचुर्ड लोग है, सत्तर सत्तर साल के लोग है
11:54दो दो बार, कि तिल बार इंजी बने है हमारे पार्टी से, तो हम क्या उनको अबनाएं
12:00लेकिन इस बार उनको मेहनगा पड़े लेकिन ये पहली बार नहीं है
12:08शिव्जेना की राजनीती में पगावत कोई नई बात नहीं है
12:11पिछले तीन दशकों में पार्टी कई बार ढूटी, कई बड़े नेताओं ने विद्रोह किया और हर बार पार्टी का चेहरा
12:19बदल गया
12:32कहानी शुरू होती है 1991 से बाला साहब ठाकरे का दौर था
12:37मुंबई से लेकर पूरे महराश तक शिव्जेना का धबदवा पड़ रहा था
12:41लेकिन इसी दौरान पार्टी के बड़े चेहरे छगन भुजबल ने बगावत कर दी
12:46ये बाला साहब ठाकरे के सामने पहली बड़ी राजनितिक चुनावती थी
12:50लेकिन असली जटका अभी पाकी था
13:01नारायन राणे शिव्जेना के सबसे ताकतवर नेताओं में गिने जाते थे
13:06मुख्यमंत्री रह चुके थे
13:07लेकिन जैसे जैसे उद्धव ठाकरे का कद बढ़ने लगा
13:10राणे और नेत्रित्व के बीच दूर्यम भी बढ़ती है
13:14राणे खुल कर नाराजगी जताने लगे
13:16आरोप लगाया कि पार्टी में कुछ लोगों का दबदबा बढ़ गया है
13:20आखिरकार उन्होंने शिवसेना छोड़ दी और कॉंग्रिस में शामिल हो गए
13:27शिवसेना में इतने साल आपने कुछा रहे हैं
13:29शिवसेना से आपको मुख्यमंत्री पद मिला
13:31कॉंग्रिस में आपको लगा कि आपको मुख्यमंत्री पद मिलेगा
13:34आपको वादा भी किया गया था, मुख्य बंत्रिपद नहीं मिल पाया,
13:36शिव सेना और कॉंग्रेस में आपको क्या फरक लगता है?
13:41फरक तो काफी है, आइडियोलोजी में है,
13:46वादा पालने में है,
13:47सब में काफी फरक है,
13:50मगर दोनों में आइडियोलोजी फरक है,
14:04पुरानी पार्टी है,
14:06तो दोनों के बारे में तजुर्वे जो अलग-अलग हैं।
14:12ये सिर्फ एक नेता का जाना नहीं था,
14:15बल्कि शिव सेना की ताकत में बड़ी सेंद थी,
14:17लेकिन 2006 में जो हुआ,
14:19उसमें महराश की राजनीती ही बदल दी,
14:21ये बगावत किसी बाहरी नेता ने नहीं,
14:24बल्कि ठाकरे परिवार के भीतर से ही।
14:34बाला साहब ठाकरे के भतीजे,
14:37तेज तर्रार वक्ता, आक्रामक शेली और पार्टी कारिकरताओं के बीच,
14:41जबरदस्त लोग प्रियता।
14:43एक समय राज ठाकरे को बाला साहब का राजनितिक उत्तराधिकारी माना जाता था,
14:48लेकिन जब पार्टी की कमान उद्धव ठाकरे के हातों में जाने लगी,
14:52तो राज ठाकरे खुद को अलक थलक महसूस करने लगे।
14:55नाराजगी बढ़ी और आखिरकार राज ठाकरे ने शिव सेना छोड़ दी,
15:00इसके बाद महराष्ट नगमिर्मान सेना यानी मन से का जन्म हुआ।
15:28शिव सेनिकों को अपने धन्दे, अपने बिजनीज, अपने कर्पोरेशन के लिए
15:32एक ताकत की जरुवती, सत्ता की शक्ती की जरुवती तो वहाँ पर तूटी।
15:36पहले एकनाश शिंदे साब ने तूटा, आदित ठाकरे की वज़े से वहाँ पर परिवार वाद में पूंड रहा।
15:41ये शिवसेना के इतिहास की सबसे चर्चित और सबसे भावनात्मक बागावत थी, क्योंकि पहली बार ठाकरे परिवार दो हिस्सों में
15:51बढ़ गया था।
15:52पाला साहब के रहते हुए पार्टी हर संकट से निकलती रही, लेकिन 2012 में उनके निधन के बाद हालात बदल
15:59गए।
16:02उद्धव ठाकरे ने पार्टी की कमान संभाली, शिवसेना सत्ता में भी पहुची, लेकिन अंदरूनी मत्भेद लगातार बढ़ते रहे।
16:09और फिर आया 2022, वो साल जिसने शिवसेना की पहचान ही बदल दी।
16:25पहले शिवसेना भार्के जनता पार्टी की योती थी, अलायंस था, हम लोग चुनाव लड़े अलायंस में, और आज हमारा जो
16:33शिवसेना गठ है, जो तू थर्ड मेजोरिटी से जादे लोग हमारे साथ है, विधि मंदल में लेजिशलेटर पार्टी, शिवसेना थाट
16:45है,
16:45और निशित रूप से हम लोग आज भार्तिय जनता पार्टी के साथ है, एक मजबूत सरकार यहां पर बना रहे,
16:53हम लोगों ने ऐसा कोई भी दुसरा गलत कदम नहीं उटाया है.
17:172019 में BJP से अलग होकर उधव ठाकरे ने कॉंग्रिस और NCP के साथ मिलकर महाविकास अगारी स्तरकार बनाई थी,
17:25लेगिन पार्टी के भीतर एक बड़ा वर्ग इस फैसले से खुश नहीं था, इस नाराजगी का चेहरा बने एकनाथ शिंदे,
17:32जून 2022 में शिंदे ने बगाव
17:44को गिराया, UBT, उधव ठाकरे साब है, उनकी और कॉंग्रेस की जो सरकार चल रही थी, उसको गिराया शिरतपवार की
17:51पार्टी के साथ, और एकनाथ शिंदे ने अपना गुट बना के नई सरकार बना ली, लेकिन अब उसके बाद से
17:58कॉंग्रेस को भरती जमता पार्टी के �
18:00खिलाब उधव ठाकरे की शिवसेना लड़ाई नहीं लड़ पाई, देवेंद फर्णवीस के खिलाब भी नहीं लड़ पाई, और लगा तर
18:06जो लोक सबाचना हुए, उसमें भी बहुत अच्छा तरह से प्रदशनी वा, और लोगों को लग रहा था कि उधव
18:11ठाकरे का जो
18:13नित्रत्व है, लीडर्शिप है, वो कमजोर होती जा रही है और आधित शाकरे भी उस तरह से नहीं समाल पारे
18:17जो उत्रपदेश में अखले शादव ने किया, तो वो एक बड़ी वज़े रही और अब जब ये मौका आया कि
18:23जिस तरह से तूट हुई है, तो उनको लग रह
18:26अब उनका भविश्य किसी भी हालत में उद्धव ठाकरे के साथ नहीं है।
18:56चुनायोग से लेकर सुप्रिम कोर्ट तक पहुचा। आखिरकार चुनायोग ने शिंदे गुट को असली शिवसेना और पार्टी का पारंपरिक चुनाव
19:04चिन्ह दे दिया। उद्धव ठाकरे को नई पहचान के साथ शिवसेना UBT बनानी पड़ी।
19:22यानी जिस पार्टी को बाला सहर ठाकरे ने बराया था वो आधिकारिक तौर पर दो हिस्सों में बढ़ चुकी थी।
19:33लेकिन अब दो हजार चब़ीस में एक बार फिर सियासी हल चल तेज है।
19:45शिवसेना का इतिहास बताता है कि इस पार्टी को सबसे ज्यादा चुनावती विपक्ष ने नहीं दी है।
19:51सबसे बड़े जटके पार्टी को उसके अपने नेताओं ने दिये हैं और हर बगावत ने शिवसेना को बदला है।
19:57ये कैसी कहानी है जो बार बार दोहराई जाती रही है।
20:04कभी वामपन के मजबूत गड़ को ढाकर सब्ता तक पहुँशने वारी त्रमूल कॉंग्रेस आज अपने घर में सबसे बड़े राज़नितिक
20:11संकड का सामना कर रही है।
20:13चुनावी हार के बाद से शुरू हुआ संतोश खुली बगावत में बदल गया है।
20:17पार्टी के कई सांसद और विधायकों ने नेतित्व पर सवाल उठाए और वरिश नेता भी बागी खेमे के साथ खड़े
20:25हो गए।
20:43नाशनलिस सिटिजन पार्टी के साथ हम लोग मर्च करके एंडिया के साथ काम करेंगे।
20:55हम लोग का जो सोच है पार्टी का मोजत जो सोच है और जो कंस्टिट्यूशन पार्टी का भनाया हुआ वा
21:01उसके अंदर आके जाकर काम करेंगे तो जरूर माच होना।
21:07पी हमको मदद मनगएगा हम देगा के वाउफ हमार मारम पुसका मदद जरूर पड़ हम लेगा।
21:13एक साथ करेगा इनका यहां अस्कित बन चुका है इनकी हालत खराब हो चुकी है इनको टीमसी के घर से
21:23तो निकाल लिया बीजेपी ने लेकिन बीजेपी के दर्वाजे में गुजले नहीं दिया
21:35जिस त्रिडमूल कॉंग्रस ने कभी वामपंथ के 34 साल पुराने किले को धा दिया था आज उसी पार्टी के भीतर
21:42वगावत की गून सुनाई दे रही है
21:50अब सवाल उठ रहे हैं क्या टीमसी में मम्ता बेनर जी अब सिर्फ सलाहकार की भूमिका में होंगी क्या मम्ता
21:56बेनर जी के हाथ से टीमसी निकलने वाली है
22:00इस तरह से आप अलग जुट लोगसभा के अंदर नहीं बना सकते हैं ये गैर संबेधानिक है
22:10पहले 19 सांसदों की चिठी सामने आई और अब दावा किया जा रहा है कि 22 तकी आकणा पहुच सकता
22:16है
22:16पार्टी के वरिष्ट सांसद और दिल्ली में टीमसी का सबसे बड़ा चेहरा सुधी बंदोपाध्याई भी अब बागी खेमे के साथ
22:23खड़े नजर आ रही है
22:24कि अस्थाना मिनेच अधिकाम सो शांसद अधिकाम सो अधिकाम सो भी गजा और देश्टा हो नेत्री मोतन अक्ता भुनिकानी थागो
22:45तामारा बठाव एदेर आभे लान आउन आट आभके सपर्ष्ण कोरें चेहरा
22:58टीमसी के भीतर शुरू हुई नाराजगी अब खुली लड़ाई में बदलती दिख रही है
23:02बागी गुट अब संसद में अलग पहचान की मांग करने की तैयारी में है
23:24सबसे दिल्चस्प बात ये है कि बागी नेता सीधे सीधे ममता बेनरजी को हटाने की बात नहीं कर रहे
23:30बागी नेताओं का कहना है कि ममता बेनरजी पार्टी की मार्ग दर्शक बनी रहे लेकिन संगठन और संसद्य दल की
23:37कमान नए नेतरित्यू को सौप दी जाए
23:39यानि लडाई नेतरित्यू की भूमिका और पार्टी के नियंतर्ण को लेकर है
23:44विधान सभा चुनाम में टीमसी की हार के बाद से ही पार्टी के भीतर अस्तंतोष बढ़ने लगा है
23:50पहले कुछ विधायकों ने नेतरित्यू के खिलाप मोर्चा खोला
23:53फिर विधान सभा में अलग शक्ति केंद्र बनने की कोशिश शुरू हुई
23:57और अब सांसदों का बड़ा तबका भी खुल कर सामने आ गया है
24:01सिठी देके आगया है वो नसी पी आई पार्टी से हम लोग का मार्ज हो गया
24:09हम लोग मार्ज कर लिया फिर आगे देखते हैंगे क्या क्या होता है
24:13नौया जो खेला सुरू हुआ है जाएंट गर्मेंट मेंस हमारा डबल इंजिन का सरकार एक साथ मिलके
24:21कांदा में कांदा मिला के काम करने चाहते हैंगे तो बंगाल के कलकता के उन्नती जरूर होगी
24:39सवाल अबस्तिन इतना नहीं है कि टीमसी में बगावत हुई है या नहीं
24:46सवाल ये है क्या ममता बेनर जी इस संकट से उबर पाएंगी क्या पाटी फिर एक जुट होगी
24:52या फिर शिग सेना और एंसीपी की तरह पिडमूल कॉंग्रेस भी एक बड़े विभाजन की कहानी लिखने जा रही है
25:12कॉंग्रेस देश की सबसे पुरानी राजनेतिक पार्टी एक ऐसी पार्टी जिसने दशकों तक देश पर शासन किया
25:20लेकिन सबसे रहा बगावते और तूट भी यहीं देखी गई
25:23एक सो चालेस साल के त्यास में कॉंग्रेस से चुनावी जीत और हार की कहानी नहीं है
25:28बलकि विद्रो असेमती और नए राजनेतिक दलों के जन की कहानी है
26:02देश की सबसे पुरानी पार्टी देश को आजादी धिलाने वाली पार्टी और भारती राजनीति में
26:08सबसे ज्यादा टूप वगावत और विद्रो चेलने वाली पार्टी कॉंग्रेस
26:26आज जब त्लमूल कॉंग्रेस, NCP या दूसरी पार्टियों में तूट की चर्चा होती है
26:31तो उसकी जड़ें कहीं न कहीं कॉंग्रेस के तिहास में दिखाई देती
26:47भार्टिय राजनीति में अगर किसी पार्टी ने सबसे ज्यादा बगावतें देखी हैं तो वो है कॉंग्रेस
26:541885 से लेकर 2025 तक कॉंग्रेस का इतिहास सिर्फ चुनावी जीतार का इतिहास नहीं है
27:00बलकि बगावत, वित्रोग, तूर और नई राजनितिक ताक्तों के जन्म की कहनी भी है
27:13कहनी शुरू होती है 28 दिसंबर 1885 से जब भार्टि राश्टी कॉंग्रेस की स्थापना हुई
27:191907 में पहली बाद पार्टी के भीतर बड़ा वैचारिक संघर्ष सामने आया
27:241907 में नरम दल के नेता और गरम दल के नेताओं के बीच में विचारधारा को लेकर संघर्ष हुआ
27:30जिसमें जो गरम दल के नेता थे जैसे लोकमान ने तिलक वे उग्र तरीकों से भारत को स्वतंतरता दिलवाना चाहते
27:37थे
27:37लेकिन जो नरम दल के नेता थे जैसे फिरोज शाह, मैता, गोपाल कृष्ण गोखले ये सभी बहुत शांती पूर्ण और
27:43अहिंसा के मार्क पर चलके स्वतंतरता प्राप्त करना चाहते थे
27:45लेकिन तब विचारधारा के संघर्ष के आगे वर्चस्व की लड़ाई टिक नहीं पाती थी
27:50तो होता ये था कि ये लोग लड़ते थे लेकिन 1907 में भी जैसे विभाजन हुआ कॉंग्रेस का नरम दल
27:56और गरम दल में तो वो लखनाव अदिवेशन में जाकर के एक हो गए
28:15सबसे चर्चित वैचारिक बगावतों में से एक थी
28:21साबित करने के लिए मद्रपदेश के त्रिपूरी में कॉंग्रेस का अधिवेशन हुआ जिसमें की सुभाज चंदर बोस ने कॉंग्रेस अध्यक्ष
28:27का चुनाव जीत लिया था
28:29और यह हमने कॉंग्रेस के इतियास में देखा है कि लोक तांतरिक मुल्यों को बहुत ज़्यादा तरजी दी नहीं जाती
28:34तो हुआ क्या कि इसके बाद गांधी जी नाराज हो गए उन्होंने इसे अपना अपमान बताया और इसके बाद जो
28:40कॉंग्रेस के बागी के नेता थ
28:55लेकिन अंद्रूनी असंतोश भी पड़ रहा था
29:021951 में आचारी जेवी कृपलानी ने कॉंग्रेस छोड़कर किसान मजदूर प्रजापार्टी बनाई
29:081950 से 1960 के दर्शक में कई राज्यों में कॉंग्रेस से असंतुष नेताओं ने अलग-लग राजनीतिक दल बनाए
29:15केरल कॉंग्रेस, ओडिशा जन कॉंग्रेस और भारती क्रांती दल जैसी पार्टियां इसी दौर में पैदा हुई
29:22लेकिन कॉंग्रेस की सबसे बड़ी और एथिहासिक टूट 1979 में हुई
29:27राश्पती चनाव को लेकर ततकालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और कॉंग्रेस संगठन आमने सामने आ गए
29:35इंद्रा गांधी ने पार्टी लाइन से अलग जाकर वीवी गरी का समर्थन किया जबकि संगठन ने नीलम संजीव रेड़ी को
29:42मिद्वार बनाया था
29:43विवाद इतना बढ़ा कि कॉंग्रेस दो हिस्व में पढ़ गई
29:46एक तरफ इंद्रा गांधी की कॉंग्रेस आर और दूसरी तरफ कामराज, मुरारजी देशाई और एस निगलिंगपपा जैसे इन देताओं की
29:55कॉंग्रेस को
29:57यह सिर्फ संगटनात्मक विभाजन नहीं था, बलकि कॉंग्रेस के भीतर सत्ताव नाम संगठन की लडाई थी
30:03इंद्रा गांधी का कद सिर्फ जनता के बीच ही ज्यादा लोगप्रिय नहीं था, संगठन के बीच भी था
30:09लिहाज अग्रेस आर मुख्य कॉंग्रेस बन गए
30:25इसके बाद इन द्रा गांधी ने कॉंग्रेस आई बनाया याने की कॉंग्रेस इंद्रा और इसके बाद से लगातार हमने देखा
30:34कि जिन प्रारंभिक मुल्यों पर कॉंग्रेस की स्थापना हुई थी, जिन वैचारिक मुल्यों पर कॉंग्रेस की स्थापना हुई थी, उससे
30:42एक शिफ्ट लेते हुए इस पार्टी में फिर हमने एक परिवार को केंदर में आते हुए देखा
30:49मतुं सब्सक्राइब
31:11पॉस्थक 16 Go Good
31:14कौनंग्रेस के भीतर लगातार असत명 सफ़क रहा
31:171990 का दश्रक कॉंग्रिस के लिए सबसे ज्यादा नुक्सान दे सावित हुआ
31:22यही वो दौर था जब कॉंग्रिस से निकलने वाली पार्टियां आगे चलकर ख्षेत्रिय राजनीती की बड़ी ताकत बंग गई
31:29अब जब हम इन ख्षेत्रिय पार्टियों को देखते हैं
31:32तो एक तो लोकतांत्रिक मूल्यों का ना होना, सभी नेताओं की बराबर सतर पर बात को ना सुना जाना
31:38यह कॉंग्रिस पार्टी में हम अमूमन देखते हैं
31:40इसके अलावा उनके जो अपने रीजिनल इंट्रेस्ट्स थे जब उनकी अंदेखी की गई
31:45जैसे की बंगाल में, जैसे की महराष्ट्री में, जैसे की हम जाकर के तेलंगाना या आंधरा में देखते हैं
31:50तो फिर इन नेताओं को लगा कि हमारा एक बड़ा योगदान कॉंग्रेस पार्टी को
31:54सेंट्रल गवर्मेंट में बिठाय रखने का है या चुनाव जितवाने में हैं
31:57तो फिर हम अपनी पार्टी क्यों ना बना ले तो फिर एक कॉंबिनेशन हम देखते हैं
32:01वैचारिक संगर्ष का वीजवी एक वर्चस्व की लडाई का और अपनी अपने जो क्षेत्री मुद्दे हैं
32:08उनको एक मुख्य पटल पर लाने का तो यही कारण है कि तमाम जो क्षेत्री दल हैं यह कॉंग्रेस से
32:14अलग हुए
32:151996 में माधवराव सिंधिया ने मध्यप्रदेश विकास कॉंग्रेस बनाई
32:201997-98 में ममता बेनर्जी ने कॉंग्रेस से अलग होकर औल इंडिया तिन्मूल कॉंग्रेस का गठन किया
32:27बंगाल में कॉंग्रेस की कमजोर रणनेती और वामपंथियों के खिलाफ आक्रामक लडाई की जरुवत को ममता बेनर्जी अलग पार्टी बनाने
32:35की वज़ा बता रही थी
32:36लेकिन आज तिन्मूल कॉंग्रेस पश्चिन बंगाल चुराव में हार के बाद खुद संकट पे है
32:47फिर आया 1999 ये कॉंग्रेस के तिहास की सबसे चर्चित पगावतों में से एक थी
32:53सोनिया गांधी के विदेशी मूल के मुद्दे पर शरत पवार, पीए संगमा और तारीक अनवर ने खुल कर सवाल उठाए
33:00कॉंग्रेस नित्रित्युने इसे अनुशासन हींता माना और तीनों नेताओं को बाहर का रास्ता दिखा दिया
33:07इसके बाद राष्टवादी कॉंग्रेस पार्टी यानि एनसीपी का जन्म हुआ
33:10और महराष्ट की राजनीती में एनसीपी कॉंग्रेस की बराबरी की ताकत नहीं एक बड़ी ताकत पन गई
33:16लेकिन कॉंग्रेस में बगावत हमेशा परकरार रहे
33:192011 में वायस जगन महन रेड़ी ने कॉंग्रेस छोड़कर वायसार कॉंग्रेस बनाई
33:24उनके फिता वायस राजच्रेकर रेड़ी कॉंग्रेस के बड़ी नेता थे
33:28लेकिन उनके मौत के बाद नेत्रित्व को लेकर विवाद बढ़ गया
33:32जगन मोहन रेड़ी ने अलग पार्टी बनाई और कुछी सालों में आंध्रप्रदेश में कॉंग्रेस का लगभग सफाया कर दिया
33:392014 में नल्लारी किरन कुमार रेड़ी ने कॉंग्रेस छोड़ी
34:02जब घुलाम नवी आजाद ने पार्टी छोड़ दी आजाद में कॉंग्रेस नित्रित्तु पर गंभीर सवाल उठाए और बात में डेमुक्रेटिक
34:09आजाद पार्टी का गठन किया
34:11दिल्चस्त बात ये है कि कॉंग्रिस से निकलने वाली कई पाठियां बाद में कॉंग्रिस के लिए ही सबसे बड़ी चुनाती
34:18बन गई
34:18पश्चिम बंगाल में तुनमूल कॉंग्रिस ने कॉंग्रिस की जगह ले ली
34:22आंद्रप्रदेश में YSR कॉंग्रेस ने कॉंग्रेस का जनाधार खत्म कर दिया
34:26महराष्ट में NCP कॉंग्रेस की बराबरी की शक्ती बन गई
34:29जम्मू कश्मीर में PDP और कई राजियों में खेत्रिय दल कॉंग्रेस के वोट बैंक पर खड़े हुए
34:39यानि कॉंग्रेस का इतिहास तिरफिक राजनीतिक दल का इतिहास नहीं है
34:43ये महत्वा कांख्षाओं, वैचारिक स्तन घर्षों, नेत्रितु की लडाईयों और सत्ता के समिकर्णों का इतिहास है
34:50140 साल की यात्रा में कॉंग्रेस जितनी बार तूटी, उतनी बार भारती राजनीतिका नक्षा भी बगला
34:57और यही वज़ा है कि जब भी देश में किसी पार्टी में बगावत की चर्चा होती है, तो सबसे पहले
35:03कॉंग्रेस का इतिहास यादाता है
35:05क्योंकि भारती राजनीति में तूट की सबसे लंबी कहानी, अगर किसी पार्टी में लिखी है, तो वो कॉंग्रेस लिए है
35:17एक दोर था, जब जनता दल कॉंग्रेस के खिलास सबसे बड़ा राजनीतिक विकल्ब बनकर उभरा था
35:23वीपी सिंग की अगवाई में ये पार्टी केंद की सत्ता तक पहुँची, लेकिन सत्ता की शिखर पर पहुँचने ये भीतर
35:30की खीच तान शुरू हो गई
35:31नतीजा ये हुआ कि जनता दल का कुंबा लगा तार बिखरता चला गया
35:36कोई नित्तर से नाराज होकर अलग हो गया तो किसी ने शेत्रिय राजनीति की नई जमीन तलाश ली
35:41समाजवादी पार्टी, आजेडी, जेडियू और जेडियेश जैसी कई बड़ी पार्टियां इसी बिखरा की कहानी से निकली
35:51भारती राजनीति में अगर किसी पार्टी के तूटने से सबसे ज्यादा नई पार्टियां पैदा हुई तो वो जन्ता दल थी
35:58एक समय देश की सत्ता पर काविश जन्ता दल कुछी सालों में इतने हिस्वों में बढ़ गया
36:04कि उससे निकली पार्टियों में अलग लग राज्यों की राजनीति का नक्षा बदल दिया
36:10कहानी शुरू होती है 1988 से जब पुरानी जन्ता पार्टी के अलग अलग धड़े लोक दल, कॉंग्रेसेस और लोक मोर्चा
36:18एक साथ आए
36:19और जन्ता दल का गठन हुआ लक्षिता, कॉंग्रेस के खिलाफ एक मजबूत राश्टी विकल्प खड़ा तरना
36:26जन्ता दल की कहानी अलगी है, जन्ता दल कौन है, जन्ता दल को समझना चीए जब से जन्ता दल बना,
36:31वो समाजवादियों का गोटे है
36:33हिंदुस्तान में दो तरह की विचारदा रही, एक कॉंग्रेस की विचारदा रहा है, दोसरी भारती जन्ता पर्टी की दक्षिन पंती
36:38विचारदा रहा है
36:39और इन दोनों के बीच में जो लोग हैं, वो हैं समाजवादी लोग
36:42समाजवादी लोग एक तो बड़ा कन्फूज रहा है शुरुवाती दर में वो कॉंग्रेस के खिलाफ लड़ते रहे
36:47तो कॉंग्रेस के खिलाफ लड़ने के लिए वो उन्होंने मजबूती की
36:50लेकिन जब कॉंग्रेस के खिलाफ लड़ रहे थे तब उनको बाद में समझ में आया कि कॉंग्रेस ही सबसे मजबूत
36:55है
36:561989 के लोकसभाचुनाव में जंता दल ने शांदार पुरदर्शन किया और विशुनात प्रताब सिंग देश के प्रधान मंत्री बले
37:11लेकिन सत्ता मिलने के साथ ही पार्टी के भीतर नेत्रितु की लड़ाई भी शुरू हो गई
37:19वीपी सिंग, चंदर शेखर और देविलाल जैसे दिगज नेताओं के बीच मतभेद लगातार बढ़ते रहे
37:26आखिरकार 1990 में बीजेपी ने वीपी सिंग सरकार से समर्थन वापस ले लिया और सरकार गिर गए
37:32इसी उथल पुथल के बीच चंदर शेखर लगभग 60 सांसदों को साथ लेकर अलग हो गए और समाजवादी जन्ता पाटी
37:40का गठन कर दिया
37:46कॉंग्रिस के समर्थन से चंदर शेखर प्रधान मंत्री बन गए लेकिन जन्ता दल का बिखराव थमने के बजाए और तेज
37:53हो गया
37:541992 में चंदर शेखर की समाजवादी जन्ता पाटी से अलग होकर मुलायम सिंग यादव ने समाजवादी पाटी बनाई
38:01उत्तर प्रधेश की राजनीती में ये पाटी आगे चल कर एक बड़ी ताकत बन गई
38:051994 में बिहार की राजनीती में भी विद्रो हुआ नितीश कुमार और चौर्ज फरनांडी समेत कई नेताओं ने लालू प्रसाद
38:14के नेत्रितु का विरोध करते हुए समता पाटी का गठन कर दिया
38:17फिर 1997 में चारग घोटाले के दवाव के बीच लालू प्रसाद यादव ने जनता दल छोड़कर राष्टिय जनता दल यानी
38:25आर जेडी बना ली
38:261999 में जनता दल को दो और बड़े जटके लगे
38:30HD देव गोड़ा ने जनता दल सेकुलर यानी जेडियस बनाई जबकि शरद यादव के नित्रितु में जनता दल युनाइटेड यानी
38:39जेडी यू अस्तिक्ट में आया
39:00इधर मुलायम सिंग यादव थी तो उन छत्रपो की जो महत्वा कांक शाय थी राजनीतिक महत्वा कांक शाय थी उन्होंने
39:07उस पार्टी को तोड़ा विचारधारा के तौर पर देखे तो वह आज भी समाजवादी है विचारधारा में कोई फरक नहीं
39:14आया लेकिन उनको ल
39:27लगा कि कॉंग्रेस के साथ नहीं चल सकते तो नितिश कुमार भारतिय जनता पार्टी के साथ आ गए लेकिन समाजवादी
39:33पार्टी और आड़ जेडी वह अब भी कॉंग्रेस के साथ इस सत्ता की लड़ाई को लड़ रहे विचार थारा वैसे
39:38भी जनता दल का कोई मूल या
40:09कोर विशेड नहीं रहा
40:10जो कभी देश की सत्ता का केंद्र था और फिर लगातार पगावतों का शिकार होकर इतिहास का हिस्ता बन गया
40:19फिलाल कहानी मेरे साथ अभी के लिए बस इतना ही मुझे दीजे जाज़त देश और दुनिया की तमाम कपरों के
40:23लिए देखते रहे आज तक
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